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	<title>Ripon hospital shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Ripon hospital shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>खलीनी वार्ड के लोग दूषित बावड़ी का पानी पीने को मजबूर, प्रतिदिन 10 मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/03/water-contamination-in-shimla-water-resources-increasing-health-issues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 14:55:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के नगर निगम वार्ड खलीनी के लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। नगर निगम ने खलीनी वार्ड के झंझीड़ी में स्थित बावड़ी से पानी के सैंपल लिए, जो पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा न उतर सका। पानी पीने लायक नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यहां पर करीब आठ हजार लोग रहते हैं। नगर निगम ने झंझीड़ी स्थित बावड़ी के पास पानी पीने योग्य नहीं है सूचना पट्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नगर निगम नाकाम रहा है। </p>
<p>मजबूरन लोगों को इसी बावड़ी से पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र पूरी तरह पीलिया की चपेट में आया हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक लोगों को क्लोरिन की गोलियां नहीं दी गई हैं। हालांकि सीएमओ शिमला ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक वार्ड में चार स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करेंगे और क्लोरिन की गोलियां बांटेंगे लेकिन सीएमओ के आदेश भी कागजों में ही सिमटते नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेट दर्द के मामलों में हो रही वृद्धि</strong></p>
<p>दूषित पेयजल से लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों में उल्ट, दस्त व बुखार के साथ पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>स्वास्थ्य केंद्र खलीनी में प्रतिदिन करीब दस मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तीन से चार मरीज बुखार व उल्टी, दस्त से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों को रिपन अस्पताल टेस्ट के लिए भेजा जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong></p>
<p><strong>तीन माह से पेयजल किल्लत</strong></p>
<p>खलीनी में तीन माह से पेयजल किल्लत चल रही है। चार दिन बाद भी सिर्फ आधे घंटे के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस कारण मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
उमा दत्त</p>
<p><strong>पानी की आपूर्ति करने में निगम विफल</strong></p>
<p>जल जीवन है जल के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। नगर निगम पानी की आपूर्ति करने में विफल हो रहा है। मजबूरन लोगों को दूषित बावड़ी से पानी लाना पड़ता है।<br />
पूजा</p>
<p><strong>उबाल कर पीना पड़ रहा पानी</strong></p>
<p>प्रतिदिन पानी उबाल कर पी रहे हैं। नगर निगम पानी उपलब्ध करवा नहीं पा रहा है, तो मजबूरन दूषित पानी को उबाल कर पीना पड़ रहा है। ऐसे में सिलेंडर की खपत भी दुगनी हो गई है।<br />
निशा</p>
<p><strong>आम आदमी नहीं खरीद सकता पानी</strong></p>
<p>आम आदमी खरीद कर पानी ला नहीं सकता, नलकों में पानी आ नहीं रहा है। ऐसे में बावड़ी ही विकल्प है। मजबूरन यही से पानी भरना पड़ता है।<br />
पल्लवी</p>
<p><strong>टैक्स देने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी</strong></p>
<p>पहले नगर निगम ने लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिला दिया और अब पानी दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बावड़ी ही एक विकल्प था, यहां पर भी पानी पीने योग्य नहीं है। टैक्स देने के बावजूद पानी लोगों को नहीं मिल रहा है।<br />
विरेंद्र कुमार</p>
<p>Photo/Representational </p>
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		<title>रिपन अस्पताल में एक्सपायरी डेट की दवाएं  मुफ्त देकर वाहवाही लूट रही सरकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/free-medicins-in-himachal-hospitals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:19:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[DDU Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Expired medicins]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Hp Health Director]]></category>
		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है। डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला के डीडीयू (रिपन) अस्पताल में मरीजों को खराब होने वाली दवाएं मुफ्त में बांटी जा रही है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मरीजों को एक्सपायरी डेट के महीने की दवाएं अस्पताल प्रशासन दे रहा है।</p>
<p>डिस्पेंसरी से दी जा रही दवाओं की एक्सपायरी डेट फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की है। अस्पताल प्रशासन की इस बेखबरी से मुफ्त दवाओं की सरकारी खरीद पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय (रिपन) के पांच नंबर कमरे में डिस्पेंसरी खोली गई है।</p>
<p>डाक्टरों द्वारा लिखी जाने वाले कई दवाएं इस डिस्पेंसरी से मुफ्त में दी जा रही है। डिस्पेंसरी से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि अस्पताल प्रशासन की अनुमति पर यह दवाएं खरीदी जाती हैं। डाक्टरों के पर्ची पर दवा लिखने के बाद डिस्पेंसरी से दवा दी जाती है।</p>
<p>पैरासिटामौल की दवा में एक्सपायरी डेट अप्रैल 2016 लिखी गई है। जबकि लैसीपरो 500 दवा में एक्सपायरी डेट फरवरी 2016 लिखी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल प्रशासन की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि जिसके तहत खराब होने वाली दवाओं को बांटा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि फरवरी एक्सपायरी डेट की दवा अभी एक्सपायर नहीं हुई है। मार्च में इसे एक्सपायर माना जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डा. डी एस गुरंग ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी।</p>
<p>सभी सीएमओ को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि एक साल की लाइफ वाली दवाओं की ही खरीद की जाए। डीडीयू में अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/free-medicins-in-himachal-hospitals/">रिपन अस्पताल में एक्सपायरी डेट की दवाएं  मुफ्त देकर वाहवाही लूट रही सरकार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>शिमला मे पीलिया के 60 नए मामले,  एक महिला की मौत, अआईजीएमसी व केएनएच ने साधी चुप्पी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/14/jaundice-death-at-igmc-shimla/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Jan 2016 11:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[hepatitis e virus]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[IGMC Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
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		<category><![CDATA[Ripon hospital shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है। शिमला के निगम विहार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> राजधानी शिमला में पीलिया से एक महिला की मौत हो गई है। प्रदेश में यह इस साल की पीलिया से पहली मौत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस मामले को दबाने में जुट गया है। आईजीएमसी शिमला व कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) का प्रबंधन इस मामले से पल्ला झाड़ रहा है।</p>
<p>शिमला के निगम विहार की रहने वाली सुनीता (29) की मौत पीलिया से आईजीएमसी में हुई है। रिपोर्ट में हेपेटाईटिस ई होने का हवाला दिया गया है। आईजीएमसी में मंगलवार देर रात को सुनीता की मौत हुई है। सुनीता गर्भवती थी व उसका पति रॉबिन सिंह आठ जनवरी को उसे केएनएच में ले गया। वहां चिकित्सकों ने चेकअप करने पर बताया कि सुनीता को पीलिया है। ऐसे में प्रसव में काफी परेशानी हो सकती है। यहां तक कि मां या बच्चे में से एक की मौत भी हो सकती है। नौ जनवरी को सुबह छह बजे सुनीता ने बेटे को जन्म दिया व इसके बाद कोमा में चली गई। </p>
<p>10 जनवरी को केएनएच की चिकित्सकों ने सुनीता को आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। उसे आईसीयू में रखा गया। वह तीन दिन आईजीएमसी में रही। मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। वहीं बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बच्चे को पीलिया है या नहीं। इस मामले पर आईजीएमसी व केएनएच दोनों अस्तपाल प्रबंधनों ने चुप्पी साध ली है। हालांकि चिकित्सकों का तर्क है कि प्रसव के दौरान लीवर फेल होने से सुनीता की मौत हुई है मगर यह बात उसके परिजन मान नहीं रहे हैं।</p>
<p>पति रॉबिन सिंह ने कहा कि डॉक्टरों ने डिलीवरी के दौरान सुनीता को पीलिया की बीमारी बताई थी। उन्होंने बताया था कि नार्मल डिलीवरी के बाद सुनीता का लीवर खराब हो गया था। वहीं, वाल्मीकि महासभा के महासचिव ने कहा है कि रॉबिन सिंह गरीब परिवार से संबंध रखता है। उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। शहर में पीलिया काफी फैलता जा रहा है। इस पर रोकथाम जरूरी है।</p>
<p><em>अभी मैं बैठक में हूं। इस मामले में बाद में बात करता हूं।<br />
डॉ. एलएस चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक,केएनएच</em></p>
<p>राजधानी शिमला में बुधवार को पीलिया के 60 नए मामले सामने आए। अकेले डीडीयू अस्पताल में पीलिया के 26 मामले सामने आए  हैं। करीब 100 लोगों कें सैंपल लिए गए थे। इनमें से 60 सैंपल पॉजीटिव आए हैं।</p>
<p>पीलिया से शिमला शहर में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। प्रशासन अब तक पीलिया पर काबू पाने में नाकाम रहा है व अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। लैब्स के बाहर लोगों को टेस्ट करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लोग अब शिमला शहर का पानी पीने से भी डरने लगे हैं। </p>
<p>सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों से पानी पीने से शिमला के लोग परहेज कर रहे हैं। अस्पतालों में आए मरीज और तीमारदार अपने साथ पानी की बोतल साथ ला रहे हैं। शहर में पीलिया फैले को एक महीना होने को है। अश्वनि खड्ड से पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इसके बावजूद शहर में पीलिया के मामलों का आना चिंता का विषय है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजना राव ने बताया कि पीलिया के 60 नए मामले सामने आए हैं। लोगों को स्वच्छ और उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए। </p>
<p><strong>शहर में नहीं हुआ अलर्ट जारी</strong></p>
<p>हैरानी इस बात की है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया को लेकर कोई जागरूकता अभियान शहर में नहीं चलाया है। यहां तक कि शहर में कोई अलर्ट भी जारी नहीं किया है। लोगों को पीलिया से बचने के संबंध में उपाय भी नहीं बताए जा रहे हैं। वहीं अधिकारी कार्यालय में बैठ कर फाइलों को निपटाने में लगे हुए हैं। नगर निगम शहर के कुछ हिस्सों में जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है।</p>
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