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	<title>Mansoor Ahmad Mir Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>गुनहगार अफसरों को बचाने के लिए कोर्ट से झूठ बोल रही सरकार, पुलिस एसआईटी रिपोर्ट में भी  कई खामियां: हाईकोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/26/hp-government-trying-to-save-officers-responsible-for-jaundice-outbreak-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Feb 2016 10:05:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पीलिया मामले में अफसरों ने जो रिपोर्ट दी है उसमें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला है। उनके खिलाफ केस चलना चाहिए। राज्य सरकार को पीलिया के कारण मौत के मुंह में समाए लोगों के परिजनों को अंतरिम राहत के तौर पर दो-दो लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने पीलिया मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए कोर्ट को गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को दंडित करने के उद्देश्य से अलग-अलग मामले चलाने के भी आदेश पारित किए।</p>
<p><strong>एसआईटी रिपोर्ट में खामियां</strong></p>
<p>कोर्ट ने इस मामले की जांच में जुटी एसआईटी की रिपोर्ट में खामियां स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें न तो यह बताया गया है कि पानी लिफ्ट करने से जुड़ी तमाम प्रक्रिया में वर्ष 2007 से कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात थे और न ही यह बताया गया है कि उनको तलाशने एवं उनके विरुद्ध जांच करने के लिए क्या किया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूषित पानी पिलाने के गुनहगार अधिकारी कौन हैं। कोर्ट ने खेद जताया कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जा रही है या नहीं।</p>
<p>एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पानी चेक करते थे और उच्चाधिकारियों की पानी जांचने में कोई रुचि ही नहीं थी। नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने भी पानी जांचने की जहमत नहीं उठाई।</p>
<p><strong>ठेकेदार की पेमेंट रोकी</strong></p>
<p>कोर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की देखरेख के लिए रखे गए ठेकेदार अक्षय डोगर को 31 जनवरी तक जारी की जाने वाली बकाया राशि 99 लाख 45 हजार के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>कोर्ट ने नई स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में बताएं। पीलिया से मरने वाले और अन्य पीड़ितों का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है या नहीं। प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वे जनसाधारण को पीलिया के बारे में जागरूक करें व इससे बचने के उपाय बताएं।</p>
<p>शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्राथमिक शिक्षा से विश्वविद्यालय के छात्रों को स्वच्छ व मिनरल वाटर मुहैया करवाना सुनिश्चित करंे। प्रदेश में पर्याप्त स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्थान गठित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।</p>
<p><strong>सचिव साथियों को बचाने के लिए कोर्ट को कर रही गुमराह</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर को झूठा वक्तव्य देने का दोषी पाते हुए पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ गलत और विरोधाभासी वक्तव्य सामने रखने के लिए कार्रवाई अमल में लाई जाए। कोर्ट ने आशंका जाहिर की कि सचिव या तो अपने पुराने सहयोगियों, अधीनस्थ अधिकारियों को बचाने एवं उनके हक में मामला तैयार करने की कोशिश कर रहीं हैं या फिर कोर्ट को पूरी तरह गुमराह करने का प्रयत्न कर रही हैं। कोर्ट ने अधिकारी के वक्तव्य में पाया कि एक तरफ वह कह रही हैं कि अश्वनी खड्ड के बारे में कोर्ट की ओर से पारित पिछले आदेशों की अनुपालना की जाती रही और दूसरी तरफ कहती हैं कि अश्वनी खड्ड से पानी लिफ्ट करने के बाद प्लांट का उचित ढंग से रखरखाव नहीं किया जा रहा था इसलिए सप्लाई गंदी होने के कारण प्लांट को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>सचिव प्रदूषण बोर्ड ने समय पर नहीं दी अश्वनी खड्ड की रिपोर्ट</strong></strong></p>
<p>कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार पर भी ऐसे ही मामले चलाने के आदेश दिए। बोर्ड के सदस्य सचिव ने कोर्ट के आदेशानुसार अश्वनी खड्ड संबंधित रिपोर्ट हर तीन माह में कोर्ट में पेश नहीं की।</p>
<p>उन्होंने 18 सितंबर 2014 के बाद केवल एक बार रिपोर्ट पेश की, वो भी झूठी और गुमराह करने वाली पाई गई। कोर्ट ने अन्य अधिकारियों को भी अवमानना का दोषी पाया है, जिन्हें शिमला शहर में शुद्ध व पर्याप्त पानी वितरण करने के लिए समय-समय पर कोर्ट ने आवश्यक आदेश दिए थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>कोर्ट ने महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह तीन दिन के भीतर ऐसे अधिकारियों के नाम अदालत को बताएं ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जा सके।</p>
<p> <strong>दर्जनों अधिकारी बनाए प्रतिवादी</strong></p>
<p>कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें मुख्य सचिव सहित शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को भी प्रतिवादी बनाया। वहीं जन संपर्क विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सभी जिला दंडाधिकारी, सभी पुलिस अधीक्षक और सभी सीएमओ को भी प्रतिवादी बनाया है।</p>
<p><strong>आईपीएच में इन्हें नोटिस</strong></p>
<p>कोर्ट ने आईपीएच विभाग के इंजीनियर सुमन विक्रांत, सुनील जस्टा को भी नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला चलाया जाए और क्यों न उनके खिलाफ झूठे हल्फनामे दायर करने के आरोप के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p> strong>सीएस आैर सचिव आईपीएच से 2007 से अब तक की रिपोर्ट तलब</strong></p>
<p>मुख्य सचिव व सचिव आईपीएच से कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि कौन से अधिकारी वर्ष 2007 से आईपीएच विभाग में स्वच्छ पानी मुहैया करवाने के लिए तैनात किए गए थे। मुख्य अभियंता से चपरासी तक का ब्योरा मांगा गया है।</p>
<p>ठेकेदार को हस्तांतरित धन, प्रक्रिया तथा उसके बिल पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई है।</p>
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		<title>पीलिया से मरने वाले लोगों को दो-दो लाख, ठेकेदार को देय 99 लाख की राशि पर भी रोक : हाईकोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Feb 2016 11:26:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP government Chief Secretary]]></category>
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		<category><![CDATA[Jaundice Deaths]]></category>
		<category><![CDATA[Justice Trilok Singh Chauhan]]></category>
		<category><![CDATA[Mansoor Ahmad Mir]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Jaundice Outbreak]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में महामारी का रूप धारण कर चुके पीलिया को लेकर बेफिक्र नजर आ रही सरकार पर हाईकोर्ट का डंडा चल गया है। वीरवार सुबह दस बजे हाईकोर्ट खुलते ही पीलिया मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पीलिया से मरने वाले लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में महामारी का रूप धारण कर चुके पीलिया को लेकर बेफिक्र नजर आ रही सरकार पर हाईकोर्ट का डंडा चल गया है। वीरवार सुबह दस बजे हाईकोर्ट खुलते ही पीलिया मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पीलिया से मरने वाले लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने साल 2007 से 2016 तक पानी मामले से जुड़े सभी अफसरों का रिकॉर्ड भी तलब किया है। एसटीपी के ठेकेदार को देय 99 लाख रुपये की राशि जारी करने पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर कोर्ट में पैसे जमा करने के आदेश दिए हैं।</p>
<p><strong>मुख्य सचिव से पूछा, क्यों न आप पर कार्रवाई की जाए  </strong></p>
<p>हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश त्रिलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि दोषी अफसरों के खिलाफ अभी तक क्या-क्या कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट ने सभी जिलों के सीएमओ से तीन मार्च तक मृतकों की संख्या की डिटेल मांगी हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों का पालन नहीं करने पर सरकार को नोटिस भी दिया है। मुख्य सचिव को इस मामले में पार्टी बनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा कि आदेशों की पालना नहीं हुई ऐसे में क्यों न आपको पार्टी बनाया जाए। क्यों न आप पर कार्रवाई की जाए।</p>
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