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	<title>Youth for Right to Employment Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल रोजगार देने में फिसड्डी, शिक्षित बेरोजगार युवा नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Aug 2016 08:01:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल में 9 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में चौथे पायदान पर है,लेकिन रोजगार देने में सबसे पीछे है। शिमला- 19 जुलाई भारत में शिक्षित बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा कई करोड़ पहुंच गया है। देश का ऐसा कोई [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हिमाचल में 9 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में चौथे पायदान पर है,लेकिन रोजगार देने में सबसे पीछे है। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  19 जुलाई भारत में शिक्षित बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा कई करोड़ पहुंच गया है। देश का ऐसा कोई राज्य नहीं है,जहां शिक्षित बेरोजगार युवा वर्ग रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें नहीं खा रहा है। जबकि विश्व में भारत ही ऐसा देश हैं,जहां 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम युवाओं की है। देश में बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए अब रोजगार को मौलिक अधिकार में शामिल करने तथा रोजगार आयोग का गठन किया जाना अनिवार्य है। </p>
<p>यह बात पूरे देश में यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट अभियान चला रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पांच छात्रों ने शिमला में आयोजित बैठक के दौरान कही। इस मौके पर दिल्ली विवि के छात्र लक्षणम यादव ने कहा कि आज पुरे देश में बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है इस मुद्दे पर किसी भी पार्टी की सरकार गंभीरता से कार्य नहीं कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस अभियान को पिछले एक साल से पुरे देश में चलाया गया है। यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट अभियान के माध्यम से वह राज्य व केंद्र सरकार से यही मांग करते आ रहे हैं कि रोजगार को मोलिक अधिकार बनाया जाए। साथ ही एक रोजगार आयोग का गठन किया जाए,ताकि शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार मुहैया हो सके। लक्षमण यादव ने कहा कि बेरोजगारी देश में सबसे ज्वलंत एवं बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। </p>
<p>छात्रों ने ये भी कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को विवश है। उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्य सरकारें बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में विफल साबित हो रही है। यही वजह है कि अदद रोजगार न मिलने की वजह से आज का युवा वर्ग नशे सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूथ फॉर राइट टू एम्पलॉयमेंट का मकसद शिक्षित युवाओं को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। साथ ही देश में निरंतर बढ़ रही बेरोजगारी के खिलाफ एक जनआंदोलन खड़ा करना है,ताकि शिक्षित युवाओं को उनके संवैधानिक अधिकार मिल सके।</p>
<p>अभियान चला रहे छात्रों का ये भी कहना है कि हिमाचल प्रदेश में उन्होंने जिला सोलन से अपने जनआंदोलन को शुरू किया है और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ये दूसरी बैठक है। आगामी दिनों में यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जाकर कार्यक्रमों का आयोजन करेगी तथा ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस देश की जीडीपी लगातार बढ़ रही हो उस देश में रोजगार दर में गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि जनगणना 2011  के मुताबिक देश में बेरोजगारी की दर 2001 के 6.8 फिसदी बढ़कर 2011 में 9.6 फीसदीहो चुकी है। </p>
<p>जहां तक नौकरियों की बात है तो एनएसएसओ के आंकड़े बताते हैं कि पिछली तीमाही में रोजगार दर पिछले कई वर्षों की तुलना में सबसे नीचे है। छात्रों का कहना है कि वित्त वर्ष 2010 में 11 लाख नौकरियां सृजित की गई थीं, वहीं वित्त वर्ष 2015 में यह संख्या घटकर 5 लाख पर आ गई है। यही नहीं,बल्कि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा घट कर 91 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्यों में लाखों पद विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पड़े हैं,लेकिन उन पदों को भरने की प्रक्रिया लगभग बंद है। जबकि यह सभी पद स्वीकृत है। यानि कि स्वीकृत सभी पदों के लिए वेतन भत्ता वार्षिक बजट में आबंटित होता है। बावजूद इसके इन पदों को सृजित नहीं किया जा रहा है। </p>
<p>हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए छात्रों ने कहा कि इस राज्य में 9 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में चौथे पायदान पर है,लेकिन रोजगार देने में सबसे पीछे है। उन्होंने केंद्र तथा राज्य सरकारों से मांग की है कि रोजगार को मौलिक अधिकार बनाया जाए, केंद्र व राज्यों में रिक्त पड़े लाखा पदों को शीघ्र भरने के लिए एक आयोग का गठन किया जाए, रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाए तथा ठोस सेवा शर्तों को बनाया जाए,जहां सरकारी, अर्ध सरकारी, निजी सभी क्षेत्र समान जवाबदेही और शर्तों से संचालित हो। </p>
<p>Photo: The News Himachal</p>
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