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	<title>HP Forest Minister Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>HP Forest Minister Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>जो बन्दर मारेगा वो ही दफनाएगा, जानिए बन्दर मारने के लिए किन नियमो का  करना होगा पालन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/09/02/rules-for-monkey-culling-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2016 09:36:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे। शिमला- हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध दिए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बंदर को मारने वाले पर ही उसे दफनाने की भी जिम्मेदारी होगी। बंदरों को भले ही वर्मिन घोषित किया गया हो।</p>
<p>नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या बच्चे वाली मादा को नहीं मार सकेंगे। बंदर पर निशाना साधने से पहले शिकारी को पता करना होगा कि मादा बंदर कहीं गर्भवती तो नहीं।</p>
<p><strong>कानूनी विवाद की सारी जिम्मेदारी बंदर मारने वाले पर </strong></p>
<p>बंदर अगर अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हुए है तो उसे भी नहीं मारा जा सकता। खास बात ये है कि बंदर को ऐसे मारा जाए जिससे बंदर पर निर्दयता न हो, यह कैसे संभव है इसका जिक्र गाइडलाइन में नहीं है।</p>
<p>सबसे दिलचस्प बात यह कि बंदर मारने के दौरान या बाद में अगर कोई कानूनी विवाद हुआ तो उसकी जिम्मेदारी भी बंदर मारने वाले पर होगी। ऐसे मामलों में वन विभाग पार्टी नहीं बनेगा। बंदर मारने के बाद संबंधित रेंज अफसर, फॉरेस्ट गार्ड को सूचना देनी होगी।</p>
<p>पहले से गठित कमेटी की निगरानी में बंदर को चयनित जगह पर ही दफनाया जाएगा। बंदर मारने से लेकर दफनाने तक वन विभाग सिर्फ मॉनीटरिंग रोल में रहेगा।</p>
<p><strong>तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने का प्रोसेस<br />
</strong><br />
बंदर मारने के बाद संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड, रेंज अफसर या डीएफओ को सूचित करना होगा। वन अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगा। इसके बाद बंदर को तय प्रक्रिया के तहत मारने वाले को दफनाना होगा। इसके बाद उसे तीन सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि मिलेंगे।</p>
<p>वर्मिन बंदरों को मारने के संबंध में एक प्रोटोकाल तैयार किया है। स्थानीय अफसरों के माध्यम से लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है ताकि मरने के बाद बंदर से किसी तरह की संक्रामक बीमारी न फैले। इसके लिए संबंधित रेंज व डिविजन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।- एसएस नेगी, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ</p>
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			</item>
		<item>
		<title>फॉरेस्ट गार्ड भर्ती शुरू होने से पहले ही सवालों के घेरे में, आसान फिजिकल के चलते महिलाओं को मिल जाते हैं ज्यादा अंक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/09/hp-forest-guard-recruitment-2016-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jun 2016 06:49:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[HP Forest Dept]]></category>
		<category><![CDATA[HP Forest Guards Recruitment]]></category>
		<category><![CDATA[HP Forest Minister]]></category>
		<category><![CDATA[Thakur Singh Bharmouri]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- वन विभाग में अगले कुछ समय में करीब साढ़े चार सौ फारेस्ट गार्ड की भर्ती होने जा रही है। वन मंत्री की सख्ती के बाद विभाग ने भर्ती की कवायद शुरू कर दी है। लेकिन शुरू होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। किसी भी विभाग की भर्ती [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  वन विभाग में अगले कुछ समय में करीब साढ़े चार सौ फारेस्ट गार्ड की भर्ती होने जा रही है। वन मंत्री की सख्ती के बाद विभाग ने भर्ती की कवायद शुरू कर दी है। लेकिन शुरू होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। किसी भी विभाग की भर्ती से इतर वन विभाग में गार्ड की भर्ती प्रक्रिया में महिला और पुरुषों के पदों की संख्या तो तय नहीं हैं।</p>
<p>लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए दोनों ही वर्गों के मानक अलग हैं। इसकी वजह से भर्ती में महिलाओं को पुरुषों से कम मेहनत पर भी लिखित परीक्षा में पहुंचने का मौका मिल रहा है। विभाग की इस व्यवस्था के बाद अब कुछ युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर, पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>इसलिए उठे भर्ती पर सवाल</strong></p>
<p>दरअसल, सिपाही भर्ती परीक्षा में कुल पदों में महिलाओं और पुरुषों के लिए पदों की संख्या तय रहती है। इसकी वजह से महिलाओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में मिलने वाली छूट का पुरुष अभ्यर्थियों की भर्ती पर असर नहीं पड़ता। वहीं, फारेस्ट गार्ड भर्ती प्रक्रिया में भर्ती के लिए पुरुष और महिला गार्डों के पद तय नहीं हैं।</p>
<p>जबकि भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम फिजिकल करना होता है। इसका नतीजा यह होता है कि आसान फिजिकल के चलते महिलाओं को ज्यादा अंक मिल जाते हैं जबकि पुरुष अभ्यर्थी असफल हो जाते हैं।</p>
<p><strong>नियमों में बदलाव को हुए थे प्रयास</strong></p>
<p>पिछले साल बड़ी संख्या में महिला गार्डों के भर्ती होने के बाद विभाग को कामकाज में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। सूत्रों की मानें तो ऐसा इसलिए हो रहा था कि कुछ अति पिछड़े इलाकों में अकेले महिला गार्ड को गश्त के लिए भेजा नहीं जा सकता था और पुरुष गार्ड की कमी थी।</p>
<p>इसकी समस्या के बाद इस साल होने वाली गार्ड भर्ती से पहले विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने की कवायद शुरू की थी। इसमें कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया का अवलोकन भी किया गया था। लेकिन कवायद बीच में ही रोक दी गई।</p>
<p><strong>पिछली भर्ती में भी हुई थी समस्या</strong></p>
<p>पिछले साल भी करीब चार सौ गार्डों के पदों पर भर्ती हुई थी। उस दौरान भी भर्ती प्रक्रिया में इस अनियमितता की वजह से बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थियों का चयन हो गया। जबकि ज्यादा मेहनत करने के बावजूद पुरुष अभ्यर्थी सेलेक्ट नहीं हो सके।</p>
<p>इसके बाद उस समय भी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे थे लेकिन तब यह कहकर मामला दबा दिया गया था कि फेल होने की वजह से अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं।</p>
<p>Photo: HP Forest Department </p>
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