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	<title>हिमाचल स्वास्थ्य सेवाएं Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिमाचल स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न श्रेणियों में 9000 पद खाली, 600 से ज्यादा डाक्टरों की कमी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/07/22/over-one-thousand-vacancies-in-hp-health-department/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Jul 2017 10:30:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[टीएमसी काँगड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला आईजीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्वास्थ्य विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्वास्थ्य सेवाएं]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल में करीब 60 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जिस स्वास्थ्य विभाग पर है, उस विभाग का अपना स्वास्थ्य ही खराब है शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार ने साढ़े चार साल पहले सत्ता में आते ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के वादे किए थे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया, पर स्वास्थ्य विभाग ज्यों का त्यों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हिमाचल में करीब 60 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जिस स्वास्थ्य विभाग पर है, उस विभाग का अपना स्वास्थ्य ही खराब है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश सरकार ने साढ़े चार साल पहले सत्ता में आते ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के वादे किए थे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया, पर स्वास्थ्य विभाग ज्यों का त्यों बदहाल रहा। लेकिन समय के गुजरने के साथ-2 विभाग की स्तिथि ज्यों का त्यों ही है।  </p>
<p>अभी प्रदेश सरकार के पांच साल पूरे होने में थोड़ा समय शेष है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सैकड़ों पद खाली हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर अपने वादों पर कितना खरा उतर पाई सरकार।  <a href="http://www.divyahimachal.com/2017/07/%E0%A4%86%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97/" target="_blank">दैनिक समाचार-पत्र में छपी खबर के मुताबिक:</a> हिमाचल में करीब 60 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जिस स्वास्थ्य विभाग पर है, उस विभाग का अपना स्वास्थ्य ही खराब है। </p>
<p>दरअसल स्वास्थ्य विभाग में हजारों की संख्या में विभिन्न श्रेणी के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न श्रेणी के 22212 पद स्वीकृत हैं और उनमें से नौ हजार 87 पद खाली पड़े हैं। सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों की है। डाक्टरों के ही 600 से अधिक पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में  स्वास्थ्य सेवाओं का हाल समझा जा सकता है। </p>
<p>नियमों के मुताबिक पीएससी के लिए एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक सहायक, सीएचसी में चार डाक्टर व एक डेंटल डाक्टर, 50 बेडिड अस्पताल में आठ डाक्टरों व अन्य स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अधिकतर अस्पतालों में ये नियम पूरे नहीं होते। वर्ष 2012 में प्रदेश में कुल 1597 डाक्टर थे, लेकिन 2012 से मार्च 2017 तक करीब 500 डाक्टरों के नए पद सृजत किए हैं। </p>
<p>इसके साथ ही विभिन्न श्रेणी के 3248 पद स्वीकृत किए गए हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 550 पद भरे हैं और 1250 के करीब स्टाफ नर्सों की भर्ती भी की। इसके बावजूद अभी भी डाक्टरों के 600 से अधिक पद खाली हैं।</p>
<p><strong>प्रदेश में 2706 स्वास्थ्य केंद्र</strong></p>
<p>वर्तमान में प्रदेश मे अलग-अलग श्रेणियों में डाक्टरों के 1897 डाक्टरों के पद हैं। इनमें से करीब 500 डाक्टरों के पद खाली हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है। पूरे प्रदेश में वर्तमान में 2706 स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें 61 अस्पताल, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 497 पीएचसी और 2068 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। साथ ही 11 ईएसआई औषद्यालय केंद्र भी हैं। प्रदेश में नर्सिंग की स्थिति भी काफी खराब है।</p>
<p><strong>टीएमसी-आईजीएमसी में ये हाल</strong></p>
<p>आईजीएमसी शिमला में 2278 में से 1085 पद और टीएमसी में 1351 में से 524 पद खाली हैं। नाहन में केवल 47 पद भरे हैं, जबकि 1712 पद खाली हैं। चंबा में अभी तक एक पद भरा है और 200 खाली हैं व नेरचौक में 773 पद खाली हैं। हाल ही में नए कालेजों के लिए भी इन अस्पतालों के लिए फैकल्टी शिफ्ट की गई है।इसके कारण इन स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव डाला है। </p>
<p>हालांकि विभाग की ओर से प्रदेश ही नहीं, प्रदेश से बाहर भी डाक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किए गए, लेकिन कोई डाक्टर आने को तैयार नहीं है। वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सों के 600 से भी अधिक पद खाली पड़े हैं। पर्याप्त बजट के बाद भी प्रदेश में डाक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।</p>
<p>कई बार डाक्टरों को लगातार 36 घंटों तक ड्यूटी देनी पड़ती है। यही कारण है कि आईजीएसी से डाक्टरी करने के बाद ही कई डाक्टर विदेशों की और रुख कर कर लेते है, तो कई बीच में ही सरकार की नौकरी को छोड़कर अपने क्लीनिक खोल लेते हैं। परिणामस्वरूप राज्य के दूरस्थ क्षेत्र ही नहीं, शिमला में भी हालात खस्ता हैं। प्रदेश के बड़े अस्पताल में ही चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के करीब 300 पद खाली पड़े हैं।  </p>
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		<item>
		<title>पीएचसी टुटू में पिछले 2 महीनों से आने को तैयार नहीं नवनियुक्त डाॅक्टर: विकास समिति टुटू</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/29/primary-health-centre-totu-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nagender Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2017 11:01:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[नागेन्द्र गुप्ता]]></category>
		<category><![CDATA[पीएचसी टुटू]]></category>
		<category><![CDATA[विकास समिति टुटू]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला शहरी]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्वास्थ्य सेवाएं]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पीएचसी टुटू में आने को तैयार नहीं नव -नियुक्त डाक्टर,शहरी -ग्रामीण की लड़ाई में पिस रहे हैं मरीज, ग्रामीण एरिया में अपनी सेवा नहीं देना चाहते हैं नव-नियुक्त डाक्टर, शहरी इलाकों में डाक्टर को पीजी करने की प्राथमिकता नहीं मिलती है पिछले दो महीने से डाक्टर सौरभ शर्मा का पीएचसी टुटू से तबादला होने के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पीएचसी टुटू में आने को तैयार नहीं नव -नियुक्त डाक्टर,शहरी -ग्रामीण की लड़ाई में पिस रहे हैं मरीज, ग्रामीण एरिया में अपनी सेवा नहीं देना चाहते हैं नव-नियुक्त डाक्टर, शहरी  इलाकों में डाक्टर को पीजी करने की प्राथमिकता नहीं मिलती है</strong></p>
<p>पिछले दो महीने से डाक्टर सौरभ शर्मा का पीएचसी टुटू से तबादला होने के बाद पीएचसी में स्थाई रूप से कोई भी डाक्टर नहीं है जिस कारण रोजाना सैंकड़ों मरीजों को इलाज करवाने में परेशानी हो रही है! यह बात संयुक्त रूप से विकास समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ,महासचिव ठाकुर सिंह वर्मा व मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र कुमार ने प्रैस को जारी एक ब्यान में कही!</p>
<p>समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि समिति द्वारा मांग करने पर स्थाई रूप से नियुक्ति न होने तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला ने अस्थाई रूप से डाक्टर की तैनाती की थी लेकिन अब स्थाई नियुक्ति होने पर भी समस्या का हल नहीं निकल पाया है!</p>
<p>समिति ने यह भी कहा कि पिछले दिनों प्रदेश सरकार द्वारा स्थाई रूप से डाक्टरों की नियुक्ति की है और पीएचसी टुटू में भी स्थाई रूप से एक महिला  डाक्टर की तैनाती की गयी है, लेकिन उस महिला डाक्टर ने अभी तक ज्वायन नहीं किया है! गुप्ता ने कहा की जानकारी प्राप्त करने पर पता चला है कि उक्त महिला डाक्टर शहरी इलाकों (Urban Area) में अपनी सेवाएँ नहीं देना चाहती है और न ही अभी तक नव-नियुक्त डाक्टर ने विभाग को उपस्थिति की सूचना दी है !</p>
<p>समिति ने कहा कि उन्हें पता चला है कि हिमाचल में ग्रामीण क्षेत्र की दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों के न जाने को लेकर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किये हैं कि ग्रामीण इलाकों (rural area) में अपनी सेवाएं देने वाले डाक्टरों को पीजी करने के लिए प्राथमिकता दी जाए जिस कारण वर्तमान समय में नव-नियुक्त चिकित्सक शहरी इलाकों में अपनी सेवायें देने में आनाकानी कर रहे हैं! </p>
<p>उन्होंने कहा की उच्च न्यायालय के इस फैसले के कारण शहरी इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में कोई नव-नियुक्त डाक्टर आने को तैयार नहीं हैं जिस कारण आम नागरिक को छोटी-छोटी बीमारी का इलाज करवाने के लिए जगह-2 निजी क्लिनिकों में या बड़े अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं!</p>
<p>विकास समिति टुटू जनहित में प्रदेश सरकार से मांग कर कहा कि  टुटू में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाये व डेंटल चेयर (dental chair) स्थापित की जाये !  और एक्सरे के लिए स्थाई रूप से रेडियोग्राफर की नियुक्ति भी की जाये!  </p>
<p>ज्ञात रहे की पिछले दिनों लगभग 660 नए डाक्टरों की नियुक्ति के बावजूद भी शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र की सड़क साथ लगती इस पीएचसी टुटू में एक भी डाक्टर नहीं है जबकि दो चिकित्सकों की तैनाती की घोषणा स्वंय मुख्यमंत्री ने 30 अगस्त 2014 को उदघाटन के समय में की थी ! डाक्टर की तैनाती न होने के कारण पीएचसी टुटू में आपातकाल, प्राथमिक सेवायें प्रभावित हो रही हैं जहाँ रोजाना औसतन 70 -80 मरीज अपने इलाज को आते हैं! </p>
<p>विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ,महासचिव ठाकुर सिंह वर्मा ,मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार,कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ,संगठन सचिव राजेश गोयल सदस्य नरेश शर्मा व अन्य पदाधिकारियों ने भी प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द  डाक्टर की तैनाती की मांग की है ताकि टुटू व उसके आसपास के  क्षेत्र की जनता को परेशानी न हो! </p>
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		<item>
		<title>रिपन अस्पताल में डॉक्टरों का अकाल , एक डॉक्टर के सहारे ऑर्थो ओपीडी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/31/himacha-pradesh-heath-services/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Jan 2017 13:32:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[रंजना राव चिकित्सा अधीक्षक रिपन अस्पताल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल स्वास्थ्य सेवाएं]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार व स्वस्थ विभाग के प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के दावे रिपन अस्पताल में खोखले साबित हो रहे हैं।राजधानी शिमला का दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में एक-एक चिकित्सक के सहारे सैकड़ों मरीजों को छोड़ा गया है। डॉक्टर को केवल ओपीडी में मरीजों का चेकअप नहीं करना पड़ता है, [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/31/himacha-pradesh-heath-services/">रिपन अस्पताल में डॉक्टरों का अकाल , एक डॉक्टर के सहारे ऑर्थो ओपीडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> हिमाचल प्रदेश सरकार व स्वस्थ विभाग के प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के दावे रिपन अस्पताल में खोखले साबित हो रहे हैं।राजधानी शिमला का  दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में एक-एक चिकित्सक के सहारे सैकड़ों मरीजों को छोड़ा गया है।</p>
<p>डॉक्टर को केवल ओपीडी में मरीजों का चेकअप नहीं करना पड़ता है, बल्कि वार्ड में जाकर भी मरीज देखने पड़ते हैं। जब अस्पताल में दाखिल मरीज को किसी तरह की परेशानी आती है तो डॉक्टर को ओपीडी छोड़ वार्ड में जाना पड़ता है, ऐसे में ओपीडी के बाहर लाइन में खड़े इंतजार कर रहे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p>इतना ही नहीं एक डॉक्टर के छुट्टी पर जाने से ऑपरेशन भी टल जाते हैं, एक डाक्टर ओपीडी संभाले या फिर ऑपरेशन और वार्ड में दाखिल मरीजों को देखें। उपचार करवाने अस्पताल पहुंचे मरीजों को लंबा इंतजार करने के बावजूद भी कई बार डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते हैं और बिना उपचार करवाए वापस लौटना पड़ता है।</p>
<p>मेडिसन ओपीडी की भी ऐसी ही स्थिति है। जहां पर सैकड़ों मरीज तो प्रतिदिन आते हैं लेकिन दो डॉक्टरों के सहारे ही ओपीडी चलती है। ऐसे में एक डॉक्टर के छुट्टी पर जाने से सारा जिम्मा दूसरे डॉक्टर पर आ जाता है। त्वचा रोग विभाग में तो एक डॉक्टर है ऐसे में यदि डॉक्टर छुट्टी पर चले जाते हैं तो ओपीडी बंद करनी पड़ती है। इस कारण दूरदराज क्षेत्र से आए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p>अस्पताल में कुछ विभाग ऐसे भी हैं, जहां दो से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक कार्यरत हैं, यहां तक कि रिपन अस्पताल में डेंटल ओपीडी में तो सर्जन सहित सात डॉक्टर बैठाए गए हैं, जबकि यहां पर डेंटल के मरीजों की संख्या काफी कम हैं, लेकिन जिन ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक है वहां पर डॉक्टर नहीं है खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>यह है रिपन अस्पताल में डाक्टरों की स्थिति</strong></p>
<p>आर्थो 2</p>
<p>मेडिसीन 2</p>
<p>आई 3</p>
<p>ईएनटी 2</p>
<p>गायनी 4</p>
<p>रेडियोलॉजी 2</p>
<p>सर्जरी 1</p>
<p>डेंटल 7</p>
<p>रिपन अस्पताल की आर्थो ओपीडी में दो डॉक्टर हैं। एक के छुट्टी पर जाने के कारण दिक्कत आई है। मेडिसन ओपीडी में दो डाक्टर हैं, यदि एक छुट्टी पर जाता है तो पीएचसी से डॉक्टरों को बुलाया जाता है ताकि लोगों को दिक्कत न हो।</p>
<p>रंजना राव, चिकित्सा अधीक्षक, रिपन, शिमला</p>
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