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	<title>education Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>education Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>HP University में हॉस्टलों की स्थिति खराब, कमरों में सीलन, शौचालय जर्जर, मरमम्त के नाम पर कई सालों से बंद पड़े है हॉस्टल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/20/hostel-crisis-at-hp-university-damp-rooms-dilapidated-toilets-hostels-shut-for-years-in-the-name-of-repairs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:15:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे है। हॉस्टलों की हालत दयनीय बनी हुई है और लंबे समय से मरम्मत कार्य के नाम पर बंद पड़े है। श्रीखंड हॉस्टल 2 सालों से बंद पिछले दो वर्षों से श्रीखंड हॉस्टल बंद होने के कारण सैंकड़ों विद्यार्थियों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे है। हॉस्टलों की हालत दयनीय बनी हुई है और लंबे समय से मरम्मत कार्य के नाम पर बंद पड़े है।</p>
<p><strong>श्रीखंड हॉस्टल 2 सालों से बंद</strong></p>
<p>पिछले दो वर्षों से श्रीखंड हॉस्टल बंद होने के कारण सैंकड़ों विद्यार्थियों को आवास की समस्या से जूझना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि हर वर्ष हॉस्टलों की सीमित उपल्बधता के कारण विद्यार्थियों को मंहगे किराए के मकानों में रहना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।</p>
<p><strong>एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय </strong></p>
<p>छात्रों का कहना है कि एसबीएस और वाईएसपी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। कई कमरों में सीलन, टूटे दरवाजे-खिड़कियां, खराब विद्युत व्यवस्था और जर्जर शौचालयों जैसी गंभीर समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं, जिससे छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>इन समस्याओं को लेकर आज एक छात्र संगठन ने चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक बार फिर ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि हॉस्टलों के लिए अलग से बजट बनाकर जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। साथ ही मरम्मत कार्य की स्पष्ट समय-सीमा तय कर उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि आगामी सत्र से पहले हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके। संगठन ने यह भी मांग रखी कि छात्र प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो मरम्मत कार्य की निगरानी करेगी, ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।</p>
<p><strong>जिम उपकरण और मशीनें भी खराब </strong></p>
<p>इसके अलावा संगठन ने बताया कि हॉस्टलों में जिम उपकरण और मशीनें भी खराब पड़ी है, जो उपयोग योग्य नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से नए उपकण उपल्बध करवाने और पुराने उपकरणों को जल्द ठीक करवाने की मांग की है। वहीं, चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने आश्वासन देते हुए कहा कि मांगो पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल : अब विधवाओं की बेटियों को बाहर पढ़ाई करने पर भी मिलेगी वित्तिय मदद , जानिए सरकार का फैसला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/20/himachal-widows-daughters-to-get-financial-support-for-studies-outside-the-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:02:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Education]]></category>
		<category><![CDATA[himachal govt]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला:  &#8216;इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना&#8217; के तहत अब विधवा महिलाओं की बेटियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार ने योजना में संशोधन को मंजूरा दे दी है। पात्र विधवाओं की बेटियों को 27 वर्ष की उम्र तक योजना का लाभ [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong><strong>:</strong>  &#8216;इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना&#8217; के तहत अब विधवा महिलाओं की बेटियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार ने योजना में संशोधन को मंजूरा दे दी है। पात्र विधवाओं की बेटियों को 27 वर्ष की उम्र तक योजना का लाभ मिलेगा।</p>
<h3><strong>वित्तिय सहायता</strong></h3>
<p>संशोधित प्रावधानों के अनुसार, राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठयक्रम पढ़ रही छात्राओं को 10 महीने तक प्रति माह 3,000 रुपए दिए जाएंगे। यह सहायता सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में प्रदान की जाएगी।</p>
<h3><strong>योजना में शामिल पाठ्यक्रमों की सूची :</strong></h3>
<ol>
<li>इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी</li>
<li>व्यवसाय एवं प्रबंधन</li>
<li>चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान</li>
<li>लॉ</li>
<li>कंप्यूटर एपलीकेशन एंड आईटी सर्टिफिकेशन</li>
<li>एजुकेशन एंड हयूमेनिटीज़</li>
<li>राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा संचालित विभिन्न पाठयक्रम</li>
<li>शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के पाठयक्रम</li>
<li>सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित कार्यक्रम।</li>
</ol>
<h3><strong>वर्तमान में योजना की स्थिति </strong></h3>
<p>राज्य सरकार के अनुसार अब तक इस योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय मदद प्रदान की जा रही है। इसके अलावा सरकारी संस्थानों में पढ़ रहे लाभार्थियों की टयूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य संबंधित शैक्षणिक खर्च भी वहन किए जा रहे हैं।</p>
<p>राज्य सरकार ने बताया कि अब तक 18 &#8211; 27 साल आयु वर्ग की 504 छात्राएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। एक अनुमान के अनुसार इनमें से लगभग 20 प्रतिशत छात्राएं विस्तारित प्रावधानों के अंतर्गत व्यावसायिक पाठयक्रम चुन सकती है, जिसके लिए लगभग 1 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वार्षिक बजट का प्रावधान किया जाएगा।</p>
<h3><strong>लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद</strong></h3>
<p>राज्य सरकार का कहना है कि योजना के विस्तार से लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने &#8216;इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना&#8217; के तहत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है, जिसमें से 3 फरवरी, 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक रुकावट के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>HP University: 8 से सिर्फ 3 रह गई बसें, छात्रावासों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/17/hp-university-buses-drops-from-three-to-five/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:17:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[HP University]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। विश्वविद्यालय में बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पहले जहां आठ बसें सुविधा के लिए उपलब्ध थीं, वहीं वर्तमान में केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों को रोजाना आने &#8211; जाने में [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला </strong><strong>:</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। विश्वविद्यालय में बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पहले जहां आठ बसें सुविधा के लिए उपलब्ध थीं, वहीं वर्तमान में केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों को रोजाना आने &#8211; जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को समय पर कक्षाओं में पहुंचने में बाधा आ रही है, जिससे उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है।</p>
<p>इन्ही समस्याओं को लेकर छात्र संगठन ने वित्त विभाग के अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। छात्रों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से नई बसों की खरीद की जाए , साथ ही बसों की नियमित मेंटेनेंस और समय सारणी को सुव्यवस्थित किया जाए , ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके। इसके साथ ही छात्र संगठन ने ज्ञापन में वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक करने और छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि के विवरण की भी मांग की है।</p>
<p><strong>वित्त समिति की कार्यवाही सार्वजनिक की जाए</strong></p>
<p>संगठन की मांग है कि, 10 दिसंबर 2025 को हुई विश्वविद्यालय वित्त समिति की बैठक की कार्यवाही को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए। विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों और निर्णयों का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वित्त समिति में लिए गए निर्णयों, स्वीकृत बजट, व्यय और प्रस्तावों की जानकारी पारदर्शी तरीके से छात्रों और शिक्षकों के समक्ष लाई जाए। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर वित्त समिति की कार्यवाही अपलोड करने की भी मांग की है।</p>
<p><strong>छात्रावासों के नवीनीकरण हेतु आवंटित राशि का विवरण</strong></p>
<p>संगठन ने वित्त अधिकारी से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि लड़के और लड़कियों के छात्रावासों के नवीनीकरण के लिए कुल कितनी राशि आवंटित की गई है और अब तक उस राशि में से कितना व्यय किया जा चुका है। छात्रों का आरोप है कि छात्रावासों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे &#8211; शौचालयों की मरम्मत, विद्युत व्यवस्था और कमरों की मरम्मत की आवश्यकता है। संगठन का कहना है छात्र-छात्राओं ने कईं बार इन समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/17/hp-university-buses-drops-from-three-to-five/">HP University: 8 से सिर्फ 3 रह गई बसें, छात्रावासों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, नियम तोड़ने पर NOC होगी रद्द</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/08/hp-govt-tightenes-noose-around-himachals-private-school/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 05:23:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education Department]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[Private Schools]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला:  हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों में किताबों, कॉपियों और वर्दी की खरीद को लेकर होने वाली मनमानी पर अब स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम, 1997 में निहित प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/08/hp-govt-tightenes-noose-around-himachals-private-school/">हिमाचल में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, नियम तोड़ने पर NOC होगी रद्द</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला: </strong> हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों में किताबों, कॉपियों और वर्दी की खरीद को लेकर होने वाली मनमानी पर अब स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम, 1997 में निहित प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<p>अक्सर देखा गया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों पर बच्चों की किताबें, कॉपियां और वर्दी किसी एक तय दुकान से ही खरीदने का दबाव बनाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी निजी शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस तरह की किसी भी व्यवस्था को तुरंत समाप्त करें।</p>
<p><strong>शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि:</strong></p>
<ul>
<li>स्कूल स्वयं किताबें या कॉपियां नहीं बेच सकेंगे।</li>
<li>किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान से किताबें, कॉपियां या वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।</li>
</ul>
<p><strong>नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक होंगे निर्णय</strong></p>
<p>शिक्षा विभाग ने सभी सेकेंडरी और प्रारंभिक उपनिदेशकों, स्कूल प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले पीटीए के माध्यम से अभिभावकों का जनरल हाउस आयोजित किया जाए। इस बैठक में किताबों, कॉपियों और वर्दी की खरीद से संबंधित विषय को गंभीरता से रखा जाएगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जनरल हाउस में लिए गए निर्णयों को स्कूलों के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।</p>
<p><strong>नियम तोड़े तो रद्द होगा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)</strong></p>
<p>शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को नियमों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कहा है कि यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों की अवहेलना की जाती है या विभाग को शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित स्कूल का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) रद्द किया जा सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/08/hp-govt-tightenes-noose-around-himachals-private-school/">हिमाचल में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, नियम तोड़ने पर NOC होगी रद्द</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशाशन पर लगाए ये 7 गंभीर आरोप, कहा 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतना चरमारया प्रशासनिक ढ़ांचा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/27/sfis-allegations-on-hpu-administration-and-top-officials/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2019 16:34:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[Corruptoin]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[HP University]]></category>
		<category><![CDATA[HPU Campus]]></category>
		<category><![CDATA[SFI]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई व एस एफ आई शिमला जिला कमेटी ने संयुक्त प्रैस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रैस वार्ता के माध्यम से एस एफ आई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढ़ांचा पूरी तरह से चरमरा गया है जिसके लिए कुलपति,वि वि प्रशासन [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/27/sfis-allegations-on-hpu-administration-and-top-officials/">छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशाशन पर लगाए ये 7 गंभीर आरोप, कहा 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतना चरमारया प्रशासनिक ढ़ांचा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई व एस एफ आई शिमला जिला कमेटी ने संयुक्त प्रैस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रैस वार्ता के माध्यम से एस एफ आई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढ़ांचा पूरी तरह से चरमरा गया है जिसके लिए कुलपति,वि वि प्रशासन व प्रदेश सरकार समान रूप से जिम्मेवार हैं।</p>
<p>एस एफ आई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार वि।वि। का प्रशासनिक ढ़ांचा इतना चरमरा चुका है कि वि वि के कुलपति के रूप में सिकंदर कुमार जी ने शपथ ली तो उन्होंने पहला बयान यह दिया कि मैं आरएसएस की वजह से यहां तक पहुंचा हूँ और ता उम्र इस विचार के लिए काम करूँगा। इस बात का सिकंदर साहब समय-समय पर खूबी सबूत भी देते रहते है। विश्वविद्यालय के डीन ऑफ स्टडीज श्रीमान अरविन्द कालिया भष्टाचार में संलिप्त है। एस एफ आई ने आरोप लगाया कि ICDEOL के निदेशक कुलवंत पठानिया 10 महीनों में Ph.D करवाने का कारनामा कर चुके है।</p>
<p><iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fhimachalw%2Fvideos%2F1814211785392281%2F&#038;show_text=0&#038;width=560" width="560" height="420" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowTransparency="true" allowFullScreen="true"></iframe></p>
<p>विश्वविद्यालय के कुलसचिव ऑउटसोर्स के माध्यम से वि।वि। में आर ऐस ऐस   (RSS) और बी जे पी के लोगों की भर्तियां करवाने में लीन है। प्रदेश के ज्यादातर कॉलेजों में प्रिंसिपल की कुर्सी पर ऐसे लोगो को बिठाया गया है जो अपने-अपने कॉलेज में ए बी वी पी का काम प्रत्यक्ष रूप से कर रहे हैं। एस एफ आई ने कहा कि ऐसे लोगो का विश्वविद्यालय व कॉलेज के प्रशासन में होना यह दर्शाता है कि ये किस मंशा से इन पदों पर आसीन है। विश्वविद्यालय प्रशासन की बागड़ोर इस तरह के लोगो के हाथ में होने के कारण पिछले एक साल से विश्वविद्यालय का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। एस।एफ। आई। ने कहा कि यह बातें वह अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों के साथ बोल रही है और संस्था ने निम्नलिखित तथ्य पेश किये:-</p>
<h3>एच पी यू ऑनलाईन प्रणाली के खस्ताहालात</h3>
<p>एस एफ आई ने कहा कि जब से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने ऑफलाईन की जगह ऑनलाईन प्रणाली को लागू किया है तब से लेकर आज तक परीक्षा परिणाम एक भी बार समय पर घोषित नहीं हुए है और न ही सही परिणाम घोषित किए है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट के हालात दयनीय है जिसका कारण कंप्यूटर शाखा का ठेकाकरण व नियमित की जगह ऑउटसोर्स भर्तियां का होना है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 में करोड़ ERP(Enterprise Resource Programme) लागू किया है लेकिन इस प्रणाली को चलाने के लिए योग्य कर्मचारियों की जगह अपने चहेते बिठाये है। जर्जर हो चुके इस ऑनलाईन सिस्टम के कारण छात्रों के परिणाम समय पर नहीं आ रहे है और न ही काउंसलिंग के परिणाम समय पर आ रहे है, न तो हॉस्टल फॉर्म समय पर भरे जा रहे है और न ही फिसे जमा हो पा रही है। इसके साथ-साथ परीक्षा परिणामो का दुरुस्तीकरण भी समय पर नहीं हो रहा है जिसके कारण छात्रों की पढ़ाई वाधित हो रही है।एस एफ आई ने कहा कि इन सभी कारणों की वजह से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र भी लगभग 20 दिन देरी से शुरू होगा।</p>
<h3>विश्वविद्यालय के अधीन सभी कॉलेजों के छात्रों के हालात दयनीय</h3>
<p>एस एफ आई ने कहा कि कॉलेज के अधिकतर छात्र आजकल विश्वविद्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। छात्रों के परीक्षा परिणाम प्रशासन की नालायकी के कारण लंबे समय से लंबित है। छात्रों की Internal Assessment(I A) अभी तक विश्वविद्यालय नहीं पहुंची है। बहुत सारे छात्रों के Term end marks एक साल बीते जाने के बाद भी अपडेट नहीं किए गए है। हद तो तब हो जाती है जब छात्र एक ग्रेड कार्ड में पास और उसी सत्र के दूसरे ग्रेड कार्ड में फेल हो जाता है। कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी के कारण सरेआम छात्रों के भविष्य को रौंदा जा रहा है। एस एफ आई ने कहा कि वर्तमान समय में छात्र अपने शिक्षण संस्थान नहीं जा पा रहा है या समय पर नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि बसों में ओवरलोडिंग मान्य नहीं है और कॉलेज के पास छत्रों के लिए विशेष बसों का प्रावधान नहीं है और न ही प्रशासन द्वारा बसों का प्रावधान करने की जहमत उठाई जाती है न तो बस पास काउंटर खोले जा रहे है जिससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि प्रदेश का छात्र किन विपरीत परिस्थितियों में अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए मज़बूर है।</p>
<h3>विश्वविद्यालय में भगवाकरण की मुहिम को तेज़ करना</h3>
<p>एस एफ आई ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से भर्तियों की प्रकिया नियमित न करवाकर ऑउटसोर्स के माध्यम से करवाई जा रही है। जिस कारण विश्वविद्यालय में आरएसएस व भाजपा की राजनीतिक विचारधारा के व्यक्तियों की भर्तियाँ धड़ल्ले से करवाई जा रही है। ऑउटसोर्स प्रणाली के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन ने गैर कानूनी तरीके ऑउटसोर्स भर्तियों का टेंडर आरएसएस से तलूक रखने वाले व्यक्ति को दिया जिसने आरएसएस व भाजपा से सम्बन्ध रखने वाले लगभग 70 लोगों की भर्ती की। इसके साथ-साथ प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय व कॉलेजों में प्राध्यापकों के ए बी वी पी का प्रचार-प्रसार करने की खुली छूट दी गई है। एस एफ आई ने कहा कि परिसर में बहुत से प्राध्यापक सरेआम ए बी वी पी की बैठकें आयोजित करवाते हैं व विचारधारा के आधार पर छात्रों को Internal Assessment व प्रैक्टिकल मार्क्स देते है। जिसके कारण विश्वविद्यालय में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और साथ ही साथ विश्वविद्यालय का भगवाकरण जोर पकड़ता जा रहा है।</p>
<h3>विश्वविद्यालय में ए बी वी पी को मिलता संघ-रक्षण</h3>
<p>एस एफ आई का यह भी कहना है की जब से प्रदेश में भाजपा सरकार आई है और जब से विश्वविद्यालय में सिकंदर कुमार कुलपति के पद पर आसीन हुए है तब से लेकर प्रशासन व कुलपति द्वारा ए बी वी पी के नेताओं को पूरा संरक्षण दिया जा रहा है। इसका उदाहरण हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन,कुलपति व ए बी वी पी के गठजोड़ के द्वारा तैयार किया गया निष्कासन का ढोंग है। प्रशासन ने परिसर में घेराव व धरना प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध लगाया है। ऐसे में जब ए बी वी पी रजिस्ट्रार का घेराव करती है तो विश्वविद्यालय प्रशासन व कुलपति महाशय अपने आप को निष्पक्ष दिखाने व ए बी वी पी को छात्रहितैषी दिखाने के लिए ए बी वी पी के नेताओं को निष्काषित करने का ढोंग रचती है पर यह स्वांग कथा मात्र तीन दिनों में सिमट गया और निष्कासन वापिस ले लिया जाता है जिस निर्णय का हम स्वागत करते है। एस एफ आई ने कहा कि लेकिन यह निर्णय ए बी वी पी , कुलपति व प्रशासन के कूटनीतिक चेहरे के मुखौटे को उतार देता है और यह भी साबित करता है कि परिसर में घेराव व प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध केवल SFI के लिए है। पिछले 5 सालों से SFI के 7 छात्रों का विश्वविद्यालय से निष्कासन इस बात का साक्ष है। निष्कासन की बहाली का पैमाना भी विशेष विचारधारा पर मेहरबान है। एस एफ आई ने कहा कि विश्वविद्यालय में आरएसएस सम्बंधित विचारधारा पूरी तरह से प्रशासनिक अमले में घुल गई है और यही आर ऐस ऐस  युक्त प्रशासन ए बी वी पी को संरक्षण प्रदान कर रहा है।</p>
<h3>कोटशेरा कॉलेज में प्रिंसिपल द्वारा एस एफ आई के नेताओ पर एक तरफा कारवाई</h3>
<p>एस एफ आई ने कहा कि बीते दिनो कोटशेरा कॉलेज में ए बी वी पी के छात्रों द्वारा एक छात्र के साथ रैगिंग जैसी गैर कानूनी वारदात को अंजाम दिया जाता है।जिसकी बाकायदा पीड़ित छात्र द्वारा प्रशासन के समक्ष शिक़ायत की जाती है।अगले दिन रैगिंग लेने वाले उन्ही छात्रों में से पांच छात्र शराब के नशे में चूर होकर कॉलेज में हथियार लहराते है।दो शराबी छात्रों को एस एफ आई ने आम छात्रों की मदद से पुलिस के हवाले किया लेकिन तीन शराबी छात्र वहां से रफू चक्कर होने में कामयाब रहे। एस एफ आई ने आरोप लगाया है कि इन तीन छात्रों के कारनामे यही नहीं थमे बल्कि उसी दिन एक छात्रा के साथ छेड़खानी की। छात्रा ने प्रशासन के समक्ष इस प्रकरण की शिकायत की। कहां तो कॉलेज के प्रिंसिपल को शराबी और गुंडागर्दी करने वाले छात्रों पर कार्रवाई अम्ल में लानी चाहिए थी ,लेकिन उल्टा रैगिंग पीड़ित छात्र और छेड़खानी की शिकार छात्रा को प्रताड़ित किया गया। छात्र अब कॉलेज से माइग्रेशन करने को मजबूर है। एस एफ आई ने कहा कि वही छात्रा के अभिभावकों को बुलाकर छात्रा के संदर्भ में बेबुनियाद बाते कही गई।प्रिंसिपल पी के सलारिया सरेआम ए बी वी पी के कार्यकर्ता की भूमिका अदा करते हुए ए बी वी पी के स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में जाते है।</p>
<h3>विश्वविद्यालय व कॉलेजों में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन</h3>
<p>एस एफ आई ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विवि तथा कॉलेजों में लोकतंत्र की हत्या कर केन्द्रीय छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाकर प्रशासन पहले ही छात्रों की आवाज़ को दबा चुका है व अब छात्रों की आज़ादी को पूरी तरह से कुचलने पर आमादा है। कन्या छात्रावासों में छत्राओं की इंटर होस्टल आउटिंग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है जो कि पहले रात 11 बजे तक होती थी। कन्या छात्रावास में बेवजह गेस्ट एंट्री को बढ़ाया गया है जो कि प्रशासनिक डकैती की एक जीता जागता उदाहरण है। विवि में छात्रों को पढ़ाई से दूर करने के प्रयास भी किये जा रहे हैं।बॉयज होस्टल के छात्रों को 24 ऑवर लाइब्रेरी में नही जाने दिया जा रहा है और रात 10 बजे ही होस्टल के गेट पर ताले जड़ दिए जाते हैं। एस एफ आई ने कहा कि ये गेट पहले कभी बन्द ही नहीं होते थे। छात्र रात भर आ जा सकते थे पर अब नहीं। अब छात्र रात भर पिंजरे में रहने को मज़बूर हैं। छात्रों के धरने प्रदर्शन करने के अधिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है और न ही विवि प्रशासन से सवाल पूछने का अधिकार है। एस एफ आई ने कहा कि यदि प्रशासन इसका विरोध करता है तो उसे कक्षाओं से सस्पेंड किया जाता है व उसके अभिभावकों को बुलाकर उस छात्र के साथ साथ उन्हें भी प्रताड़ित किया जाता है।</p>
<h3>पीएचडी में फ़र्ज़ी प्रवेश की बाढ़</h3>
<p>एस एफ आई ने यह भी आरोप लगाया है कि किविश्वविद्यालय का एमसीए विभाग पीएचडी में अवैध प्रवेश के लिए बदनाम हो चुका है। एचपीयू के डीन ऑफ स्टडीज अरविंद कालिया इसी विभाग में कार्यरत है लेकिन शर्म की बात है कि इन फ़र्ज़ी प्रवेशों को करवाने में इनकी भी एक बड़ी भूमिका है। नियमों को दरकिनार कर अपने एक चहेते को टीचर कोटे से पीएचडी में प्रवेश दिलाना उनके भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। एस एफ आई ने कहा कि उन्ही के चलते ऐसे लोगों को पीएचडी में प्रवेश दिया गया है जिनकी योग्यता एमसीए के अनूरूप भी नहीं थी। आज वो ही लोग प्राध्यापक बन कर विवि में बैठे हैं। हैरानी की बात तो तब सामने आई जब डीएस के एक करीबी को उसकी एमसीए पूरी हाने से पहले ही पीएचडी में प्रवेश दिया गया। वाणिज्य विभाग में 10 महीने में पीएचडी पूरी करवाने का कारनामा भी वर्तमान इक्डोल निदेशक द्वारा ही किया गया है। इस समय भी एमसीए विभाग में NET/JRF को दरकिनार कर अपने चहेतों को प्रवेश देने की कोशिशें की जा रही हैं।</p>
<p>एस एफ आई ने कहा कि इन तमाम तथ्यों से यह साबित होता है कि एचपीयू में प्रदेश सरकार के संरक्षण में कुलपति व प्रशासन द्वारा सरेआम इसके व्यापारीकरण व भगवाकरण की मुहिम को पूरी ताक़त के साथ लागू किया जा रहा व एचपीयू के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से खस्ताहाल बना दिया है।</p>
<p>एस एफ आई एचपीयू में व्याप्त इन तमाम समस्याओं, भ्रष्टाचार व नाइंसाफी के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत 29 जुलाई को कोटशेरा कॉलेज प्रिंसिपल पी के सलारिया की तानाशाही के खिलाफ कॉलेगर में धरना प्रदर्शन व प्रिंसिपल का घेराव करके करेगी। एस एफ आई ने कहा कि 30 व 31 जुलाई को प्रदेश के तमाम कॉलेज व विवि में इन सभी मुद्दों को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा जिसे कुलपति तक पहुंचाया जाएगा।</p>
<p>एक अगस्त को हिमाचल के प्रत्येक कॉलेज व विवि में इन तमाम मुद्दों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। एस एफ आई ने कहा कि अगर प्रशासन फिर भी नहीं मानता है तो इस आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा जिसके ज़िम्मेदार कुलपति, प्रशासन व प्रदेश सरकार होंगे</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/27/sfis-allegations-on-hpu-administration-and-top-officials/">छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशाशन पर लगाए ये 7 गंभीर आरोप, कहा 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतना चरमारया प्रशासनिक ढ़ांचा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>2015 सत्र के यूजी विद्यार्थियों के लिए पासिंग पर्सेंटेज को किया जाए 40 %: ऐबीवीपी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/25/reduce-passing-percentage-for-ug-students-to-40-percent-abvp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jul 2019 12:10:47 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[ABVP HPU]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211;आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई विभिन्न मांगों को लेकर कुलसचिव से मिली और लंबे समय से परेशानियां झेल रहे 2015-18 सत्र के छात्रों का पासिंग परसेंटेज 40% करने की मांग कुलसचिव के सामने रखी। इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया कि लंबे समय से यह मांग विद्यार्थी परिषद प्रशासन के सामने रखता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong>आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई विभिन्न मांगों को लेकर कुलसचिव से मिली और लंबे समय से परेशानियां झेल रहे 2015-18 सत्र के छात्रों का पासिंग परसेंटेज 40% करने की मांग कुलसचिव के सामने रखी।</p>
<p>इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया कि लंबे समय से यह मांग विद्यार्थी परिषद प्रशासन के सामने रखता आ रहा है क्योंकि 2015 सत्र के बच्चे दर-2 भटकने को आज मजबूर हो चुके है। एक तरफ तो विश्वविद्यालय 2015 सत्र के विद्यार्थीयों को इंटरनल असेसमेंट रीवाइस करने का मौका दे रहा है परंतु दूसरी तरफ महाविद्यालय इस अधिसूचना की ओर कोई खासा ध्यान नही दे रहे हैं, जोकि सोचने का विषय है।</p>
<p>उन्होंने मांग रखी है कि 2015 और 2016 दोनों सत्रों की वेबसाइट विश्वविद्यालय प्रतिदिन रीवाइस करवाए ताकि समय पर सभी छात्र अपना सही परिणाम प्राप्त कर सकें।</p>
<p>साथ ही बीसीऐ (BCA) के अधूरे परिणामों के चलते एम्सीऐ (MCA) विभाग में मेरिट लिस्ट को कुछ दिनों तक रोकने की मांग भी परिषद ने कुलसचिव (Registrar )के सामने रखी।</p>
<p>वहीं परिषद ने होस्टेल व बीएड (B.ed) की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<item>
		<title>नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/17/uhf-nauni-elf-employment-vocational-training-course-2019/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jul 2019 07:14:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[Employment]]></category>
		<category><![CDATA[Horticulture]]></category>
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		<category><![CDATA[UHF Nauni]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन-डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/17/uhf-nauni-elf-employment-vocational-training-course-2019/">नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के<br />
औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य<br />
कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में<br />
स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।</p>
<p>यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 11 सितंबर से विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशनों और<br />
कृषि विज्ञान केंद्र में चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय के सात स्टेशनों में इस प्रशिक्षण कोर्स की कुल 130 सीटें<br />
होगी। जाछ (कांगड़ा), बाजौरा(कुल्लू), शारबो (किन्नौर), मशोबरा (शिमला) में स्थित विश्वविद्यालय के<br />
क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों और औदयानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में<br />
20-20 सीटें होगी। सिरमौर के धौलाकुआं में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र और चंबा के कृषि<br />
विज्ञान केंद्र में इस प्रशिक्षण कोर्स की 15-15 सीटें होगी।</p>
<p>इस कार्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने कम से कम दसवीं या समकक्ष स्तर की परीक्षा उतिर्ण की हो, 17 से 30 वर्ष<br />
की आयु का हो और कृषक परिवार से संबंध रखता हो। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन पत्र साधारण कागज पर<br />
संबंधित स्टेशनों के सह निदेशकय या कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के कार्यालय में 8 अगस्त या उससे पहले तक जमा<br />
कर सकते हैं।</p>
<p>साक्षात्कार 19 अगस्त को केंद्र सह निदेशक/ प्रभारी के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे। सभी<br />
उम्मीदवारों को यह घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाएगें। साक्षात्कार के समय<br />
उम्मीदवारों को अपने समस्त प्रमाण पत्र तथा उसकी एक-एक प्रतिलिपि साथ लानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान कोई<br />
भता देय नहीं होगा।</p>
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		<title>डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/dr-parvinder-kaushal-joins-as-new-vc-of-uhf-nauni/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jul 2019 07:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Parvinder Kaushal]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[Horticulture]]></category>
		<category><![CDATA[Solan]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[UHF Nauni]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन- डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे। हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong> सोलन- </strong>डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी विवि के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। उन्होनें अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है जिसके बादफ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।</p>
<p>डॉ कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण,अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएँ दी। इनमें से प्रमुख हैं, इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांचीमें वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के रूप डॉ कौशल ने कई वर्षो तक कार्य किया।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12718" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg" alt="UHF Nauni's New VC" width="1000" height="650" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC-300x195.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC-768x499.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>डॉ कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं। उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार द्वारा भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी। इसके अलावा,उन्होंने फ्रांस, इटली, यूनाइटेड किंगडम, मैक्सिको, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, यूगोस्लाविया, बेल्जियम, हॉलैंड, स्पेन, एस्टोनिया, कनाडा, फिनलैंड, तुर्की, मलेशिया और श्रीलंका सहित कई देशों का दौरा किया है।</p>
<p>डॉ परविंदर कौशल ने विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों और समूहों के सदस्य के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख हैं क्षेत्रीय डीन समिति दक्षिण एशिया (2009); कृषि विज्ञान में पीजी पाठ्यक्रम की समीक्षा और पुनर्गठन के लिए नेशनल कोर ग्रुप (आईसीएआर) के सदस्य; आईसीएआर की वानिकी में ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया कमेटी (BSMA)के संयोजक (2007); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरल रेसिंस अँड गम्स के लिए क्विनक्वीनियल रिव्यू टीम (QRT) के सदस्य(2001-2007);शेर-ए-कशमीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की मान्यता के लिए पीयर रिव्यू टीम (आईसीएआर प्रत्यायन बोर्ड) के सदस्य(2008); यूजीसी की कृषि,बागवानी और वानिकी,पर्यावरण,कौशल विकास आदि पर विभिन्नविशेषज्ञ समितियों के सदस्य (2013-2016);आईसीएआर-केंद्रीय कृषि-वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित सदस्य अनुसंधान सलाहकार समितिके सदस्य (2015-17)। डॉ कौशल ने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (IUFRO)के रिसर्च ग्रुप &#8216;फॉरेस्ट स्टैंड एस्टेब्लिशमेंट ऑपरेशंस एंड टेक्नीक्स&#8217;के डिप्टी लीडर(2000-05)के रूप में भी काम किया है। वह वृक्षारोपण प्रतिष्ठान (1990-2000) पर IUFROवर्किंग पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।</p>
<p>इस अवसर पर डॉ कौशल ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रीमण्डल का धन्यवाद किया। उन्होनें कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि नौणी विश्वविद्यालय को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके।</p>
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		<title>विकलांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप शिक्षा संस्थानों में नहीं मिल रही मुफ्त शिक्षा व् सुविधायें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/08/specially-able-students-in-himachal-pradesh-not-receiving-free-education-and-facilities-as-per-hp-high-court-orders/</link>
		
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		<pubDate>Mon, 08 Jul 2019 08:37:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; हिमाचल प्रदेश राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और विकलांगों के लिए काम कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने सरकार से मांग की है की राज्य सरकार के सभी स्कूलों और कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में विकलांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप मुफ्त शिक्षा दी जाए। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; हिमाचल प्रदेश राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और विकलांगों के लिए काम कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने सरकार से मांग की है की राज्य सरकार के सभी स्कूलों और कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में विकलांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप मुफ्त शिक्षा दी जाए। इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा एक सरकारी कॉलेज में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय में कंप्यूटर एवं टॉकिंग सॉफ्टवेयर की सुविधा देने के फैसले को सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में लागू किया जाए।</p>
<p>विकलांगजनों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव और ट्रस्टी डॉ. सुरेंदर कुमार ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार विकलांगजनों की समस्याओं के प्रति गंभीर है।</p>
<p>उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र ही विकलांगजनों की अन्य समस्याओं का समाधान कर देगी।</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर हाईकोर्ट के 4 जून 2019 के उस फैसले की याद दिलाई है जिसमें विश्वविद्यालय स्तर तक विकलांग विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे। राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों ने ये आदेश तभी लागू कर दिए थे। लेकिन राज्य सरकार के स्कूलों, कॉलेजों, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई आदि में इसे लागू नहीं किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बिलासपुर जिले के घुमारवीं कॉलेज की छात्राओं की जनहित याचिका पर 14 मई को हाईकोर्ट ने चार महीनों के भीतर दृष्टिबाधित छात्राओं के लिए टॉकिंग साफ्टवेयर वाले कम्यूटर, स्कैनर, ई- बुक्स, ब्रेल बुक्स आदि सुविधाएं देने के आदेश दिए हैं। सुगम्य पुस्तकालय की यह सुविधा उन सभी स्कूलों और कॉलेजों में भी दी जाए जहाँ दृष्टिबाधित विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि संजौली कालेज, के अलावा रामपुर, घुमारवीं, कुल्लू और मंडी आदि कॉलेजों और शिमला के पोर्टमोर समेत अनेक स्कूलों में दृष्टिबाधित विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।</p>
<p>प्रो. श्रीवास्तव और डॉ सुरेंदर कुमार ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सामाजिक न्याय मंत्री डॉ राजीव सैजल इन मुद्दों को शीघ्रता से सुलझा लेंगे। इस अवसर पर विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता मुकेश कुमार, सतीश ठाकुर, मीना शर्मा, और दृष्टिबाधित मेधावी विद्यार्थी इन्दु कुमारी, अनुज कुमार, अरुण शर्मा और अभिषेक आदि भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/22/make-inspection-report-of-himachals-private-schools-public-student-parent-forum/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2019 14:08:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/22/make-inspection-report-of-himachals-private-schools-public-student-parent-forum/">किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा था। प्रदेश भर के निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन के 14 दिन का समय अब खत्म हो गया है। अधिसूचना के हिसाब से अब सभी निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा निदेशक के टेबल पर होनी चाहिए। इस अधिसूचना के तहत प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर स्थित निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन 9 व 10 अप्रैल को निर्धारित की गई थी। उच्चतर शिक्षा निदेशक की अधिसूचना में स्पष्ट था कि दो दिनों की इंस्पेक्शन के बाद 11 अप्रैल को जिला मुख्यालयों के स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को सौंप दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने शिक्षा निदेशक से पूछा है कि वे इन स्कूलों की रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं और रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने के पीछे उनपर आखिर किसके दबाव है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों के निजी स्कूलों के अलावा अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य भी अब खत्म हो गया है। जिला मुख्यालयों के इतर अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन की टाइम लिमिट भी 22 अप्रैल को खत्म हो गई है।</p>
<p>मंच ने कहा है कि शिक्षा विभाग अब जनता व अभिभावकों को स्पष्ट करे कि इंस्पेक्शन रिपोर्ट में निजी स्कूलों के संदर्भ में क्या आंकड़े व तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों की रिपोर्ट तुरन्त सार्वजनिक करें अन्यथा अभिभावकों का रोष उनको झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक केवल कागजी कार्यवाही व लीपापोती से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।</p>
<p>मंच ने कहा है किअभिभावकों को जमीनी स्तर पर निजी स्कूलों की लूट व मनमानी के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहिए। अगर शिक्षा विभाग ने इस पूरे मसले पर संतोषजनक कार्रवाई न की तो निश्चित तौर पर शिक्षा विभाग के खिलाफ अभिभावक और ज़्यादा मुखर होकर दोबारा से सड़कों पर उतर आएंगे।</p>
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