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	<title>हिमाचली सेब Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट व लागत वस्तुओं की कीमतों मे भारी वृद्धि के चलते बढ़ी बागवानों की परेशानियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Aug 2021 16:20:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; किसान सभा ने प्रदेश सरकार पर हाल ही मे सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट के चलते बागवानों की परेशानी को बढ़ाने का आरोप लगाया है। राज्याध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों की रक्षा करने मे पूरी तरह विफल रही है और कॉरपोरेट घरानों के साथ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; किसान सभा ने प्रदेश सरकार पर हाल ही मे सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट के चलते बागवानों की परेशानी को बढ़ाने का आरोप लगाया है। राज्याध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों की रक्षा करने मे पूरी तरह विफल रही है और कॉरपोरेट घरानों के साथ खड़ी होकर उनको खुली छूट दी जा रही है ।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हाल ही मे अडानी समूह द्वारा सेब के जो दाम तय किये हैं जिसमें बीते साल 80-100 फीसदी रंग वाले सेब के दाम 85 रुपये प्रति किलो था जबकि इस बार इसी सेब का रेट 72 रुपये प्रति किलो है। इसी तरह दूसरे दर के सेब के रेट में भी भारी गिरावट की गई है।इतने कम रेट में किसानों को अपने बागीचे का खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p>तंवर ने कहा है कि प्रदेश सरकार बड़े बड़े घरानों के साथ खड़ी होकर बागवानों का शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार ने किसानों व बागवानों को मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है। जिससे कि लागत बढ़ रही है। आज किसान बाजार से महंगी दवाई खरीदने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों व बागवानों को बाजार मे सेब के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। आज के समय में उत्पादन लागत मे कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे कि आज इनकी आजीविका का संकट ओर गहरा हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश इस आर्थिकी को बचाने मे पूरी तरह विफल रही है। प्रदेश सरकार का बड़े बड़े कॉरपोरेट पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्हें खुली छूट दी जा रही है। सरकार को चाहिए कि वह इन कॉरपोरेट घरानों की इस मनमर्जी पर रोक लगाये। उन्होंने कहा कि सेब के दामों में आई गिरावट से व निरन्तर लागत वस्तुओं की कीमतों मे भारी वृद्धि के कारण सेब की 5 हजार करोड़ की आर्थिकी भी गहरे संकट में चली गयी है।</p>
<p>किसान सभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस संकट के समय मे बागवानों को संकट से बाहर निकालने के लिए जम्मू कश्मीर की तर्ज पर एम आई एस (मंडी मध्यस्थता योजना) के तहत सेब खरीदना चाहिए। जिसमें ए० ग्रेड के लिये 60 रुपये प्रति किलो बी ग्रेड के लिए 44 रुपये व सी ग्रेड के लिए 24 रुपये प्रति किलो के हिसाब से एच.पी.एम.सी. हिम्फेड व अन्य सहकारी समितियों के माध्यम से सेब खरीदना चाहिए।</p>
<p>जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि प्रदेश सरकार की लचर कार्यप्रणाली के कारण एच.पी.एम.सी. कानून की खुली अवहेलना पर रोक लगानी चाहिए, कानून के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करना चाहिए। मंडियों में जिनके पास लाइसेंस व परमिट हैं केवल उन्हें ही कारोबार करने की इजाजत देनी चाहिए तथा किसानों को जिस दिन उनका उत्पाद बिकता है उसी दिन खरीददार व आढ़ती द्वारा भुगतान के प्रावधान को लागू करना चाहिए।</p>
<p>किसान सभा के नेताओं ने कहा है कि 30 अगस्त को शिमला में संयुक्त किसान मंच द्वारा आयोजित अधवेशन में किसान सभा बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेगी। तथा किसान-बागवानों की समस्याओं को लेकर आगामी रणनीति तैयार करेगी।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने भी आरोप  लगाया है कि सरकार की मिलीभगत से सेब के दाम गिराए गए है। उन्होंने आरोप लगाया कि लदानी, अदानी को सरकार का पूरा सरंक्षण है।उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इसकी जांच करें और इस पर हस्तक्षेप करते हुए बागवानों के हितों की रक्षा करें। राठौर ने बागवानी मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि उन्होंने 1135 करोड़ के बागवानी प्रोजेक्ट पर कुंडली मारते हुए बागवानों के साथ अन्याय किया है।</p>
<p>वंही  भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद ठाकुर का कहना है कि मांग और आपूर्ति के अनुपात में ज्यादा अंतर आने से मार्किट में दाम गिरना स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे रेगुलेट करने के लिए ही सरकार ने बागवानों को तुड़ान की गति धीमी करने का सुझाव दिया है। जिस तरह से विपक्षी नेता इस मामले को तूल दे रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं, उससे बागवानों का कतई भला नहीं होने वाला। सरकार हर स्तर पर इस मामले में गंभीरता से काम कर रही है। प्रदेश में उच्च गुणवत्ता सेब के दाम में कोई गिरावट नहीं आई है। इस बार प्रदेश में हुई बंपर फसल के कारण पिछले कुछ दिनों में आपूर्ति एकदम बढ़ गई है, जिससे मांग सीमित होने के कारण दाम में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बागवानों को इससे घबराने की जरूरत कतई नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सेब खरीद के लिए जल्द ही रिलायंस, बिग बास्केट और सफल जैसी कंपनियां मार्केट में उतरने वाली हैं। खरीद में प्रतिस्पर्धा बढ़ने का फायदा बागवानों को ही होगा। अभी सेब सीजन शुरू ही हुआ है, ऐसे में जो हालात बने हैं उन्हें ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।</p>
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		<title>छत्तीसगढ़-तेलंगाना-कर्नाटक में लगाए हिमाचली सेब  के पौधों ने 2 साल में फल देना किया शुरू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/14/himachal-apple-trees-in-south-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Feb 2017 07:01:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[बिलासपुर]]></category>
		<category><![CDATA[इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर]]></category>
		<category><![CDATA[एचआरएमएन-99]]></category>
		<category><![CDATA[बागबान हरिमन शर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली सेब]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बिलासपुर- पुरे देश में हिमाचली सेब की की काफी मांग और धूम है रसीला और पोष्टिक हिमाचली सेब भारत के हर कोने में भेजा जाता है, आपको जानकर हैरानी होगी कि अब देश के छत्तीसगढ़, तेलंगाना व कर्नाटक राज्यों में अब सेब की फसल लहलहाना शुरू हो गई है। जी हाँ! गर्मी बहुल राज्यों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर-</strong>  पुरे देश में हिमाचली सेब की की काफी मांग और धूम है रसीला और पोष्टिक हिमाचली सेब भारत के हर कोने में भेजा जाता है, आपको जानकर हैरानी होगी कि अब  देश के छत्तीसगढ़, तेलंगाना व कर्नाटक राज्यों में अब सेब की फसल लहलहाना शुरू हो गई है। जी हाँ! गर्मी बहुल राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़, तेलंगाना व कर्नाटक में  प्रगतिशील बागबान हरिमन शर्मा की विकसित सेब की वैरायटी एचआरएमएन-99 (HRMN 99) के पौधों ने फल देना शुरू कर दिया है। इसके प्रमाण के लिए वहां के बागबानों ने फलों से लदे सेब के पौधों की फोटो हरिमन शर्मा को व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी है। </p>
<p>इसमें अहम बात यह है कि इन राज्यों में ये सेब के पौधे 2 साल पहले ही रोपे थे, जो अब फल दे रहे हैं। इससे अब छत्तीसगढ, कर्नाटक व तेलंगाना राज्य भी सेब उगाने वाले राज्यों की श्रेणी में शुमार हो गए हैं। प्रगतिशील बागबान हरिमन शर्मा ने देश के करीब 25 राज्यों में एचआरएमएन-99 (HRMN 99) वैरायटी के सेब के पौधे वितरित किए हैं।</p>
<p>करीब दो साल पहले उन्होंने छत्तीसगढ़, कर्नाटक व तेलंगाना में भी सेब के पौधे भेजे थे। छत्तीसगढ़ राज्य में हरियाली दीदी से मशहूर पुष्पा साहू के घर में उगे सेब के पौधे में फल आना शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ में रायपुर की रहने वाली पुष्पा साहू ने हरिमन शर्मा से करीब दो साल पहले सेब की पौधे की मांग की थी, जिसके बाद उन्होंने यह सेब का पौधा मकान के छत पर लगाया।</p>
<p><strong>साहू दंपति की मांग </strong></p>
<p>पुष्पा साहू देश के इनोवेटिव फार्मरों में शुमार हैं तथा उनके पति केके साहू इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर में साइंटिस्ट हैं। जिन्होंने बागबान हरिमन शर्मा की विकसित की गई गर्म जलवायु में उगने वाली सेब की वैरायटी के पौधों में रुचि दिखाई। साहू दंपति ने हरिमन शर्मा से सेब के पौधों की डिमांड की।</p>
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