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	<title>HP Education board Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>कैग रिपोर्ट में खुलसा: हिमाचल निगम बोर्डों के अफसरों ने सरकार को लगया 469.97 का चूना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Apr 2016 12:04:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया,आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए,सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं,क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया,आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए,सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं,क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से हुआ 209 करोड़ का नुकसान,हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने प्रदेश सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> चेयरमैनों व वाइस चेयरमैनों के खर्चों का बोझ ढो रहे प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के बोर्ड व निगम हांफ रहे हैं। प्रदेश के कुल 19 क्रियाशील उपक्रमों में से दस बोर्ड निगम ऐसे हैं जिन्होंने एक साल में राज्य सरकार का 469.97 करोड़ का चूना लगा दिया। खास बात यह है कि इन निगम व बोर्डों को होने वाला घाटा साल दर साल बढ़ता जा रहा है लेकिन सरकार घाटा रोकने के बजाय सिर्फ इन हांफते निगमों में करोड़ों रुपये का निवेश करती जा रही है।</p>
<p>सीएजी की रिपोर्ट ने कुछ ऐसे ही खुलासे किए हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार  साल 2014-15 में प्रदेश के कुल 21 सार्वजनिक उपक्रमों में से 19 क्रियाशील रहे। इनमें दस उपक्रमों ने प्रदेश सरकार का करीब 470 करोड़ रुपये डुबो दिया। जबकि सात बोर्ड-उपक्रमों ने 13.97 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। इनमें से सिर्फ एक उपक्रम हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने दस प्रतिशत की दर से लाभांष घोषित किया।</p>
<p>खास बात यह है कि घाटे में होने वाले दस निगम-बोर्डों में से तीन ऐसे उपक्रम रहे जिन्होंने अपने लेखों को न लाभ न हानि के आधार पर तैयार किया था। वहीं, व्यास घाटी विद्युत निगम ने अपने आडिट रिपोर्ट ही तैयार नहीं की। सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार का सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा क्षेत्र में रहा है। यही कारण है कि साल 2010-11 में जहां 4600 करोड़ का निवेश हुआ, वहीं साल 2014-15 में यह बढ़कर 8571 करोड़ हो गया।</p>
<p><strong>यहां जानिए किस विभाग ने क्या की गड़बड़ी</strong></p>
<p><strong>साढ़े बारह की जगह चार प्रतिशत का कर किया निर्धारित</strong><br />
आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कई मामले सीएजी रिपोर्ट में सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार 183 करोड़ की बिक्री के बाइस मामले ऐसे सामने आए जिनमें साढ़े बारह से पौने चौदह प्रतिशत का कर लगाने के बजाय अधिकारियों ने चार से पांच प्रतिशत का कर निर्धारित कर दिया।</p>
<p>इसकी वजह से सरकार को करीब साढ़े तीन करोड़ का नुकसान हुआ। इसी तरह विभाग ने कई मामलों में कुल बिक्री का गलत निर्धारण कर दिया जिसकी वजह से सरकार को करीब छह करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिला। वहीं, विवरणियों के डाटाबेस का इंस्पेक्शन न करने और देर से भरने के चलते हुए साढ़े 38 करोड़ की वसूली को भी नहीं किया।</p>
<p><strong>लाइसेंस फीस की कम वसूली से लगा झटका</strong></p>
<p>आबकारी एवं कराधान विभाग ने साल 2013-14 के दौरान 28 शराब बिक्री केंद्रों के लाइसेंसधारकों से 17.25 करोड़ वसूला जाना था। लेकिन विभाग के अधिकारी सिर्फ 12.83 करोड़ की फीस ही वसूल सका। इसके चलते प्रदेश को साढ़े चार करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ।</p>
<p><strong>सीमेंट कंपनियों को दिया मुनाफा</strong></p>
<p>आडिट रिपोर्ट के अनुसार दो सीमेंट कंपनियां जिन्होंने सीमेंट व क्लीन्कर बनाने के लिए खनन क्षेत्रों से सीमेंट संयंत्रों तक चूना पत्थर व स्लेटी पत्थर का परिवहन किया। उनसे अतिरिक्त माल कर वसूला जाना चाहिए था। लेकिन विभाग ने उनसे यह कर नहीं वसूला जिसके चलते प्रदेश के खजाने को 59.90 करोड़ का नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>इन विभागों की भी कैग रिपोर्ट ने खोली पोल</strong></p>
<p><strong>पटवारियों ने किया गलत मूल्यांकन</strong><br />
रिपोर्ट में 189 ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें पटवारियों द्वारा संपत्तियों के मूल्यांकन प्रतिवेदनों को गलत तैयार किया गया। साथ ही संपत्ति के बाजार मूल्य का भी गलत निर्धारण किया गया जिसकी वजह से करीब 80 लाख रुपये के स्टांप शुल्क व पंजीकरण फीस की कम वसूली हुई। पट्टी राशि की भी अल्प वसूली के तीन मामले सामने आए जिसके चलते<br />
सरकारी खजाने को 4.24 करोड़ का नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>नहीं हुई वाहनों से प्रवेश कर की वसूली</strong><br />
सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग द्वारा करों की गैर वसूली के भी मामले सामने आए हैं। साल 2010-11 से 2013-14 तक प्रवेश कर के लिए होेने वाली वसूली में अधिकारियों ने खेल किया। इसके चलते 17.73 करोड़ रुपये के सांकेतिक कर व प्रवेश कर की विभाग ने न तो मांग की और न ही वाहन मालिकों ने इसका भुगतान किया।</p>
<p><strong>वन मंडल अधिकारियों ने नहीं की रायल्टी की वसूली</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा करीब साढ़े तेरह करोड़ की रॉयल्टी भुगतान योग्य थी। लेकिन वन मंडल अधिकारियों ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रॉयल्टी का भुगतान समय पर और करीब पौने पांच करोड़ देर से जमा किया। लेकिन बकाया करीब सवा सात करोड़ की राशि की वसूली नहीं की गई।</p>
<p><strong>लकड़ी की ग्रेडिंग में भी हुआ खेल</strong></p>
<p>लकड़ी की ग्रेडिंग का काम वन निगम की बिक्री डिपुओं पर किया जाता है। लेकिन वन अधिकारियों ने .5 प्रतिशत को ही ए ग्रेड में रखा गया। लकड़ी के वर्गीकरण की प्रक्रिया में कोई भी जांच नहीं की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार लकड़ी के 25 प्रतिशत वर्गीकरण को ही गलत मानने से करीब 71 करोड़ से ज्यादा की संभावित राजस्व हानि होने की संभावना जताई।</p>
<p><strong>इन विभागों ने भी कराया बड़ा नुकसान</strong> </p>
<p><strong>ज्वालामुखी मंदिर न्यास को दिलाया 6.27 करोड़ का लाभ</strong><br />
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को ज्वालामुखी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बदलना था। लेकिन इस काम में भी अधिकारियों ने खेल किया और स्वास्थ्य केंद्र को श्री ज्वालामुखी मंदिर न्यास के भवन से बदलने में न्यास को करीब 6.27 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचा दिया।</p>
<p><strong>जलापूर्ति स्कीमों में गलत निवेश से डुबो दिए 56 करोड़</strong></p>
<p>आईपीएच विभाग ने जलापूर्ति स्कीमों को शुरू करने में ही देरी कर द। इसकी वजह से कई योजनाओं में 53.57 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वहीं, 3.31 करोड़ के ब्याज का भी सरकार को नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>क्षमता संवर्धन प्रभारों की वसूली न होने से हुआ 209 करोड़ का नुकसान</strong></p>
<p>जल विद्युत परियोजना के क्षमता संवर्धन का समय पर पता लगाने में बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत विभाग फेल साबित हुआ। समय पर पता न लगा पाने, अतिरिक्त मुफ्त विद्युत रॉयल्टी और स्थानीय विकास निधि के आधार पर करीब 209 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।</p>
<p><strong>37 प्रतिशत बजट नहीं खर्च सका उच्च शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>उच्च शिक्षा विभाग राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 348.47 करोड़ की कुल उपलब्ध निधियों में से कार्यक्रम के विभिन्न घटकों पर केवल 218.67 करोड़ ही खर्च कर सका। मार्च 2015 तक 129.80 करोड़ यानी 37 प्रतिशत बजट अप्रयुक्त ही रहा। 2013-15 के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तर पर आरएमएसए के तहत वार्षिक कार्य योजना को पाठशाला स्तर की विकासात्मक योजना पर विचार किए बिना तैयार किया गया।</p>
<p>पांच आदर्श पाठशालाओं के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी गई 7.23 करोड़ की राशि में से 4.70 करोड़ रुपये बाधामुक्त जमीन उपलब्ध न करवाने और कार्य की गति धीमी होने के कारण अप्रयुक्त रहे। 25 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>एचआरटीसी ने सरकार को लगाया करोड़ों का चूना</strong></p>
<p>हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने प्रदेश सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है। वर्ष 2013 से मार्च 2014 अवधि के बीच की 20.47 करोड़ रुपये की राशि मार्च 2015 तक दी जानी थी लेकिन निगम ने विशेष पथकर का यह पैसा सरकार के खाते में जमा नहीं कराया।</p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से विधानसभा के पटल पर रखी कैग रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवहन निगम का 20.47 करोड़ जबकि निजी स्टेज कैरिज से 167 मामलों में 91.15 लाख रुपये की राशि सरकार को देय थी।</p>
<p>निर्धारित समय में यह राशि न लिए जाने से प्रदेश सरकार को 21.38 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसी तरह वर्ष 2010-11 से 2013-14 के लिए 22,527 वाहनों के संदर्भ में 17.73 करोड़ के सांकेतिक कर एवं प्रदेश कर की न तो मांग की गई और न ही इन वाहन मालिकों की ओर से इसका भुगतान किया गया।</p>
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		<title>पांवटा साहिब के इंदोली स्कूल  मे विध्यार्थी 44 लेकिन आधायपक सिर्फ 1,	 सरकार ने उसका भी कर दिया तबादला</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/goverenment-school-indoli-paonta-sahib/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2016 11:26:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[सिरमौर]]></category>
		<category><![CDATA[Education system in Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal pradesh Government School]]></category>
		<category><![CDATA[HP Education board]]></category>
		<category><![CDATA[HP Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य होने का दम भरने वाले हिमाचल के धरातलीय आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इसकी बानगी गिरिपार क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां पर न तो पूरा स्टाफ है और न ही मजबूत आधारभूत संरचना। कफोटा कलस्टर के अधीन आने वाला मिडल स्कूल इंदोली [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य होने का दम भरने वाले हिमाचल के धरातलीय आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इसकी बानगी गिरिपार क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां पर न तो पूरा स्टाफ है और न ही मजबूत आधारभूत संरचना। कफोटा कलस्टर के अधीन आने वाला मिडल स्कूल इंदोली इस समय बिना शिक्षक के चल रहा है। सड़क से करीब 7 किलोमीटर दूर इस स्कूल में 44 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनको एक ही शिक्षक पढ़ा रहा था। हाल ही में सरकार ने उसका भी तबादला कर दिया, जिसके बाद से यह स्कूल शिक्षक विहीन हो गया है। </p>
<p>आजकल स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, जिन्हें आयोजित करवाने के लिए शिक्षा विभाग कफोटा से प्रतिनियुक्ति पर एक शिक्षक भेज रहा है, जो नाकाफी है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में छात्रों की संख्या 100 के पार हो सकती है। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चे इस स्कूल में दाखिला न लेकर 7 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर कफोटा जा रहे हैं, जिनकी सारी ऊर्जा चढ़ाई चढ़ने में व्यर्थ हो जाती है। उधर, राजनेताओं का भी रवैया चुनाव तक सिमट कर रह गया है। ऐसे कार्यों को करवाने के लिए कोई नेता आगे नहीं आता, जिसके चलते जनता का उनसे मोहभंग हो रहा है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस स्कूल में शिक्षक तैनात किया जाए, नहीं तो इसे बंद कर दिया जाए। </p>
<p>Credit:Punjab Kesari/Image Credit:Shutter Stock</p>
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