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	<title>paonta sahib Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>paonta sahib Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>सिरमौर: मेडिकल लीव के बहाने राजस्थान घूमने चला गया तहसील का पूरा स्टाफ, पीछे आम जनता को हुई परेशानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 12:02:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सिरमौर: हिमाचल प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। पांवटा साहिब की माजरा तहसील के नायब तहसीलदार समेत पूरा स्टॉफ मेडिकल लीव का बहाना बनाकर राजस्थान सैर-सपाटा करने चला गया, जिससे तहसील कार्यालय में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरमौर:</strong> हिमाचल प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। पांवटा साहिब की माजरा तहसील के नायब तहसीलदार समेत पूरा स्टॉफ मेडिकल लीव का बहाना बनाकर राजस्थान सैर-सपाटा करने चला गया, जिससे तहसील कार्यालय में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों को बिना काम कराए ही निराश होकर लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>अधिकारियों की लापरवाही , लोगों को झेलनी पड़ी परेशानी</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार , नायब तहसीलदार इंद्र कुमार सहित अन्य कर्मचारियों ने एक साथ मेडिकल लीव ली और जैसलमेर छुट्टियां मनाने चले गए। इस दौरान कार्यालय में कामकाज पूरी तरह से बंद रहा और आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मौज- मस्ती करते हुए फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।</p>
<p><strong>कारण बताओ नोटिस जारी</strong></p>
<p>एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने मामले पर संज्ञान लेते हुए नायब तहसीलदार इंद्र कुमार और अन्य कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही , एक साथ इतनी छुट्टियां मंजूर करने वाले पांवटा साहिब के नए तहसीलदार रविंद्र सिसोदिया को भी नोटिस जारी किया गया है। एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने बताया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की लोकेशन मांगी गई थी लेकिन अभी तक अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
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		<title>लम्बाई ज्यादा होने के कारण नाहन की वर्कशॉप में बेकार खड़ी 50 लाख रुपए लागत की दो बसें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/05/20/jnnurm-buses-too-long-for-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 May 2016 14:49:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- माननीय ट्रांसपोर्ट मंत्री बाली जी, आपने जेएनआरयूएम के तहत दो बसें नाहन डिपो भिजवाई हैं, लेकिन इन बसों का क्या करें। बेहतर होता कि इन बसों को भेजने की बजाय 42 सीटर बसें भेज देते, जिससे जनता को कुछ फायदा तो मिलता क्योंकि इन बसों की लंबाई 12 मीटर होने के कारण यह बसें [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  माननीय ट्रांसपोर्ट मंत्री बाली जी, आपने जेएनआरयूएम के तहत दो बसें नाहन डिपो भिजवाई हैं, लेकिन इन बसों का क्या करें। बेहतर होता कि इन बसों को भेजने की बजाय 42 सीटर बसें भेज देते, जिससे जनता को कुछ फायदा तो मिलता क्योंकि इन बसों की लंबाई 12 मीटर होने के कारण यह बसें यहां नहीं चल सकती हैं। शायह यह बात एचआरटीसी वर्कशॉप में बेकार खड़ी इन बसों को देखकर हर किसी के जहन में उठ रही होगी।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि इन बसों की खरीद पर 50 से 60 लाख रुपए खर्च किए गए। एक तरफ एचआरटीसी घाटे की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के क्रियाकलापों से मुनाफे की उम्मीद नहीं की जा सकती। बताते हैं कि इन बसों के इस्तेमाल के लिए एचआरटीसी परेशानी में है।</p>
<p>मजेदार बात यह है कि इन बसों को खरीदने से पहले इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया कि पहाड़ी राज्य में इस तरह की बसों का क्या औचित्य है। हैरानी इस बात पर भी है कि इतनी लंबी बसों में महज 36 सवारियों के ही बैठने की व्यवस्था है। उधर क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव बिष्ट ने माना कि एक-डेढ़ महीने से इन बसों का इस्तेमाल नहीं हो पाया है। अलबत्ता उन्होंने कहा कि इन बसों को पांवटा साहिब-नालागढ़-ऊना चलाने का प्रस्ताव है। इस रूट पर बसों को चलाया जा सकता है। लेकिन परमिट न मिलने के कारण मामला लटका हुआ है।</p>
<p>Photo: Representational Image</p>
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		<title>पांवटा साहिब के इंदोली स्कूल  मे विध्यार्थी 44 लेकिन आधायपक सिर्फ 1,	 सरकार ने उसका भी कर दिया तबादला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/goverenment-school-indoli-paonta-sahib/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2016 11:26:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[सिरमौर]]></category>
		<category><![CDATA[Education system in Himachal]]></category>
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		<category><![CDATA[HP Education board]]></category>
		<category><![CDATA[HP Government]]></category>
		<category><![CDATA[paonta sahib]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य होने का दम भरने वाले हिमाचल के धरातलीय आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इसकी बानगी गिरिपार क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां पर न तो पूरा स्टाफ है और न ही मजबूत आधारभूत संरचना। कफोटा कलस्टर के अधीन आने वाला मिडल स्कूल इंदोली [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/goverenment-school-indoli-paonta-sahib/">पांवटा साहिब के इंदोली स्कूल  मे विध्यार्थी 44 लेकिन आधायपक सिर्फ 1,	 सरकार ने उसका भी कर दिया तबादला</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य होने का दम भरने वाले हिमाचल के धरातलीय आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इसकी बानगी गिरिपार क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां पर न तो पूरा स्टाफ है और न ही मजबूत आधारभूत संरचना। कफोटा कलस्टर के अधीन आने वाला मिडल स्कूल इंदोली इस समय बिना शिक्षक के चल रहा है। सड़क से करीब 7 किलोमीटर दूर इस स्कूल में 44 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनको एक ही शिक्षक पढ़ा रहा था। हाल ही में सरकार ने उसका भी तबादला कर दिया, जिसके बाद से यह स्कूल शिक्षक विहीन हो गया है। </p>
<p>आजकल स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, जिन्हें आयोजित करवाने के लिए शिक्षा विभाग कफोटा से प्रतिनियुक्ति पर एक शिक्षक भेज रहा है, जो नाकाफी है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में छात्रों की संख्या 100 के पार हो सकती है। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चे इस स्कूल में दाखिला न लेकर 7 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर कफोटा जा रहे हैं, जिनकी सारी ऊर्जा चढ़ाई चढ़ने में व्यर्थ हो जाती है। उधर, राजनेताओं का भी रवैया चुनाव तक सिमट कर रह गया है। ऐसे कार्यों को करवाने के लिए कोई नेता आगे नहीं आता, जिसके चलते जनता का उनसे मोहभंग हो रहा है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस स्कूल में शिक्षक तैनात किया जाए, नहीं तो इसे बंद कर दिया जाए। </p>
<p>Credit:Punjab Kesari/Image Credit:Shutter Stock</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/goverenment-school-indoli-paonta-sahib/">पांवटा साहिब के इंदोली स्कूल  मे विध्यार्थी 44 लेकिन आधायपक सिर्फ 1,	 सरकार ने उसका भी कर दिया तबादला</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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