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	<title>Umang Foundation Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिमाचल  के दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल में धांधली</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/08/17/irregularities-in-himachals-school-for-blind-and-deaf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2015 08:45:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Ajai Srivastava]]></category>
		<category><![CDATA[School For Deaf and blind Dhali]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Umang Foundation Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उमंग फाउंडेशन ने हिमाचल के राज्यपाल को सौंपा पत्र सेवा में, आचार्य देवव्रत जी, महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश विषय: दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल की हालत में सुधार तथा धांधली की जांच का अनुरोध महोदय, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमें पूर्ण विश्वास है कि इस महत्वपूर्ण [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>उमंग फाउंडेशन ने हिमाचल के राज्यपाल को सौंपा पत्र </strong></p>
<p>सेवा में,<br />
आचार्य देवव्रत जी,<br />
महामहिम राज्यपाल,<br />
हिमाचल प्रदेश</p>
<p><strong>विषय: दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों के स्कूल की हालत में सुधार तथा धांधली की जांच का अनुरोध</strong></p>
<p>महोदय,<br />
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमें पूर्ण विश्वास है कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के निर्वहन में आप राज्य के सभी वर्गों के साथ न्याय करेंगे। हमें आशा है कि समाज के सर्वाधिक दुर्बल वर्गों &#8211; दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बच्चों, अन्य विकलांगों, थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों, कुष्ठरोगियों, मंदबुद्धि लोगों, मनोरोगियों, निर्धन मरीजों, बेसहारा महिलाओं और बेघर बुजुर्गों को भी आपके माध्यम से न्याय एवं सार्थक जीवन जीने का अवसर प्राप्त होगा।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन एक जन कल्याण न्यास है जो हिमाचल में उपरोक्त सभी दुर्बल वर्गों के मानवाधिकार संरक्षण तथा सशक्तिकरण हेतु कार्य कर रहा है। हम बिना किसी सरकारी अनुदान के कार्य कर रहे हैं। विशेषकर दृष्टिहीन, मूकबधिर एवं अन्य विकलांग बालक- बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए हम समाज के सहयोग से कार्यरत हैं। शिमला के दो प्रतिष्ठित राजकीय महाविद्यालयों में हमारी शतप्रतिशत छात्रवृत्ति से 22 दृष्टिहीन विद्यार्थी, जिनमे 9 लड़कियां हैं, होस्टल में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिमला के पोर्टमोर स्कूल में 19 बच्चियां हमारे सहयोग से होस्टल में रह कर पढ़ रही हैं जिनमे 14 मूकबधिर एवं 5 दृष्टिहीन हैं। हम इन वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर तक संघर्ष करते हैं जिनमे हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर करना भी शामिल है। हमे अपने उद्देश्य में कई सफलताएं भी मिली हैं।<br />
यहाँ हम आपका ध्यान शिमला के ढली क्षेत्र में राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बालकों के विशेष विद्यालय की दुर्दशा, विकलांग बच्चों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं की और खींचना चाहते हैं। राज्यपाल के नाते आप बाल कल्याण परिषद् के प्रेसीडेंट हैं और मुख्यमंत्री अध्यक्ष हैं और यह प्रदेश में दृष्टिहीन एवं मूकबधिर बालकों का एकमात्र स्कूल है जिसके सर्वोच्च पदाधिकारी भी आप ही हैं।</p>
<p><strong>आपसे निवेदन है कि कृपया निम्नलिखित मुद्दों पर विचार करने की कृपा करें:</strong></p>
<p>1. ढली स्थित विशेष विद्यालय के दृष्टिहीन एवं मूकबधिर विद्यालय में पहली से 10वीं कक्षा तक के कुल 120 बच्चे हैं जिनमें 27 दृष्टिहीन और 93 मूकबधिर हैं।</p>
<p>2. वर्षों से दृष्टिहीन और बधिर, दोनों वर्गों के लिए गणित तथा विज्ञान विषयों का कोई शिक्षक ही नहीं है। सभी कक्षाओं के लिए विषयवार शिक्षक नहीं हैं।</p>
<p>3. दृष्टिहीन बच्चे संगीत में अच्छा कार्य कर सकते हैं पर स्कूल में संगीत का शिक्षक ही नहीं है।</p>
<p>4. बधिर बच्चे पेंटिंग और ग्राफ़िक्स में बहुत अच्छे निकल सकते हैं पर इस विषय का कोई अध्यापक नहीं है।</p>
<p>5. दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चे कम्प्यूटर के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकते हैं और रोज़गार कमा सकते हैं परंतु उन्हें इसकी कोई वोकेशनल ट्रेनिंग नहीं दी जाती है।</p>
<p>6. विज्ञान प्रयोगशाला और लैब सहायक तक विद्यालय में नहीं है।</p>
<p>7. दृष्टिहीन बच्चों की पहली से दसवीं तक की कुल दस कक्षाओं के लिए स्कूल में मात्र 3 कमरे ही हैं।</p>
<p>8. इसी तरह मूकबधिर बच्चों की कुल 10 कक्षाओं हेतु मात्र 6 कमरे उपलब्ध हैं।</p>
<p>9. विशेष विद्यालय में राज्य के गरीब परिवारों के बच्चे ही पढ़ते हैं। धनी लोग अपने दृष्टिहीन तथा बधिर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रदेश से बाहर भेज देते हैं। लेकिन बाल कल्याण परिषद् कई वर्षों से बच्चों को वर्दी व पुस्तकें तक नहीं देरही थी। अप्रैल में मैंने उमंग फाउंडेशन की ओर से माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा जिसके बाद बच्चों को एक पैंट और एक शर्ट दी गई।</p>
<p>9. यह बड़े खेद का विषय है कि बाल कल्याण परिषद् और विशेष विद्यालय भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए अप्रैल में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र जब अखबारों में छपा तो बाल कल्याण परिषद् हरकत में आई और बच्चों के लिए वर्दी सप्लाई का आर्डर दिया।</p>
<p>10. विशेष विद्यालय में खरीद के लिए बाकायदा एक परचेज कमेटी है जिसे अँधेरे में रख कर मूकबधिर स्कूल की प्रिंसिपल ने अप्रैल में अपने स्तर पर 120 पैंटें और इतनी ही शर्टें खरीदने का आर्डर एक निजी दूकानदार को दिया। यह नियमों के विपरीत था।</p>
<p>11. नियम के अनुसार प्रिंसिपल अपनी खरीद- जरूरतों का ब्यौरा बाल कल्याण परिषद् को भेजती जिसकी मंजूरी मिलने के बाद स्कूल की परचेज कमेटी सरकारी एजेंसी यानी राज्य खाद्य एवं आपूर्ति निगम से खरीद के लिए संपर्क करती। आपूर्ति निगम में सामग्री उपलब्ध न होने पर उससे अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेकर सरकारी रेट कॉन्ट्रैक्ट वाले आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री खरीदी जानी चाहिए थी।</p>
<p>12. रेट कॉन्ट्रैक्ट वाले आपूर्तिकर्ताओं के पास सामग्री अनुपलब्ध होने पर परचेज कमेटी सील्ड कुटेशन आमंत्रित करती और वही कमेटी कुटेशन व् सैंपल का निरीक्षण करके सप्लाई आर्डर देती।</p>
<p>13. हैरानी की बात ये है कि अप्रैल में मूकबधिर विद्यालय की प्रिंसिपल ने सप्लाई के लिए मौखिक आर्डर दे दिया और 22- 23 मई को 120 बच्चों की पैंट- शर्ट स्कूल पहुँच गई। 25 मई 2015 को दूकानदार ने लगभग 70 हजार रुपये का बिल भी दे दिया। लेकिन राज्य आपूर्ति निगम को उक्त प्रिंसिपल ने NOC के लिए पत्र उसके एक महीने बाद 22 जून 2015 को लिखा। निगम ने NOC 23 जून को जारी किया।</p>
<p>14. राज्य बाल कल्याण परिषद् ने नियमों के विपरीत उक्त प्रिंसिपल के खाते में सामग्री की खरीद हेतु 2 लाख रुपए डाल दिए जिससे 5 अगस्त को लगभग 70 हज़ार रु. का भुगतान किया गया। जबकि बिल का भुगतान परिषद् को खुद करना चाहिए था। परिषद् के अधिकारी भी अनियमितताओं में शामिल लगते हैं।</p>
<p>15. वर्ष 2014 मेँ माननीय मुख्यमंत्री ने बच्चों के लिए रु. 30 हज़ार और माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने रु. 21 हजार अनुदान मेँ स्कूल को दिए थे। वन विभाग ने 15 हज़ार रु. दिए। ये सभी राशि परचेज कमेटी के ध्यान में लाए बिना प्रिंसिपल द्वारा खर्च की गई।</p>
<p>16. विशेष स्कूल के बच्चों को वर्दी का स्वेटर, जूते, जुराबें तथा अंडरवियर, बनियान, तौलिया व चप्पलें आदि अभी तक नहीं मिले हैं।</p>
<p>17. बच्चोँ को आवश्यकता के अनुसार पठन सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। दृष्टिहीन बच्चों के लिए डिजिटल पुस्तकालय अभी भी सपना है।</p>
<p>महामहिम, आपसे प्रार्थना है कि आप उपरोक्त सभी मामलों की जांच के आदेश देने की कृपा करें ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और विकलांग बच्चों को न्याय मिल सके।</p>
<p>धन्यवाद।<br />
अजय श्रीवास्तव</p>
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