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	<title>Farmers Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Farmers Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला: रोहड़ू में किसानों-बागवानों का प्रदर्शन, हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने MSP लागू करने, विदेशी सेब पर शुल्क और लेबर कोड रद्द करने की उठाई मांग</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/13/rohr-himachal-seb-utpadak-sangh-demands-msp-guarantee-higher-duty-on-imported-apples-and-repeal-of-labour-codes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 06:21:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : वीरवार को रोहड़ू बस स्टैंड परिसर में राष्ट्रव्यापी किसान–मज़दूर हड़ताल के तहत आयोजित सभा में जुब्बल, कोटखाई, रोहड़ू और छुहारा क्षेत्र के किसान–बागवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभा के दौरान किसानों और मजदूरों से जुड़ी कई प्रमुख मांगें उठाई गईं। इनमें मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, किसानों की भूमि व घरों से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला </strong><strong>: </strong>वीरवार को रोहड़ू बस स्टैंड परिसर में राष्ट्रव्यापी किसान–मज़दूर हड़ताल के तहत आयोजित सभा में जुब्बल, कोटखाई, रोहड़ू और छुहारा क्षेत्र के किसान–बागवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभा के दौरान किसानों और मजदूरों से जुड़ी कई प्रमुख मांगें उठाई गईं।</p>
<p>इनमें मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, किसानों की भूमि व घरों से बेदखली पर रोक लगाने, भूमिहीन और गरीब किसानों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने, किसान विरोधी टैरिफ नीतियों व मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर रोक लगाने, विदेशी सेब पर पर्याप्त आयात शुल्क सुनिश्चित करने, सभी फसलों पर कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने तथा प्राकृतिक आपदाओं व विकास कार्यों से हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं।</p>
<p>सेब उत्पादक संघ के वरिष्ठ नेता संजय चौहान ने आरोप लगाया कि देश के नीति-निर्धारक और केंद्र सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को संरक्षित करने में लगे हैं, जबकि किसानों, मजदूरों और आम जनसाधारण के अधिकारों को लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी क्षेत्र को कमजोर करने वाली नीतियां अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगी।</p>
<p>उन्होंने सभी मांगों को न्यायोचित बताते हुए सरकार से तत्काल सकारात्मक कदम उठाने की अपील की तथा चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक व तेज़ किया जाएगा।</p>
<p>हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने स्पष्ट किया कि किसानों और मजदूरों की मांगों पर ठोस निर्णय लिए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा। संघ ने प्रदेश के किसानों-बागवानों से एकजुट रहकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।</p>
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		<title>अब सरल फार्म भरकर आसानी से प्राकृतिक खेती से जुड़ सकेंगे हिमाचल के किसान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2025/02/04/natural-farming-in-himachal-pradesh-simple-form-for-farmers-launch/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Feb 2025 07:10:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[Chander Kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला -हिमाचल सरकार ने विधायक प्राथमिकता बैठक के दौरान राज्य में प्राकृतिक खेती में किसानों के पंजीकरण के लिए सरल फार्म लांच किया है। सरकार के अनुसार किसान ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से यह फार्म भर सकेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार इच्छुक किसान अब इस फार्म को भरकर प्राकृतिक खेती [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong> -हिमाचल सरकार ने विधायक प्राथमिकता बैठक के दौरान राज्य में प्राकृतिक खेती में किसानों के पंजीकरण के लिए सरल फार्म लांच किया है। सरकार के अनुसार किसान ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से यह फार्म भर सकेंगे।</p>
<p>प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार इच्छुक किसान अब इस फार्म को भरकर प्राकृतिक खेती से जुड़ सकते हैं। पंजीकरण फार्म में किसानों की भूमि, उगाई जाने वाली फसलों, पशुओं की नस्ल और प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण से संबंधित कुछ अन्य विवरण होंगे। यह फार्म प्रदेश की सभी पंचायतों में किसानों को वितरित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे राज्य में वर्ष 2025-26 में प्राकृतिक खेती को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>आत्मा( ATMA) स्टाफ पंजीकृत फार्म का सत्यापन करेगा </strong></p>
<p>कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि आत्मा ( ATMA) स्टाफ किसानों द्वारा भरे गए फार्म का सत्यापन करेगा। उन्होंने कहा कि फार्म को PK3Y पोर्टल के सीटारा-एनएफ (प्राकृतिक खेती के कृषि संसाधन विशलेषण का प्रमाणित मूल्याकंन उपकरण) से जोड़ा जाएगा।</p>
<p><strong>‘हिम भोग’ ब्रांड नाम से उपलब्ध है मक्की का आटा</strong></p>
<p>जारी की गई जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार ने हाल ही में 1508 किसानों से 398.976 मीट्रिक टन प्राकृतिक रूप से उगाई गई मक्की 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी है। प्रदेश, देश में मक्की पर सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रहा है।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने कहा कि आगामी सीजन में प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं की खरीद के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। लोगों को प्राकृतिक रूप से उत्पादित मक्की के आटे के एक किलोग्राम और पांच किलोग्राम के पैकेट ‘हिम भोग’ ब्रांड नाम से उपलब्ध करवाया जा रहा है।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने कहा 1054 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 1 फरवरी, 2025 तक 38.225 मीट्रिक टन मक्की के आटे की बिक्री की गई है और हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड की थोक इकाइयों के माध्यम से 73.52 मीट्रिक टन आटा बेचा गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में बिना किसी वैज्ञानिक जांच परख के बीज आलू उत्पादन बंद करना न्यायसंगत नहीं</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/03/16/central-potato-research-centre-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Mar 2019 14:38:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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		<category><![CDATA[Central Potato Research Centre]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में बीज आलू के उत्पादन को बंद करने के निर्णय को किसान विरोधी ठहराते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने इसकी कड़ी निंदा की है। पार्टी के राज्य सचिवमण्डल सदस्य और शिमला शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में 1935 से कार्यरत है [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में बीज आलू के उत्पादन को बंद करने के निर्णय को किसान विरोधी ठहराते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने इसकी कड़ी निंदा की है। </p>
<p>पार्टी के राज्य सचिवमण्डल सदस्य और शिमला शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में 1935 से कार्यरत है और इसने कई तरह की नई किस्मों को तैयार कर देश मे आलू की पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूरे देश में बीज आलू की आपूर्ति के लिए यह संस्थान जाना जाता हैं। </p>
<p>चौहान ने कहा कि एकदम केंद्र सरकार द्वारा इस संस्थान में बीज आलू के उत्पादन पर बिना किसी वैज्ञानिक जांच परख के रोक लगाना न्यायसंगत नहीं है। इस निर्णय से न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर व उत्तर पूर्व के अन्य पहाड़ी राज्य भी प्रभावित होंगे।</p>
<p> उन्होंने ने आशंका जताई है कि जिस प्रकार से आज कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों का सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कहीं उसके चलते तो यह निर्णय नहीं लिया गया है। आज भी कई बीज आलू का कारोबार करने वाली निजी कंपनियां केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के कुफरी स्थित फार्म में बीज ब्रीडिंग के लिए आते हैं क्योंकि यहाँ के आलू में आने वाले फूलों के संख्या व गुणवत्ता बीज उत्पादन के लिए अन्य राज्यों से बहुत बेहतर है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि प्रदेश में बागवानी के क्षेत्र में भी देखा गया है कि सरकार ने निजी कंपनियों के दबाव में आकर नौणी विश्विद्यालय की तमाम तरह के अनुसंधान व विकास(R&#038;D) समाप्त कर व इसकी भूमि भी निजी कंपनियों को बागवानी के क्षेत्र में बढ़ावे के लिए दे दिये हैं जिसके कारण आज बागवानो को निजी व विदेशी कंपनियों के महंगे पौधे व उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर बना दिये गए हैं। </p>
<p>प्रदेश की आर्थिकी में बीज आलू का महत्वपूर्ण योगदान है क्योंकि इस पहाड़ी राज्य के हर जिला में ही इसका उत्पादन होता है और मैदानी क्षेत्रों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक का किसान इससे अपना गुजारा करता है। लाहौल स्पीति के बीज आलू की मांग तो आज भी देश के विभिन्न राज्यों में है और वहां के किसानों का यह मुख्य रोजगार का साधन भी है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश की कृषि पर बेहद बुरा असर पड़ेगा और किसानों की निजी कंपनियों की लूट के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव होगा। प्रदेश में कृषि का संकट और विकराल होगा।</p>
<p> सी.पी.एम.  ने मांग की है कि प्रदेश सरकार को इस निर्णय की गम्भीरता को समझते हुए इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए और केंद्र सरकार से इस किसान विरोधी निर्णय को तुरंत वापस लेने के लिए दबाव बनाना चाहिए तथा केंद्र सरकार तुरंत केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान को इस समस्या का हल निकालने के लिए दिशानिर्देश जारी करे।</p>
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		<item>
		<title>केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसानों की आत्महत्या का दैनिक आंकड़ा 55 से 60 पहुंचा: किसान सभा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/12/himachal-kisan-sabha-protest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2016 12:51:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Kisan Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Kushal Bhradwaj]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरा राम ने केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों को कोसते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के कारण देश का किसान आज गंभीर कृषि संकट के दौर से गुज़र रहा है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा हर [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरा राम ने  केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों को कोसते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के कारण देश का किसान आज गंभीर कृषि संकट के दौर से गुज़र रहा है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा हर दिन 55 से 60 पहुंच गया है। </p>
<p>सभा ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। चुनाव से पहले देश भर में रैलियां करके मोदी ने ज़ोर-शोर से इस बात का एलान किया था कि वे सत्ता में आते ही डाॅ. स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेंगे और किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य देंगे लेकिन सत्ता में आते ही केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उसके पास इतने साधन नहीं है कि वह डाॅ. स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर सके। </p>
<p>सभा ने कहा कि दूसरी ओर कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन लाकर किसानों से उनकी ज़मीनें छीनने की साजिश रच रही है। सभा ने यह भी कहा कि  मोदी राज में पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट है। मनरेगा के बजट में कटौती करके मोदी सरकार ने ग्रामीण रोज़गार पर कुठाराघात किया है। साल में 100 दिन की जगह सिकुड़कर रोज़गार 35 से 39 दिन रह गया है तथा  जिसके फलस्वरूप केन्द्र सरकार के खिलाफ 24 नवम्बर को दिल्ली में लाखों किसान रामलीला ग्रांउड में विरोध प्रदर्शन करेंगे।</p>
<p>हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव कुशाल भारद्वाज ने नुक्कड़ सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की तरह ही राज्य की कांग्रेस सरकार भी किसान विरोधी साबित हुई है। प्रदेश के किसान जंगली जानवरों की समस्या से बुरी तरह से प्रभावित है लेकिन सरकार समस्या को हल करने के बजाय उसे आगे टालने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2015 को विधानसभा में संकल्प प्रस्ताव पारित करने के बावजूद प्रदेश सरकार ने किसानों को 10 बीघा तक जम़ीन देने और गरीब, लघु और सीमान्त किसानों को राहत देने के लिए नीति बनाने के अपने वादे को भूलकर किसानों के फलदार पौधों को काटने की मुहिम में जुटी है। सभा ने यह भी कहा कि प्रदेश में वनाधिकार कानून को लागू नहीं किया जा रहा और न ही आवारा-नकारा पशुओं पर सरकार कोई नीति बना रही है। भारद्वाज ने प्राकृतिक आपदा, सूखे, भारी बरसात और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों के नुकसान के मुआवज़े की राशि को बढ़ाकर न्यायसंगत बनाने की मांग भी उठाई।</p>
<p>किसान सभा ने जंगली जानवरों की समस्या के समाधान व बन्दरों लिए का निर्यात खोलने, कलिंग के लिए प्रशिक्षित शूटरों की टीमें बनाने, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जंगली जानवरों को वर्मिन घोषित करने की मांग भी उठाई।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/12/himachal-kisan-sabha-protest/">केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसानों की आत्महत्या का दैनिक आंकड़ा 55 से 60 पहुंचा: किसान सभा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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