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	<title>हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>कांगड़ा चाय पर कार्यशाला में लगभग 1000 चाय उत्पादक एवं विक्रेता लेंगे हिस्सा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Mar 2017 13:25:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[काँगड़ा]]></category>
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		<category><![CDATA[बृज बिहारी लाल बुटेल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>काँगड़ा- हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केन्द्र 24 मार्च को हिमालयन जैव संसाधन संस्थान पालमपुर में कांगड़ा चाय, भौगौलिक संकेतक पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। कार्यशाला की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल द्वारा की जाएगी। इस कार्यशाला में पालमपुर एवं अन्य कांगड़ा चाय उत्पादक क्षेत्रों से लगभग 1000 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काँगड़ा-</strong> हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केन्द्र 24 मार्च को हिमालयन जैव संसाधन संस्थान पालमपुर में कांगड़ा चाय, भौगौलिक संकेतक पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। कार्यशाला की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल द्वारा की जाएगी।  </p>
<p>इस कार्यशाला में पालमपुर एवं अन्य कांगड़ा चाय उत्पादक क्षेत्रों से लगभग 1000 चाय उत्पादक एवं विक्रेता हिस्सा लेंगे। कार्यशाला में मुख्य तौर पर  कुणाल सत्यार्थी, संयुक्त सदस्य सचिव राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण, डा0 संजय कुमार, निदेशक आईएचबीटी , पालमपुर, अनुपम दास उप-निदेशक, टी बोर्ड, पालमपुर एवं  डी एस कंवर तकनीकी अधिकारी ;चायद्ध विशेष रुप से उपस्थित रहेंगे और कार्यशाला के दौरान होने वाली विवेचना में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>इस कार्यशाला में कांगड़ा चाय की authorised usership एवं बाजार में उपलब्ध अवसर और इससे संबंधित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। ब्रिटिश काल में कांगड़ा चाय लन्दन और एमस्टरडेम के बाजारों में निर्यात करी जाती थी। उस समय में कांगड़ा चाय की काफी ख्याती थी। </p>
<p>हालाँकि पिछले कुछ समय में कांगड़ा चाय उत्पादकों का चाय के कारोबार में घटती रुचि चिंतनीय विषय है और इस हेतु हम सबको कार्य करने की जरुरत है। यह कार्यशाला भविष्य में नीति निर्धारण एवं कांगड़ा चाय की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः बहाल करने में सहायक होगी।</p>
<p>इस अवसर पर कांगड़ा चाय पलान्टर एसोसिएशन की तरफ से जे एल बुटेल एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला में डा0 आशु गुलहाटी, डा0 आर के सूद, डी0 एस0 कंवर, अनुपम दास कांगड़ा चाय और इससे संबंधित विषय पर प्रकाश डालेंगे।</p>
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		<title>हिमाचल विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद भवन का उद्धघाटन, जैवविविधता बोर्ड की नई बैवसाइट लाॅन्च</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/10/himachal-pradesh-environment-science-and-technology-department/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Feb 2017 12:29:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान बैमलोई]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य सचिव वीसी फारका]]></category>
		<category><![CDATA[वीरभद्र सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल जैव विविधता बोर्ड]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल प्रदेश जैव विविधता बोर्ड की केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान बैमलोई शिमला में जिला शिमला के 7 विकास खण्डों बसन्तपुर, छुआराए चैपाल, जुब्बल.कोटखाई, मशोबरा, ठियोग और रोहड़ुद्ध के समस्त ग्राम पंचायत प्रधानों तथा हितधारक विभागों क्रमशः वन, आयुर्वेदा, मत्स्य, वानकी, कृषि, पशुपालन विभागो के अधिकारियो के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हिमाचल प्रदेश जैव विविधता बोर्ड की केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान बैमलोई शिमला में जिला शिमला के 7 विकास खण्डों बसन्तपुर, छुआराए चैपाल, जुब्बल.कोटखाई, मशोबरा, ठियोग और रोहड़ुद्ध के समस्त ग्राम पंचायत प्रधानों तथा हितधारक विभागों  क्रमशः वन, आयुर्वेदा, मत्स्य, वानकी, कृषि, पशुपालन विभागो के अधिकारियो के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमे जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना, लोग और उनकी आजीविका को कायम रखनाद्ध को लेकर चर्चा की गयी ।  </p>
<p>इस प्रशिक्षण कार्यशाला में शिमला के सात विकास खण्डों एवं पांच वन मण्डलों के ग्रामं पंचायत प्रधानों अधिकारी एवं कर्मचारियों को जैवविविधता के महत्व, इसके योगदान जैवविविधता अधिनियम, 2002 और नियम, 2004, जैवविविधता प्रबन्धन समितियों का गठन पंचायत स्तर पर, जैवविविधता रजिस्टर तैयार करने तथा शिमला जिला के जैविक संसाधन के उपयोग से उत्पन्न लाभों के आवंटन बारे अवगत कराया गया। </p>
<p>राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के लिए बनाई गई नवनिर्मित भवन जिसमें हिमाचल प्रदेश जैवविविधता बोर्ड, जलवायु परिवर्तन केन्द्र तथा बौद्विक सूचना केन्द्र कार्य करेंगे। यह तीनों केन्द्र भविष्य में उपरोक्त क्षेत्रों में तथा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहे अधिकारियों एवं वैज्ञानिको को कार्य करने में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवायेंगे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस नवनिर्मित भवन का उद्धघाटन किया तथा जैवविविधता बोर्ड की नई बैवसाइट को भी लाॅन्च किया। हिमाचल प्रदेश मुख्य सचिव वीसी फारका ने इस समारोह का शुभारंभ किया </p>
<p>जैवविविधता एक्ट के प्रावधानों के अन्तर्गत जैव संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग करने वाले उद्योग एवं कम्पनियों की इन संसाधनों द्वारा अर्जित लाभ को राज्य जैवविविधता बोर्ड के माध्यम से स्थानी निकाय स्तर पर गठित बीएमसी  बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी (Biodiversity Management Committee); के साथ साँझा  करना पड़ेगा । यह लाभ स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण एवं आजिविका सृजित करने में उपयोग किया जाएगा। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अर्की जिला सोलन द्वारा जैवविविधता पर एकांकी प्रस्तुत की गई। </p>
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