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	<title>Ajai Srivastava Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Mon, 06 Jun 2016 16:57:42 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Ajai Srivastava Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने  में लगा स्वास्थ्य महकमा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/06/ddu-shimla-blood-bank-wasting-blood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jun 2016 11:37:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता। </p>
<p>फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को <em>&#8220;रूटीन का मामला&#8221;</em> बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था। </p>
<p><iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/wvMb4H9U5KE" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।</p>
<p>आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण <em>&#8220;रक्त की कम मात्रा&#8221;</em> बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।</p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।</p>
<h3>तेरह मई को फेंका गया रक्त</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25646</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25764</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25700</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25775</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25789</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h3>यह है सोलह मई का आंकड़ा</h3>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25664</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25649</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25679</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25677</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25682</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25683</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25687</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25696</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th>रजिस्ट्रेशन नंबर</th>
<th>ब्लड ग्रुप</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>25731</td>
<td>एबी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25737</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25724</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25728</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25722</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25735</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25716</td>
<td>ओ पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25707</td>
<td>एबी पॉजिटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25699</td>
<td>बी नेगेटिव</td>
</tr>
<tr>
<td>25734</td>
<td>बी पॉजिटिव</td>
</tr>
</tbody>
</table>
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			</item>
		<item>
		<title>डीडीयू शिमला के ब्लड बैंक ने कूड़ेदान में फ़ेंक दिया 21 यूनिट रक्त, रक्तदाताओं की भावनाएं आहत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/15/shimla-ddu-hospital-blood-bank-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 May 2016 05:23:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donors]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ब्लडबैंक द्वारा 21 यूनिट रक्त कूड़ेदान में फेक दिए जाने को &#8220;अपराध&#8221; बताते हुए उमंग फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यही नहीं, वहां छह यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा। </p>
<p>प्रेस कांफ्रेंस में उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि डीडीयू अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त फेंके जाने से रक्तदाताओं की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं। उन्होंने डीडीयू और कमलानेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद करके वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोलने और स्टाफ को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक को मज़बूत बनाने में लगाने की मांग की।</p>
<p>फाउंडेशन ने बताया कि गत 25 मार्च से 3 मई के बीच डीडीयू ब्लड बैंक ने 21 यूनिट रक्त इसलिए फ़ेंक दिया क्योकि वह 35 दिन की मियाद पूरी कर चुका था। फेंका गया रक्त संक्रमित नहीं था और उसे समय रहते आईजीएमसी या किसी अन्य ब्लड बैंक को दिया जा सकता था। रक्त फेंकना एक घृणित अपराध है क्योंकि रक्तदाता निस्वार्थ भाव से दूसरों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद 87 बार खून दान कर चुके हैं।</p>
<p>फाउंडेश का यह भी कहना है कि डीडीयू अस्पताल ब्लड बैंक से आईजीएमसी ब्लड बैंक मुश्किल से आधे घंटे की दूरी पर है जहाँ रक्त की अक्सर कमी रहती है और रोज़ाना औसत खपत 40 से 60 यूनिट की है। वहां रक्त आसानी से भेजा जा सकता था। लेकिन डीडीयू ब्लड बैंक ने इस ओर कोई प्रयास नहीं करता है और 35 दिन के बाद बड़ी आसानी से खून कूड़ेदान में फ़ेंक देता है। वहां 6 यूनिट रक्त कल फ़ेंक दिया जाएगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेश ने सुझाव देते हुए कहा कि डीडीयू और कमला नेहरू अस्पताल के ब्लड बैंकों को बंद कर के वहां ब्लड स्टोरेज सेंटर खोले जाएं। इन दोनों ब्लड बैंकों के स्टाफ को आईजीएमसी में शिफ्ट कर के उसे और मज़बूत बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>फाउंडेश ने प्रदेश में ब्लड कंपोनेंट थेरेपी को बढ़ावा देने की मांग की ताकि एक यूनिट रक्त को कई मरीजों के काम में लाया जा सके। अभी ये सुविधा आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज और मंडी के अस्पताल में ही उपलब्ध हैं जहाँ इसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है।   </p>
<p>Photo: Mental Floss/Representational Image</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल  के दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल में धांधली</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/08/17/irregularities-in-himachals-school-for-blind-and-deaf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2015 08:45:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[School For Deaf and blind Dhali]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Umang Foundation Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उमंग फाउंडेशन ने हिमाचल के राज्यपाल को सौंपा पत्र सेवा में, आचार्य देवव्रत जी, महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश विषय: दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल की हालत में सुधार तथा धांधली की जांच का अनुरोध महोदय, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमें पूर्ण विश्वास है कि इस महत्वपूर्ण [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>उमंग फाउंडेशन ने हिमाचल के राज्यपाल को सौंपा पत्र </strong></p>
<p>सेवा में,<br />
आचार्य देवव्रत जी,<br />
महामहिम राज्यपाल,<br />
हिमाचल प्रदेश</p>
<p><strong>विषय: दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल की हालत में सुधार तथा धांधली की जांच का अनुरोध</strong></p>
<p>महोदय,<br />
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमें पूर्ण विश्वास है कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के निर्वहन में आप राज्य के सभी वर्गों के साथ न्याय करेंगे। हमें आशा है कि समाज के सर्वाधिक दुर्बल वर्गों &#8211; दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बच्चों, अन्य विकलांगों, थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों, कुष्ठरोगियों, मंदबुद्धि लोगों, मनोरोगियों, निर्धन मरीजों, बेसहारा महिलाओं और बेघर बुजुर्गों को भी आपके माध्यम से न्याय एवं सार्थक जीवन जीने का अवसर प्राप्त होगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन एक जन कल्याण न्यास है जो हिमाचल में उपरोक्त सभी दुर्बल वर्गों के मानवाधिकार संरक्षण तथा सशक्तिकरण हेतु कार्य कर रहा है। हम बिना किसी सरकारी अनुदान के कार्य कर रहे हैं। विशेषकर दृष्टिहीन, मूकबधिर एवं अन्य विकलांग बालक- बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए हम समाज के सहयोग से कार्यरत हैं। शिमला के दो प्रतिष्ठित राजकीय महाविद्यालयों में हमारी शतप्रतिशत छात्रवृत्ति से 22 दृष्टिहीन विद्यार्थी, जिनमे 9 लड़कियां हैं, होस्टल में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिमला के पोर्टमोर स्कूल में 19 बच्चियां हमारे सहयोग से होस्टल में रह कर पढ़ रही हैं जिनमे 14 मूकबधिर एवं 5 दृष्टिहीन हैं। हम इन वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर तक संघर्ष करते हैं जिनमे हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर करना भी शामिल है। हमे अपने उद्देश्य में कई सफलताएं भी मिली हैं।<br />
यहाँ हम आपका ध्यान शिमला के ढली क्षेत्र में राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बालकों के विशेष विद्यालय की दुर्दशा, विकलांग बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं की और खींचना चाहते हैं। राज्यपाल के नाते आप बाल कल्याण परिषद् के प्रेसीडेंट हैं और मुख्यमंत्री अध्यक्ष हैं और यह प्रदेश में दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बालकों का एकमात्र स्कूल है जिसके सर्वोच्च पदाधिकारी भी आप ही हैं।</p>
<p><strong>आपसे निवेदन है कि कृपया निम्नलिखित मुद्दों पर विचार करने की कृपा करें:</strong></p>
<p>1. ढली स्थित विशेष विद्यालय के दृष्टिहीन एवं मूकबधिर विद्यालय में पहली से 10वीं कक्षा तक के कुल 120 बच्चे हैं जिनमें 27 दृष्टिहीन और 93 मूकबधिर हैं।</p>
<p>2. वर्षों से दृष्टिहीन और बधिर, दोनों वर्गों के लिए गणित तथा विज्ञान विषयों का कोई शिक्षक ही नहीं है। सभी कक्षाओं के लिए विषयवार शिक्षक नहीं हैं।</p>
<p>3. दृष्टिहीन बच्चे संगीत में अच्छा कार्य कर सकते हैं पर स्कूल में संगीत का शिक्षक ही नहीं है।</p>
<p>4. बधिर बच्चे पेंटिंग और ग्राफ़िक्स में बहुत अच्छे निकल सकते हैं पर इस विषय का कोई अध्यापक नहीं है।</p>
<p>5. दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चे कम्प्यूटर के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकते हैं और रोज़गार कमा सकते हैं परंतु उन्हें इसकी कोई वोकेशनल ट्रेनिंग नहीं दी जाती है।</p>
<p>6. विज्ञान प्रयोगशाला और लैब सहायक तक विद्यालय में नहीं है।</p>
<p>7. दृष्टिहीन बच्चों की पहली से दसवीं तक की कुल दस कक्षाओं के लिए स्कूल में मात्र 3 कमरे ही हैं।</p>
<p>8. इसी तरह मूकबधिर बच्चों की कुल 10 कक्षाओं हेतु मात्र 6 कमरे उपलब्ध हैं।</p>
<p>9. विशेष विद्यालय में राज्य के गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ते हैं। धनी लोग अपने दृष्टिहीन तथा बधिर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रदेश से बाहर भेज देते हैं। लेकिन बाल कल्याण परिषद् कई वर्षों से बच्चों को वर्दी व पुस्तकें तक नहीं देरही थी। अप्रैल में मैंने उमंग फाउंडेशन की ओर से माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा जिसके बाद बच्चों को एक पैंट और एक शर्ट दी गई।</p>
<p>9. यह बड़े खेद का विषय है कि बाल कल्याण परिषद् और विशेष विद्यालय भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए अप्रैल में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र जब अखबारों में छपा तो बाल कल्याण परिषद् हरकत में आई और बच्चों के लिए वर्दी सप्लाई का आर्डर दिया।</p>
<p>10. विशेष विद्यालय में खरीद के लिए बाकायदा एक परचेज कमेटी है जिसे अँधेरे में रख कर मूकबधिर स्कूल की प्रिंसिपल ने अप्रैल में अपने स्तर पर 120 पैंटें और इतनी ही शर्टें खरीदने का आर्डर एक निजी दूकानदार को दिया। यह नियमों के विपरीत था।</p>
<p>11. नियम के अनुसार प्रिंसिपल अपनी खरीद- जरूरतों का ब्यौरा बाल कल्याण परिषद् को भेजती जिसकी मंजूरी मिलने के बाद स्कूल की परचेज कमेटी सरकारी एजेंसी यानी राज्य खाद्य एवं आपूर्ति निगम से खरीद के लिए संपर्क करती। आपूर्ति निगम में सामग्री उपलब्ध न होने पर उससे अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेकर सरकारी रेट कॉन्ट्रैक्ट वाले आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री खरीदी जानी चाहिए थी।</p>
<p>12. रेट कॉन्ट्रैक्ट वाले आपूर्तिकर्ताओं के पास सामग्री अनुपलब्ध होने पर परचेज कमेटी सील्ड कुटेशन आमंत्रित करती और वही कमेटी कुटेशन व् सैंपल का निरीक्षण करके सप्लाई आर्डर देती।</p>
<p>13. हैरानी की बात ये है कि अप्रैल में मूकबधिर विद्यालय की प्रिंसिपल ने सप्लाई के लिए मौखिक आर्डर दे दिया और 22- 23 मई को 120 बच्चों की पैंट- शर्ट स्कूल पहुँच गई। 25 मई 2015 को दूकानदार ने लगभग 70 हजार रुपये का बिल भी दे दिया। लेकिन राज्य आपूर्ति निगम को उक्त प्रिंसिपल ने NOC के लिए पत्र उसके एक महीने बाद 22 जून 2015 को लिखा। निगम ने NOC 23 जून को जारी किया।</p>
<p>14. राज्य बाल कल्याण परिषद् ने नियमों के विपरीत उक्त प्रिंसिपल के खाते में सामग्री की खरीद हेतु 2 लाख रुपए डाल दिए जिससे 5 अगस्त को लगभग 70 हज़ार रु. का भुगतान किया गया। जबकि बिल का भुगतान परिषद् को खुद करना चाहिए था। परिषद् के अधिकारी भी अनियमितताओं में शामिल लगते हैं।</p>
<p>15. वर्ष 2014 मेँ माननीय मुख्यमंत्री ने बच्चों के लिए रु. 30 हज़ार और माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने रु. 21 हजार अनुदान मेँ स्कूल को दिए थे। वन विभाग ने 15 हज़ार रु. दिए। ये सभी राशि परचेज कमेटी के ध्यान में लाए बिना प्रिंसिपल द्वारा खर्च की गई।</p>
<p>16. विशेष स्कूल के बच्चों को वर्दी का स्वेटर, जूते, जुराबें तथा अंडरवियर, बनियान, तौलिया व चप्पलें आदि अभी तक नहीं मिले हैं।</p>
<p>17. बच्चोँ को आवश्यकता के अनुसार पठन सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। दृष्टिहीन बच्चों के लिए डिजिटल पुस्तकालय अभी भी सपना है।</p>
<p>महामहिम, आपसे प्रार्थना है कि आप उपरोक्त सभी मामलों की जांच के आदेश देने की कृपा करें ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और विकलांग बच्चों को न्याय मिल सके।</p>
<p>धन्यवाद।<br />
अजय श्रीवास्तव</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/08/17/irregularities-in-himachals-school-for-blind-and-deaf/">हिमाचल  के दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल में धांधली</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
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		<title>मरने के बाद भी यह आँखे देखती रहें &#8211; आँखे की जाएगी दान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2014/04/27/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%b9-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a4/</link>
		
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		<pubDate>Sun, 27 Apr 2014 16:47:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>वि. वि. कर्मचारी व् समाजसेवक नागेन्द्र गुप्ता ने आज उमंग फाऊंडेशन द्वारा आयोजित सेमीनार में आँखे दान करने की घोषणा की गई! उन्होंने बताया की यह प्रेरणा उन्हें उमंग फाऊंडेशन द्वारा नेत्रहीन तथा अपंग बच्चों के समय -समय पर आयोजित कार्यक्रमों को देखने से मिली है! गुप्ता ने बताया की उमंग फाऊंडेशन सामाजिक उत्थान के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2014/04/मरने-के-बाद-भी-यह-आँखे-देखती-रहें-आँखे-की-जाएगी-दान.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2014/04/मरने-के-बाद-भी-यह-आँखे-देखती-रहें-आँखे-की-जाएगी-दान.jpg" alt="मरने के बाद भी यह आँखे देखती रहें - आँखे की जाएगी दान" width="620" height="450" class="alignnone size-full wp-image-1257" /></a></p>
<p>वि. वि. कर्मचारी व् समाजसेवक नागेन्द्र गुप्ता ने आज उमंग फाऊंडेशन द्वारा आयोजित सेमीनार में आँखे दान करने की घोषणा की गई! उन्होंने बताया की यह प्रेरणा उन्हें उमंग फाऊंडेशन द्वारा नेत्रहीन तथा अपंग बच्चों के समय -समय पर आयोजित कार्यक्रमों को देखने से मिली है! गुप्ता ने बताया की उमंग फाऊंडेशन सामाजिक उत्थान के लिए समय -समय रक्त दान शिविरों की आयोजन भी करती रहती है तथा नेत्रहीन व् अपंग व्यक्तियों व् बच्चों का मार्गदर्शन भी करती रहती है! </p>
<p>उन्होंने कहा की उमंग फाऊंडेशन की तरह समाज में अन्य संस्थाये भी किसी न किसी रूप से समाज की सेवा कर रहीं हैं जिनसे हमने प्रेरणा लेनी चाहिए! </p>
<p>विकास समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा की हम सभी को चाहिए की वह तन -मन-धन चाहे किसी रूप में सक्षम हों समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए! गुप्ता ने इस मौके पर अतिथि के रूप में शिरकत की तथा नेत्र हीं बच्चों को संस्था की ओर से एंजल स्टडी डिवाइस तथा टाॅकिंग घड़ी भी भेंट की! नागेन्द्र गुप्ता ने उमंग फाऊंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तवा व् उनकी पूरी टीम को भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई दी!  </p>
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