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	<title>Shimla Depot Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल परिवहन की खस्ताहाल बसें, कर्मियों की कमी, पूर्व सूचना बिना रूटों का बंद करना लोगों के लिए बन रहा आफत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jul 2019 07:51:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण भी बताया है। यह कहना है ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा का।</p>
<p>सिंघा ने प्रबंध निदेशक, हिमाचल सड़क परिवहन निगम, के माध्यम से एक ज्ञापन सौंप कर 11 जुलाई से पहले आवश्यक मुद्दों के तहत एक बैठक बुलाने के लिए सरकार को नोटिस भेजा है।</p>
<p>इस ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि और बस सेवाओं की संख्या में निरंतर में भारी अंतर है। इस अंतर को दूर करने के लिए निर्मित और स्वीकृत सड़कों पर न केवल अतिरिक्त बसें चलाने की आवश्यकता होती है बल्कि आवागमन के वर्तमान सार्वजनिक और निजी मोड को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी आवश्यकता होती है।</p>
<p>सिंघा ने कहा कि इस ज्ञापन का मसौदा तैयार करते समय, पूरे राज्य के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अगर शिमला जिले के परिवहन डिपो में से कुछ में कर्मियों की चल रही कमी की जांच की जाती है, तो यह राज्य में मौजूद गंभीर स्थिति के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण पेश करेगा।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश के शिमला लोकल डिपो में अभी 240 बसें ही चल पा रही है जबकि शिमला लोकल डिपो के तहत 283 स्वीकृत बस रूट हैं, 111 चालक और 98 परिचालक कम हैं और कर्मचारियों की अत्यधिक कमी को देखते हुए 12 मार्गों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। तारादेवी डिपो के तहत ड्राइवरों की कमी 55 है और कंडक्टरों का आंकड़ा 65 पर है।</p>
<p>सिंघा ने ज्ञापन में कहा कि रोहड़ू डिपो में स्थिति समान रूप से दयनीय है, जहां 24 बसें शून्य मान बुक में हैं यानी तय दूरी चल चुकी है और अब और चलने की स्थिति में नही है और इन बसों को एच आर टी सी सड़को पर दौड़ा रहा है जबकि इन बसों को कबाड़खाने में होना चाहिए था। इस डिपो के तहत 16 बसें 9 साल से अधिक पुरानी हैं और अभी भी चल रही हैं और हर कोई जानता है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की स्थिति क्या है। इसके अलावा ड्राइवरों की कमी का आंकड़ा 49 है और परिचालकों की 46 है।</p>
<p>रामपुर डिपो के तहत जीरो वैल्यू बुक बसों की संख्या 11 है और ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी क्रमशः 60 और 42 है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की इस तरह की दयनीय स्थिति के साथ राज्य में बस सेवाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं है। HRTC प्रबंधन राज्य में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में नाकामयाब हो गया है। बार-बार होने वाली &#8220;मजिस्ट्रियल पूछताछ&#8221; दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए कोई परिणाम नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ केवल लोगो को दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए की जा रही है किसी को कभी भी चूक के लिए दंडित नहीं किया जाता और प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया जाता है।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा है कि एचआरटीसी के हालिया फैसले जिसमे &#8220;बसो में क्षमता से अधिक सवारियां न बिठाए जाने का फैसला हुआ&#8221; उससे लोगों को अधिक असुविधा हुई है। हर दिन लगभग 3 लाख छात्र इन बसों से सफर करते है लेकिन नवीनतम निर्णय के बाद वे ऐसा करने में असमर्थ हुए हैं। हजारों कर्मचारी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।</p>
<p>उनका ये भी कहना है कि लोगों को पूर्व सूचना दिए बिना हर रोज सौ रूटों को निलंबित किया जा रहा है। यह विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, महिलाओं, बुजुर्गों व किसानों के लिए कठिनाइयों का कारण बना है जो अपने खेत का उत्पादन इस सार्वजनिक परिवहन से बाजार तक पहुंचते हैं। अकेले ठियोग में कई बस मार्गों को अभी निलंबित किया जा रहा है इन मार्गों में शिमला-सांभर, शिमला-अलवा, शिमला-गगनघट्टी, शिमला-माहीपुल वाया तल्ली, शिमला-मुंडो, ठियोग जारई, शिमला-श्यामनगर वाया कोटगढ़ व अन्य मुख्य है।</p>
<p>सिंघा ने कहा है कि ड्राइवरों व कंडक्टरों की नई भर्ती करके स्टाफ में चल रही कमी को पूरा करने के अलावा,<br />
इन समस्याओं का कोई अस्थायी समाधान या &#8220;स्टॉप गैप सॉल्यूशन&#8221; नहीं हो सकता है, इसके अलावा उन बसों की कबाड़ में भेज दिया जाना चाहिए जो &#8220;शून्य बुक वैल्यू&#8221; यानी नकारा हो चुकी है और साथ ही नए वाहनों की खरीद की जानी चाहिए, यही इसका स्थाई समाधान होगा।</p>
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