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	<title>दिव्यांग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>दिव्यांग Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>राज्यपाल से शिकायत के बाद बदला बोर्ड का निर्णय,हटाई दिव्यांग विद्यार्थियों पर लगाई गैरकानूनी शर्तें: प्रो श्रीवास्तव</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/17/ngo-umang-foundation-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2022 16:13:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल राज्यपाल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल शिक्षा बोर्ड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विरोधी नीति की शिकायत उमंग फाउंडेशन की ओर से राज्यपाल से करने के बाद बोर्ड ने दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोपी गई गैरकानूनी शर्तें हटा दी हैं। पहले बोर्ड ने केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों को नकार कर मनमानी दिव्यांग नीति [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विरोधी नीति की शिकायत <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/10/umang-foundation-ngo-shimla/" rel="noopener" target="_blank">उमंग फाउंडेशन की ओर से </a>राज्यपाल से करने के बाद बोर्ड ने दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोपी गई गैरकानूनी शर्तें हटा दी हैं।</p>
<p> पहले बोर्ड ने केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों को नकार कर मनमानी दिव्यांग नीति घोषित कर दी थी,जिसमें अब गैरकानूनी शर्तें हटा दी गई है हालांकि अभी भी उसमें अनेक गैर कानूनी प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य एवं उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा विगत 4 फरवरी को जारी अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति जताते 10 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से शिकायत की थी। </p>
<p>उन्होंने कहा था कि बोर्ड ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ विद्यार्थियों पर मनमानी शर्तें थोप दी थीं। </p>
<p>उनका कहना था कि हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक हाथ से लिखने में असमर्थ परीक्षार्थियों के लिए शिक्षा बोर्ड को राइटरों का पैनल तैयार करना चाहिए था। </p>
<p>बोर्ड यदि अपने पैनल से पात्र दिव्यांग परीक्षार्थियों को राइटर उपलब्ध कराए तो उस की शैक्षणिक योग्यता परीक्षार्थी से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति को परीक्षा में बतौर राइटर ला सकता है।</p>
<p>शिक्षा बोर्ड ने 4 फरवरी को मनमाना फरमान जारी कर दिया कि राइटर को परीक्षार्थी से एक क्लास जूनियर हो। यही नहीं, वह परीक्षार्थी के स्कूल का ही होना चाहिए और परीक्षाओं के दौरान राइटर बदलने की अनुमति सिर्फ एक बार दी जाएगी। </p>
<p>राज्यपाल से प्रो. अजय श्रीवास्तव ने दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग बच्चों को न्याय दिलाने का अनुरोध किया था। इसके बाद शिक्षा बोर्ड में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बैठक कर दिव्यांग नीति के गैर कानूनी प्रावधानों को हटा दिया गया। अब शिक्षा बोर्ड या स्कूल द्वारा परीक्षा में राइटर उपलब्ध न कराए जाने पर परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले राइटर की मदद ले सकता है। राइटर को एक से अधिक बार बदलने की भी सुविधा रहेगी।</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहां कि शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग नीति में अभी भी अनेक गैर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने इसका ब्यौरा बोर्ड को भेज दिया है और कहा है कि दिव्यांग बच्चों को न्याय न मिलने पर वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।</p>
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		<title>दिव्यांगों के साथ मनमानी,स्कूल शिक्षा बोर्ड कानून और सरकार के आदेशों को ना मानने की राज्यपाल को दी शिकायत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/10/umang-foundation-ngo-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Mar 2022 16:17:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को शिकायत भेज कर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को शिकायत भेज कर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड को दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा की समझ ही नहीं है जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को विशेष कर मुश्किलें पेश आती हैं।</p>
<p>राज्यपाल को भेजे पत्र में प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार द्वारा 12 अप्रैल 2021 को जारी आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं है। इस बारे में वह विगत दिसंबर में भी सरकार और बोर्ड के अलावा मीडिया में मामला उजागर कर चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में जारी निर्देशों में कहा गया था कि यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी पात्र दिव्यांगों को राइटर उपलब्ध नहीं करा पाती है तो परीक्षार्थी द्वारा लाए गए राइटर की शैक्षणिक योग्यता नहीं पूछी जाएगी। यानी दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिख पाने में असमर्थ परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता के व्यक्ति को राइटर बना सकते हैं। </p>
<p>हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी यही नियम लागू है।</p>
<p>प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने पिछले साल 12 अप्रैल को केंद्र के आदेशों को लागू करने की अधिसूचना जारी कर सभी विभागों और स्कूल शिक्षा बोर्ड को भी भेज दी थी। लेकिन शिक्षा बोर्ड ने इसे मानने से इनकार कर दिया। </p>
<p>स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 17 जनवरी 2021 को एक समिति बनाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं की समीक्षा की। समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर 4 फरवरी 2022 को बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर दी जिसके अनेक बिंदु अत्यंत आपत्तिजनक हैं। इसमें राज्य सरकार के आदेशों को नकारते हुए कहा गया है कि हर हालत में परीक्षार्थी से उसका राइटर एक कक्षा जूनियर होना चाहिए। यही नहीं राइटर उसी विद्यालय का विद्यार्थी हो जिसमें परीक्षार्थी पढ़ता है।</p>
<p>यही नहीं स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रमाण में यह भी शामिल है कि परीक्षार्थी सिर्फ एक बार अपने राइटर को बदल सकता है। यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के आदेशों के साथ ही विकलांगजन कानून 2016 का भी खुला उल्लंघन है। शिक्षा बोर्ड कानून का उल्लंघन कर मनमानी शर्ते नहीं थोप सकता।</p>
<p>प्रदेश विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य ने कहा कि शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विद्यार्थियों की परीक्षाओं के बारे में घोषित नीति में कई अन्य बातें भी अत्यंत आपत्तिजनक हैं। </p>
<p>उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि शिकायत का संज्ञान लेकर तुरंत दिव्यांग विद्यार्थियों को न्याय दिलाएं और स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विद्यार्थियों संबंधी परीक्षा नीति को कानून के अनुरूप बनवाएं।</p>
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		<title>दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/28/umang-foundation-webinar-on-role-of-judiciary-in-protection-of-fundamental-rights/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Feb 2022 15:37:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग]]></category>
		<category><![CDATA[मौलिक अधिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- &#8220;मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका&#8221; विषय पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित 24वें साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> &#8220;मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका&#8221; विषय पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित 24वें साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। </p>
<p>उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसी तरह गरिमा पूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार मृतक के मौलिक अधिकारों में शामिल है। </p>
<p>प्रो.ललित डडवाल ने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार केस में फैसला दिया था कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को बिना कोई औपचारिकताएं पूरी किए नजदीक के सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराने का मौलिक अधिकार है। इससे पहले आमतौर पर अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार कर देते थे।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के आधार पर न्यायपालिका ने अपने फैसलों के माध्यम से उन्हें काफी विस्तार दिया। न्यायपालिका द्वारा दिए गए अधिकारों को मानवाधिकार भी कहा जाता है। </p>
<p>इनमें वयस्क महिला एवं पुरुष को अपनी पसंद से विवाह का अधिकार, निजता का अधिकार, मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं को सुरक्षा का अधिकार, समलैंगिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार, विकलांगजनों को नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण का आधिकार और इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार प्रमुख रूप से शामिल है।</p>
<p>प्रो.डडवाल ने बताया कि छुआछूत को छोड़कर मौलिक अधिकारों के मामले आमतौर पर राज्य के विरुद्ध दर्ज होते हैं। </p>
<p>मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर पहले पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी शुरुआत की। अनेक मामलों में पीड़ित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों अथवा अन्य एजेंसियों से मुआवजा भी दिलवाया।</p>
<p>प्रोफ़ेसर ललित डडवाल ने कहा कि उमंग फाउंडेशन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों, बेसहारा महिलाओं, बेघर बुजुर्गों,अनाथ बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उनकी जनहित याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। इससे प्रदेश सरकार की नीतियों में बड़ा बदलाव आया।</p>
<p>कार्यक्रम की संयोजक और प्रदेश विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी की छात्रा अंजना ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्यों और छत्तीसगढ़,बिहार तथा झारखंड के लगभग 70 युवाओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञ वक्ता प्रो. डडवाल ने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/28/umang-foundation-webinar-on-role-of-judiciary-in-protection-of-fundamental-rights/">दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>दिव्यांग कर रहा पैम्फलेट बाँट के गुजारा , सरकार से कर रहा नौकरी की गुहार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/13/himachal-pradesh-disability-act/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Feb 2017 07:13:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[सिरमौर]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग]]></category>
		<category><![CDATA[नाजिम खान नाहन]]></category>
		<category><![CDATA[नाहन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सिरमौर- कौन कहता है कि दिव्यांग केवल दुसरो पर निर्भर रहने को मजबूर होते है। हम में अधिकतर ने देखा होगा कि कुछ दिव्यांग होने के बावजूद भी मेहनत करना नहीं भूलते। ऐसे ही एक मिसाल पेश की है हिमाचल प्रदेश के नाहन के रानीताल बाग निवासी नाजिम खान ने। 32 वर्षीय नाजिम बचपन से [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरमौर-</strong>  कौन कहता है कि दिव्यांग केवल दुसरो पर निर्भर रहने को मजबूर होते है। हम में अधिकतर ने देखा होगा कि कुछ दिव्यांग होने के बावजूद भी मेहनत करना नहीं भूलते। ऐसे ही एक मिसाल पेश की है हिमाचल प्रदेश के नाहन के रानीताल बाग निवासी नाजिम खान ने।  32 वर्षीय नाजिम बचपन से ही दिव्यांग हैं और जितना संभव हो सके नाज़िम उतनी महेनत कर अपना पेट पलता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नाजिम एक गरीब परिवार से तालुख रखते हैं। इनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं तो मां गृहिणी है। गरीब माता पिता अपने बेटे का दिव्यांग होना उन्हें हमेशा ही चिंतित रखता है लेकिन उसके काम करने की लगन से उन्हें कुछ राहत जरूर मिलती है।</p>
<p><strong>संस्थानों के पैम्फलेट बांट कर करता है गुजारा</strong></p>
<p>अभिभावक बताते हैं कि नाजिम 40 प्रतिशत दिव्यांग है, वह सही से बातचीत नहीं कर सकता और हाथ व टांगों में समस्या होने के कारण वह सही से चलने में असमर्थ है और हाथों से काम करने में भी लेकिन जितना हो सके वह काम करता है। नाजिम पिछले कई सालों से अलग-अलग संस्थानों के पैम्फलेट बांटता है और पैम्फलेट बांटकर जो राशि मिलती है उससे अपना गुजारा करता है। हालांकि पैम्फलेट बांटने का काम आसान नहीं है और उसके लिए इधर-उधर चलना पड़ता है लेकिन फिर भी वह यह काम करता है। </p>
<p><strong>मुख्यमंत्री से लगाई नौकरी की गुहार</strong></p>
<p>दिव्यांग नाजिम ने बताया कि वह 40 प्रतिशत तक दिव्यांग है और परिवार गरीब होने के चलते उसे अपना गुजारा चलाना मुश्किल होता जा रहा है, ऐसे में उसने मुख्यमंत्री से हाल ही में कोई छोटी नौकरी दिलवाने की गुहार लगाई है ताकि वह अपना पेट पाल सके और उसे दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। नाजिम ने सरकार से गुहार लगाई कि दिव्यांगों की नौकरी पर बल दिया जाए। नाज़िम केवल काम नहीं करता बल्कि समाज सेवा के कार्यों में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है।  </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/13/himachal-pradesh-disability-act/">दिव्यांग कर रहा पैम्फलेट बाँट के गुजारा , सरकार से कर रहा नौकरी की गुहार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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