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	<title>Supreme Court Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Supreme Court Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल पंचायती राज चुनाव : सरकार को सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर, 31 मई से पहले हर हाल में करवाने होंगे चुनाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 13:03:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने के आदेश दिए है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुनर्सीमांकन के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने के आदेश दिए है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुनर्सीमांकन के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव को नहीं टाला जा सकता।</p>
<p>प्रदेश में 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश में 30 अप्रैल को चुनाव करवाने के आदेश दिए थे,लेकिन सरकार ने एलएसपी डालकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक हर हाल में आरक्षण रोस्टर जारी करने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दलील दी थी कि प्रदेश में बरसात में भारी बारिश और आपदा के कारण नुकसान के कारण कई स्थानों पर बहाली का कार्य अभी जारी है। प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है। ऐसे में चुनाव कराना संभव नहीं है।</p>
<p>सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि आपदा प्रबंधन अधिनियम संसद की ओर से बनाया गया कानून है, जबकि पंचायती राज कानून राज्य विधानसभा का। ऐसे में संसद का कानून प्राथमिकता रखता है।</p>
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		<title>हिमाचल में निजी जमीन पर खैर पेड़ों की कटाई पर लोगों को मिली राहत, पढें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/13/supreme-court-allows-khair-tree-cutting-on-private-land-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 06:45:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Law and Order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश में खैर पेड़ों की कटाई को लेकर लोगों को बड़ी राहत मिली है। वीरवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में निजी भूमि पर सूखे, गिरे हुए, फफूंदग्रस्त और सड़े हुए खैर के पेड़ों की कटाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है। पहले ही संशोधित किया जा चुका है प्रतिबंध [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश में खैर पेड़ों की कटाई को लेकर लोगों को बड़ी राहत मिली है। वीरवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में निजी भूमि पर सूखे, गिरे हुए, फफूंदग्रस्त और सड़े हुए खैर के पेड़ों की कटाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है।</p>
<p><strong>पहले ही संशोधित किया जा चुका है प्रतिबंध</strong></p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि वर्ष 1996 में पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर लगाया गया प्रतिबंध 16 फरवरी 2018 और 10 मई 2023 के आदेशों के माध्यम से पहले ही संशोधित किया जा चुका है। इन आदेशों के तहत निर्धारित शर्तों के साथ खैर पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।</p>
<p><strong>अनुमति न मिलने पर अदालत पहुंचे याचिकाकर्ता</strong></p>
<p>मामले में नियुक्त न्याय मित्र के. परमेश्वर ने बताया कि हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि मामला शीर्ष अदालत में लंबित है। याचिकाकर्ताओं ने पहले जिला वन अधिकारी से सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी। अनुमति न मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया और बाद में निजी भूमि पर ऐसे पेड़ों की कटाई को लेकर स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।</p>
<p><strong>समिति गठित करने के निर्देश</strong></p>
<p>के.परमेश्वर ने बताया कि इस तरह के पेड़ों को काटने के लिए याचिकाएं आमतौर पर सर्दियों के मौसम के बाद बड़ी संख्या में दायर की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई 2023 के आदेश का पालन करते हुए राज्यों को ऐसी कटाई से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश्वर सूद ने कहा कि प्रदेश में अब तक ऐसी कोई समिति गठित नहीं की गई है और न ही इससे संबंधित स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।</p>
<p><strong>निजी एजेंसियों को नहीं दिया जा सकता ठेका</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के आदेश में निर्देश दिया था कि खैर पेड़ों की कटाई सीधे वन विभाग या हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम द्वारा की जानी चाहिए। साथ ही, कटाई का कार्य किसी भी निजी एजेंसी को ठेके पर देने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p>अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि जिस क्षेत्र में कटाई की जाएगी वहां</p>
<ul>
<li>कटाई से पहले,</li>
<li>कटाई के दौरान और</li>
<li>कटाई के बाद तीनों चरणों की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से कराई जाए, ताकि जंगलों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके।</li>
</ul>
<p>इसके अलावा कम से कम 25 प्रतिशत परिपक्व खैर पेड़ों को ‘मदर ट्री’ के रूप में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए थे।</p>
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		<title>बेसहारा पशुओं की सड़कों पर बढ़ती संख्या पर चला कोर्ट का डंडा , शिमला प्रशासन आया हरकत में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/01/29/court-crackdown-forces-shimla-admin-into-action-on-stray-cattle/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 09:37:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211; 29 जनवरी 2026 — सड़कों पर बढ़ती बेसहारा और लावारिस पशुओं को संख्या को लेकर कोर्ट का डंडा पड़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।  प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रशासन ने अब तक कुल 472 बेसहारा पशुओं को रेस्क्यू कर गौशालाओं तक सुरक्षित पहुंचाया है। प्रशासन का कहना है [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211; </strong>29 जनवरी 2026 — सड़कों पर बढ़ती बेसहारा और लावारिस पशुओं को संख्या को लेकर कोर्ट का डंडा पड़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।  प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रशासन ने अब तक कुल 472 बेसहारा पशुओं को रेस्क्यू कर गौशालाओं तक सुरक्षित पहुंचाया है। प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक सर्वेक्षण में जिला में बेसहारा पशुओं की संख्या 272 थी, लेकिन अभियान के दौरान यह संख्या इससे अधिक पाई गई है।</p>
<p>ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हाई-वे, एक्सप्रेस-वे और अन्य सड़कों से बेसहारा मवेशियों और आवारा कुत्तों को हटाने के सख्त आदेश जारी किए थे। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखते हुए निर्देश दिए कि सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निगम, सड़क परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यह सुनिश्चित करें कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे से सभी आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं को हटाया जाए और उचित आश्रयों में रखा जाए और उन्हें वापस सड़क पर न छोड़ा जाए।</p>
<p>इसके साथ ही कोर्ट ने पशु-चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने, सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर 24 घंटे सक्रिय पेट्रोल टीमें तैनात करने और हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से 8 हफ्तों के भीतर इन निर्देशों को लागू करने की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी थी।</p>
<p>वहीं हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को राज्य सरकार को सड़कों पर बेसहारा घूमने वाले पशुओं की जिलावार गणना करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने सभी गो अभयारण्यों में पहले से रखे गए पशुओं का विवरण मांगा और बेसहारा पशुओं को टैग करने के लिए कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे।</p>
<p>उपायुक्त अनुपम कश्यप का कहना है कि एक महीने में लोगों द्वारा करीब 200 पशु सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य 1 जनवरी 2026 तक जिला को बेसहारा पशु मुक्त बनाना था और चिन्हित सभी 272 पशुओं को गौशालाओं में पहुंचा भी दिया गया था। इसके बावजूद लगातार नई सूचनाएं मिलने पर अभियान जारी रखा गया। उन्होंने बताया कि 28 जनवरी तक कुल 472 बेसहारा पशुओं को सड़कों से रेस्क्यू कर गौसदनों में सुरक्षित पहुंचाया गया है।</p>
<p><strong>पशुओं को बेसहारा छोड़ने पर उपायुक्त कार्यालय को दें सूचना &#8211;</strong></p>
<p>उपायुक्त ने बताया कि अभियान शुरु होते ही लोगों ने पशुओं को सड़कों पर छोड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि पशुधन हमारी धरोहर है, इन्हें बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने पशु मालिकों से अपील की है कि जिन्होंने अपने पशु छोड़े हैं, वे उन्हें वापस ले जाएं।</p>
<p>सर्दियों में बेसहारा पशुओं की जान को भी खतरा बना रहता है। इसके साथ ही प्रशासन ने जनता से अपील की है कि यदि कोई पशु छोड़ता है तो इसकी सूचना उपायुक्त कार्यालय को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।</p>
<p><strong>472 </strong><strong>पशुओं को कौन -कौन से गौ सदनों में पहुंचाया गया &#8211;</strong></p>
<p><strong>शिमला</strong><strong>:</strong> 5 बेसहारा पशु सुन्नी और टुटू गौशालाओं में पहुंचाए गए।</p>
<p><strong>ठियोग </strong><strong>:</strong> 118 बेसहारा पशुओं को छैला, मतियाना, शिलारू, कोटखाई, कलबोग से रेस्कयू करके घुंड बलसन वासी गौसदन बलघर, श्री कृष्णा गौशाला मल्कू माजरा बददी और हांडा कुंडी कैटल सेंन्चुरी नालागढ़ पहुंचाया गया।</p>
<p><strong>ज्यूरी</strong> : 175 बेसहारा पशुओं को नारकंडा, ओडी, ज्यूरी, कंडयाली, तकलेच, पिपटी, बधाल, नगर परिषद रामपुर, कुमारसैन क्षेत्र से रेस्कयू करके ज्यूरी के विभिन्न गौसदनों, श्री कृष्ण गौशाला मल्कू माजरा बददी और हांडा कुंडी कैटल सेंन्चुरी नालागढ जिला सोलन पहुंचाया गया।</p>
<p><strong>रोहड़ू </strong>: 51 बेसहारा पशुओं को नगर परिषद रोहड़ू, मेंहदली, समाला, हाटकोटी, जुब्बल क्षेत्र से रेस्कूय करके रोहड़ू के गौसदन में छोड़ा गया</p>
<p><strong>चौपाल</strong> : 123 बेसहारा पशुओं को नेरवा बाजार और चैपाल क्षेत्र से रेस्कयू करके विभिन्न गौसदनों में छोड़ा गया।</p>
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		<item>
		<title>वीरभद्र केस: हाईकोर्ट में तीन दिसंबर को होगी बहस</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/11/05/virbhadra-singh-disproportionate-assets-case-transferred-to-delhi-hc-hearing-scheduled-for-dec-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Nov 2015 07:24:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग संबंधी आवेदन पर योग्यता पर दलीलें सुनने के लिए हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर की तारीख तय की है। जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/11/05/virbhadra-singh-disproportionate-assets-case-transferred-to-delhi-hc-hearing-scheduled-for-dec-3/">वीरभद्र केस: हाईकोर्ट में तीन दिसंबर को होगी बहस</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग संबंधी आवेदन पर योग्यता पर दलीलें सुनने के लिए हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर की तारीख तय की है।</p>
<p>जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों के मद्देनजर आवदेन की योग्यता पर दोबारा विचार किया जाएगा।</p>
<p>यह आवेदन सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर न्याय मित्र अधिवक्ता एन हरीहरन अपनी दलीलें 3 दिसंबर को पेश करें। दूसरी ओर वीरभद्र सिंह की ओर से बहस करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच चल रही है।</p>
<p>यह मामला हिमाचल प्रदेश से संबंधित है। इन हालात में कोर्ट की निगरानी में जांच की जरूरत नहीं है और इसके मद्देनजर यह आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज- वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई में चल रहे आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच नवंबर को सुनवाई है।</p>
<p>सीबीआई ने हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर लगाई गई रोक के फैसले को चुनौती दी है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/11/05/virbhadra-singh-disproportionate-assets-case-transferred-to-delhi-hc-hearing-scheduled-for-dec-3/">वीरभद्र केस: हाईकोर्ट में तीन दिसंबर को होगी बहस</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>26 अक्टूबर को वीरभद्र की किस्मत का फैसला, गिरफ़्तारी  हुई तो कौन संभालेगा सत्ता की कमान ?</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/24/who-will-succeed-virbhadra-singh-if-he-faces-cbi-arrest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Oct 2015 14:05:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[CBI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सियासी आग में घी डालने का काम भाजपा के उन बयानों ने किया है, जिसमें पार्टी प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की बात कर रही [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/24/who-will-succeed-virbhadra-singh-if-he-faces-cbi-arrest/">26 अक्टूबर को वीरभद्र की किस्मत का फैसला, गिरफ़्तारी  हुई तो कौन संभालेगा सत्ता की कमान ?</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सियासी आग में घी डालने का काम भाजपा के उन बयानों ने किया है, जिसमें पार्टी प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की बात कर रही है।</p>
<p>ऐसे में हिमाचल में सहज ही सवाल उठ रहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटाई और वीरभद्र सिंह को पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जाता है तो प्रदेश में कौन सत्ता की कमान संभालेगा? सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को मामले की सुनवाई है। इसी बीच, हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली तलब कर मामले की जानकारी ली है।</p>
<p>यही नहीं, हाल ही में शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह से परिवहन मंत्री जीएस बाली की मुलाकात भी हुई। अंदरखाने वीरभद्र सिंह समर्थक भी इस घटनाक्रम से डरे हुए हैं कि यदि आय से अधिक संपत्ति मामले में मुख्यमंत्री गिरफ्तार होते हैं तो कांग्रेस सरकार का भविष्य क्या होगा?</p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने 26 सितंबर को शिमला सहित सराहन, रामपुर व दिल्ली आवासों में छापेमारी की थी। छापेमारी से दो दिन पहले ही सीबीआई ने मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस कार्रवाई की भनक हिमाचल में मुख्यमंत्री को लग गई थी। यह भी अहसास हो गया था कि सीबीआई छापेमारी भी कर सकती है। यही कारण है कि छापेमारी से पहले हिमाचल सरकार के सभी मंत्रियों ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व पर भरोसा जताने संबंधी हस्ताक्षरित बयान भी जारी किया था।</p>
<p>हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी मुख्यमंत्री के निवास पर सीबीआई का छापा पड़ा हो। छापेमारी के बाद कांग्रेस हाईकमान वीरभद्र सिंह के पक्ष में उतर आया। हालांकि कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आजाद तथा दीपेंद्र हुड्डा ने उनके समर्थन में मीडिया में बयान जारी किए, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। यह सही है कि इस मामले में वीरभद्र सिंह की पैरवी मशहूर वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं, परंतु सीबीआई जिस तरह से इस केस में सक्रियता दिखा रही है, उससे वीरभद्र सिंह समर्थक आशंकित हैं।</p>
<p>हिमाचल की राजनीति में पांच दशक से प्रभावशाली वीरभद्र सिंह के लिए इससे पहले इतना मुश्किल समय कभी नहीं आया था। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि ऐसी परिस्थितियां आएंगी। मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करें तो कांग्रेस में दूसरी पंक्ति के नेताओं को उभरने ही नहीं दिया गया। हालांकि कांग्रेस में कौल सिंह, विद्या स्टोक्स के साथ-साथ जीएस बाली भी मुख्यमंत्री पद के लिए गोटियां फिट करते रहे हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह के समक्ष सफल नहीं हुए हैं।</p>
<p>अब देखना यह है कि सीबीआई को 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट क्या निर्देश देता है। यदि हिमाचल हाईकोर्ट के गिरफ्तारी के आदेश पर रोक हटती है तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन संभावित है। ऐसे में कांग्रेस की गुटबाजी भी फूट कर सामने आ सकती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा नेता बयान जारी कर रहे हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव समय से पूर्व हो सकते हैं।</p>
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