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	<title>JNNURM Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>JNNURM Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>धर्मशाला ने जीती स्मार्ट  सिटी की जंग , शिमला से 15 अंक आगे निकला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/08/dharamshala-to-becomes-smart-city/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Jan 2016 11:12:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश का एकमात्र स्मार्ट शहर धर्मशाला ही बनेगा। हाईकोर्ट की ओर से धर्मशाला शहर को स्मार्ट सिटी चुनने की अधिसूचना रद्द करने के बाद राज्य सचिवालय में एक बार फिर स्मार्ट सिटी हाईपावर कमेटी की बैठक हुई। इसमें नए सिरे से शिमला और धर्मशाला शहर का चयन करने के लिए आंकड़ों का आकलन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश का एकमात्र स्मार्ट शहर धर्मशाला ही बनेगा। हाईकोर्ट की ओर से धर्मशाला शहर को स्मार्ट सिटी चुनने की अधिसूचना रद्द करने के बाद राज्य सचिवालय में एक बार फिर स्मार्ट सिटी हाईपावर कमेटी की बैठक हुई। इसमें नए सिरे से शिमला और धर्मशाला शहर का चयन करने के लिए आंकड़ों का आकलन किया गया। </p>
<p>केंद्र की गाइडलाइन की अनुसार कमेटी ने दूसरी बार भी धर्मशाला को शिमला से ज्यादा नंबर दिए हैं। धर्मशाला को सबसे ज्यादा 90.63 जबकि शिमला 77.5 नंबर मिले हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगर निगम शिमला और धर्मशाला के अलावा 14 शहरों के अधिकारियों ने भी भाग लिया। </p>
<p>इस बैठक के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी ने धर्मशाला स्मार्ट सिटी के चयन की रिपोर्ट मुख्य सचिव पी मित्रा को सौंप दी है। बैठक में शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया, नगर निगम शिमला और धर्मशाला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विभाग के निदेशक पठानिया ने बताया कि दोबारा आकलन में भी धर्मशाला को सर्वाधिक नंबर मिले हैं।</p>
<p><strong>इस बार 100 नहीं 80 नंबरों में हुआ आकलन</strong><br />
स्मार्ट सिटी के चयन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से तय नियम के अनुसार जिस शहर में जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के प्रोजेक्ट चल रहे हैं वहां 100 से नंबरिंग जबकि जिन शहरों में इस योजना के तहत प्रोजेक्ट के लिए पैसा जारी नहीं हुआ है वहां 80 में से मार्किंग की गई। शिमला शहर में जेएनएनयूआरएम के प्रोजेक्ट चल रहे हैं, ऐसे में यहां 100 से मार्किंग हुई है। अन्य शहरों में जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट न होने से 80 में से मार्किगिं की गई। ऐसे में धर्मशाला को सबसे ज्यादा नंबर मिले हैं। </p>
<p><strong>अब धर्मशाला नगर निगम ने जताई आपत्ति-</strong> बैठक में धर्मशाला नगर निगम ने शिमला एमसी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठाई है। सूत्रों के अनुसार बैठक में धर्मशाला नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि फार्म में 5 और 6 नंबर कॉलम में स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव हाउस से पास किया जाना था, लेकिन नगर निगम शिमला ने ऐसा नहीं किया। दूसरा विकास कार्यों के बारे में लोगों की भी राय भी ली जानी चाहिए थी, लेकिन नहीं किया गया। ऐसे में शिमला नगर निगम को स्मार्ट सिटी के लिए शामिल ही नहीं किया जाना चाहिए था। </p>
<p><strong>ढंग से नहीं सुना पक्ष, कोर्ट जाएंगे</strong><br />
स्मार्ट सिटी को लेकर पहले की गई नंबरिंग में शिमला और पिछड़ गया है। शिमला को पहले 85 जबकि धर्मशाला को 87.5 नंबर मिले थे। पहले शिमला धर्मशाला से ढाई नंबर से पीछे था अब शिमला साढ़े सात नंबर पीछे हो गया है। शिमला के महापौर संजय चौहान ने कहा कि बैठक में उनका पक्ष ढंग से सुना नहीं गया। </p>
<p>बैठक में हर प्वाइंट पर चर्चा के दौरान निगम ने अपना पक्ष रखा है। बाकायदा डाक्यूमेंट देकर इसे नोट कराया गया है। अभी तक स्मार्ट सिटी की प्रोसीडिंग्स नहीं आई है। अगर अफसरों ने धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित किया है तो वह किस आधार पर किया होगा, यह देखना होगा। गलत मार्किगिं के लिए नगर निगम के पास हाईकोर्ट के दरवाजे खुले हैं।स्मार्ट सिटी को लेकर पहले की गई नंबरिंग में शिमला और पिछड़ गया है। शिमला को पहले 85 जबकि धर्मशाला को 87.5 नंबर मिले थे। पहले शिमला धर्मशाला से ढाई नंबर से पीछे था अब शिमला साढ़े सात नंबर पीछे हो गया है। शिमला के महापौर संजय चौहान ने कहा कि बैठक में उनका पक्ष ढंग से सुना नहीं गया। </p>
<p>बैठक में हर प्वाइंट पर चर्चा के दौरान निगम ने अपना पक्ष रखा है। बाकायदा डाक्यूमेंट देकर इसे नोट कराया गया है। अभी तक स्मार्ट सिटी की प्रोसीडिंग्स नहीं आई है। अगर अफसरों ने धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित किया है तो वह किस आधार पर किया होगा, यह देखना होगा। गलत मार्किगिं के लिए नगर निगम के पास हाईकोर्ट के दरवाजे खुले हैं।</p>
<p><strong>100 में से नंबर मिलते तो शिमला चुन लिया जाता स्मार्ट सिटी</strong><br />
न्यायालय के आदेशों के बाद स्मार्ट सिटी के लिए पात्र शहर के चयन के दौरान अगर शिमला और धर्मशाला दोनों शहरों को 100 में से अंक दिए जाते तो शिमला का नाम फाइनल होना तय हो गया था। लेकिन चयन में शिमला को 100 में से और धर्मशाला को 80 में से अंक दिए गए। शहर के चयन को लेकर बदली गई व्यवस्था के कारण शिमला पिछड़ गया। बैठक के दौरान चयन समिति के सदस्य नगर निगम शिमला के मेयर संजय चौहान ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। </p>
<p>स्मार्ट सिटी के लिए पात्र शहर का चयन करते हुए जब दोनों शहरों को सौ में से अंक दिए गए तो शिमला के 77.5 और धर्मशाला के कुल 72 अंक बने। इसके बाद जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के आधार पर जब चयन की व्यवस्था बदली गई तो धर्मशाला के अंक बढ़ाकर 90.63 कर दिए गए। चयन को लेकर निगम महापौर संजय चौहान ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई तो उनसे आपत्ति लिखित में मांगी गई।</p>
<p><strong>सरकार के दबाव में गड़बड़ी की कोशिश: मेयर</strong><br />
लिखित में देने के बाद आपत्तियों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया। सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान सरकार के अधिकारियों ने पिछली बार स्मार्ट सिटी के चयन में जेएनएनयूआरएम के अंकों को लेकर अपनी गलती स्वीकारी। जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के आधार पर शहर के चयन को लेकर इस बार व्यवस्था में बदलाव से यह साफ हो गया कि स्मार्ट सिटी के चयन में पिछली बार कहीं न कहीं कोई चूक रह गई थी। </p>
<p>नगर निगम शिमला के मेयर सरकार संजय चौहान ने कहा कि सरकार के दबाव में मिशन डायरेक्टर और मेंबर सेक्रेटरी ने पिछली बार भी आंकड़ों के साथ गड़बड़ी की थी और इस बार भी गड़बड़ी करने का पूरा इरादा है। बैठक में जेएनएनयूआरएम सिटी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। हमने लिखित में अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। भारत सरकार के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति में आयोजित इस बैठक की प्रोसिडिंग पर मेरे हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए हैं।</p>
<p>धर्मशाला को शिमला से ज्यादा नंबर स्मार्ट शहर के अब धर्मशाला नगर निगम ने जताई आपत्ति  हिमाचल प्रदेश का एकमात्र स्मार्ट शहर धर्मशाला ही बनेगा।</p>
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