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	<title>उमंग फाउंडेशन Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>उमंग फाउंडेशन Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>राज्यपाल से शिकायत के बाद बदला बोर्ड का निर्णय,हटाई दिव्यांग विद्यार्थियों पर लगाई गैरकानूनी शर्तें: प्रो श्रीवास्तव</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/17/ngo-umang-foundation-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2022 16:13:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल शिक्षा बोर्ड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विरोधी नीति की शिकायत उमंग फाउंडेशन की ओर से राज्यपाल से करने के बाद बोर्ड ने दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोपी गई गैरकानूनी शर्तें हटा दी हैं। पहले बोर्ड ने केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों को नकार कर मनमानी दिव्यांग नीति [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विरोधी नीति की शिकायत <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/10/umang-foundation-ngo-shimla/" rel="noopener" target="_blank">उमंग फाउंडेशन की ओर से </a>राज्यपाल से करने के बाद बोर्ड ने दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोपी गई गैरकानूनी शर्तें हटा दी हैं।</p>
<p> पहले बोर्ड ने केंद्र और राज्य सरकार के आदेशों को नकार कर मनमानी दिव्यांग नीति घोषित कर दी थी,जिसमें अब गैरकानूनी शर्तें हटा दी गई है हालांकि अभी भी उसमें अनेक गैर कानूनी प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य एवं उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा विगत 4 फरवरी को जारी अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति जताते 10 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से शिकायत की थी। </p>
<p>उन्होंने कहा था कि बोर्ड ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ विद्यार्थियों पर मनमानी शर्तें थोप दी थीं। </p>
<p>उनका कहना था कि हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक हाथ से लिखने में असमर्थ परीक्षार्थियों के लिए शिक्षा बोर्ड को राइटरों का पैनल तैयार करना चाहिए था। </p>
<p>बोर्ड यदि अपने पैनल से पात्र दिव्यांग परीक्षार्थियों को राइटर उपलब्ध कराए तो उस की शैक्षणिक योग्यता परीक्षार्थी से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति को परीक्षा में बतौर राइटर ला सकता है।</p>
<p>शिक्षा बोर्ड ने 4 फरवरी को मनमाना फरमान जारी कर दिया कि राइटर को परीक्षार्थी से एक क्लास जूनियर हो। यही नहीं, वह परीक्षार्थी के स्कूल का ही होना चाहिए और परीक्षाओं के दौरान राइटर बदलने की अनुमति सिर्फ एक बार दी जाएगी। </p>
<p>राज्यपाल से प्रो. अजय श्रीवास्तव ने दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग बच्चों को न्याय दिलाने का अनुरोध किया था। इसके बाद शिक्षा बोर्ड में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बैठक कर दिव्यांग नीति के गैर कानूनी प्रावधानों को हटा दिया गया। अब शिक्षा बोर्ड या स्कूल द्वारा परीक्षा में राइटर उपलब्ध न कराए जाने पर परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले राइटर की मदद ले सकता है। राइटर को एक से अधिक बार बदलने की भी सुविधा रहेगी।</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहां कि शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग नीति में अभी भी अनेक गैर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने इसका ब्यौरा बोर्ड को भेज दिया है और कहा है कि दिव्यांग बच्चों को न्याय न मिलने पर वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।</p>
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		<title>कोरोना में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क अब समुद्री जीव जंतुओं की ले रहे जान:डॉ. जिस्टू</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Mar 2022 13:51:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[समुद्री जीव]]></category>
		<category><![CDATA[हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- कोरोना काल में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क अब बड़े पैमाने पर समुद्री जीव जंतुओं जान ले रहे हैं। कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का अभाव सभी जीव जंतुओं और मनुष्यों के लिए खतरा है। सड़कों से लेकर पहाड़ी नालों और नदियों में कचरा फेंकने के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। यह बात उमंग फाउंडेशन [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> कोरोना काल में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क अब बड़े पैमाने पर समुद्री जीव जंतुओं जान ले रहे हैं। कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का अभाव सभी जीव जंतुओं और मनुष्यों के लिए खतरा है। सड़कों से लेकर पहाड़ी नालों और नदियों में कचरा फेंकने के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। </p>
<p>यह बात उमंग फाउंडेशन <em>&#8220;स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार और सामाजिक दायित्व&#8221; </em>विषय ने मानवाधिकार संरक्षण के 26वें साप्ताहिक वेबिनार में हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) में वैज्ञानिक वनस्पति-विज्ञानी डॉक्टर वनीत जिस्टू ने कही। </p>
<p>उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र के लिए अलग ढंग से नीतियां बनाने की जरूरत है। विकास के लिए पनबिजली परियोजनाएं एवं उद्योग जरूरी हैं। लेकिन उनसे पर्यावरण को नुकसान न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी तंत्र होना चाहिए। </p>
<p>डॉ. वनीत जिस्टू ने पर्यावरण संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र और भारत सरकार द्वारा किए गए अनेक प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने  स्वच्छ पर्यावरण पर जोर देकर कहा कि स्वच्छ पर्यावरण एक प्रमुख मानवाधिकार है और इसे लागू कराने के लिए न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार केंद्र सरकार की योजनाओं से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। हमारे वन और वनस्पतियां ग्लोबल वार्मिंग का असर कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में मनुष्य ने उन्हें सम्मान नहीं दिया। हमने कंक्रीट के जंगल बना दिए और हमारे जीवनदाता वनों को काटा जाता रहा, जबकि वनों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में झाड़ियों के  कम होने या समाप्त होने से धरती पर सभी प्रकार का जीवन समाप्त हो जाएगा। अनेक प्रकार की औषधियां सिर्फ हिमालय क्षेत्र में ही मिलती हैं जो समाप्त हो रही हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि हिमालय के ग्लेशियरों, नदियों और वनों से दुनिया की बहुत बड़ी आबादी का जीवन जुड़ा हुआ है।  उद्योगों के रासायनिक और शहरी प्लास्टिक कचरे से पहाड़ों को स्थाई नुकसान पहुंच रहा है। पनबिजली परियोजनाओं एवं अन्य उद्योगों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की सख्त निगरानी की जरूरत है। </p>
<p>डॉ. जिस्टू ने यह भी  बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल कट रहे हैं तो शहरी क्षेत्रों में हरे-भरे पार्क विकसित नहीं किए जाते। वनीकरण के नाम पर अक्सर विदेशी प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं जिन पर गिलहरी, पक्षी, कीट-पतंगे आदि भी अपना घर नहीं बनाते। जैव विविधता को बचाए रखना बहुत जरूरी है। </p>
<p>डॉ. वनीत जिस्टू ने कहा कि युवाओं में नई चेतना लाकर ही हम धरती को रहने लायक बना सकते हैं।</p>
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		<title>दिव्यांगों के साथ मनमानी,स्कूल शिक्षा बोर्ड कानून और सरकार के आदेशों को ना मानने की राज्यपाल को दी शिकायत</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/10/umang-foundation-ngo-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Mar 2022 16:17:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को शिकायत भेज कर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को शिकायत भेज कर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड को दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा की समझ ही नहीं है जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को विशेष कर मुश्किलें पेश आती हैं।</p>
<p>राज्यपाल को भेजे पत्र में प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार द्वारा 12 अप्रैल 2021 को जारी आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं है। इस बारे में वह विगत दिसंबर में भी सरकार और बोर्ड के अलावा मीडिया में मामला उजागर कर चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में जारी निर्देशों में कहा गया था कि यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी पात्र दिव्यांगों को राइटर उपलब्ध नहीं करा पाती है तो परीक्षार्थी द्वारा लाए गए राइटर की शैक्षणिक योग्यता नहीं पूछी जाएगी। यानी दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिख पाने में असमर्थ परीक्षार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता के व्यक्ति को राइटर बना सकते हैं। </p>
<p>हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी यही नियम लागू है।</p>
<p>प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने पिछले साल 12 अप्रैल को केंद्र के आदेशों को लागू करने की अधिसूचना जारी कर सभी विभागों और स्कूल शिक्षा बोर्ड को भी भेज दी थी। लेकिन शिक्षा बोर्ड ने इसे मानने से इनकार कर दिया। </p>
<p>स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 17 जनवरी 2021 को एक समिति बनाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं की समीक्षा की। समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर 4 फरवरी 2022 को बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर दी जिसके अनेक बिंदु अत्यंत आपत्तिजनक हैं। इसमें राज्य सरकार के आदेशों को नकारते हुए कहा गया है कि हर हालत में परीक्षार्थी से उसका राइटर एक कक्षा जूनियर होना चाहिए। यही नहीं राइटर उसी विद्यालय का विद्यार्थी हो जिसमें परीक्षार्थी पढ़ता है।</p>
<p>यही नहीं स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रमाण में यह भी शामिल है कि परीक्षार्थी सिर्फ एक बार अपने राइटर को बदल सकता है। यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के आदेशों के साथ ही विकलांगजन कानून 2016 का भी खुला उल्लंघन है। शिक्षा बोर्ड कानून का उल्लंघन कर मनमानी शर्ते नहीं थोप सकता।</p>
<p>प्रदेश विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य ने कहा कि शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विद्यार्थियों की परीक्षाओं के बारे में घोषित नीति में कई अन्य बातें भी अत्यंत आपत्तिजनक हैं। </p>
<p>उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि शिकायत का संज्ञान लेकर तुरंत दिव्यांग विद्यार्थियों को न्याय दिलाएं और स्कूल शिक्षा बोर्ड की दिव्यांग विद्यार्थियों संबंधी परीक्षा नीति को कानून के अनुरूप बनवाएं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/10/umang-foundation-ngo-shimla/">दिव्यांगों के साथ मनमानी,स्कूल शिक्षा बोर्ड कानून और सरकार के आदेशों को ना मानने की राज्यपाल को दी शिकायत</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/28/umang-foundation-webinar-on-role-of-judiciary-in-protection-of-fundamental-rights/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Feb 2022 15:37:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग]]></category>
		<category><![CDATA[मौलिक अधिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- &#8220;मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका&#8221; विषय पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित 24वें साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/28/umang-foundation-webinar-on-role-of-judiciary-in-protection-of-fundamental-rights/">दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> &#8220;मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका&#8221; विषय पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित 24वें साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता। </p>
<p>उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसी तरह गरिमा पूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार मृतक के मौलिक अधिकारों में शामिल है। </p>
<p>प्रो.ललित डडवाल ने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार केस में फैसला दिया था कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को बिना कोई औपचारिकताएं पूरी किए नजदीक के सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराने का मौलिक अधिकार है। इससे पहले आमतौर पर अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार कर देते थे।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के आधार पर न्यायपालिका ने अपने फैसलों के माध्यम से उन्हें काफी विस्तार दिया। न्यायपालिका द्वारा दिए गए अधिकारों को मानवाधिकार भी कहा जाता है। </p>
<p>इनमें वयस्क महिला एवं पुरुष को अपनी पसंद से विवाह का अधिकार, निजता का अधिकार, मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं को सुरक्षा का अधिकार, समलैंगिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार, विकलांगजनों को नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण का आधिकार और इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार प्रमुख रूप से शामिल है।</p>
<p>प्रो.डडवाल ने बताया कि छुआछूत को छोड़कर मौलिक अधिकारों के मामले आमतौर पर राज्य के विरुद्ध दर्ज होते हैं। </p>
<p>मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर पहले पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी शुरुआत की। अनेक मामलों में पीड़ित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों अथवा अन्य एजेंसियों से मुआवजा भी दिलवाया।</p>
<p>प्रोफ़ेसर ललित डडवाल ने कहा कि उमंग फाउंडेशन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों, बेसहारा महिलाओं, बेघर बुजुर्गों,अनाथ बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उनकी जनहित याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। इससे प्रदेश सरकार की नीतियों में बड़ा बदलाव आया।</p>
<p>कार्यक्रम की संयोजक और प्रदेश विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी की छात्रा अंजना ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्यों और छत्तीसगढ़,बिहार तथा झारखंड के लगभग 70 युवाओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञ वक्ता प्रो. डडवाल ने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/28/umang-foundation-webinar-on-role-of-judiciary-in-protection-of-fundamental-rights/">दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शिमला ग्रामीण की 20 से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को हो रही मलमूत्र और दुर्गंध वाले पानी की सप्लाई:एनजीओ</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/27/contaminated-water-supply-in-shimla-panchayats/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Feb 2022 16:20:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[नगर निगम शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला ग्रामीण]]></category>
		<category><![CDATA[सीवरेज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिमला शहर के सीवरेज समेत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से निकलने वाला खतरनाक पानी बिना शुद्ध किए शिमला ग्रामीण 20 से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को सप्लाई किया जा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों में भीषण दुर्गंध और गंदगी का माहौल है। यह यह कहना है उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी विनोद [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/27/contaminated-water-supply-in-shimla-panchayats/">शिमला ग्रामीण की 20 से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को हो रही मलमूत्र और दुर्गंध वाले पानी की सप्लाई:एनजीओ</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> शिमला शहर के सीवरेज समेत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से निकलने वाला खतरनाक पानी बिना शुद्ध किए शिमला ग्रामीण 20 से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को सप्लाई किया जा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों में भीषण दुर्गंध और गंदगी का माहौल है। यह यह कहना है उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी विनोद योगाचार्य का।</p>
<p>फाउंडेशन के ट्रस्टी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भेजे पत्र में यह आरोप लगाया है कि शिमला ग्रामीण के बरमू स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को बिना शुद्ध किए दाड़गी- सैंज उठाऊ पेयजल योजना को जाने वाली खड् (आईजीएमसी नाला) में छोड़ा जा रहा है। यह मलमूत्र एवं आईजीएमसी की खतरनाक गंदगी वाला पानी गांव निहारी, बड़फर, गौसदन चैड़ी, और क्यार कोटी होते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में जाता है।</p>
<p>उनका कहना है कि शिमला नगर निगम कि इस आपराधिक लापरवाही से हजारों लोगों, पालतू मवेशियों और जंगली जानवरों को खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा खेतों में सब्जियों की फसल भी इससे खराब हो रही है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि  मडोड़ घाट, जाबरी, ज्यूणी, शकराह, रेयोग, घनाहट्टी, चलाहल, धुधाल्टी, कोटला, धमून, थाची, बाईचीड़ी, पोखरू, टूटू , चनावग, नेहरा, शोघी, हलोग, ढेंडा, पीपलीधार आदि पंचायतों में यह खतरनाक पानी सप्लाई हो रहा है। उन्होंने बताया कि चैड़ी के गौसदन में रखी गई 42 बेसहारा गायों के लिए पीने का पानी अन्य स्थान से ढोकर लाना पड़ रहा है।</p>
<p>विनोद योगाचार्य ने कहा कि बरमू का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अक्सर खराब रहता है जिससे हजारों लोगों के जीवन को खतरा पैदा होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत कदम उठाने और दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</p>
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		<title>आपदा से बचाव की नीतियां दिव्यांगों, बुजुर्गों और बच्चों को ध्यान में रख कर बनाई जानी चाहिए: नवनीत यादव </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/14/umang-foundation-webnair-on-right-to-disaster-risk-prevention-policy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Feb 2022 14:15:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अमृत महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[आपदा बचाव]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[मानवाधिकार जागरूकता]]></category>
		<category><![CDATA[यूएनडीपी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में आज उमंग फाउंडेशन की ओर से &#8220;आपदा जोखिम से बचाव का अधिकार&#8221; विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के लिए कार्य कर चुके इस वेबिनार में बतौर विशेषज्ञ वक्ता नवनीत यादव ने कहा है कि आपदा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में आज उमंग फाउंडेशन की ओर से &#8220;आपदा जोखिम से बचाव का अधिकार&#8221; विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया।</p>
<p>आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के लिए कार्य कर चुके इस वेबिनार में बतौर विशेषज्ञ वक्ता नवनीत यादव ने कहा है कि आपदा से बचाव की नीतियां दिव्यांगों, बुजुर्गों और बच्चों को ध्यान में रख कर बनाई जानी चाहिए। अधिक जोखिम वाले इन वर्गों को विशेष रुप से जागरूक करने की जरुरत है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि आपदाओं के जोखिम से बचाव का अधिकार वास्तव में एक मानवाधिकार है। लेकिन इस बारे में देश और हिमाचल  में जागरूकता की काफी कमी है। उन्होंने कहा कि बाढ़, भूकंप या अन्य व्यापक जोखिम वाले संकट तब आपदा में परिवर्तित हो कर नुकसान पहुंचाते हैं जब मनुष्य उनसे बचाव के लिए पहले से तैयार नहीं होता है। </p>
<p>विशेषज्ञ नवनीत  ने बताया कि समूचा हिमालय क्षेत्र भूकंप के लिए अत्यंत संवेदनशील है। यह जोखिम आपदा को बड़ा न्योता दे रहा है क्योंकि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अन्य सरकारी एवं निजी भवनों में जोखिम को कम से कम करने की व्यवस्था नहीं है। </p>
<p>उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां रिक्टर स्केल पर 9 तीव्रता वाले भूकंप से भी जानमाल का कोई नुकसान नहीं होता, जबकि कुछ वर्ष पूर्व नेपाल में 7 तीव्रता वाले भूकंप ने  हजारों लोगों की जान ले ली थी।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि भूकंप के अधिक जोखिम वाले हिमालय क्षेत्रों में  सभी प्रकार के भवन भूकंप रोधी होने चाहिए इसके लिए कानूनन अनिवार्य किया जाना चाहिए।</p>
<p>यादव ने कहा कि आपका प्रबंधन में फर्स्ट एड की जानकारी भी अत्यंत आवश्यक है। स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के विद्यार्थियों और अन्य सभी वर्गों को इस बारे में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आपदा की स्थिति में यह जीवन बचाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।</p>
<p>कार्यक्रम के संयोजक संजीव शर्मा ने बताया कि मानवाधिकार संरक्षण पर वेबिनारों की साप्ताहिक श्रृंखला में यह 22वां कार्यक्रम था। इसमें हिमाचल प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों के लगभग 60 युवाओं ने हिस्सा लिया।</p>
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		<title>13 फरवरी को आपदा जोख़िम से बचाव पर उमंग आयोजित करेगी वेबिनार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/11/umang-foundation-webnair-on-right-to-disaster-risk-prevention/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Feb 2022 16:15:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आपदा जोख़िम]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[मानवाधिकार जागरूकता]]></category>
		<category><![CDATA[यूएनडीपी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- उमंग फाउंडेशन की ओर से रविवार 13 फरवरी को आपदा जोख़िम से बाचव विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के लिए कार्य कर चुके नवनीत यादव उमंग फाउंडेशन के वेबीनार में &#8220;आपदा जोखिम से बचाव का अधिकार&#8221; विषय पर युवाओं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/11/umang-foundation-webnair-on-right-to-disaster-risk-prevention/">13 फरवरी को आपदा जोख़िम से बचाव पर उमंग आयोजित करेगी वेबिनार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> उमंग फाउंडेशन की ओर से रविवार 13 फरवरी को आपदा जोख़िम से बाचव विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। </p>
<p>आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के लिए कार्य कर चुके नवनीत यादव उमंग फाउंडेशन के वेबीनार में &#8220;आपदा जोखिम से बचाव का अधिकार&#8221;  विषय पर युवाओं के साथ चर्चा करेंगे। वह दिव्यांगों को आपदा के समय सुरक्षित बचाने के तरीके भी बताएंगे।</p>
<p>कार्यक्रम के संयोजक संजीव शर्मा ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में मानवाधिकार जागरूकता पर संस्था का ये 22वां साप्ताहिक कार्यक्रम होगा। </p>
<p>गूगल मेल पर 13 फरवरी को शाम 7:00 बजे लिंक http://meet.google.com/zop-pbkn-heg के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुआ जा सकता है। यहां &#8216;उमंग फाउंडेशन शिमला&#8217; के फेसबुक पेज पर भी लाइव उपलब्ध रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आपदा जोखिम से बचाव को लेकर समाज में जागरूकता की कमी है। विशेषकर दिव्यांग व्यक्तियों को भीषण आपदा के समय कैसे सुरक्षित निकाला जाए, यह एक बड़ा मुद्दा है।</p>
<p>&#8216;आपदा जोखिम से बचाव का अधिकार&#8217; विषय पर आपदा जोखिम प्रबंधन से जुड़े संगठन डूअर्स के कार्यक्रम निदेशक और जापान, थाईलैंड, सेनेगल एवं नेपाल में अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों में नवनीत यादव  हिस्सा ले चुके हैं। </p>
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		<item>
		<title>प्रदेश हाईकर्ट के आदेश के बाद भी हमीरपुर में बेसहारा मनोरोगी का नहीं किया गया रेस्क्यू: उमंग  फाउंडेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/05/umang-foundation-himahcal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Feb 2022 15:56:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरोगी]]></category>
		<category><![CDATA[हमीरपुर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाईकर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हमीपुर शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू करने के सन्दर्भ में प्रदेश राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमीरपुर में फाउंडेशन की सदस्य चंद्रिका चौहान ने शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हमीपुर शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू करने के सन्दर्भ में प्रदेश राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमीरपुर में फाउंडेशन की सदस्य चंद्रिका चौहान ने शहर में बेसहारा भटक रहे मनोरोगियों को मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधानों के तहत रेस्क्यू कराने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रही हैं। </p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने हैरानी जताते हुए कहा कि मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के प्रावधान के इस कानून के बारे में न तो जिला प्रशासन और न ही  पुलिस को  कुछ  पता  है। </p>
<p>उन्होने कहा कि चंद्रिका निराश होकर राज्य मानवाधिकार आयोग को भी एक मनोरोगी को रेस्क्यू कराने के लिए पत्र भेजा था और आयोग ने जिला उपायुक्त को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद भी पुलिस और प्रशासन उसे रेस्क्यू नहीं करा सका। </p>
<p>फाउंडेशन ने कहा कि राज्य मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बावजूद कड़ाके की ठंड में सड़कों पर बेसहारा दर-दर की ठोकरें खा रहे मनोरोगियों की परवाह न तो पुलिस को है और न ही हमीरपुर जिला प्रशासन को है।</p>
<p>प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का इस तरह का रवैया हाईकोर्ट के जून 2015 के आदेश का भी खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और  पुलिस यदि कोई कार्रवाई नहीं करती है तो फाउंडेशन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगी।</p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 5 जून 2015 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर अपने फैसले में कहा था की सड़कों पर घूमने वाले मनोरोगियों को कानून के तहत रेस्क्यू करने और अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेवारी जिला पुलिस अधीक्षक की है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि एक आम नागरिक के नाते चंद्रिका बेसहारा मनोरोगियों के कानूनी अधिकारों का संरक्षण चाहती हैं। लेकिन प्रशासन कानून की जानकारी ना होने के कारण अदालत की अवमानना भी कर रहा है। उनका कहना है कि यदि यही रवैया रहा तो वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/05/umang-foundation-himahcal-pradesh/">प्रदेश हाईकर्ट के आदेश के बाद भी हमीरपुर में बेसहारा मनोरोगी का नहीं किया गया रेस्क्यू: उमंग  फाउंडेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर मेला लग सकता है लेकिन रक्तदान शिविर नहीं: उमंग फाउंडेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/17/umang-foundation-register-complaint-against-the-nalagarh-peer-mela/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jan 2022 15:18:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी ब्लड बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एसडीएम नालागढ़]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना नियम]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[पीर बाबा मेला नालागढ़]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य सचिव राम सुभग सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[रक्तदान शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता। शिमला- उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने नालागढ़ में हुए पीर बाबा के मेले में हज़ारों लोगों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/17/umang-foundation-register-complaint-against-the-nalagarh-peer-mela/">कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर मेला लग सकता है लेकिन रक्तदान शिविर नहीं: उमंग फाउंडेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने नालागढ़ में हुए पीर बाबा के मेले में हज़ारों लोगों के इक्कठा होने को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह से शिकियत दर्ज की है।</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर प्रशासन की सांठगांठ से यह मेला लगा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कोविड के बहाने से उमंग फाउंडेशन को नालागढ़ में <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/12/umang-foundation-blood-donation-camp/" target="_blank" rel="noopener">रक्तदान शिविर</a> लगाने की मंजूरी नहीं दी थी।</p>
<p>उन्होंने अपनी शिकायत में सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नालागढ़ के एसडीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध संक्रमण फैलाने के मामले में केस दर्ज कर उन्हें निलंबित करने की मांग की है।</p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने कहा कि मेला एक सप्ताह से बेरोकटोक चल रहा है और अब तक उसमें कई हजार लोग शामिल हो चुके हैं।</p>
<p>अपनी शिकायत में उन्होंने प्रमाण के तौर पर समाचार पत्रों की खबरें भी लगाई हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा है कि यह डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन है। मेले में 2 गज की दूरी, मास्क एवं सैनिटाइजर जैसे सुरक्षा उपाय दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रशासन की नाक तले इतनी बड़ी व्यापारिक गतिविधि चलाने में भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी नजर आती है।</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा कि वह मुख्य सचिव से मांग करते है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नालागढ़ के एसडीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।उन्होंने यह भी कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और सोलन जिला प्रशासन ने लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है।</p>
<p>प्रो.श्रीवास्तव ने कहा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 मार्च 2020 और 17 मई 2021 को रक्तदान शिविरों को कोविड-19 के तहत मंजूरी देने के के निर्देश सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को दिए गए थे। इसके बावजूद सोलन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नालागढ़ के एसडीएम ने उमंग फाउंडेशन को रक्तदान शिविर लगाने की मंजूरी नहीं दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी की गई,लेकिन यही अधिकारी एक हफ्ते तक पीर स्थान में मेला चलवाते रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उमंग फाउंडेशन मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से लेकर अभी तक कोरोना नियमों का पालन करते हुए 23 रक्तदान शिविर लगा कर आईजीएमसी शिमला को सेकंड यूनिट रक्त दे चुका है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आजकल भी आईजीएमसी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। लेकिन सोलन जिला प्रशासन हजारों लोगों की संख्या वाले मेले लगवा सकता है। मगर जीवन रक्षा के लिए रक्तदान शिविर की मंजूरी नहीं दे सकता।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/17/umang-foundation-register-complaint-against-the-nalagarh-peer-mela/">कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ा कर मेला लग सकता है लेकिन रक्तदान शिविर नहीं: उमंग फाउंडेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>कोरोना प्रोटोकॉल के तहत जब प्रदेश में रक्तदान शिविर लगाने कि अनुमति तो सोलन ज़िले में क्यों है पाबंदी:उमंग फाउंडेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/12/umang-foundation-blood-donation-camp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Jan 2022 17:20:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[spotliight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[उमंग फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एसडीएम नालागढ़]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना प्रोटोकॉल]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड संक्रमण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रो. अजय श्रीवास्तव]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर]]></category>
		<category><![CDATA[रक्तदान शिवर]]></category>
		<category><![CDATA[सीएमओ सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=15269</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि फाउंडेशन को 16 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले सोलन के नालागढ़ में रक्तदान शिविर लगाना था लेकिन एसडीएम नालागढ़ और सीएमओ द्वार रक्तदान शिविर की अनुमति नहीं दी गई। श्रीवास्तव ने कहा कि रक्तदान शिविर की अनुमति न मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/12/umang-foundation-blood-donation-camp/">कोरोना प्रोटोकॉल के तहत जब प्रदेश में रक्तदान शिविर लगाने कि अनुमति तो सोलन ज़िले में क्यों है पाबंदी:उमंग फाउंडेशन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला- उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि फाउंडेशन को 16 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले सोलन के नालागढ़ में रक्तदान शिविर लगाना था लेकिन एसडीएम नालागढ़ और सीएमओ द्वार रक्तदान शिविर की अनुमति नहीं दी गई।</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा कि रक्तदान शिविर की अनुमति न मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लिखित शिकायत की है।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे में पत्र में लिखा कि फाउंडेशन कोविड संक्रमण के मुश्किल दौर में आईजीएमसी में मरीजों का जीवन बचाने के लिए 23 रक्तदान शिविर लगा चुका है। लेकिन उन्हें दिक्कत हमेशा स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में ही आती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले साल 2021 में मई कंडाघाट में लगने वाले रक्तदान शिविर में भी एसडीएम ने अनुमति देने से इंकार कर दिया था। तब भी उन्होंने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी जिसके बाद उनके हस्तक्षेप से अनुमति मिली थी।</p>
<p>प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि यह बड़ी हैरानी की बात है कि सोलन का जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव के 20 मार्च, 2020 और 17 मई 2021 के दिशा निर्देशों को मानने के लिए भी तैयार नहीं है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य सचिव ने 17 मई 2021 को सभी जिला अधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयंसेवी संस्थाओं के रक्तदान शिविरों को कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन की शर्त पर अनुमति देने के निर्देश दिए थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो पत्र मुख्यमंत्री को भेजा है उसमे यह कहा है कि उमंग फाउंडेशन और जन कल्याण समिति नालागढ़ में 16 जनवरी को रक्तदान शिविर लगाना चाहते हैं। इसकी अनुमति के लिए जन कल्याण समिति के अध्यक्ष विशाल परमार नालागढ़ के एसडीएम महेंद्र पाल गुज्जर के पास गए तो उन्होंने अनुमति देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) के पास जाएं। बीएमओ का कहना है कि अनुमति मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) देंगे।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष ने बताया कि जब उन्होंने सोलन के सीएमओ डॉ. राजन उप्पल से बात की तो उन्होंने रक्तदान शिविर की अनुमति देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल तो वह रक्तदान शिविर की अनुमति नहीं देंगे क्योंकि कोरोना केस बढ़ रहे हैं।</p>
<p>फाउंडेशन अध्यक्ष ने कहा कि सोलन सीएमओ को जब इस बता से अवगत करवाया कि स्वास्थ्य सचिव 17 मई 2021 को सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयंसेवी संस्थाओं के रक्तदान शिविरों को कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन की शर्त पर अनुमति देने के स्पष्ट निर्देश जारी कर चुके हैं जिसके जवाब में डॉ उप्पल ने कहा कि , &#8221; कोविड के बढ़ते मामलों के मद्देनजर वह फिलहाल अनुमति नहीं दे सकते।&#8221;</p>
<p>अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सोलन जिला प्रशासन और सीएमओ के व्यवहार पर घोर निराशा और आपत्ति जताते हुए कहा कि नौकरशाही मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। स्वयंसेवी संस्थाएं सरकार की सहायता के बिना रक्तदान शिविर लगाती हैं और उनके साथ प्रशासन इस तरह का व्यवहार करता है। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</p>
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