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	<title>Himalayas Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Himalayas Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>बादल फटना, अचानक बाढ़-भूस्खलन और ग्लेशियर सिकुड़ने जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के संकेत : रिपोर्ट</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/25/report-says-unprecedented-cloudbursts-shrinking-glaciers-signal-climate-change-in-himachal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 10:32:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: जलवायु परिवर्तन अब एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है, जिसके कारण हिमाचल प्रदेश में बादल फटना, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकार ने इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी बताते हुए कहा कि अब तत्काल सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी हो गया है। जलवायु परिवर्तन से बढ़ती [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/25/report-says-unprecedented-cloudbursts-shrinking-glaciers-signal-climate-change-in-himachal/">बादल फटना, अचानक बाढ़-भूस्खलन और ग्लेशियर सिकुड़ने जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के संकेत : रिपोर्ट</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> जलवायु परिवर्तन अब एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है, जिसके कारण हिमाचल प्रदेश में बादल फटना, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकार ने इन घटनाओं को प्राकृतिक चेतावनी बताते हुए कहा कि अब तत्काल सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी हो गया है।</p>
<h3>जलवायु परिवर्तन से बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं</h3>
<p>राज्य सरकार ने बताया कि वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान राज्य में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे। राज्य सरकार ने कहा कि हिमाचल केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि हिमालय की आत्मा है, जहां ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत ही जीवन का आधार हैं। हिमालय क्षेत्र में अस्थिरता का असर केवल राज्य ही नहीं, पूरे देश पर पड़ेगा।</p>
<p>ये बातें मंगलवार को जारी Scientific Assessment of Tackling Non-Carbon Dioxide Emissions: Pathways for Himachal Pradesh रिपोर्ट में कही गई।</p>
<p>इस रिपोर्ट को जारी करने के अवसर पर सरकार ने राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) भी हस्ताक्षरित किए।</p>
<h3>डाबर इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता : 10 सालों में 1.20 करोड़ पौधे</h3>
<p>पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म के एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी। इसमे निम्नलिखित प्रजातियां शामिल हैं:</p>
<ul>
<li>निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर जिलों और निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएगें।</li>
<li>मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला (जड़ी-बूटियां), पदम काष्ठ (वृक्ष) और पुष्करमूल (जड़ी) के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में वितरित किए जाएगें।</li>
<li>अल्पाइन प्रजातियां जैसे अतीस और विष (जड़ी-बूटियाँ) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
</ul>
<h3>मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ समझौता : औषधीय पौधों की खेती</h3>
<p>दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत सोलन जिला में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस समझौते के तहत छह प्राथमिकता वाली प्रजातियों हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता), हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू) की खेती की जाएगी।</p>
<p>इसमें आसपास की पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।</p>
<h3>किशाऊ-रेणुका परियोजनाओं पर स्पष्ट रुख</h3>
<p>राज्य सरकार ने सपष्ट करते हुए कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकायों के निपटारे पर ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं।</p>
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		<title>हिमाचल पर तबाही के संकेत, 4 तीव्रता वाले भूकंप के 5 झटकों से लोग दहशत में</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/11/earhquake-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[तरुण शर्मा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Feb 2016 12:39:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[जिला]]></category>
		<category><![CDATA[Chamba Earthquake]]></category>
		<category><![CDATA[Climate Change]]></category>
		<category><![CDATA[Global Warming]]></category>
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		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla MET Department]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211;  हिमाचल के पहाड़ों से प्रकृति के खतरनाक संकेत मिल रहे हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार हिल गई। बुधवार को 4 तीव्रता वाले भूकंप के झटकों से हैरान लोग किसी अनहोनी को लेकर दहशत में हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार थर्राई। 4 तीव्रता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211;  हिमाचल के पहाड़ों से प्रकृति के खतरनाक संकेत मिल रहे हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार हिल गई। बुधवार को 4 तीव्रता वाले भूकंप के झटकों से हैरान लोग किसी अनहोनी को लेकर दहशत में हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार थर्राई।</p>
<p>4 तीव्रता वाले भूकंप के पांच झटकों से लोग दहशत में हैं। एक घर को आंशिक नुकसान भी हुआ है। पहला झटका सुबह 11:14, दूसरा 11:24, तीसरा 11:29, चौथा 11:31 और पांचवां 12:03 बजे महसूस किया गया। सिलसिले वार झटकों से भयभीत होकर लोग घरों से बाहर निकल आए।</p>
<p>कई घंटे ये लोग घरों से बाहर ही रहे। इससे पहले 4 फरवरी को तीन, 9 फरवरी को रात करीब नौ बजे 4.4 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। बीते मंगलवार रात 8:43 बजे लाहौल में भी 4.4 तीव्रता का भूकंप आया है। हिमाचल के पहाड़ों से प्रकृति के खतरनाक संकेत मिल रहे हैं। हफ्ते के भीतर बुधवार को चंबा की धरती तीसरी बार हिल गई।</p>
<h2>बदल रहा पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड</h2>
<p>वहीं, पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड बदल रहा है। नई सदी में अब दिसंबर के बजाय फरवरी-मार्च माह में ज्यादा बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी के दस साल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। साल 2000 से 2015 तक दिसंबर महीने में सिर्फ 13 दिन बर्फ गिरी।</p>
<p>वहीं, इस दौरान फरवरी में 44 दिन और मार्च में 15 दिन बर्फ गिरी। वैज्ञानिक इसे खतरनाक संकेत मान रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के असर ने पहाड़ों पर बर्फबारी का ट्रेंड बदल दिया है। अब नवंबर-दिसंबर के मुकाबले फरवरी-मार्च में ज्यादा बर्फबारी हो रही है।</p>
<p>शिमला शहर में बर्फबारी के दस साल के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। हिमाचल में बीते दस साल से बर्फबारी भी कम हो रही है। नब्बे के दशक में जहां औसतन हर साल 130 से 262 सेंटीमीटर बर्फ रिकॉर्ड की गई।</p>
<p>वहीं वर्ष 2000 के बाद कभी साल में 120 सेंटीमीटर से अधिक बर्फ नहीं गिरी। साल 2001 में 186, 2006-07 में 120, 2007-08 में 34, 2008-09 में 43, 2010-11 में 31.5 और 2014-15 में 83 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई। 2011-12 में 119 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी।</p>
<h2शिमला में नवंबर में 20 साल से नहीं गिरी बर्फ </h2>
<p>पहाड़ों पर बर्फबारी के बदलते ट्रेंड के लिए मौसम विशेषज्ञ अधिकतम तापमान में हो रही वृद्धि को जिम्मेदार मानते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अंधाधुंध भवन निर्माण, बढ़ता प्रदूषण और पेड़ कटान इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसी कारण बर्फबारी के ट्रेंड में बदलाव आ रहा है।</p>
<p>साल 2015 में लाहौल स्पीति और किन्नौर जिला की ऊंची चोटियों में तो अप्रैल और मई महीने में भी बर्फबारी हुई थी। राजधानी शिमला में साल 2005 के नवंबर, दिसंबर और साल 2006 के जनवरी, फरवरी और मार्च महीने में बर्फबारी नहीं हुई थी। साल 2009-10 में नाममात्र 1.8 सेंटीमीटर पूरे सीजन में बर्फबारी रिकॉर्ड की गई।</p>
<p>शिमला में साल 1995 में नवंबर महीने के दौरान बर्र्फ गिरी थी। उस समय 7.8 सेंटीमीटर बर्फ रिकॉर्ड की गई। इसके बाद अभी तक नवंबर में बर्फबारी नहीं हुई है। मौसम विभाग के निदेशक डॉ मनमोहन सिंह की मानें तो ग्लोबल वार्मिंग के चलते पहाड़ों में बर्फबारी का ट्रेंड बदल रहा है।</p>
<p>बीते कुछ सालों से फरवरी और मार्च में बर्फबारी हो रही है। दिसंबर की जगह जनवरी में अधिक बर्फबारी हो रही है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान बढ़ने से ऐसा हो रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>हिमाचल के मंडी &#8211; कुल्लू  में आपदा प्रबंधन की सख्त जरूरत, विशेषज्ञों ने दी है भीषण भूकम्प की चेतावनी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/08/earthquake-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Jan 2016 07:34:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[earthquake in himachal]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL DISASTER MANAGEMENT]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal NGO]]></category>
		<category><![CDATA[Himalayas]]></category>
		<category><![CDATA[Vasudha Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल मंडी कुछ क्षेत्र जैसे मंडी के कुछ इलाक़े (मुख्यता सुंदर नगर) और कुल्लू के कुछ इलाक़े सबसे ज़्यादा ख़तरे वाली भूकंप ज़ोन में हैं! हाल ही में मणिपुर में हुए भूकंप के बाद गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हिमालयन बेल्ट में कभी भी भीषण भूकंप आने के आसार हैं [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल मंडी कुछ क्षेत्र जैसे मंडी के कुछ इलाक़े (मुख्यता सुंदर नगर) और कुल्लू के कुछ इलाक़े सबसे ज़्यादा ख़तरे वाली भूकंप ज़ोन में हैं! हाल ही में मणिपुर में हुए भूकंप के बाद गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हिमालयन बेल्ट में कभी भी भीषण भूकंप आने के आसार हैं जिसका परिमाण रिक्टर स्केल पर 8.2 या उससे भी अधिक हो सकता है! </p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार 8.2 की तीव्रता वाला यह भूकंप पूरे उत्तर भारत में भारी तबाही मचा सकता है. आशंका जताई गई है कि यह झटके दिए गए आंकड़े से भी ज्यादा हो सकती है.</p>
<p>पिछले दिनों लगातार आए भूकंपों के अध्ययन के बाद विशेषज्ञ इस तरह की आशंका जता रहे हैं. इसी सप्ताह मनिपुर (6.9) में आए भूकंप और नेपाल(7.3) में आए विनाशकारी झटकों के बाद भूगर्भीय प्लेटों में उथल-पुथल बताया गया है. यह भी कहा जा रहा है कि इनमें दरारें आ गई हैं जो खतरनाक साबित हो सकती हैं.</p>
<p>टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पिछले दिनों ईटानगर में आयोजित हुई एनआईडीएम (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन) की एक बैठक में पहाड़ों पर मंडरा रहे इस बेहद गंभीर संकट से निपटने के लिए एक कार्यक्रम व योजना शुरू करने का फैसला किया. इस बैठक में 11 पहाड़ी राज्यों के नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया था.</p>
<p>एनआईडीएम के निदेशक संतोष कुमार के अनुसार नेपाल, भूटान, म्यांमार और भारत को सबसे ज्यादा खतरा है. उनके अनुसार बिहार, यूपी और दिल्ली में भी इसके खतरनाक नतीजे हो सकते हैं जो कि पहले से ही संवेदनशील सेस्मिक जोन में आते हैं. इसे लेकर केंद्र की ओर से संबंधित राज्यों को चेतावनी जारी कर दी गई है.</p>
<p><strong>वसुधा ने भूकंप से निपटने के उपाय सुझाए</strong></p>
<p>वसुधा ने पहले भी जिला प्रशासन को इस ख़तरे के बारे में अवगत करवाया है तथा ज़िलाधीश मंडी ने इसका तुरंत संज्ञान लेते हुए संस्था द्वारा दिए गये सुझावों को अमल में लाने के आदेश जारी किए हैं! इसके तहत जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए गये हैं कि वे नियमित रूप से मॉक ड्रिल करवाएं तथा विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन कौशल प्रदान करें! इसके अतिरिक्त संस्थान की बिल्डिंग्स की निकास योजना बनाने के भी आदेश दिए गये ताकि आपदा के समय विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके!</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को पूरी प्रतियां</strong><br />

<a href='https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-1.jpg'><img decoding="async" width="150" height="150" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-1-150x150.jpg" class="attachment-thumbnail size-thumbnail" alt="" /></a>
<a href='https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-2.jpg'><img decoding="async" width="150" height="150" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-2-150x150.jpg" class="attachment-thumbnail size-thumbnail" alt="" /></a>
<a href='https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-3.jpg'><img decoding="async" width="150" height="150" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/cm-3-150x150.jpg" class="attachment-thumbnail size-thumbnail" alt="" /></a>
<a href='https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/eqhimachal.jpg'><img loading="lazy" decoding="async" width="150" height="150" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/eqhimachal-150x150.jpg" class="attachment-thumbnail size-thumbnail" alt="" /></a>
<a href='https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/pr.jpg'><img loading="lazy" decoding="async" width="150" height="150" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/01/pr-150x150.jpg" class="attachment-thumbnail size-thumbnail" alt="" /></a>

<p>वसुधा के मुख्या कार्यकारी अधिकारी कर्म प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होनें मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर आपदा प्रबंधन के लिए सख़्त कदम उठाने का अनुरोध किया है तथा संस्था की तरफ से कुछ सुझाव भी दिए हैं! मुख्यमंत्री से इमारत निर्माण कोड को सख्ती से लागू करवाने का भी अनुरोध किया गया है! उन्होनें लोगों से अनुरोध किया है की वे स्वयं भी आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक रहें तथा इमारर्तों का निर्माण तय मानकों के अनुसार ही करें!</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/01/08/earthquake-in-himachal-pradesh/">हिमाचल के मंडी &#8211; कुल्लू  में आपदा प्रबंधन की सख्त जरूरत, विशेषज्ञों ने दी है भीषण भूकम्प की चेतावनी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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