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	<title>Kinnaur Hydroprojects Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल में बढ़ा है मानवाधिकारों के हनन का ग्राफ, श्रम कानून लागू करने की मांग करने वाले मजदूर जेलों में बंद: सिंघा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Dec 2016 09:01:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), हिमाचल प्रदेश की राज्य कमेटी ने 68वें मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष में बैठकों एवं सेमिनार के माध्यम से मानव अधिकारों के सम्बंध में चर्चा की। शिमला में पार्टी की बैठक में शिमला के पूर्व विधायक एवं पूर्व पार्टी राज्य सचिव राकेश सिंघा ने कार्यकर्ताओं को अवगत कराया कि दिसम्बर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), हिमाचल प्रदेश की राज्य कमेटी ने 68वें मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष में बैठकों एवं सेमिनार के माध्यम से मानव अधिकारों के सम्बंध में चर्चा की। शिमला में पार्टी की बैठक में शिमला के पूर्व विधायक एवं पूर्व पार्टी राज्य सचिव राकेश सिंघा ने कार्यकर्ताओं को अवगत कराया कि  दिसम्बर 10, 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में इस दिन को सार्वजनिक तौर पर ‘मानवाधिकार दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। सिंघा ने खेद जताते हुए कहा कि इस वर्गीय विभाजित समाज में आज राज्य का तंत्र ही मानवाधिकारों के हनन का माध्यम बन गया है जो पर बहुमत के समाज की कीमत पर मुटठीभर अमीरों के मुनाफे को उच्चतम स्तर पर ले जाने की अनुमति देता है। और यही मानवाधिकारों के हनन का बुनियादि कारण है।</p>
<p>बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मानवाधिकारों के हनन का ग्राफ हिमाचल प्रदेश में विशेषतौर पर बढ़ा है। राकेश सिंघा ने शौंगठोंग-कड़छम विद्युत परियोजना में कार्यरत मज़दूरों के अधिकारों के हनन के संदर्भ में कहा कि मज़दूरों का मानवाधिकारों के दायरे के अंदर अपने बुनियादि अधिकारों की मांग को भी इस तंत्र द्वारा कानून व्यवस्था की उल्लंघना की संज्ञा दी जाती है। </p>
<p>सिंघा ने कहा कि यह कितनी विडम्बना है कि अपने अधिकारों की मांग के लिए मज़दूरों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। जबकि मज़दूरों का दोष मात्र यह है कि वे श्रम कानूनों को लागू करने, अपने लिए न्युनतम वेतन, टनल के अंदर सुरक्षा प्रदान करने, मज़दूरों के रहन-सहन को बेहतर बनाने, वेतन स्लिप, ई.पी.एफ. कानून के तहत सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर रहे थे। इन मांगों के लिए प्रदेश सरकार के इशारे पर प्रशासन उनके खिलाफ आई.पी.सी. की धारा 307 के तहत झूठे अपराधिक मुकदमे दायर करता है। मज़दूरों के खिलाफ की गई एफ.आई.आर. में दर्ज शिकायत को कोई भी कानून की जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी यह कहेगा कि इस प्रकार के किसी भी अपराध की सुनवाई तो पंचायतों द्वारा की जा सकती है।</p>
<p>सिंघा ने कहा कि 2013 में मज़दूरों के नेता सोम देव को न्यूनतम वेतन की मांग करने पर पटेल कम्पनी द्वारा निकाल दिया गया जिस कारण से सोम देव ने आत्महत्या की। मानवाधिकारों की इस प्रकार की घोर उल्लंघना के अन्य भी कई सबूत सरकार के श्रम विभाग के पास मौजूद है जिसमें विभाग ने श्रम कानूनों की अवेहलना के लिए कम्पनी तथा ठेकेदारों के खिलाफ दर्ज किए है। ई.पी.एफ. कमीश्नर ने भी ठेकेदारों पर ई.पी.एफ. कानून के प्रावधानों को लागू न करने के खिलाफ केस दर्ज किये हैं।</p>
<p>स्थिति यह है कि आज इन मज़दूरों के बच्चों को दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है क्योंकि इनके माता-पिता ही मज़दूरी व काम करके कमाने वाले थे जोकि आज जेलों में बंद हैं।</p>
<p>पूर्व विधायक एवं मज़दूरों के नेता राकेश सिंघा ने सरकार से तीन सवाल किए हैं कि प्रदेश सरकार बताए कि देश में शौंगठोंग-कड़छम परियोजना क्षेत्र के इलावा कहीं भी ऐसी कोई जगह है जहां पिछले 9 महीनों से धारा 144 लगाई गई हो? </p>
<p>सिंघा ने कहा कि प्रदेश सरकार इस सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली सरकार के राम लीला मैदान में बाबा रामदेव के प्रदर्शन केस पर संज्ञान के तहत धारा 144 के संदर्भ में बनाये गए नियमों को मानने से क्यों इंनकार कर रही है?</p>
<p>सिंघा ने पूछा कि आखिर किसके इशारे पर किन्नौर प्रशासन को इस प्रकार के कठोर एवं निष्ठुर कानून को लागू करनेे की इजाज़त दी जा रही है? तथा ठेकेदारों को मज़दूरों की लूट की छूट देने की इजाज़त दी जा रही है?</p>
<p>सिंघा ने कहा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) इस बात पर हैरान है कि 20 सितम्बर, 2016 के माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किये जिसमें कहा गया है कि मज़दूर हड़ताल खत्म करें तथा कम्पनी को सभी कानूनों को लागू करने, मज़दूरों को तीन महीने के अंदर (20 दिसम्बर, 2016 तक) वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। जबकि इस जवाबदेही से बचने के लिए पटेल कम्पनी तथा इसके ठेकेदारों ने 900 मज़दूरों की सेवायें समाप्त करने का रास्ता चुना जो कि हि0प्र0 के इतिहास में आज से पहले कभी नहीं हुआ।</p>
<p>भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), मानवाधिकार दिवस के अवसर पर कि है कि पटेल कम्पनी व इसके ठेकेदारों पर इस प्रकार से किए गए मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के लिए कड़ी कार्यवाही की जाए तथा निकाले गए सभी मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें बहाल किया जाए।</p>
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