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	<title>Street Light Scam Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Street Light Scam Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>जांच में खुलासा: बिना हाउस की मंजूरी के लगी थी स्ट्रीट लाइट्स</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Dec 2015 14:15:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- निगम के ढली वार्ड में एक कांग्रेसी नेता के घर के रास्ते में बिना स्वीकृति के लाखों की स्ट्रीट लाइटें लगाने के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। शनिवार को निगम हाउस में सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्ट्रीट लाइटें निगम के पूर्व डिप्टी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> निगम के ढली वार्ड में एक कांग्रेसी नेता के घर के रास्ते में बिना स्वीकृति के लाखों की स्ट्रीट लाइटें लगाने के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। शनिवार को निगम हाउस में सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्ट्रीट लाइटें निगम के पूर्व डिप्टी मेयर एवं कांग्रेस नेता हरीश जनारथा के कहने पर लगाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्व डिप्टी मेयर ने निगम के पूर्व एसी को मौखिक तौर पर 26 लाइटें लगाने को कहा था। हालांकि, इसमें से करीब पांच लाख खर्च करके 10 लाइटें लगाई गई।</p>
<p>28 अक्टूबर के हाउस में बिना स्वीकृति के कांग्रेस नेता के घर के रास्ते में अवैध रूप से लाइटें लगाने का मामला उठा था। ढली के पार्षद शैलेेंद्र चौहान ने मामले को उठाया था। उनका कहना था कि उन्होंने वर्ष 2011 में अपने लाइटें लगवाने के लिए प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव आज तक सिरे नहीं चढ़ा, मगर कांग्रेस नेता के मौखिक तौर पर कहने मात्र से ही वर्ष 2013 में लाइटें लगा दी गई। उन्होंने कहा था कि पार्षदों के लिए तो निगम हर बार बजट के लिए मना करता है, तो फिर यह लाखों रुपए लाइटों के लिए कहां से आए। पार्षद के सवाल को गंभीरता से लेते हुए मेयर संजय चौहान ने इस पर जांच बिठाई और इस हाउस में रिपोर्ट पेश करने को कहा था।</p>
<p><strong>कई वार्ड बिना लाइट्स के</strong></p>
<p>निगम में पार्षद प्राथमिकता को दरकिनार करके किसी अन्य को तरजीह देकर लाइटें लगाने का यह पहला मामला नहीं है। जाखू, कसुम्पटी, फागली, राम बाजार समेत अन्य वार्डों में इस तरह बिना स्वीकृति के लाइटें लगी हैं। जाखू के पार्षद मनोज कुठियाला ने वर्ष 2011, फागली के पार्षद कल्याण चंद, कसुम्पटी की पार्षद ने 2012 में लाइटें लगवाने का प्रस्ताव दिया था। उनके प्रस्ताव पर आज तक गौर नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>जब जनारथा का नाम अाया तो कांग्रेस भाजपा-पार्षदों के बीच नोकझोंक</strong></p>
<p>एसी ने जांच रिपोर्ट में जब जनारथा का नाम लिया तो कांग्रेसी पार्षद आग बबूला हो गए। पार्षद सुशांत कपरेट, अर्चना धवन और नरेंद्र ठाकुर ने बचाव करते हुए कहा कि उनका नाम इस मामले में जबरन घसीटा जा रहा है। उनका इतना कहते ही ढली के पार्षद शैलेेंद्र चौहान कुर्सी से उठे और कांग्रेसियों पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि कोई जनारथा का नाम घसीट नहीं रहा है, यह जांच रिपोर्ट में सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनकी जनारथा से कोई दुश्मनी नहीं है, उनकी नाराजगी उनके प्रस्ताव को दर किनार कर अन्य को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर है।</p>
<p><strong>अधिकारियों को निर्देश पार्षदों को बाइपास न करेंः टिकेंद्र</strong></p>
<p>हाउस की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि काउंसलर प्रायोर्टी को दरकिनार करना गलत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई कार्य बाइपास कर न हो। उनका कहना था कि पहले पार्षदों के कार्यों को प्राथमिकता मिले, उसके बाद ही अन्य द्वारा दिए गए कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। अगर बाइपास करके ही काम किए जाते रहेंगे तो पार्षदों का क्या काम।</p>
<p><strong>कांग्रेस को एनओसी न देने पर भी हंगामा</strong></p>
<p>हाउस में कांग्रेस को भवन विस्तार के लिए एनओसी न दिए जाने के मामले में भी हंगामा हुआ। बीते हाउस में पार्षदों ने कांग्रेस के प्रस्ताव को रिजेक्ट किया था। हाउस शुरू होते ही छोटा शिमला के पार्षद सुरेंद्र चौहान ने सवाल किया कि आखिर किस आधार पर कांग्रेस के प्रस्ताव को रिजेक्ट किया गया। पार्षद रजनी ने कहा कि बीते हाउस में कांग्रेस के प्रस्ताव का विरोध इसलिए किया था कि गरीबों को भी जमीन दी जानी चाहिए। इस पर पार्षद संजय परमार ने कहा कि अगर आप गरीबों के लिए जमीन दिलवाना चाहती हैं तो इस का प्रस्ताव हाउस में लाएं न कि अन्य के प्रस्ताव को विरोध करें। डिप्टी मेयर ने कहा कि पार्षदों को शांत किया और कहा कि इस बारे में अगले हाउस में प्रस्ताव दोबारा से लाया जाएगा।</p>
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		<title>एमसी में घोटाला, फोन पर तय हुआ कहां लगेंगी स्ट्रीट लाइटें!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Nov 2015 11:12:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[dhali]]></category>
		<category><![CDATA[kasumpti]]></category>
		<category><![CDATA[MC SHimla]]></category>
		<category><![CDATA[Street Light Scam]]></category>
		<category><![CDATA[Vikasnagar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सरकार में ऊंची पहुंच रखने वाले कुछ प्रभावशाली लोगों के फोन पर ही नगर निगम ने शहर में नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए स्थान चिन्हित कर दिए। स्ट्रीट लाइटों के गड़बड़झाले की जांच में यह बात सामने आई है। सूची में नजर दौड़ाई जाए तो यह बात खुद ही साफ हो जाएगी की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> सरकार में ऊंची पहुंच रखने वाले कुछ प्रभावशाली लोगों के फोन पर ही नगर निगम ने शहर में नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए स्थान चिन्हित कर दिए। <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2015/10/29/shimla-mc-streetlight-scam-streetlights-worth-2-crore-lighting-homes-of-vips-and-businessmen/" target="_blank">स्ट्रीट लाइटों के गड़बड़झाले</a> की जांच में यह बात सामने आई है। सूची में नजर दौड़ाई जाए तो यह बात खुद ही साफ हो जाएगी की लाइटें लगाने के लिए फील्ड सर्वे करने की जहमत तक नहीं उठाई गई।</p>
<p><iframe width="700" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/THlYwxeZ4I4" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>तत्कालीन अधिकारी या कर्मचारी अगर यह कहते हैं कि उन्होंने फील्ड सर्वे किया था तो वह यह जवाब नहीं दे पाएंगे कि फिर उन्होंने एक ही जगह चार से पांच लाइटों के प्वाइंट कैसे दर्शा रखे हैं। हैरत इस बात की है कि ढली में एक ही जगह 18 और विकासनगर में एक निजी अस्पताल के आसपास स्ट्रीट लाइटों के 21 प्वाइंटों की दरकार सूची में दिखा रखी है। हाउस में मामला उठने के बाद इस पूरे मामले की अब जांच शुरू हो गई है।</p>
<p>इसके साथ ही लाइटें लगाने का काम भी रोक दिया है। कायदे कानूनों को ताक पर रखकर नगर निगम ने नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए 112 स्थानों की सूची तैयार की थी। इसमें से 47 जगह स्ट्रीट लाइटें लगा भी दी हैं। नगर निगम में 2012 से स्ट्रीट लाइटें लगाने के काम पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। अब मेयर संजय चौहान के आदेशों पर निगम प्रबंधन ने स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए बनाई सूची की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>जांच रिपोर्ट इस माह के अंत में होेने वाले नगर निगम के मासिक हाउस में रखी जानी है। मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस की अनुमति के बगैर ही नई स्ट्रीट लाइटों पर दो करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। शहर के जिन इलाकों में सालों से अंधेरा पसरा है वहां रोशनी की कोई उम्मीद नहीं दिख रही और जो इलाके पहले से रोशन हैं उन्हें नगर निगम जगमग करने की कोशिशों में लगा है।</p>
<blockquote><p>स्ट्रीट लाइटें लगाने में इस कदर लापरवाही बरती है कि शहर के कुछ क्षेत्रों में ऊपर हाई मास्ट लाइट लगा दी हैं और नीचे स्ट्रीट लाइट सोडियम लैंप लगा लगे हैं। 112 में से 47 स्थानों पर नगर निगम नई स्ट्रीट लाइटें लगा चुका है।</p></blockquote>
<p>निगम के सहायक आयुक्त को जांच अधिकारी बनाया है। इस हाउस में सहायक आयुक्त अपनी रिपोर्ट रखेंगे। हाउस में चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।<br />
<strong>&#8211; संजय चौहान मेयर, एमसी शिमला</strong></p>
<p><strong>एक माह में मांगी है रिपोर्ट-</strong> निगम महापौर संजय चौहान ने स्ट्रीट लाइट फर्जीवाड़े की जांच का जिम्मा निगम सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक को सौंपा था। स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए किस आधार पर प्राथमिकता तय की गई इसकी जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।</p>
<p><strong>एमसी हाउस में पार्षदों ने उठाया था मामला- </strong>एमसी के पिछले हाउस में पार्षदों ने स्ट्रीट लाइटों का मामला उठाया था। जाखू वार्ड से पार्षद मनोज कुठियाला के सवाल के जवाब में नगर निगम की ओर से दिए विवरण से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। निगम पार्षद शैलेंद्र चौहान, कुसुम ठाकुर, सरोज ठाकुर, रजनी सिंह, कांता स्याल, कल्याण चंद और भारती सूद ने पार्षद प्राथमिकता को दरकिनार कर मनमाने तरीके से स्ट्रीट लाइट प्वाइंट चिन्हित करने पर सवाल उठाए।</p>
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