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	<title>आईजीएमसी Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>आईजीएमसी Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>संजौली-ढली बाईपास के समीप 18 करोड़ के हेलीपोर्ट का हुआ लोकार्पण</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/12/heliport-in-shimlas-dhali-inagurated/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Jan 2022 15:45:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
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		<category><![CDATA[शिमला हेलीपोर्ट]]></category>
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		<category><![CDATA[स्वदेश दर्शन कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वर्तमान में प्रदेश में 64 हेलीपेड हैं तथा प्रदेश सरकार द्वारा 38 नए हेलीपेड का निर्माण कार्य किया जा रहा है। शिमला- आज बुधवार को शिमला के संजौली-ढली बाईपास के समीप मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 18 करोड़ रुपये की लागत से बने हेलीपोर्ट का लोकार्पण किया। प्रदेश सरकार के अनुसार  इस परियोजना के निर्माण [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वर्तमान में प्रदेश में 64 हेलीपेड हैं तथा प्रदेश सरकार द्वारा 38 नए हेलीपेड का निर्माण कार्य किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> आज बुधवार को शिमला के संजौली-ढली बाईपास के समीप मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 18 करोड़ रुपये की लागत से बने हेलीपोर्ट का लोकार्पण किया। प्रदेश सरकार के अनुसार  इस परियोजना के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार ने स्वदेश दर्शन कार्यक्रम के हिमालयन सर्किट के अंतर्गत 12.13 करोड़ रुपये और केन्द्र सरकार की उड़ान-2 योजना के तहत 6 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।</p>
<p>सरकार का मानना है कि  इस हेलीपोर्ट से न केवल प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी बल्कि आईजीएमसी के समीप होने से इसका उपयोग आपातकालीन सेवाओं में भी प्रभावी रूप से किया जा सकेगा।</p>
<p>इस तीन मंजिला हेलीपोर्ट में  सुविधाएं जैसे रिसेप्शन काउंटर,हेलीपोर्ट प्रबंधक कार्यालय, टिकट काउंटर और वीआईपी लाउंज आदि शामिल हैं।  हेलीपोर्ट में यात्रियों के आगमन के लिए पोराटा केबिन की सुविधा, 50 वाहनों के लिए पार्किंग, हेलीकाॅप्टर के लिए डेक और सेफ्टी नेट भी हैं।</p>
<p>हेलीपोर्ट 10.3 बीघा भूमि के क्षेत्र में फैला है तथा भिति चित्रों द्वारा इसका सौन्दर्यीकरण किया गया है और हेलीपोर्ट में सीसीटीवी पूर्ण रूप से लगाए गए हैं । सरकार के अनुसार केंद्र सरकार की उड़ान-2 योजना के तहत बद्दी, रामपुर तथा बद्दी में भी हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 64 हेलीपेड हैं तथा प्रदेश सरकार द्वारा 38 नए हेलीपेड का निर्माण कार्य किया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार केन्द्रीय पयर्टन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को रिकांगपिओ, चम्बा, डलहौजी, जंजैहली, ज्वालाजी आदि में नए हेलीपोर्ट के निर्माण के लिए शीघ्र प्रस्ताव भेजेगी जिससे इन क्षेत्रों में पयर्टन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और हिमाचल प्रदेश में हेलीपोर्ट पयर्टन तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलीपोर्ट तथा हेलीपेड निकट भविष्य मेें पयर्टन,कनेक्टिीविटी तथा आपातकालीन परिपेक्ष्य से लाभकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि इससे राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान तथा आपातकालीन स्थिति में रोगियों को बड़े अस्पतालों में ले जाने में भी सहायता मिलेगी।</p>
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		<title>एक जनवरी से हिम केयर पोर्टल पर लोग बनवा सकेंगे नए कार्ड और करवा सकेंगे नवीनीकरण</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/26/him-care-portal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Nov 2021 18:13:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[हिम केयर योजना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; आईजीएमसी (IGMC) में केंद्र सरकार की ओर से साल 2018 में आयुष्मान भारत की तर्ज पर हिम केयर योजना का शुभारंभ किया गया था। सरकार द्वारा ऐसे सभी नागरिक जो आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, उनके लिए हिम केयर योजना शुरू की गई थी। यह जानकारी आईजीएमसी के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; आईजीएमसी (IGMC) में केंद्र सरकार की ओर से साल 2018 में आयुष्मान भारत की तर्ज पर हिम केयर योजना का शुभारंभ किया गया था। सरकार द्वारा ऐसे सभी नागरिक जो आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, उनके लिए हिम केयर योजना शुरू की गई थी। यह जानकारी आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ जनक राज ने प्रेस वार्ता के माध्यम से दी है।</p>
<p>उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी एक जनवरी से स्वास्थ्य विभाग की ओर से हिम केयर पोर्टल शुरू किया जा रहा है। इसके तहत लोग अपने कार्ड का नवीनीकरण करवा सकते हैं और नए कार्ड बनवा सकते हैं। उन्होंने लोगों से कहा है कि नजदीकी लोक मित्र केंद्र में जाकर कार्ड की वैधता जरूर जांच लें ताकि अस्पताल आने पर उन्हें कार्ड एक्टिवेट करवाने में किसी प्रकार की परेशानी ना आए।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अस्पताल में मौजूदा समय तक 31261 मरीजों को विभिन्न बीमारियों के तहत इलाज से लाभान्वित किया गया है। साल 2018 &#8211; 2019 में 2615 मरीजों पर 4,46,35,950 रुपए की राशि खर्च की गई है। वहीं साल 2019-2020 में 10169 मरीजों पर 17,36,38,543 रुपए की राशि खर्च की गई है। साल 2020- 2021 में 11078 मरीजों पर 21,93,86,286 रुपये की राशि खर्च की गई। इसके अलावा साल 2021 में अभी तक 7399 मरीजों पर 13,92,63,813 रुपए की राशि खर्च की गई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार सहित अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने को लेकर प्रतिबद्ध है ताकि मरीजों को अस्पताल में सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके। इसी दिशा में सरकार की ओर से अस्पताल में पिछले दिनों मुफ्त जांच योजना शुरू की गई थी। जहां सभी श्रेणियों के मरीजों के 56 प्रकार के टेस्ट निशुल्क करवाए जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि सीटी स्कैन एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट भी बीपीएल, कैंसर मरीजों, व दिव्यांग मरीजों के लिए निशुल्क है। साथ ही अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे अति निर्धन मरीजों को भी मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के जरिए स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करवाया जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा गया है कि मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं तो कार्ड की वैधता समाप्त हो जाने और पारिवारिक सदस्यों का नाम सही से दर्ज ना होने के कारण मरीज के कार्ड को एक्टिवेट करवाने में काफी दिक्कत आती है। ऐसे में मरीजों को उचित इलाज मुहैया करवाने में अस्पताल प्रशासन असमर्थ रहता है और कई बार मरीज की जान पर भी खतरा बन आता है। इसीलिए समय रहते अपने कार्ड की वैधता और नाम सही प्रकार से दर्ज होना चाहिए ताकि कार्ड एक्टिवेट करने में समय व्यर्थ ना हो।</p>
<p>उन्होंने बताया कि एक कार्ड में परिवार के अधिकतम पांच व्यक्तियों को लाभ मिल सकता है और अधिकतम पाँच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य लाभ दिया जाता है । लेकिन अगर मरीज किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसके इलाज में 5 लाख रुपए से अधिक खर्च होने की संभावना होती है, तो ऐसी स्थिति में मरीज के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है, जहां विभाग के चिकित्सक कार्ड में राशि बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र जारी करते हैं ।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अस्पताल में हिम केयर योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए चार प्रशासनिक अधिकारी और दो नर्सिंग सुपरीटेंडेंट तैनात किए गए हैं। वह सुनिश्चित करते हैं कि अस्पताल में आए मरीजों को हिमकेयर योजना के तहत लाभ मिलने में किसी प्रकार की परेशानी न आये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शहरी निकायों में जनप्रतिनिधियों, पंचायत में वार्ड सदस्य, प्रधान व उपप्रधान सहित सभी जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए और सामाजिक परिवेश में लोगों को कार्ड बनवाने व इससे संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उन सब लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण अच्छी स्वास्थ्य सेवा वहन नहीं कर सकते हैं।</p>
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		<item>
		<title>आईजीएमसी मे किडनी स्टोन ऑपरेशन की मशीन खराब, कई ऑपरेशन टले  </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/24/lithotripsy-machine-igmc-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Nov 2021 09:51:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[डाॅ. जनकराज]]></category>
		<category><![CDATA[लिथाेट्रिप्सी मशीन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) में किडनी स्टोन के ऑपरेशन के लिए लगाई गई लिथोट्रिप्सी मशीन खराब हो गई है। अस्पताल मे  किडनी स्टोन की केवल एक ही मशीन है। इस मशीन के खराब होने से मरीज काफी परेशान है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अब इलाज करवाने के लिए पीजीआई व अन्य [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="_66b0012b">
<p><strong>शिमला</strong>-हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) में किडनी स्टोन के ऑपरेशन के लिए लगाई गई लिथोट्रिप्सी मशीन खराब हो गई है। अस्पताल मे  किडनी स्टोन की केवल एक ही मशीन है।</p>
<p>इस मशीन के खराब होने से मरीज काफी परेशान है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अब इलाज करवाने के लिए पीजीआई व अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, लेकिन वहां पर भी मरीजाें काे लंबी डेट दी जा रही है।</p>
<p>आईजीएमसी में लिथोट्रिप्सी मशीन से हर दिन 10 से 12 ऑपरेशन होते हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मशीन के  खराब होने का कारण अधिक वर्क लोड है जिसकी वजह से यह मशीन खराब हो गई है।</p>
<p>इस मशीन का शाॅक वेव जेनरेटर खराब हुआ है। शाॅक वेव जेनरेट स्टाेन काे ताेड़ने का काम करता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है।</p>
</div>
<p>अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह मशीन इजरायल की कंपनी की है और  इसका खराब पुर्जा इजरायल से मंगवाया गया है। लिथोट्रिप्सी मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का ऑपरेशन बिना चीर फाड़ के किया जाता है और मरीज तुरंत घर चला जाता है। मशीन खराब होने के कारण सभी ऑपरेशन टालने पड़े हैं।</p>
<p>वहीं आईजीएमसी के एमएस <strong>डाॅ. जनकराज</strong> का कहना है  कि- आईजीएमसी में लिथाेट्रिप्सी की एक ही मशीन है, ऐसे में इस पर वर्क लोड अधिक होने के कारण मशीन में खराबी आई है। जो पार्ट खराब हुआ है, वह मंगवा दिया गया है। जैसे ही पार्ट आएगा मशीन काे ठीक करवा दिया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p class="">
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			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार सफलता पूर्वक हुई भोजन नली के कैंसर की न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/09/igmc-shimla-performs-thoracoscopic-esophagectomy-for-food-pipe-cancer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Nov 2021 15:24:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[एमएस डॉ.जनकराज]]></category>
		<category><![CDATA[हाइटेक लेप्रोस्कोपिक तकनीक]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार आहार नली के कैंसर का ऑपरेशन हाइटेक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ के ऑपरेशन किया गया है। आईजीएमसी के डॉक्टरों ने शिमला के 74 वर्षीय बज़ुर्ग मरीज़ का इस तकनीक से सफल ऑपरेशन कर जीवनदान दिया है। इस तकनीक से पहली बार ऑपरेशन [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/09/igmc-shimla-performs-thoracoscopic-esophagectomy-for-food-pipe-cancer/">आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार सफलता पूर्वक हुई भोजन नली के कैंसर की न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार आहार नली के कैंसर का ऑपरेशन हाइटेक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ के ऑपरेशन किया गया है। आईजीएमसी के डॉक्टरों ने शिमला के 74 वर्षीय बज़ुर्ग मरीज़ का इस तकनीक से सफल ऑपरेशन कर जीवनदान दिया है। इस तकनीक से पहली बार ऑपरेशन किया गया है और आम तौर पर चीरफाड़ कर अब तक ऑपरेशन होता आया है, इसमें जहाँ समय भी ज्यादा लगता है वहीं मरीज को ठीक होने में भी बहुत समय लगता है। लेप्रोस्कोपिक तकनीक से पहले ऑपरेशन करने के लिए बाहरी राज्यों पीजीआई या एम्स का रुख करना पड़ता था लेकिन अब प्रदेश में ही इस तकनीक से ऑपरेशन संभव हो गया है।</p>
<p><iframe title="आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार सफलता पूर्वक हुई भोजन नली के कैंसर की न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी" width="740" height="555" src="https://www.youtube.com/embed/yMtzHHgDYPM?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>कैंसर सर्जन डीके वर्मा ने बताया कि इस तकनीक से अभी तक हिमाचल के किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं किया गया है। बड़े शहरों में इस ऑपरेशन पर चार से पांच लाख रुपए खर्च आता है, लेकिन IGMC में निःशुल्क सर्जरी की गई है। इस तकनीक से ऑपरेशन करने में 3 घण्टे लगे है, जबकि आमतौर पर 5 घण्टे ऑपरेशन करने में लगते है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर खाने-पीने में परेशानी हो रही हों तो मरीजों को लगता है कि एसिडिटी के कारण ऐसा हो रहा है। बार-बार मिचली आने को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कई बार यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए। आहार नली के कैंसर का कारण तंबाकू व गुड़ाखू भी है। जिस महिला मरीज का ऑपरेशन किया गया, उनमें एक को गुड़ाखू करने की लत थी। वहीं दूसरी महिला इस तरह का नशा नहीं करती है। आहार नली के कैंसर का ऑपरेशन संभव है। वास्तव में मनुष्य के शरीर में स्थित आहार नली, मुंह से पेट तक भोजन ले जाने का काम करती है। जब यह नली कैंसर ग्रस्त हो जाती है, तो उसे इसोफेगल कैंसर कहते है।</p>
<p>वहीं आइजीएमसी के एमएस डॉ.जनकराज ने कहा कि इस तकनीक से ऑपरेशन काफी फायदेमंद रहेगा। इस तकनीक से मरीज जल्दी ठीक होगा, साथ ही समय भी कम लगेगा। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के ऑपरेशन पहले भी होते थे, लेकिन उसमें काफी ज्यादा समय लगता था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/09/igmc-shimla-performs-thoracoscopic-esophagectomy-for-food-pipe-cancer/">आईजीएमसी (IGMC) शिमला में पहली बार सफलता पूर्वक हुई भोजन नली के कैंसर की न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आईजीएमसी में चंद लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए कैंटीन से लेकर सभी प्रकार के टेस्ट करने के कार्य निजी हाथों में: सीपीआईएम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/10/cpim-protests-over-privatization-of-igmc-facilities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Sep 2021 10:36:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[लंगर]]></category>
		<category><![CDATA[सीपीआईएम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) प्रशासन ने जिस तरीके से वहां पर चल रहे लंगर को अवैध घोषित किया है। उसका सीपीआईएम लोकल कमेटी शिमला ने अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर कड़ा प्रदर्शन किया। कमेटी के सचिव बाबू राम ने बताया है कि जो लोग लंगर को अवैध बता रहे है वहीं [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) प्रशासन ने जिस तरीके से वहां पर चल रहे लंगर को अवैध घोषित किया है। उसका सीपीआईएम लोकल कमेटी शिमला ने अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर कड़ा प्रदर्शन किया। कमेटी के सचिव बाबू राम ने बताया है कि जो लोग लंगर को अवैध बता रहे है वहीं लोग वहां पर लंगर बांटते देखे गए हैं। उन्होंने कहा है कि सबसे पहले आईजीएमसी प्रशासन की जांच होनी चाहिए जिसने इस लंगर को चलाने की अनुमति दी थी।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि प्रशासन वहां पर लंगर को सुचारू रूप से चलाने की अनुमति दें ताकि वहां पर जरूरतमंद तीमारदारों को राहत मिल सके। यदि कोई भी सामाजिक संस्था आईजीएमसी में लंगर लगाना चाहती है तो उनको भी इजाजत दी जाए।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा है कि एक कल्याणकारी राज्य की जिमेदारी है कि सभी लोगों को मूलभूत सुभिधाए प्रदान की जाए। लेकिन आज सरकार सब कुछ निजी हाथों में सौंप रही है। आईजीएमसी के अंदर कैंटीनों से लेकर सभी प्रकार के टेस्ट करने के कार्य को निजी हाथों में दिया गया है।</p>
<p>इस प्रदर्शन में राज्य सचिव मंडल सदस्य कुलदीप सिंह तंवर , राज्य कमेटी सदस्य विजेंदर मेहरा, जिला कमेटी सदस्य सोनू वर्मा , सत्यवान पुंडीर, जगमोहन ठाकुर, बालक राम, महेश वर्मा, ज़िया नन्द, विवेक कश्यप, पंकज वर्मा, पोविंदर, रमन चंद्रकांत वर्मा, सोहन ठाकुर, सुरेश वर्मा, हिमी देवी , बालकृष्ण बाली आदि सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।</p>
<p>सीपीआईएम ने मांग की है कि सभी प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जाए। आईजीएमसी में किसी भी निजी कंपनी को इजाजत न दी जाए। लंगर को सुचारू रूप से चलाया जाए। कैंटीनों का संचालन आईजीएमसी प्रशासन करे। उन्होंने यह भी कहा कि चंद व्यक्तियों के फायदे के लिए सब कुछ निजी हाथों में दिया जा रहा है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/10/cpim-protests-over-privatization-of-igmc-facilities/">आईजीएमसी में चंद लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए कैंटीन से लेकर सभी प्रकार के टेस्ट करने के कार्य निजी हाथों में: सीपीआईएम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>सरबजीत सिंह बॉबी की संस्था पर आईजीएमसी प्रशासन ने लगाया बिजली,पानी चोरी और अराजकता फ़ैलाने का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Sep 2021 09:11:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; शिमला के आईजीएमसी (IGMC) हॉस्पिटल में ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स (Almighty Blesings) संस्था द्वारा चलाए जाने वाले लंगर को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ ली है। जिस तरीके से पुलिस बल का प्रयोग कर लंगर बंद करवाया गया उसने लगभग सभी लोगों को हैरानी में डाल दिया है। आम लोगों के साथ-2 कांग्रेस भी इस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; शिमला के आईजीएमसी (IGMC) हॉस्पिटल में ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स (Almighty Blesings) संस्था द्वारा चलाए जाने वाले लंगर को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ ली है। जिस तरीके से पुलिस बल का प्रयोग कर लंगर बंद करवाया गया उसने लगभग सभी लोगों को हैरानी में डाल दिया है। आम लोगों के साथ-2 कांग्रेस भी इस का कड़ा विरोध कर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि सात साल से जरूरतमंद लोगों की सेवा करके संस्था ने कौन सा अपराध कर दिया जो पुलिस बल का प्रयोग कर अस्पताल प्रशाशन ने लंगर बंद करवा दिया। प्रशासन पर आरोप लगया जा रहा है कि किसी अपने चहते को ये जगह मुहैया करवाने के लिए ये सब किया गया है।</p>
<p>पर आईजीएमसी के एम एस डॉक्टर जनक राज ने संस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने संस्था द्वारा लंगर के आयोजन के लिए इस्तेमाल हो रहे अस्पताल के बिजली और पानी को चोरी करार दिया है और संस्था को आ रहे धन के स्त्रोतों पर भी सवाल खड़े किये हैं। उनका मानना है की ये सब कार्य भले इंसान की करनी नहीं लग रहे। उन्होंने ने ये भी आरोप लगाए कि संस्था सेवा के नाम पर अराजकता फैला रही है।</p>
<p>जनक ने मीडिया से सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा है कि यह मुद्दा वर्तमान समय का नहीं है। 2014 में सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे की ना कोई जगह दी जाए ना ही कोई अन्य गतिविधि की इजाज़त दी है केवल बनी बनायी चाय और खिचड़ी को बाँटने की इजाज़त दी गयी थी। वर्ष 2016 में इस संस्था ने चाय बिस्किट बाँटने का कार्य शुरू किया था। उसके बाद इन्होने कैंसर अस्पताल के अंदर खाना बनाने का कार्य शुरू किया। वहाँ पर एक आग की घटना हुई थी और उस वक्त संस्था के संस्थापक ने लंगर बंद करने की घोषणा की थी। उसके बाद 16 दिसम्बर 2016 को डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पत्र के माध्यम से सूचित किया था कि यह जो निर्माण कार्य  हो रहा है यह गैर क़ानूनी है और इसका ढांचा कच्चा है यहां पर किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसके लिए संस्था स्वयं जिम्मेवार होगी।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2016 में सरकार ने अस्पताल प्रशासन को इस संस्था को पहले से बने खाने को बाँटने के लिए जगह देने पर सोच विचार करने के लिए कहा था। लेकिन ऐसा कोई भी निर्णय अस्पताल द्वारा नहीं लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा की अस्पताल के पास बहुत सारी एनजीओ (NGO) के आवेदन आते रहते है की हमे भी दान पुण्य करने के लिए जगह दी जाये। उन्होंने यह भी कहा कि भावनाओं से व्यवस्था नहीं चलती है व्यावस्था को चलने के लिए कानून और नियमो के अनुरूप कार्य करना होता है। सेवा के नाम पर अराजकता को नहीं पनपने दिया जा सकता।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके साथ आये लोगो को मिल रही मदद के खिलाफ अस्पताल प्रशासन बिलकुल भी नहीं है। अस्पताल केवल नियमानुसार अपनी सम्पति को लेने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जा,पानी की चोरी, बिजली की चोरी, ये एक नेक नियत के इंसान के कार्य नहीं हो सकते। 22 जनवरी 2021 को इस संथा ने स्वयं घोषणा की थी कि 31 मार्च 2021 तक यह लंगर बंद कर देंगें।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा की यह संस्था जो भी कार्य कर रही है, संस्था या व्यक्ति विशेष अपनी आमदनी से नहीं कर रहे हैं। इसको लोगो के सहयोग के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा की लोगों के द्वारा दी गयी सहायता राशि का प्रयोग कहाँ हुआ और कैसे हुआ ये जानने का अधिकार उनको है। और किसी भी संस्था को प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता के बारें में जानकारी इंडियन सोसाटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत देनी पड़ती है। एमएस ने कहा कि इतने बड़े सेवाकार्य को चलाने के लिए काफी धन की आवश्यकता होती है। पैसा कहाँ से आ रहा है,कौन पैसा दे रहा है। इस संस्था ने प्रतिदिन तीन हजार लोगों को खाना खिलाने का दावा किया है और निशुल्क एम्बुलेंस की भी सुविधा दी है। जब यह संस्था आईजीएमसी के नाम पर काम कर रही है तो अस्पताल प्रशासन को जानने का यह अधिकार है। 21 जुलाई 2021 को उच्च न्यायलय ने संज्ञान  लिया है कि प्रदेश भर के अवैध कब्जों पर हलफनामा दायर हो।</p>
<p>उन्होंने सरकार से मांग की है की इस सारे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जाँच करवाई जाये। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास प्रतिदिन भिन्न-2 संस्थाओं से जगह को आवंटित करने के आवेदन आते रहते है कि अगर उनको जगह दी है तो हमें भी जगह दी जाये। एमएस  ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन से संस्था के संस्थापक खुली वार्तालाप करें। ये जाँच करने का अधिकार अस्पताल प्रशासन को है कि इतना सारा ताम झाम जो किया जा रहा है उसका फंडिग सोर्स क्या है। कहीं कोई असमाजिक तत्व इसमें सहयोग तो नहीं कर रहे, कहीं किसी गलत धारणा से कोई कार्य तो नहीं हो रहा। जनता के सामने सारा लेखा जोखा रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन फ्री में मिल रहे लंगर के खिलाफ बिलकुल भी नहीं है।</p>
<h3>क्या है युथ कांग्रेस का कहना</h3>
<p>हिमाचल प्रदेश युथ कांग्रेस ने आज प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा है कि ऐसी क्या वजह रही होगी की आईजीएमसी प्रशासन ऑलमाइटी संस्था का सारा सामान उठाकर सड़कों पर बिखेर देती है। इन्होने सरकार पर आरोप लगाया की सरकार अपने लोगों को व्यवस्थित करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। हाल ही मे आईजीएमसी प्रशाशन ने एक मीटिंग आयोजित की और उस मीटिंग में यह प्रस्ताव पारित किया है कि इस लंगर को किसी और को दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बात यह नहीं है कि यह लंगर किसी और को दिया जायेगा, वह भी सेवा करेगा,यह भी सेवा कर रहे है। इस लिए प्रशाशन इस लंगर को जल्द से जल्द खाली करने की मुहीम कर रहा है।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि यह सरकार हर संस्थान को बर्बाद करने में तुली है और हर संस्थान का भगवाकरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा की युवा कांग्रेस सर्वजीत सिंह बॉबी का पूर्ण रूप से समर्थन करेगी।</p>
<h3>क्या है कांग्रेस यंग ब्रिगेड का कहना</h3>
<p>कांग्रेस यंग ब्रिगेड ने भी आईजीएमसी के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन मुर्दाबाद, प्रदेश सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। अध्यक्ष वीरेंद्र बांसटू ने कहा कि पिछले सात साल से गरीब जनता का पेट भर रहे सर्वजीत सिंह बॉबी के लंगर को अवैध बताना गलत है। उन्होंने कहा कि लंगर पर राजनीति नही होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई लोगों ने यहां पर लंगर सेवा दी है। लेकिन 7 साल बाद अब जाकर आईजीएमसी प्रशासन को होश आई है। उन्होंने कहा कि अगर लंगर को बहाल नही किया जाता है तो आगामी समय मे प्रदेश की जनता इसके खिलाफ आंदोलन करेगी। बता दें कि लंगर चलाने वाले सर्वजीत सिंह बॉबी मौजूदा समय में बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।</p>
<h3>क्या है लोगो का कहना</h3>
<p>इसी बीच आम लोग भी संस्था के समर्थन में आये हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि किस तरह उन्हें इस संस्था ने बुरे समय में मदद की थी।</p>
<p>ऐसे ही एक व्यक्ति ने कहा कि: &#8220;पिछले लोकडाउन में लोग अस्पताल में फंसे थे। मुझे पता है कि तब यहां कैसी स्थिति थी। उस समय खाने पीने की कोई सुविधा नहीं थी। पैसा होते हुई भी कहीं खाना नहीं मिल रहा था। तब सर्वजीत सिंह बॉबी ने ही उनकी मदद की थी और साथ ही साथ में मरीजों को भी खाना पैक करके दिया था। आज सरकार गरीबों के साथ अन्याय कर रही है। जो इन्होने बिजली पानी लिया वो वह घर तो नहीं ले गए लोगो की सेवा के लिए उपयोग किया है। सरदार ने इसको कोई होटल नहीं बनाया यह सब गरीब लोगों की सेवा के लिए कर रहे हैं। <strong> </strong>&#8221;</p>
<p>उन्होंने सरकार को इस विषय में गहराई से सोचने का निवेदन किया है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/07/almighty-blesings-igmc-shimla-case/">सरबजीत सिंह बॉबी की संस्था पर आईजीएमसी प्रशासन ने लगाया बिजली,पानी चोरी और अराजकता फ़ैलाने का आरोप</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिमाचल में पहली बार Awake Craniotomy तकनीक से जागते हुए मरीज़ के दिमाग़ का आपरेशन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/29/awake-craniotomy-at-igmc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Aug 2021 16:14:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Awake Craniotomy]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इन्दिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आईजीएमसी) शिमला में न्यूरो सर्जरी विभाग में Awake Craniotomy तकनीक से जागते हुए मरीज़ के दिमाग़ का आपरेशन किया गया। हिमाचल प्रदेश में इस तकनीक का यह पहला आपरेशन हुआ है। इससे पहले ऐसे आपरेशन के लिए लोगों को प्रदेश से बाहर जाना [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इन्दिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आईजीएमसी) शिमला में न्यूरो सर्जरी विभाग में Awake Craniotomy तकनीक से जागते हुए मरीज़ के दिमाग़ का आपरेशन किया गया। हिमाचल प्रदेश में इस तकनीक का यह पहला आपरेशन हुआ है। इससे पहले ऐसे आपरेशन के लिए लोगों को प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था।</p>
<p>मरीज़ के दिमाग़ के बाएँ हिस्से में एक ट्यूमर था। बीमारी की जगह और आपरेशन की जटिलताओं की वजह से मरीज़ के दाएँ पैर और बाजू तथा बोलने की क्षमता खो सकती थी। लेकिन अवेक करेनोटॉमी तकनीक ये ऑपरेशन आसानी से हो गया। यह ओप्रशन पूरी तरह से सफल रहा है।</p>
<p>बता दें कि यह ऑप्रेशन करते समय डॉक्टर मरीज से बात कर रहे थे। मरीज हाथ हिला रहा था, आंखे खुली थी,जीभ निकाल रहा था,पैर हिला रहा था और वह पानी भी पी रहा था।</p>
<p>आईजीएमसी के एमएस ने इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जिला शिमला के ठियोग के बणी के 34 वर्षीय मरीज के दिमाग के बांए हिस्से में ट्यूमर था। 21 अगस्त को मरीज को दाखिल किया गया। यहां पर अवेक क्रेनियोटॉमी तकनीक से ऑपरेशन व उसकी जटिलताओं संबंधी जानकारी को लेकर काउंसलिंग की गई। इसके बाद मरीज का ऑपरेशन किया गया जोकि पूर्ण रूप से सफल रहा है।</p>
<p><strong>अवेक क्रेनियोटॉमी क्या है</strong></p>
<p>अवेक क्रेनियोटॉमी सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें ऑपरेशन करने के लिए मरीज को पूरी तरह से बेहोश नहीं किया जाता है। मरीज को होश में रखा जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया को इसलिए चुनते हैं ताकि वे सर्जरी के दौरान मरीज से बातचीत करते रहें और मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहें।</p>
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