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	<title>Himachal Pradesh Government Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Himachal Pradesh Government Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल के सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी शुरू करने की तैयारी, दोबारा शुरू हो सकती है पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/26/himachal-to-introduce-pre-nursery-in-government-schools/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2016 10:30:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Education Dept]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government Schools]]></category>
		<category><![CDATA[Neeraj Bharti]]></category>
		<category><![CDATA[Pre-Nursary]]></category>
		<category><![CDATA[Right to education]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर तैयारी आरंभ हो गई है। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक के दौरान यह मामला उठाया है। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) व शिक्षा सचिवों ने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर तैयारी आरंभ हो गई है। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक के दौरान यह मामला उठाया है। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) व शिक्षा सचिवों ने हिस्सा लिया। </p>
<p>वैसे देखा जाये तो प्रदेश के सरकारी स्कूलो की स्तिथि बहुत दयनीय है, कहीं पर शिक्षक नहीं होते तो कहीं पर विद्यार्थी नहीं, कुछ जगह पर तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बचे बुनियादी चीजो से ही वंचित है! हंसी तो तब आती है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदेश में साक्षरता दर की बात करते है पर इस और कभी ध्यान नहीं देते  की कुछ  स्कूलों में तो छत तक नहीं है तो कुछ स्कूलों की इमारतों की हालत भी जर जर है </p>
<p>बैठक में राज्य सरकार की ओर से सीपीएस नीरज भारती व शिक्षा सचिव डॉ. राकेश शर्मा शामिल हुए और प्रदेश के मामले सलाहकार बोर्ड के समक्ष उठाए। राज्य सरकार की ओर से सुझाव दिया गया कि सरकारी स्कूलों में भी प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से बच्चों की हाजिरी बढ़ेगी। निजी स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाओं में दाखिला लेने वाले बच्चे उसी स्कूल में कम से कम आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करते हैं। ऐसे में यदि सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी शुरू की जाती है तो आठवीं कक्षा तक बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ेंगे और इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर भी बढ़ेगा। </p>
<p><strong>पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा<br />
</strong><br />
प्रदेश सरकार ने स्कूलों में प्री नर्सरी कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत लाए जाने की बात बोर्ड के समक्ष रखी है। बैठक में पांचवीं व आठवीं कक्षा के लिए बोर्ड के तहत परीक्षा लिए जाने का प्रावधान दोबारा शुरू करने के मामले को भी उठाया गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों में बच्चों को फेल नहीं करने की नीति में संशोधन करने की मांग की गई है। बोर्ड की बैठक में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं न लिए जाने के कारण प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड सभी राज्यों से आए सुझावों को केंद्र सरकार के समक्ष रखेगा। इसके बाद केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम को संशोधन के लिए संसद में लेकर जाएगी।</p>
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		<item>
		<title>प्रदेश शिक्षा बोर्ड किताबो के मूल्यों में 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी जबकि गुणवत्ता निम्न स्तर की</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/31/hike-in-rates-of-books-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Mar 2016 02:15:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Education in Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government Schools]]></category>
		<category><![CDATA[HPBOSE]]></category>
		<category><![CDATA[NCERT Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बढ़ाए पाठ्य पुस्तकों के दाम,गुणवत्ता के मामले में ये पुस्तकें हैं निम्न स्तर की,प्राइवेट स्कूलों के बच्चे होंगे ज्यादा प्रभावित शिमला- नया शैक्षणिक सत्र प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के अभिभावकों की जेब में डाका डालेगा। वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले नौंवी से जमा दो तक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बढ़ाए पाठ्य पुस्तकों के दाम,गुणवत्ता के मामले में ये पुस्तकें हैं निम्न स्तर की,प्राइवेट स्कूलों के बच्चे होंगे ज्यादा प्रभावित</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  नया शैक्षणिक सत्र प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के अभिभावकों की जेब में डाका डालेगा। वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले नौंवी से जमा दो तक के बच्चों पर भी इस बार महंगी किताबों का बोझ पड़ेगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस शैक्षणिक सत्र से विभिन्न टाइटल की किताबों के मूल्यों में 10 से 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।</p>
<p>बोर्ड के इस फैसले से प्रदेश भर के लाखों बच्चों के अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बोर्ड ने कुछ किताबों के मूल्यों में इतनी बढ़ोतरी की है कि यह पुस्तकें निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से भी महंगी हैं, जबकि गुणवत्ता के मामले मे बोर्ड की पुस्तकें निम्न स्तर की हैं।</p>
<p>छपाई के मामले में भी यह पुस्तकें ज्यादा क्लीयर नहीं हैं। पुस्तकों के संशोधित मूल्यों के अनुसार दूसरी कक्षा की हिंदी की पुस्तक के दाम 70 रुपये से बढ़ाकर 86 रुपये, अंग्रेजी की किताब 26 से बढ़ाकर 33 रुपये कर दिए गए हैं। इसके अलावा तीन दर्जन के करीब विभिन्न टाइटल की किताबों के मूल्यों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p><strong>यहां जानिए कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी</strong></p>
<p>तीसरी कक्षा की हिंदी की पुस्तक 32 की बजाय 43 रुपये में मिलेगी, जबकि गणित की पुस्तक 46 से 64 और अंग्रेजी के 35 से 50 रुपये कर दिए हैं। चौथी कक्षा का मैथ 51 से 73, हिंदी, अंग्रेजी और पर्यावरण शिक्षा की पुस्तक अब 31 की जगह 43 रुपये में मिलेगी। पांचवीं कक्षा की हिंदी में करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दाम 37 रुपये से बढ़ाकर 54 रुपये दाम किया गया।</p>
<p><strong> प्राइवेट स्कूलों के बच्चे होंगे ज्यादा प्रभावित</strong></p>
<p>पुस्तकों के दाम में हुई बढ़ोतरी से प्राइवेट स्कूलों के बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे। क्योंकि शिक्षा का अधिकार कानून के चलते सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत पहली से आठवीं तक पुस्तकें बिल्कुल फ्री मिलती हैं। नौवीं और दसवीं में पढ़ाई करने वाले एससी, एसटी, ओबीसी, आईआरडीपी सहित अन्य आरक्षित वर्ग के बच्चों को भी किताबें मुफ्त मिलती हैं।</p>
<p>एनसीईआरटी से पुस्तकों के निर्धारित मूल्यों से दस फीसदी तक रेट स्कूल शिक्षा बोर्ड बढ़ा या कम कर सकता है। बोर्ड की पुस्तकों के रेट एनसीईआरटी के मूल्यों से कम चल रहे थे। कागज और छपाई महंगी होने पर बोर्ड ने इन मूल्यों को एनसीईआरटी के निर्धारित मूल्यों के बराबर किया है।</p>
<p>विनय धीमान, सचिव स्कूल शिक्षा बोर्ड</p>
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		<title>हिमाचल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों के  बच्चों को अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषयों का ज्ञान राष्ट्रीय औसत से भी कम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/29/himachal-pradesh-government-schools-poor-education-system/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Mar 2016 12:45:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वर्ष 2014 के सर्वेक्षण में भी अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा था हिमाचल शिमला- राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों को अंग्रेजी,गणित व विज्ञान की समझ नहीं है। इन विषयों में वह देश के अन्य राज्यों के बच्चों से काफी पिछड़ गए हैं। हिमाचल के बच्चों का इन विषयों का ज्ञान राष्ट्रीय औसत से [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/29/himachal-pradesh-government-schools-poor-education-system/">हिमाचल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों के  बच्चों को अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषयों का ज्ञान राष्ट्रीय औसत से भी कम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वर्ष 2014 के सर्वेक्षण में भी अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा था हिमाचल</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों को अंग्रेजी,गणित व विज्ञान की समझ नहीं है। इन विषयों में वह देश के अन्य राज्यों के बच्चों से काफी पिछड़ गए हैं। हिमाचल के बच्चों का इन विषयों का ज्ञान राष्ट्रीय औसत से कम है। औसत से ऊपर प्रदर्शन करने की बजाय वह औसत में भी नहीं गिने जा रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के ताजा नेशनल अचीवमेंट सर्वेक्षण में इन बातों का खुलासा हुआ है।</p>
<p>गणित में हिमाचल के बच्चे औसत से नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं। अंग्रेजी में भी छात्र काफी पिछड़े हुए हैं। छात्रों के लचर प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण उन्हें विषय की स्पष्ट समझ नहीं होना है। वे सवालों को सही से समझ नहीं पा रहे हैं। बीते वर्ष एनसीईआरटी ने प्रदेश के 349 स्कूलों के कक्षा दस में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का उक्त विषयों में उपलब्धि सर्वेक्षण किया था। उसके आधार पर परिषद ने यह विश्लेषण किया है।</p>
<p>हालांकि प्रारंभिक स्तर की बात की जाए तो पांचवीं कक्षा के बच्चे भी इस सर्वेक्षण में खरे नहीं उतरे हैं। प्राथमिक स्तर पर खासकर विज्ञान, अंग्रेजी व गणित विषयों में बच्चे कमजोर हैं। वर्ष 2014 के सर्वेक्षण में भी अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल पिछड़ा था।</p>
<p><strong>इस बार तीसरी व आठवीं के बच्चों का सर्वेक्षण</strong></p>
<p>एनसीईआरटी इन दिनों सरकारी स्कूलों के तीसरी व आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों का सर्वेक्षण कर रही है। इसके तहत बच्चों के अलावा शिक्षकों व स्कूलों का भी मूल्यांकन किया है। हिमाचल एससीईआरटी जल्द ही प्रदेश के 260 स्कूलों का सर्वेक्षण एनसीईआरटी को सौंपेगा। इसके तहत तीसरी व आठवीं कक्षा के 520 बच्चों से निर्धारित टूल के मुताबिक एनसीइआरटी ने मल्टीपल ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूछे हैं। इस सर्वेक्षण के आधार पर राष्ट्रीय परिषद विश्लेषण कर हिंदी व गणित विषयों में बच्चों का मानसिक स्तर जानेगी।</p>
<p>एनसीइआरटी ने बच्चों से यह जानने की कोशिश भी की है कि शिक्षक कक्षा में कैसे पढ़ा रहा है। होमवर्क मिल रहा है या नहीं। घर पर छात्र के कितने भाई-बहन हैं और घर पर भी कोई उन्हें पढ़ाता है या नहीं। हर स्कूल से एक कक्षा से अधिकतम 20 बच्चों का सर्वेक्षण हो रहा है। लाहुल-स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में शिक्षा का स्तर जानने के लिए सर्वे किया जा रहा है।</p>
<p>सालों से एनसीईआरटी के अचीवमेंट सर्वेक्षण में हिमाचल के बच्चों का गणित, विज्ञान व अंग्रेजी विषय में ज्ञान राष्ट्रीय औसत से कम बताया जा रहा है। इन दिनों भी छात्रों का ज्ञान जानने के लिए एनसीईआरटी द्वारा करवाया जा रहा तीसरी व आठवीं कक्षा का सर्वेक्षण लगभग पूरा है। फील्ड से रिपोर्ट इकट्ठी की जा रही है। फील्ड इंवेस्टिगेशन के लिए विभिन्न डाईट के जेबीटी प्रशिक्षुओं को स्कूल अलॉट किए गए हैं।</p>
<p>शिव कुमार,स्टेट को-ऑर्डिनेटर,नेशनल अचीवमेंट सर्वे</p>
<p>Representational Image</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/29/himachal-pradesh-government-schools-poor-education-system/">हिमाचल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों के  बच्चों को अंग्रेजी, गणित व विज्ञान विषयों का ज्ञान राष्ट्रीय औसत से भी कम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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