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	<title>हिमाचल परिवहन निगम Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>एचआरटीसी का नाम सबसे लंबे रूट और दुर्गम इलाकों में बस सेवा के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 May 2017 08:04:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[लाहौल और स्पीति]]></category>
		<category><![CDATA[एचआरटीसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एचआरटीसी ने सबसे लंबे रूट और दुर्गम इलाकों में बस सेवा का सफल संचालन कर इस राज्य ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवा लिया है, बेहतर सेवाओं के लिए एचआरटीसी सम्मानित शिमला- एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर (लाहौल स्पीति, हिमाचल प्रदेश)और बर्फ से ढके रहने वाले 1245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मनाली-लेह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एचआरटीसी ने सबसे लंबे रूट और दुर्गम इलाकों में बस सेवा का सफल संचालन कर इस राज्य ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवा लिया है, बेहतर सेवाओं के लिए एचआरटीसी सम्मानित</strong> </p>
<p><strong>शिमला-</strong> एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर (लाहौल स्पीति, हिमाचल प्रदेश)और बर्फ से ढके रहने वाले 1245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मनाली-लेह रूट पर बस सुविधा देने वाले एक मात्र निगम एचआरटीसी के नाम नेशनल रिकॉर्ड भी है।</p>
<p>लाहौल-स्पीति का किब्बर गांव समुद्र की सतह से 14200 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। काजा से किब्बर गांव की दूरी 25 किलोमीटर है। इस संकरे और दुर्गम मार्ग से एचआरटीसी की बस 90 मिनट में यात्रियों को एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर तक पहुंचाती है। मार्ग इतना दुर्गम है कि लोग छोटा वाहन चलाने से भी डरते हैं।</p>
<p>दिल्ली से वाया मनाली लेह का सफर बेहद रोमांचक और खतरों से भरा है। दिल्ली से चलने वाली एचआरटीसी की बस दूसरे दिन करीब 30 घंटे सफर के बाद लेह पहुंचती है। यात्रियों के रात्रि पड़ाव की व्यवस्था जिला मुख्यालय केलांग में होती है।</p>
<p>इस रूट पर 13051 फीट ऊंचा रोहतांग दर्रा, 16400 फीट ऊंचा बारालाचा दर्रा और 17582 फीट ऊंचा तंगलंगला दर्रा पड़ता है। इन दर्रों को पार कर एचआरटीसी की बस यात्रियों को लेह तक पहुंचाती है। दिल्ली से लेह का किराया मात्र 1380 रुपये है। एचआरटीसी के महाप्रबंधक ऑपरेशन एचके गुप्ता ने लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड की ओर से पत्र मिलने की पुष्टि की है।</p>
<p>हिमाचल और जेएंडके के बर्फ से लकदक पहाड़ों से गुजरने वाला मनाली-लेह मार्ग साल में मात्र चार माह के लिए खुलता है। इन महीनों में एचआरटीसी दिल्ली से लेह के लिए वाया मनाली बस सेवा शुरू करता है। पर्यटक ही नहीं सेना के जवान भी इस सेवा का लाभ उठाते हैं।</p>
<p>हाल ही में रोहतांग दर्रा बहाल किया गया है। बीआरओ ने हिमाचल के सीमांत क्षेत्र सरचू तक सड़क बहाली का लक्ष्य 25 मई तक रखा है। लेह की तरफ से भी मार्ग बहाल किया जा रहा है। हर साल जून माह से इस रूट पर बस सेवा शुरू की जाती है।</p>
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		<title>पुरे गाँव  को ठेंगा दिखा बगैला पंचायत प्रधान ने अपने घर के लिए बनवाली सडक,पर लोग पैदल चलने को मजबूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Mar 2017 07:32:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[मंडी]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग]]></category>
		<category><![CDATA[करसोग पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[कुफरीधार]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राम पंचायत बगैला]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल परिवहन निगम]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>करसोग- कैसे लगता है जब आपके द्वारा ही चुने गए प्रतिनिधि एक तरफ आपको विकास जैसे झूठे वायदे कर के भ्रमित कर रहे हों और दूसरी तरफ आपको अपने विश्वास में लेकर आपके साथ खिलवाड कर रहे हों तो इससे ज्यादा घटिया और शर्म की बात क्या हो सकती है। ऐसा ही मामला करसोग ग्राम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>करसोग-</strong> कैसे लगता है जब आपके द्वारा ही चुने गए प्रतिनिधि एक तरफ आपको विकास जैसे झूठे वायदे कर के भ्रमित कर रहे हों और दूसरी तरफ आपको अपने विश्वास में लेकर आपके साथ खिलवाड कर रहे हों तो इससे ज्यादा घटिया और शर्म की बात क्या हो सकती है। ऐसा ही मामला करसोग ग्राम पंचायत बगैला में देखने को मिला जहाँ की प्रधान भुवनेश्वरी आरोपण ने अपने फायदे के लिए सरकारी सडक काट कर अपने घर के लिए सडक तैयार कर दी जिसके कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड रहा है। यह कहना है ग्राम पंचायत बगैला के स्थानीय निवसियों का। </p>
<p>लोगो का कहना है कि करसोग से कुफरीधार सडक पर ग्राम पंचायत बगैला के प्रधान के द्वारा सडक काट कर अपने घर को सडक बनाई गई। लोगों को सडक सुविधा होने के बाबजूद अपने घरों के लिए पैदल सफर करना पड रहा है। </p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जब वह सड़क की शिकयात पंचायत प्रधान से करते हैं तो वह इनसे सीधे मुंह बात नहीं करती, यहाँ तक कि जब ग्रामीण इस बात पर आपत्ति जतातें हैं तो प्रधान लोगो को यह तक कह देती है कि &#8220;<em><strong>जो करना है कर लो</strong></em>&#8221; </p>
<p> लोगो का यह भी कहना है कि इस सडक पर हिमाचल परिवहन निगम की एक बस सुबह के समय और एक बस शाम के समय ही चलती है।</p>
<p>स्थानीय लोगो का कहना है कि शिवरात्रि के चलते लोग ने अपने घरों के लिए समान की खरीदारी की थी। तथा शिवरात्रि के ठीक एक दिन पहले शाम के समय जाने वाली बस कुफरीधार से पहले लगभग 3 किलो मीटर पीछे से लोग बस से उतर गए क्योंकि रास्ता ठीक नहीं होने की वजह से बस का आगे जाना संभव नहीं था। जिस कारण लोगों को सड़क होने के बावजूद शिवरात्रि का सामान अपनी पीठ पर लाद कर बाकी का रास्ता पैदल ही तय करना पडा। यहाँ तक कि कुछ लोगो को निजी वाहनों से घर जाने के लिए 300रुपये तक खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा! जिस कारण लोगो को भारी परेशानीयों का सामना करना पड रहा है।</p>
<p>एक तरफ लोगों के द्वारा चुने गए  प्रतिनिधी अपनी पंचायत का विकास का वायदा कर के लोगों को विश्वास मे ले लिया जाता है। और वहीँ  दूसरी और जनता के हितों और उनके विश्वास के साथ खिलवाड किया जा रहा है। जिस कारण आम जनता बुरी तरह से त्रस्त है</p>
<p>स्थानीय लोगो का कहना है कि पंचायत का तो विकास ही पूरी तरह से ठप पडा हुआ है! लोगो ने कहा कि  पंचायत प्रधान का घर वाला भी सरकारी कर्मचारी है। सता के नशे मे चुर हो कर सरकारी सम्पति का नुकसान किया जा रहा है। जिसका उदहारण सरकारी सडक को ही काट दिया गया है और बडी गाडियों का आवागमन भी पूरी तरह से ठप पडा हुआ है जिस कारण हिमाचल परिवहन निगम को भी रोज का नुकसान उठाना पड रहा है। </p>
<p>लोगो ने कहा कि सम्भन्दित विभाग इस पर अम्ल कर उचित कार्यवाही करे। ताकि बस कुफरीधार तक पहुंच सके,और लोगों को आवागमन मे सुविधा मिल सके। </p>
<p>इस सडक को 2-3 साल पहले भी काटा गया था। लेकिन विभाग के द्वारा कोई भी कार्यवाही अमल मे नही लाई गई। और न ही उस जगह से सडक को ठीक किया गया। जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान किया जाए। ताकी जनता को आने जाने मे सुविधा हो सके। </p>
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