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	<title>Himachal Pradesh Health Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Himachal Pradesh Health Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>रिपोर्ट में खुलासा, दिवाली पर लोगों को खिला दी घटिया मिठाई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/21/solan-sweets-sample-failed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Nov 2016 15:27:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Food Safety Officer Solan]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Department]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन- फेस्टिवल सीजन के दौरान जिला भर से मिठाइयों के 09 सैंपल अधोमानक निकले हैं। इनमें खोया से बनी मिठाइयों के अलावा पनीर के भी सैंपल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कारोबारियों को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कारोबारी फेल सैंपल की जांच खुद मनमर्जी की प्रयोगशाला [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>  फेस्टिवल सीजन के दौरान जिला भर से मिठाइयों के 09 सैंपल अधोमानक निकले हैं। इनमें खोया से बनी मिठाइयों के अलावा पनीर के भी सैंपल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कारोबारियों को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कारोबारी फेल सैंपल की जांच खुद मनमर्जी की प्रयोगशाला से करवा सकता है। अन्यथा विभाग नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई शुरू कर देगा।</p>
<p>दीवाली, करवाचौथ और भाईदूज के दौरान भरे इन सैंपलों की रिपोर्ट आने से पहले कई उपभोक्ता इनका सेवन कर चुके हैं। हैरत की बात है कि स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि इस पूरे त्योहारी सीजन में नौ सैंपल भरे हैं और नौ के नौ ही फेल निकले हैं। कई मिठाइयों में धूल मिट्टी के कण तो कई में जरूरत से अधिक सिंथेटिक कलर का यूज हुआ है। सिंथेटिक कलर के अधिक सेवन से स्किन इनफेक्शन, थ्रोट इनफेक्शन और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।<br />
<strong>यहां के सैंपल निकले फेल</strong></p>
<p>खाद्य सुरक्षा अधिकारी लीलाधर सिंह ने त्योहारी सीजन के दौरान सोलन समेत नालागढ़ और बद्दी में कुल नौ सैंपल लिए गए थे, यह सभी सैंपल फेल निकले हैं। कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले माह दिवाली, धनतेरस, भाईदूज और अन्य त्योहारों पर सोलन शहर के माल रोड और नालागढ़-बद्दी रोड पर स्थित मिठाई की नौ दुकानों से विभिन्न मिठाइयों के सैंपल भरे थे। विभाग द्वारा सभी कारोबारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसमें 30 दिन के अंदर सभी कारोबारियों को जवाब देने को कहा है।</p>
<p><strong>यह निकली हैं खामियां</strong></p>
<p>चमचम मिठाई में मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल यानी सिंथेटिक कलर अधिक पाए गए हैं। दुकानदारों द्वारा यह चमचम मिठाई को खूबसूरत बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। पनीर और खोया में पाए जाने वाला फेट कंटेंट 35 प्रतिशत पाया गया। यह तय मानकों से कहीं ज्यादा है। इसके साथ ही लैब में जांच के बाद पेठे को बनाने में उपयोग होने वाली चीजें सब स्टैंडर्ड की पाई गई। लड्डू, बर्फी जैसी मिठाइयों में धूल और मिट्टी के आंश पाए गए।</p>
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		<title>सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Nov 2016 14:00:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP HEALTH SERVICES]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला में दूरदराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अब पैसे देकर होटलों व धर्मशाला में रुकना पड़ेगा। आईजीएमसी में मरीजों की सुविधा के लिए बना आशियाना प्रशासन ने छीन लिया है। मरीजों की सुविधा लिए आईजीएमसी परिसर में बनाए गए ग्रीन हाऊस में अब आर्थो ओपीडी खुलने जा रही है। इसके लिए काम भी शुरू हो गया है। इस दौरान उपचार करवाने आए मरीजों को ग्रीन हाऊस से बाहर कर दिया गया। इस कारण मरीजों को अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। </p>
<p>लोगों की सुविधा के लिए ग्रीन हाउस बनाया गया था और लोग ओपीडी में सुबह जल्दी बारी आने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से एक दिन पहले ही पहुंच जाते थे और रात ग्रीन हाउस में गुजारते थे। इतना ही नहीं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए मरीज जिन्हें अस्पताल में बैड नहीं मिल पाता था, वह भी यहीं पर बैड मिलने तक इंतजार करते थे। इसके अलावा रात को मरीज के साथ आए तीमारदार भी दिन के समय ग्रीन हाउस में आराम करते हैं। आइजीएमसी में 100 से अधिक मरीजों के लिए सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब यह सारी सुविधाएं मरीजों व तीमारदारों से छिन गई हैं और मरीजों को अस्पताल में अब मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा।</p>
<p>ग्रीन हाउस में ओपीडी का काम शुरू होने के बाद अब लोग प्रशासन को कोस रहे हैं कि गरीब आदमी का आइजीएमसी में उपचार के लिए आना मुश्किल हो जाएगा। सर्दियों में बाहर रात काटना भी मुश्किल है और गरीब लोगों के लिए कमरा भी महंगा पड़ता है, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए आना संभव नहीं होगा। दूरदराज से मरीज इसी उम्मीद से आइजीएमसी एक दिन पहले पहुंच जाते थे कि ग्रीन हाउस में रात गुजारने के बाद सुबह जल्दी ओपीडी में नंबर लगाएंगे, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>स्टेचर भी किए बाहर</strong></p>
<p>ग्रीन हाउस के अंदर मरीजों की सुविधा के लिए रखे गए स्टेचर व व्हील चेयर भी बाहर कर दी गई हैं और जल्द ही इसमें ओपीडी का ताला लग जाएगा। आर्थो ओपीडी भी जल्द ही खुल जाएगी। ऐसे में मरीजों को अब दर-दर भटकना पड़ेगा और रात गुजारना मुश्किल हो जाएगा।<br />
<strong><br />
क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p>जिला कुल्लू से आए ओपी नेगी ने कहा कि आइजीएमसी में पहले ही बैड की कमी है। मरीज दूरदराज से उपचार करवाने आते हैं। दो-तीन दिन यहां पर लग जाते हैं, ऐसे में अधिकतर लोग ग्रीन हाउस में ही ठहरते थे। गरीब लोगों के लिए यह बहुत बड़ा आसरा था।</p>
<p>सरकाघाट से आई संतोष ने कहा कि आईजीएमसी प्रशासन को चाहिए कि या तो इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवाई जाए या ओपीडी ही कहीं और बनाई जाए। गरीब लोगों पर आईजीएमसी प्रशासन का निर्णय बहुत भारी पड़ेगा।</p>
<p>कुपवी से आए संजय ने कहा कि हर आदमी के लिए होटल में कमरा लेना मुश्किल है। अधिकतर लोग इसी के सहारे आईजीएमसी आते हैं। पहले प्रशासन को इस तरह की सुविधा कहीं और उपलब्ध करवानी चाहिए, फिर ओपीडी का काम शुरू करना चाहिए था। बहुत मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/07/shimla-igmc-green-house/">सर्दियों से ठीक पहले आईजीएमसी में छिना मरीजों व तीमारदारों का आशियाना,  ग्रीन हाऊस में अब खुलेगी आर्थो ओपीडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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