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	<title>HP Govt Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Govt Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>चम्बा की पाठशाला में कहीं 15 बच्चों लिए 3 अध्यापक, तो कहीं  44 बच्चों को पढ़ा रहा  सिर्फ 1अध्यापक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/19/hp-government-schools-in-chamba/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Nov 2016 12:35:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[चम्बा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है चम्बा- डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह में शिक्षा ग्रहण कर रहे 44 बच्चों के लिए नियुक्त 2 अध्यापकों में से एक को राजकीय [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है</strong></p>
<p><strong>चम्बा-</strong> डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह में शिक्षा ग्रहण कर रहे 44 बच्चों के लिए नियुक्त 2 अध्यापकों में से एक को राजकीय प्राथमिक पाठशाला जन्ना में शिक्षा विभाग ने तैनात कर लदवाह स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को पटरी से नीचे लाने का काम किया है।</p>
<p>जन्ना स्कूल में पहले से ही 2 अध्यापक मौजूद हैं, वहीं अब वहां 3 अध्यापक 15 बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं, ऐसे में जिला प्रशासन लदवाह स्कूल में शिक्षा की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने के लिए जन्ना स्कूल में तैनात अध्यापक को दोबारा स्कूल में भेजने के शिक्षा विभाग को निर्देश जारी करे। यह बात राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह की स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष रेखा देवी की अगुवाई में अन्य सदस्यों ने एडीएम चम्बा को इस संदर्भ में अपना मांग पत्र सौंपते हुए कही।</p>
<p>स्कूल की प्रबंधन समिति की अध्यक्ष ने बताया कि लदवाह स्कूल में 44 बच्चों पर 2 अध्यापक तैनात थे तो स्कूल की शिक्षा व्यवस्था सुचारू बनी हुई थी लेकिन जब से यहां के एक अध्यापक को जन्ना में तैनात किया है तो इस स्कूल के दोपहर के भोजन की व्यवस्था के साथ एक अध्यापक द्वारा 5 कक्षाओं को शिक्षा देना बेहद मुश्किल हो रहा है। सही शब्दों में कहें तो इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है।</p>
<p>जन्ना स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे महज 15 बच्चों के लिए पहले से ही वहां पर 2 अध्यापक नियुक्त थे लेकिन लदवाह स्कूल से एक अध्यापक को जन्ना के लिए स्थानांतरित करने से जन्ना से बदले गए अध्यापक अदालत में चले गए हैं, ऐसे में अब उक्त स्कूल में वर्तमान में 3 शिक्षक हो गए हैं। </p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे में तबादलों के इस खेल में लदवाह स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन शिक्षा विभाग को लदवाह से बदले गए अध्यापक के तबादला आदेश को रद्द करने के आदेश जारी करे ताकि इस स्कूल के 44 बच्चों की प्रभावित हुई पढ़ाई फिर से सुचारू हो पाए।</p>
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		<item>
		<title>हमीरपुर के एक ही स्कूल में 2 प्रधनाचार्य, कमरे में बैठने के लिए कर रहे धक्का-मुक्की</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/17/govt-senior-secondary-school-jangal-beri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Oct 2016 10:55:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Education Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Govt Schools]]></category>
		<category><![CDATA[Jangal Beri School Hamirpur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हमीरपुर- हमीरपुर ज़िले के पुराने स्कूलों में शुमार राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल जंगलबैरी में इन दिनों 2 प्रधानाचार्य तैनात हैं। दरअसल अगस्त महीने में यहां पर पहले एक ही महिला प्रधानाचार्य थीं मगर उसी महीने यहां पर स्थानांतरित होकर एक अन्य प्रधानाचार्य आ गया, जिन्होंने यहां पर पदभार भी संभाल लिया, मगर पहले से तैनात [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हमीरपुर-</strong> हमीरपुर ज़िले के पुराने स्कूलों में शुमार राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल जंगलबैरी में इन दिनों 2 प्रधानाचार्य तैनात हैं। </p>
<p>दरअसल अगस्त महीने में यहां पर पहले एक ही महिला प्रधानाचार्य थीं मगर उसी महीने यहां पर स्थानांतरित होकर एक अन्य प्रधानाचार्य आ गया, जिन्होंने यहां पर पदभार भी संभाल लिया, मगर पहले से तैनात प्रधानाचार्य ने स्टे ले लिया, जिससे स्थिति पेचीदा हो गई। पिछले दिनों दोनों प्रधानाचार्यों में प्रधानाचार्य के कमरे में बैठने के लिए धक्का-मुक्की भी हो गई।</p>
<p>दोनों प्रधानाचार्यों के रोज के झगड़ो से तंग आकर अब स्थानीय लोग यहां से उनके तबादले की मांग कर रहे हैं। इसके लिए स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को स्कूल में धरना-प्रदर्शन भी किया ताकि स्कूल में शैक्षणिक माहौल बने। स्कूल में 2-2 प्रधानाचार्य होने से अगस्त माह से ही स्कूल में शिक्षा का माहौल बिगड़ा हुआ है। अन्य शिक्षक भी पढ़ाई में सही ढंग से रुचि नहीं ले पा रहे हैं तो बच्चे भी ऐसे बिगड़े माहौल में पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षकों में इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ है कि अपने काम किस प्रधानाचार्य से करवाएं।</p>
<p>शुक्रवार को भी स्कूल में माहौल खराब होने पर पता चलते ही शिक्षा उपनिदेशक सैकेंडरी हमीरपुर सुजानपुर व भलेठ के प्रधानाचार्यों को लेकर स्कूल पहुंचे और दोनों प्रधानाचार्यों व शिक्षकों के पक्ष सुने। उन्होंने यहां पदभार संभालने वाले नए प्रधानाचार्य को स्कूल का कार्यभार सौंपा तथा उच्चाधिकारियों के नए आदेश आने तक ऐसे ही व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी। इसके बाद शिक्षकों को भी बच्चों की पढ़ाई की ओर ध्यान देने की नसीहत दी। यहां पहले से ही तैनात प्रधानाचार्य का कहना है कि यहां कार्यभार संभालने वाले प्रधानाचार्य ने उन्हें धक्का दिया और उनका पर्स भी नीचे गिर गया, जिसकी शिकायत उन्होंने सुजानपुर में कर दी है।</p>
<p>स्कूल में ट्रांसफर होकर आए नए प्रधानाचार्य का कहना है कि जब उन्होंने यहां पर कार्यभार संभाला था तो उनके साथ पहले वाली प्रधानाचार्य ने बदतमीजी और धक्का-मुक्की की। कुल मिलाकर जंगलबैरी स्कूल में पिछले 3 माह से शैक्षणिक माहौल पूरी तरह से चरमरा गया है और वार्षिक  परीक्षाओं को मात्र 4 माह शेष हैं, जबकि स्कूल के मुखिया अपनी तैनाती के लिए आए दिन झगड़ रहे हैं।</p>
<p>Photo: Clip Art Kid</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के सरकारी स्कूल में शिक्षक समेत बच्चों ने निम्न जाति कर्मचारी के हाथ से लड्डू खाने से किया इनकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/21/caste-discrimination-reported-in-himachals-government-school/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Sep 2016 09:01:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[सिरमौर]]></category>
		<category><![CDATA[Caste Discrimination Himachal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सामान्य वर्ग से ही संबंधित एक शिक्षक और मिड-डे मील कर्मचारी ने भी उस व्यक्ति के हाथ से बना खाना, चाय और पानी पीने से मना कर दिया। शिमला- हिमाचल सिरमौर जिले की एक राजकीय प्राथमिक पाठशाला में छुआछूत का मामला सामने आया है।स्कूल के बच्चों ने निम्न जाति के कर्मचारी के हाथ से कथित [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सामान्य वर्ग से ही संबंधित एक शिक्षक और मिड-डे मील कर्मचारी ने भी उस व्यक्ति के हाथ से बना खाना, चाय और पानी पीने से मना कर दिया।<br />
</strong><br />
<strong>शिमला-</strong> हिमाचल सिरमौर जिले की एक राजकीय प्राथमिक पाठशाला में छुआछूत का मामला सामने आया है।स्कूल के बच्चों ने निम्न जाति के कर्मचारी के हाथ से कथित तौर पर लड्डू खाने से इनकार कर दिया। उन्हें पूछा गया तो बताया कि परिजनों ने उन्हें कर्मी के हाथ से खाने को मना किया है। स्कूल की मुख्य अध्यापिका रजनी ने इस संदर्भ में थाना राजगढ़ में शिकायत दर्ज करवाई है।</p>
<p>इसके बाद पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम की धारा 3 (1) के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। उक्त प्राइमरी स्कूल में एक व्यक्ति ने मिड-डे मील में नियुक्ति होने पर स्कूल में लड्डू बांटे, लेकिन बच्चों ने लड्डू खाने से इनकार कर दिया।</p>
<p>पुलिस को दिए बयान में मुख्य अध्यापिका ने कहा कि जब बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने लड्डू क्यों नहीं खाए तो उन्होंने बताया कि उनके परिजनों ने ऐसा करने के लिए कहा है। मुख्य अध्यापिका ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग से ही संबंधित एक शिक्षक और मिड-डे मील कर्मचारी ने भी उस व्यक्ति के हाथ से बना खाना, चाय और पानी पीने से मना कर दिया।</p>
<p>उधर, डीएसपी राजगढ़ योगेश रोल्टा ने सोमवार को स्वयं स्कूल का दौरा किया। कहा कि मामले की छानबीन की जा रही है। स्कूल का रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी चेतराम शर्मा ने बताया कि मुख्य अध्यापिका ने 14 सितंबर को यह मामला उनके संज्ञान में लाया। 15 सितंबर को उन्होंने स्कूल का दौरा किया, लेकिन इसी दिन मुख्य अध्यापिका ने पुलिस में शिकायत की।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भेदभाव व भ्रष्टाचार से तंग लोगो ने प्रैस वार्ता में ही कपड़े उतार किया हिमाचल शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/09/paab-primary-school-shillai-in-sirmaur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Sep 2016 11:14:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पाब प्राथमिक पाठशाला व मिडल स्कूल गुंडाह में 80 फीसदी छात्र अनुसूचित जाति के, शिक्षा विभाग के भेदभाव व अनदेखी के चलते इस स्कूल में पढऩे वाले दलित बच्चों का भविष्य हो रहा खराब शिमला- शिक्षा के नाम पर प्रदेश के सिरमौर जिला में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सिरमौर जिला के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/09/paab-primary-school-shillai-in-sirmaur/">भेदभाव व भ्रष्टाचार से तंग लोगो ने प्रैस वार्ता में ही कपड़े उतार किया हिमाचल शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पाब प्राथमिक पाठशाला व मिडल स्कूल गुंडाह में 80 फीसदी छात्र अनुसूचित जाति के, शिक्षा विभाग के भेदभाव व अनदेखी के चलते इस स्कूल में पढऩे वाले दलित बच्चों का भविष्य हो रहा खराब</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  शिक्षा के नाम पर प्रदेश के सिरमौर जिला में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सिरमौर जिला के शिलाई क्षेत्र के पाब प्राइमरी स्कूल में पिछले 9 वर्षों से एक भी अध्यापक तैनात नहीं है। सिरमौर जिला का यह प्राथमिक स्कूल पाब डैपुटेशन पर आने वाले एक टीचर के ही सहारे चल रहा है जिस कारण सैंकड़ों बच्चे शिक्षा से महरूम हो रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा डैपुटेशन में एक पैट अध्यापक को स्कूल भेजा जाता है और स्कूल खोलकर बच्चों को खिचड़ी खिलाने के बाद स्कूल को बंद किया जाता है। शिक्षा विभाग की इस अनदेखी के चलते इस स्कूल में पढऩे वाले 46 दलित बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।</p>
<div id="attachment_7169" style="width: 932px" class="wp-caption alignnone"><img fetchpriority="high" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-7169" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai.jpeg" alt="HP Govt Primary School Shillai" width="922" height="428" class="size-full wp-image-7169" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai.jpeg 922w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai-300x139.jpeg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai-768x357.jpeg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai-696x323.jpeg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/09/HP-Govt-Primary-School-Shillai-905x420.jpeg 905w" sizes="(max-width: 922px) 100vw, 922px" /><p id="caption-attachment-7169" class="wp-caption-text">Amar Ujala</p></div>
<p>वीरवार को शिक्षा विभाग द्वारा सिरमौर जिला में शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे भेदभाव से खिन्न होकर पत्रकार सम्मेलन में अखिल भारतीय हरिजन लीग के उपाध्यक्ष केदार सिंह जिदान ने प्रैस वार्ता में ही कपड़े उतार कर अपना विरोध प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूल पाब के भवन की हालत भी इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी स्कूल का भवन गिर सकता है। हालांकि सरकार द्वारा हर वर्ष स्कूल भवन की मुरम्मत के लिए बजट दिया जाता है लेकिन सिरमौर शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर बैठे अफसर पैसों का गबन कर मुरम्मत के नाम पर स्कूल में एक भी पैसा खर्च नहीं करते हैं।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक पाठशाला व मिडल स्कूल गुंडाह में 80 फीसदी छात्र अनुसूचित जाति के शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्कूल भवन के निर्माण के समय गुणवत्ता का ध्यान न रखने वाले कनिष्ठ अभियंता व भवन का यूटीलाइजेशन प्रमाण पत्र जारी करने वाले शिक्षक के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है।</p>
<p>सिरमौर शिक्षा विभाग में हो रहे इस भ्रष्टाचार को लेकर मजबूरन ग्रामीणों को स्कूल बंद कर ताले जडऩे पड़े क्योंकि ग्रामीणों को हमेशा डर सताता रहता है कि कहीं स्कूल भवन के गिरने से उनके बच्चों के साथ कोई घटना न हो जाए। शिक्षा विभाग ने सिरमौर में भ्रष्टाचार कर इस गांव के दलितों के कपड़े उतार दिए हैं। उन्होंने कहा कि सिरमौर में शिक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 72 घंटे के अंदर अगर प्रदेश सरकार ने स्कूल की खस्ता हालत को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो शिक्षा विभाग के खिलाफ उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर की जाएगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/09/paab-primary-school-shillai-in-sirmaur/">भेदभाव व भ्रष्टाचार से तंग लोगो ने प्रैस वार्ता में ही कपड़े उतार किया हिमाचल शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण खली हो रहे स्कूल, परिजनों को लूट फायद उठा रहे निजी स्कूल</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/15/hp-government-school-education-standards-advantage-for-private-schools/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Apr 2016 11:35:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education Minister]]></category>
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		<category><![CDATA[Private Schools Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Sarva Shiksha Abhiyan]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर तथा निजी स्कूलों की तर्ज पर मिल रही सुविधा का स्तर न बढ़ाया गया तो आने वाले कुछ सालों में सरकारी स्कूल पूरी तरह खाली हो जाएंगे। क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते? यहां तक कि सरकारी स्कूलों में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/15/hp-government-school-education-standards-advantage-for-private-schools/">हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर के कारण खली हो रहे स्कूल, परिजनों को लूट फायद उठा रहे निजी स्कूल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर तथा निजी स्कूलों की तर्ज पर मिल रही सुविधा का स्तर न बढ़ाया गया तो आने वाले कुछ सालों में सरकारी स्कूल पूरी तरह खाली हो जाएंगे। क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते? यहां तक कि सरकारी स्कूलों में सेवारत ज्यादातर शिक्षकों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों की बजाय निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।</p>
<p>प्रदेश में सरकारी स्कूलों का मौजूदा शिक्षा स्तर चिंताजनक है। सर्वशिक्षा अभियान के गत वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो प्राथमिक स्तर पर जो आंकड़ा 45.8 फीसदी है, वह मिडिल स्तर पर गिरकर 32.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। यही हाल ग्रेडिंग सिस्टम का है। यहां प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 60 फीसदी बच्चे गणित विषय में कमजोर पाए गए हैं।</p>
<p>अंग्रेजी, हिंदी तथा विज्ञान विषयों के हालात भी सुखद नहीं हैं। प्राथमिक स्कूलों में तालीम का स्तर और भी चिंतनीय है। यहां ज्यादातर छात्रों को अक्षर ज्ञान तक नहीं है। छठी से दसवीं कक्षा तक के छात्रों को बेसिक की बहुत बड़ी कमजोरी पाई गई है। अंग्रेजी के टेंस तथा गणित में बेसिक गणित का ज्यादातर तक छात्रों को ज्ञान नहीं है।</p>
<p>यह हालात सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक पक्ष को बेहद कमजोर साबित करने के लिए काफी है। प्राथमिक स्कूलों में हर साल करीब दो हजार छात्र कम हो रहे हैं। नए छात्र दाखिल नहीं होंगे तो मिडिल, उच्च तथा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं होगा।</p>
<p><strong>निशुल्क भी नहीं पढ़ाना चाहते अभिभावक </strong></p>
<p>प्राथमिक स्कूलों में कोई दाखिला शुल्क नहीं है। वर्दी, पुस्तकें, दोपहर का भोजन तक सरकार मुहैया करवा रही है। बावजूद इसके अभिभावक निजी स्कूलों का रुख क्यों कर रहे हैं, यह चिंतन एवं मनन का विषय है। सर्वशिक्षा अभियान डाइट देहलां के प्रिंसिपल कमलदीप सिंह ने कहा कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में कई खामियां हैं।</p>
<p>बच्चों के गृहकार्य का अवलोकन सहीं ढंग से हो, टीचर डायरी लिखी जाए, पढ़ाई के प्रति शिक्षकों की इच्छाशक्ति हो, अध्यापन कार्य में शिक्षकों के पास एंजेडा हो, निजी स्कूलों से सरकारी शिक्षकों में प्रतिस्पर्धा की भावना हो, जो सुविधाएं निजी स्कूलों में हैं, उसी तर्ज पर सुविधाएं मिलें तो घटती तादाद पर रोक लग सकती है।</p>
<p><em>Photo: New Indian Express/ Representational Image</em></p>
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