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	<title>Himachal Pradesh Government Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Himachal Pradesh Government Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>हिमाचल में  पॉलीथीन पर प्रतिबंध के बावजूद शिमला में फिर से सरेआम शुरू हुआ पॉलीथीन का प्रयोग, अधिकारी बरत रहे  ढील</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/10/19/polythene-bags-being-use-in-shimla-despite-ban-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Oct 2016 12:04:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[Dhalli Subji Manndi]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government]]></category>
		<category><![CDATA[Polythene Free Himahcal]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Subji Mandi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णतया प्रतिबंध है परंतु प्रदेश की राजधानी शिमला में पॉलीथीन का प्रयोग फिर से शुरू होने से सरकार के आदेशों की सरेआम धज्जिया उड़ रही हैं। राजधानी शिमला की सब्जी मंडी सहित ढली सब्जी मंडी में अन्य राज्यों से सब्जिया आदि भी पॉलीथीन में पैक होकर बाजार में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर पूर्णतया प्रतिबंध है परंतु प्रदेश की राजधानी शिमला में पॉलीथीन का प्रयोग फिर से शुरू होने से सरकार के आदेशों की सरेआम धज्जिया उड़ रही हैं। राजधानी शिमला की सब्जी मंडी सहित ढली सब्जी मंडी में अन्य राज्यों से सब्जिया आदि भी पॉलीथीन में पैक होकर बाजार में पहुंच रही हैं। </p>
<p>बाजार में सब्जी की दुकानों पर पॉलीथिन में पैक सब्जी को आम देखा जा सकता है, जिससे साफ जाहिर है कि व्यापारियों में पुलिस और प्रशासन का खौफ नहीं है। प्रतिदिन कई क्विंटल पॉलीथीन एकत्रित हो रहा है। सब्जी मंडी में फैली अव्यवस्था की वजह से हिमाचल सरकार का पॉलीथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ अभियान नारा बनकर रह गया है।</p>
<p>शिमला की ढली सब्जी मंडी में मंगलवार सुबह को खुले आम पॉलीथीन की लिफाफे में बंद भिंडी व घीया, हरी मिर्च, बैंगन की बोली लगाई जा रही है। सब्जिया न सिर्फ मंडी में ही बिक रही हैं बल्कि शहर के अन्य भागों में भी धड़ल्ले से बेची जा रही हैं लेकिन अधिकारी यह दावे करते नहीं थक रहे हैं कि प्रदेश में पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है जबकि जंक फूड तो 100 प्रतिशत पॉलीथीन में आ रहा है। </p>
<p>प्रदेश के हर हिस्से में पॉलीथीन में सामान बिक रहा है। सरकार ने पॉलीथीन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान किया है परंतु सब्जी मंडी के आढ़तियों को पूछने वाला कोई नहीं है। इनके हौसले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं और अन्य राज्यों से पॉलीथीन में पैक सब्जियां बिना खौफ के लाई जा रही हैं।</p>
<p> दिल्ली, हरियाणा व पंजाब से आने वाली सब्जियां अधिकतर पॉलीथीन के लिफाफों में ही पैक होकर आती हैं। न सिर्फ सब्जियों बल्कि अन्य खाद्य पदार्थो कोभी पॉलीथीन में पैक कर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। न तो बैरियरों पर ऐसी गाड़ियों की चेकिंग हो रही है और न ही ऐसे सामान को उतारने के समय पर इन्हें कोई पूछने वाला है।</p>
<p><strong>अधिकारी बरत रहे है ढील</strong></p>
<p>अन्य राज्यों से प्रदेश के भीतर पॉलीथीन में आने वाले उत्पादों पर रोक लगाने में अधिकारी ढील बरत रहे हैं। इसका फायदा व्यापारी वर्ग उठा रहा है। यदि विभाग इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें तो आढ़ती भी अन्य राज्यों से आने वाली सब्जियों के लिए अन्य विकल्प ढूंढें लेकिन प्रशासन की लापरवाही से सारा गोरखधंधा चल रहा है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अधिक टैक्स लगा कर जनता का खून चूसने का कार्य कर रहा है नगर निगम, करेंगे निगम चुनाव का बहिष्कार: विकास समिति टुटू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/17/mc-shimla-elections-boycott-by-vikas-samiti-totu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nagender Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2016 11:48:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[CPIM(M) Shimla]]></category>
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		<category><![CDATA[Vikas Samiti Totu]]></category>
		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>निगम चुनावों के विरोध के मुख्य कारण पिछले दस वर्षों से मूलभूत सुविधाएं जैसे पानी के कनेकश्न घरेलू बिलों का भुगतान कमर्शीयल,टैक्स वसूली के लिए भवन नियमित,बिजली -पानी देने के लिए अनियमित,सीवरेज,स्ट्रीट लाईटों, पार्किंग,बिना रेलिंग की गलियां,सार्वजनिक शौचालय,सीढ़ियां जैसे झूठे वादे नगर निगम ने किये और इन मूलभूत सुविधाएं देने में नाकामयाब रहा है! शिमला- [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>निगम चुनावों के विरोध के मुख्य कारण</p>
<p>पिछले दस वर्षों से मूलभूत सुविधाएं जैसे पानी के कनेकश्न घरेलू बिलों का भुगतान कमर्शीयल,टैक्स वसूली के लिए भवन नियमित,बिजली -पानी देने के लिए अनियमित,सीवरेज,स्ट्रीट लाईटों, पार्किंग,बिना रेलिंग की गलियां,सार्वजनिक शौचालय,सीढ़ियां जैसे झूठे वादे नगर निगम ने किये और इन मूलभूत सुविधाएं देने में नाकामयाब रहा है!  </p>
<p></strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि टुटू नगर निगम वार्ड नंबर 6 के बुद्धिजीवी राजनीति से ऊपर उठ कर निगम चुनावो का बहिष्कार करने का मन बना रहे हैं! समिति अध्यक्ष ने प्रैस को जारी एक ब्यान में कहा कि नगर-निगम वार्ड बड़े लंबे समय से शिमला व पूर्व और वर्तमान प्रदेश सरकार के झूठे वादो के कारण मूलभूत सुविधाओं से वंचित है जिस कारण उपनगर में रह रहे भवन मालिक और किरायदार व दूकानदार आगामी वर्ष होने वाले नगर-निगम चुनावों का बहिष्कार करने का मन बना रहे हैं और निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध करने के लिए आगामी रणनीती बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं!</p>
<p>समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता का कहना है कि नगर-निगम शिमला वर्तमान समय में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए कोई ठोस नीती नहीं बना रहा है जबकि प्रापर्टी टैक्स,पानी के बढ़ते बिल और अन्य करो को बिना सीवरेज सुविधा के सीवरेज सेस जैसे कर लगाकर जनता का खून चूसने का कार्य कर रहा है!</p>
<p>समिति ने कहा कि नगर निगम शिमला ने तकरीबन दो दशक पूर्व पानी की तंगी के चलते टुटू क्षेत्र को घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी मुहैया करवाया था जबकि निगम क्षेत्र के दायरे में आने के बावजूद भी आजतक कमर्शीयल दरों के बिल थमा रहा है! वहीं भाजपा विचारधारा रखने वाले वरिष्ठ वकील टुटू निवासी विवेक शर्मा ने कहा कि नगर-निगम शिमला नए शामिल क्षेत्रों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है और दोहरी नीती अपना रहा है टुटू निवासी का ये भी कहना है कि एक ओर तो निगम टैक्स वसूली करने के लिए बहुमंजिला भवनो को नियमित समझता है जबकि दूसरी ओर अवैध करार कर नक्शे स्वीकृत करने के लिए नियमों में प्रावधान न होने के कारण जनता को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देने में आनाकानी कर रहा है!</p>
<p>वहीं व्यापार मण्डल के अध्यक्ष राजीव सूद का कहना है कि निगम व्यापारियों पर बेफिजूल के प्रापर्टी टैक्स व लाईसेंस फीस लगाकर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है जबकि भवन मालिकों द्वारा प्रापर्टी टैक्स की अदायगी अपरोक्ष रूप से व्यापारी वर्ग को ही चुकानी पड़ती है! राजीव सूद ने कहा कि पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक सड़क पहुँचने के कारण गाँव-गाँव में कारोबार बढ़ रहा है और शहर में कारोबार कम हो रहा है जबकि निगम नए से नए कर लगाकर व्यापारी वर्ग पर आर्थिक बोझ डाल रहा है! </p>
<p>स्वाभिमान पार्टी के जिला प्रवक्ता और कारोबारी सुरेन्द्र बाटला ने कहा कि नगर निगम व सरकार के झूठे वादों से तंग आकर स्थानीय जनता में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और लबे समय से सीवरेज सुविधाएं देने और भवन नियमित न करने के लिए निगम नाकामायब साबित हुआ है इसलिए स्थानीय जनता आगामी वर्ष में होने वाले निगम चुनावो का बहिष्कार करने के लिए विकास मंच के झंडे तले खड़े होने को मजबूर हैं!</p>
<p>पार्टी के जिला प्रवक्ता ने बताया कि भंवनों को एकमुश्त बिना शर्त नियमित करने की आड़ में भाजपा और कांग्रेस यहाँ तक की सीपीआईएम(एम) ने आजतक सिर्फ राजनैतिक रोटियाँ सेकने का ही कार्य किया है जबकि जनता को बेहतर मूलभूत सुविधाएं देने के लिए आजतक कोई ठोस नीति न तो प्रदेश सरकार बना पाई है और न ही नगर निगम!</p>
<p>समिति ने कहा कि कांग्रेस पार्टी से सीधे तौर पर संबंध रखने वाले टुटू वासी कमलेश वर्मा,दिवाकर शर्मा,खेम राज,तरुण भारद्धाज,दिनेश कपूर का कहना है कि पिछले दिनो उन्होने युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह के माध्यम से प्रदेश सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे व प्रदेश के मुख्यमंत्री से भवनो को नियमित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग और सीवरेज सुविधा की मांग को प्रमुखता से उठाया है!</p>
<p>पार्टी ने कहा की उन्हे उम्मीद है की जल्द ही प्रदेश सरकार कोई ठोस नीति बना कर नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों के भवन मालिकों को भवन नियमित करने के मामले में राहत प्रदान करेगी ताकि मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोगों को उचित सुविधाएं मिल सके! पार्टी का यह भी कहना है कि वर्तमान सरकार के मुखिया शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र के विधायक भी हैं और वह जनता का दुख-दर्द भली भांति जानते हैं! </p>
<p>टुटू विकास समिति अध्यक्ष व् महासचिव व् अन्य पदाधिकारियों ने एक संयुक्त ब्यान में कहा कि वीरभद्र सरकार के गठन के तुरंत बाद उन्होंने भवन नियमतीकरण हेतु कुछ सुझाव शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को भी दिए थे लेकिन अभी तक कोई अमल नजर नहीं आ रहा है!</p>
<p>समिति ने कहा कि टुटू की जनता जागरूक है और बार-बार भवन नियमतिकरण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है जबकि पिछले 20-25 वर्षों से आश्वासनों पर आश्वासन ही मिल रहे हैं और अब उनका सब्र का बांध टूट रहा है और यदि सरकार और निगम आगामी दिनो में भवन नियमतिकरण के लिए मिलकर कोई ठोस नीति सामने नहीं लाती है तो सभी राजनैतिक पार्टियों को उसका अंजाम आगामी वर्ष में होने वाले विधानसभा और निगम चुनावों में सहना पड़ेगा! </p>
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			</item>
		<item>
		<title>आरटीआई में खुलासा: करोड़ों के क़र्ज़ में डूबे हिमाचल के मंत्री सपरिवार कर रहे विदेश की सैर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/09/rti-on-hp-government-expenditure-on-foreign-trips/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Mar 2016 10:44:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Minister Thakur Singh Bharmouri]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government]]></category>
		<category><![CDATA[HP Health Minister]]></category>
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		<category><![CDATA[Virbhadra Singh]]></category>
		<category><![CDATA[World Bank]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरटीआई में खुलासा: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स को छोड़ सभी ने क्लेम किया लाखों का डीए,सपरिवार की विदेश की सैर या फिर जमे रहे हलकों में, शांडिल को छोड़ किसी को नहीं मिली सचिवालय में बैठने की फुरसत संसाधनों की कमी से साल दर साल करोड़ों के कर्ज में दब कर गरीब होते [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आरटीआई में खुलासा: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स को छोड़ सभी ने क्लेम किया लाखों का डीए,सपरिवार की विदेश की सैर या फिर जमे रहे हलकों में, शांडिल को छोड़ किसी को नहीं मिली सचिवालय में बैठने की फुरसत</strong></p>
<p>संसाधनों की कमी से साल दर साल करोड़ों के कर्ज में दब कर गरीब होते हिमाचल प्रदेश के विकास की इबारत विश्व बैंक, नाबार्ड और भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों से उधार लेकर लिखी जा रही है। लेकिन कई मंत्री मंत्री इस हालत को जानते हुए भी समझने को तैयार नहीं हैं। हां, विद्या स्टोक्स की तरह दरियादिली कोई नहीं दिखा रहा। सचिवालय प्रशासन विभाग का 2015 में छह माह का रिकॉर्ड बताता है कि दौरों में मंत्रियों की कमाई भी मोटी हो रही है। </p>
<p>मंत्री सिडनी, बैंकॉक, दुबई, न्यूयार्क, बोस्टन, यूरोप, स्पेन, इंग्लैंड जैसे देशों की सैर करने में रुचि दिखा रहे हैं लेकिन शिमला सचिवालय के कार्यालयों बैठना अधिकतर को पंसद नहीं।</p>
<p>क्लेम किया जा रहा डीए सरकारी खजाने में लाखों की सेंध लगा रहा है। प्रदेश या अन्य राज्यों में विभागीय कार्यों की एवज में जो दैनिक भत्ते मंत्री क्लेम कर रहे हैं, उन पैसों को लेने में तो जैसे मंत्रियों में होड़ लगी हैं। अन्य राज्यों में भी जनसुनवाई के हवाले से लाखों वसूले जो रहे हैं। </p>
<p>एक मंत्री ने प्रदेश के बाहर अपना नियमित स्वास्थ्य चैकअप और टेस्ट जहां करवाए, उस राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान के निदेशक और दूसरे पदाधिकारियों से बैठक का हवाला डीए क्लेम करने के लिए दिया। अगले ही दिन साहब उस राज्य के निजी स्वास्थ्य संस्थान में दाखिल हुए।<br />
कई मंत्रियों ने उडनख़टोलों में की विदेशों की सैर के लिए लाखों रुपये का डीए लिया। एक मंत्री ने देश के भीतर अपने पूरे परिवार को दिल्ली से हिमाचल की सैर उडनख़टोले में करवाई पर खर्चा पूरा सरकार से ही लिया। एक अन्य मंत्री ने जीवन संगिनी को सैर करवाई। कई ने विदेश जाकर निजी दौरे के नाम पर कई दिन सरकारी घोषित किए। वहां की योजनाएं यहां के पहाड़ पर कितनी चढ़ीं, जनता उसे जानती है और इंतजार में है। और तो और, शताब्दी में खाए खाने का भी डीए लिया। काबिले-जिक्र यह कि यह डीए, गाडिय़ों, पेट्रोल, मंत्री स्टाफ सहित अन्य के लाखों खर्च का यह मात्र चुटकी भर है।</p>
<p><strong>हिमाचल मंत्रियों का चंद दिनों का दैनिक भत्ता</strong></p>
<table class="footable">
<thead>
<tr>
<th></th>
<th>मंत्री का नाम</th>
<th>दैनिक भत्ता (रुपये)</th>
<th>अवधि</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/virbhadra-singh_.jpg" alt="Virbhadra-Singh_" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4189" /></td>
<td>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह</td>
<td>1,39,248</td>
<td>85</td>
</tr>
<tr>
<td><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/mukesh-agnihotri.jpg" alt="mukesh-agnihotri" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4195" /></td>
<td>उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री</td>
<td>93,000</td>
<td>32</td>
</tr>
<tr>
<td><img decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/thakur-singh-bharmouri.jpg" alt="Thakur Singh Bharmouri" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4196" /></td>
<td>वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी</td>
<td>2,49,802</td>
<td>134</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/urban-development-minister-sudhir-sharma.jpg" alt="Urban-Development-Minister-Sudhir-Sharma" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4197" /></td>
<td>शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा</td>
<td>2,83,018</td>
<td>174</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/dhani-ram-shandil.jpg" alt="Dhani-Ram-Shandil" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4198" /></td>
<td>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग धनीराम शांडिल</td>
<td> 1,67,335</td>
<td>185</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/panchayati-raj-minister-anil-sharma.jpg" alt="panchayati raj minister Anil Sharma" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4200" /></td>
<td>पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा</td>
<td>3,70,750</td>
<td>177</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/gs-bali.jpg" alt="GS Bali" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4201" /></td>
<td>परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली</td>
<td>2,51,637</td>
<td>76</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/prakash-choudhary-minister-of-excise-and-taxation-himachal.jpg" alt="Prakash-Choudhary-Minister-Of-Excise-and-Taxation-himachal" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4205" /></td>
<td>आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी</td>
<td> 2,74,627</td>
<td>154</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/thakur-kaul-singh.jpg" alt="Thakur Kaul Singh" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4202" /></td>
<td>स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह</td>
<td>2,18,576</td>
<td>151</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/sujan-singh-pathania.jpg" alt="sujan-singh-pathania" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4203" /></td>
<td>ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया</td>
<td>1,40,850</td>
<td>163</td>
</tr>
<tr>
<td><img loading="lazy" decoding="async" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2016/03/vidya-stokes.jpg" alt="vidya-stokes" width="100" height="100" class="alignleft size-full wp-image-4204" /></td>
<td>आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स</td>
<td>&#8211;</td>
<td>&#8211;</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>राहत यह है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस लिहाज से समझदार हैं। विद्या स्टोक्स ऐसा कोई पैसा नहीं लेती तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस मामले में सबसे शालीन हैं। उन्होंने सबसे कम दैनिक भत्ता क्लेम किया है। दूसरे नंबर पर ऊर्जा मंत्री व तीसरे स्थान पर धनी राम शांडिल हैं। जबकि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अधिकतर मंत्रियों ने वहां डीए क्लेम नहीं किया हैं। एक मंत्री की जानकारी देने में जीएडी ने गुरेज किया।</p>
<p><strong> प्रकाश चौधरी ने की विदेश की सैर</strong></p>
<p>प्रकाश चौधरी औसतन बीस प्रतिशत ही शिमला में सचिवालय में अपने स्टाफ के साथ बैठे। अस्सी फीसद दौरे उनके विदेश, दिल्ली, चंड़ीगढ़ सहित अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही रहे। 24 सितंबर को शिमला से विदेश के लिए रवाना हुए। एक दिन बाद दिल्ली एयरपोर्ट से बैंकाक के लिए निकले, फिर यहां से सिडनी पहुंचे। इतने सफर तक उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार के डॉलर खर्चे। मगर इसके बाद सिडनी में वेलिंगटन घूमे। चार से लेकर दस अक्टूबर तक उन्होंने टीए-डीए क्लेम नहीं किया और ऑकलैंड में रुके। उन्होंने यह निजी दौरा बताया है। वापस दिल्ली पहुंचे। 14 अक्टूबर को शिमला पहुंचे। धर्मशाला में शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान अपने दम पर रहे, कोई सरकारी खर्च नहीं लिया।</p>
<p><strong>भरमौरी को भाता है भरमौर में रहना</strong></p>
<p>प्रदेश के वन मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के बीच रहना पंसद करते हैं। अक्तूबर में तो दो दिन ही वन मंत्री शिमला आए हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ के दौरों पर भी कम ही जाते हैं। घरेलू एयरपोर्ट से चंडीगढ़ दिल्ली में हवाई सेवाएं अगस्त महीने में बैठकों के लिए उपयोग की। मुख्यमंत्री के साथ हेलीकॉप्टर में भी घूमे, उनके साथ जनसभाओं में गए। दिल्ली दौरे के दौरान हालांकि अपने साथ एक सहयोगी को भी हवाई यात्रा सरकारी खर्च पर करवाई। अपने विधानसभा क्षेत्र में दौरे किए। 19 से लेकर 23 नवंबर 2015 तक निजी गाड़ी में घूमे, मगर डीए लेना नहीं भूले।</p>
<p><strong>सचिवालय में बैठने का रिकॉर्ड शांडिल के नाम</strong></p>
<p>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अधिक सचिवालय में बैठना पंसद करते हैं। अन्य मंत्रियों में सबसे अधिक सचिवालय में बैठने का उनका रिकॉर्ड रहा हैं। जुलाई महीने में 27 दिन तक वह शिमला सचिवालय में बैठे, एक साथ इतने दिनों तक सचिवालय में मौजूदगी का रिकॉर्ड उपरोक्त अवधि में अन्य किसी के नाम नही रहा हैं। अन्य महीनों में औसतन 6 माह में तीस फीसद तक सचिवालय में मौजूद रहे जबकि पचास प्रतिशत तक अपने विधानसभा क्षेत्र और शेष में बाहरी राज्यों के दौरों और मंत्रालय के साथ बैठकों में गए। नई दिल्ली और चंडीगढ़ दौरों के दौरान बोर्डिंग पास पर 5500 रुपये के लिए क्लेम सरकार से लिया। सितंबर में प्रदेश के बाहर के दौरों के लिए हवाई सेवा टिकट क्लेम किया है। विदेश दौरे पर नहीं गए।</p>
<p><strong>अक्टूबर में एक ही दिन शिमला रहे सुधीर</strong></p>
<p>शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा अधिकतम समय शिमला से बाहर ही रहें हैं। दिल्ली चड़ीगढ़ के दौरे विभागीय बैठकों के नाम पर थे। इस दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से हिमाचल में एयरपोर्ट विस्तार, विभाग की विभिन्न योजनाओं के फॉलोअप कई मंत्रालयों में किए। अक्तूबर में तो सिर्फ एक दिन शिमला सचिवालय में बैठे। बैजनाथ में पैराग्लाइडिंग वल्र्ड कप की मेजबानी में भी व्यस्तता रही। नौ अक्टूबर को शिमला से दिल्ली रवाना हुए और फिर पूरे महीने शिमला ही नहीं आए। हां दिल्ली में मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहे।<br />
नवंबर अंत से लेकर मध्य दिसंबर तक चंडीगढ़ दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहे। 21 नवंबर को धर्मशाला से गग्गल तक 10,955 रूपए की टिकट , फिर 22 से लेकर 28 नवंबर तक विभिन्न मंत्रालयों में योजनाओं का फीडबैक लिया और प्रदेश का पक्ष रखा। अगले दिन अपनी बेटी आध्या और पत्नी रीना के साथ दिल्ली से गग्गल पहुंचे। इस दौरान 8,027 रूपए क्लेम किए। शीतकालीन विधानसभा सत्र के बाद सात दिसंबर को परिवार सहित दिल्ली गए, 21 हजार रुपए की टिकट लगी और वापसी 13 दिसंबर को भी हवाई सेवा से की उसके टिकट भी 16000 के आसपास दिए। </p>
<p><strong>दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में गए सुजान</strong></p>
<p>प्राप्त जानकारी में सुजान सिंह पठानिया ने एक टुअर ऐसा भी डीए के लिए क्लेम किया हैं जिसका जिक्र अन्य मंत्रियों ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान नहीं किया हैं। 19 सितंबर को शिमला से दिल्ली सरकारी गाड़ी में रवाना हुए और बीस को वहां कैबिनेट बैठक में भाग लिया और मुख्यमंत्री के साथ रहे। उसके बाद अगले दिन शिमला पहुंचे। विदेश सैर नहीं की, शिमला सचिवालय में बैठना भी अधिक पंसद नहीं किया। मगर दिल्ली चंडीगढ़ का दौरे विभागीय कार्यो के लिए हवाई सेवाओं के जरिए खूब की। फतेहपुर में ही अधिक जमे रहे।</p>
<p><strong>अपना खर्च करते हैं मुख्यमंत्री</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला में कम बैठे, दिल्ली, चंडीगढ़ के दौरे विभागीय कार्यो के चलते अधिक किए। अन्य राज्यों में भी गए मगर, उन्होंने अन्य मंत्रियों के लिए मिसाल कायम की कि निजी दौरों के लिए सरकारी खर्च के लिए क्लेम नहीं किया। अधिकतर दौरों का स्वयं भुगतान किया, जो निजी दौरे घोषित किए हैं। 19 जुलाई को लखनऊ बाई एयर, 25 जुलाई को सड़क मार्ग से जालंधर, मगर स्वयं खर्च उठाया।</p>
<p><strong>दिल्ली, चंडीगढ़ और नगरोटा में रहे बाली</strong></p>
<p>परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली इस अवधि में औसतन दस प्रतिशत ही सचिवालय में रहे। अधिकतर अपने विधानसभा क्षेत्र और दिल्ली चंडीगढ़ के दौरे पर रहे। सभी दौरों में दिल्ली चंडीगढ़ में अपनी निजी गाड़ी का प्रयोग किया, मगर डीए का लाभ लेना परिवहन मंत्री नहीं भूले हैं। सरकारी गाड़ी का प्रयोग नहीं किया।</p>
<p><strong>अरे वाह पेरिस, इंग्लैंड घूम आए अनिल शर्मा</strong></p>
<p>अनिल शर्मा का लंदन और पेरिस में निजी दौरे पर रहे हैं। इस दौरान उनकी पत्नी सुनीता शर्मा उनके साथ रहीं। कालका से दिल्ली शताब्दी एक्सप्रैस में नौ जुलाई को गए और 23 को दिल्ली से इसी माध्यम से वापस चंडीगढ़ पहुंचे। उसके बाद सरकारी गाड़ी में शिमला पहुंचे। टीए नियम दो सेक्शन एक के तहत दो लाख रुपये की एवज में 208500 रुपये दो सीटों के लिए क्लेम किए। 14 से 27 नवंबर तक इंग्लैंड की यात्रा पर रहे,सरकारी खर्चा नहीं मांगा।</p>
<p><strong>बस दिल्ली, चंडीगढ़ में ही रहे मुकेश</strong></p>
<p>उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अस्सी प्रतिशत तक दिल्ली चंडीगढ़ में ही रहे। दस प्रतिशत शिमला और इतनी ही फीसद में अपने हलके में गए। जीएडी ने उनकी जानकारी मात्र 32 दिनों की ही दी है। जून अंत से लेकर जुलाई 2015 तक की जानकारी सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में दी हैं।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर दुबई, न्यूयार्क घूमे</strong></p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने विदेश दौरा किया। हालांकि इस अवधि में बीमार भी थे। विधानसभा क्षेत्र में तीस प्रतिशत तक ही जा पाए। 8 नवंबर को दुबई रवाना हुए। 14 नवंबर को वापस दिल्ली आए। इसके बाद विशाखापतनम, हैदराबाद, तिरुपति के लिए उड़ान भरी, डीए भी लिया। विशाखापटनम के लिए 11843 रुपये फ्लाइट टिकट के लिए क्लेम किया। यहां रात्रि विश्राम रहा और अगले दिन 19 नवंबर को डिजास्टर मैनेजमेंट विषय पर दूसरे विश्व सम्मेलन में पहुंचे। यहां से हैदराबाद गए, इसके लिए 5177 तथा तिरुपति के लिए 2883 रुपये क्लेम किए। रोचक यह रहा कि ट्रीटमेंट पर जाने से पहले जब चंडीगढ़ में रहे तो पीजीआई निदेशक और अन्य अथॉरिटी के साथ मैराथन बैठकें की थी। 10 से 14 जुलाई तक वे वहीं रुके। इस दौरान पांच दिन का डीए 1500 रुपये के हिसाब से लिया। अगले दिन से वह फोर्टिस में दाखिल हुए और 3 अगस्त तक वहीं रहे। इस दौरान टीए, डीए एडवांस में लिया था। दो सितंबर को शताब्दी से ट्रेन से दिल्ली गए।</p>
<p><strong>स्टोक्स नहीं लेती कोई खर्च</strong></p>
<p>सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स सरकारी खर्चा दौरों के लिए लेती ही नहीं हैं। शिमला में अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अधिक वह सचिवालय कार्यालय में मौजूद रहती हैं। प्रदेश से बाहर दौरों पर कम ही रही है,अपने विधानसभा क्षेत्र में भी शिमला से कम दिखी है।</p>
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		<title>रोहतांग एनजीटी रोक का खामियाज़ा भुगत रही स्थानीय महिलायें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Nov 2015 07:44:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Government]]></category>
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		<category><![CDATA[National Green Tribunal of India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली- रोहतांग दर्रा तक सभी तरह की व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों पर रोक का खामियाजा स्थानीय कामकाजी महिलाओं की आजीविका पर पड़ रहा है। दर्रा के आसपास इलाकों में दर्शकों से अपने परिवार की आजीविका चलाने वाली इन महिलाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई है कि उन्हें रोजगार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली-</strong> रोहतांग दर्रा तक सभी तरह की व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों पर रोक का खामियाजा स्थानीय कामकाजी महिलाओं की आजीविका पर पड़ रहा है। दर्रा के आसपास इलाकों में दर्शकों से अपने परिवार की आजीविका चलाने वाली इन महिलाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई है कि उन्हें रोजगार शुरू करने की अनुमति फिर दी जाए।</p>
<p>कहा कि उनके काम से किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं हो रहा है। एनजीटी ने याचिका पर विचार के बाद हिमाचल सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।<br />
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई कर रही है।</p>
<p>पंचांग, कोठी, सोलांग, कुलांग, रूअर गांव की महिलाओं की ओर से प्रसार महिला मंडल ने याचिका दाखिल की है। एडवोकेट भक्ति परसीजा सेठी ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में इस मामले को उठाया है। एडवोकेट सेठी ने कहा कि ये महिलाएं पीढ़ियों से पर्यटकों को किराये पर सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती हैं। इससे किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता है। ऐसे में सभी तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध से इनकी आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>पारंपरिक ड्रेस मुहैया कराती हैं महिलाएं-</strong> वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक की दूरी 51 किमी है। ये महिलाएं पर्यटकों को पर्यटन संबंधी सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती थीं। ये महिलाएं पर्यटकों को पारंपरिक ड्रेस, स्नो ड्रेस, घूमने के लिए छड़ी किराये पर मुहैया करवाती हैं। पर्यटक स्थानीय लोक रंग में सज-धजकर तस्वीरें खिंचवाते हैं।</p>
<p>खासतौर से मई से नवंबर में रोहतांग दर्रे के आसपास इलाके बर्फ से ढक जाते हैं। ऐसे में पर्यटकों को भी यह सीजन लुभाता है। सभी तरह की गतिविधि पर अंकुश लगने से ये महिलाएं लाचार हो गई हैं। इन महिलाओं का थरमस में पर्यटकों को चाय पिलाना, घोड़े पर पर्यटक को बिठाकर घुमाना जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>अटका है अभी तक पुनर्वास-</strong> अभी इन महिलाओं को न तो पुनर्वास योजना का लाभ मिला है न ही सरकार से कोई मदद की गई है। 16 जुलाई को एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा के बीच प्रतिबंध आदेश से प्रभावित हुए सभी स्थानीय लोगों के लिए सरकार राहत और पुनर्वास कार्यक्रम की योजना तैयार कर पेश करे। कुल्लू के डीसी ने छह अगस्त को एक पत्र भी जारी किया था। इसके बाद भी अभी तक इस पर कोई काम नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>मनाली, सोलांग में भी पर्यटन रोजगार पर प्रतिकूल असर-</strong> याचिका के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में मनाली और सोलांग क्षेत्र भी प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। सालाना यहां करीब 30 लाख पर्यटक आते हैं। साथ ही आने वाले अधिकांश पर्यटक रोहतांग दर्रा जाने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में ज्यादातर स्थानीय आबादी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पर्यटन से जुड़ी हुई है। फैसले से इन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>एनजीटी ने जुलाई में लगाया था प्रतिबंध-</strong> एनजीटी ने 6 जुलाई 2015 को वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिये सभी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।</p>
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