<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>वन अधिकार कानून 2006 Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-2006/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/वन-अधिकार-कानून-2006/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Fri, 27 Aug 2021 15:03:57 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>वन अधिकार कानून 2006 Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/वन-अधिकार-कानून-2006/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>किन्नौर का अस्तित्व बचाने के लिए एकजुट हुए हज़ारों लोग, जिले में जल विद्युत परियोजनाओं को रद्द करने लिए उठी आवाज़</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/kinnaur-voices-rise-against-hydropwer-projects/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Aug 2021 15:03:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[निगुलसेरी]]></category>
		<category><![CDATA[बटसेरी]]></category>
		<category><![CDATA[रिकांग पिओ]]></category>
		<category><![CDATA[वन अधिकार कानून 2006]]></category>
		<category><![CDATA[विद्युत् परियोजना]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=13287</guid>

					<description><![CDATA[<p>किन्नौर- प्रदेश के किन्नौर जिले में विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में व किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए किन्नौर के लोग एकत्रित हो गए हैं। गुरुवार को जनजातीय जिला किन्नौर के जिला मुख्यालय रिकांग पिओ में  हजारों जनजातिओं ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आह्वान रैली व जन सभा कर अपनी एकजुटता [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/kinnaur-voices-rise-against-hydropwer-projects/">किन्नौर का अस्तित्व बचाने के लिए एकजुट हुए हज़ारों लोग, जिले में जल विद्युत परियोजनाओं को रद्द करने लिए उठी आवाज़</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किन्नौर- </strong>प्रदेश के किन्नौर जिले में विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में व किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए किन्नौर के लोग एकत्रित हो गए हैं। गुरुवार को जनजातीय जिला किन्नौर के जिला मुख्यालय रिकांग पिओ में  हजारों जनजातिओं ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आह्वान रैली व जन सभा कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। जिले के युवाओं द्वारा चलाये जा रहे लोकप्रिय “नो मीन्स नो” अभियान व हाल में बटसेरी व निगुलसेरी में हुये भू-स्खलन समूचे किन्नौर को एकजुट करने के मुख्य कारण रहे हैं।</p>
<p>जन सभा के दौरान किन्नौर जिला में सतलुज नदी में सभी प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं को निरस्त करने की मांग जोरों से उठाई गयी। 804 मेगावाट जंगी ठोपन परियोजना के विरोध में बात रखते हुये जंगी संघर्ष समिति के रोशन लाल नेगी ने कहा की ‘प्रशासन, सरकार और वैज्ञानिकों के साथ बहुत बात चीत हो चुकी है। वैज्ञानिक इन आपदाओं को लगातार कुदरती बताते हुये जल विद्युत परियोजनाओं को क्लीन चिट देते आए हैं। परंतु जंगी ठोपन परियोजना का क्षेत्र खदूरा भूस्खलन का बड़ा ज़ोन है और ऐसे में किसी प्रकार कि छेड़ छाड़ करना इलाके और यहाँ के निवासियों के लिए घातक साबित हो सकता है।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13295" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg" alt="kinnaur hydropower project protest" width="1000" height="655" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest-300x197.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/08/kinnaur-hydropower-project-protest-768x503.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>हंगरंग संघर्ष समिति के सदस्य शांता कुमार नेगी ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं का विरोध करने पर राष्ट्र विरोधी जैसे लेबल स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर लगा कर कंपनी और प्रशासन मिल कर जनता को डराना और तोड़ना चाहते हैं।</p>
<p>पूंजीवादी मुनाफाखोर विकास कि अंधी दौड़ में न केवल पर्यावरण का विनाश हुआ बल्कि देश के अंदर असमानताएँ भी बढ़ीं हैं। इस मॉडल में कंपनियों का दबदबा चलता है और राजनैतिक पार्टियां इनके लिए बिचौलिये का काम करती हैं।</p>
<p>“हमारे संसाधनों का बड़े पैमाने पर निजीकरण हो रहा है और इससे मुट्ठी भर कंपनियों का विकास हो रहा है और आम जनता को अपनी आजीविकाओं से हाथ धोना पड़ रहा है।&#8221;</p>
<p>हिमधरा पर्यावरण समूह कि मांशी आशर ने कहा कि हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह ने सम्पूर्ण हिमालय क्षेत्र में विनाशकारी विकास के मॉडल पर सवाल उठाते हुये कहा कि अगर आज सत्ता में बैठी सरकार ने किन्नौर में बांधों पर रोक नहीं लगाई तो इतिहास में उन्हें कातिल माना जाएगा ।</p>
<p>हिमाचल के जन जातीय क्षेत्रों में वन अधिकार कानून 2006 और नौतोड़ को लागू करने में सरकार के निराशाजनक रवैये पर भी मंच पर सभी वक्ताओं ने बात रखी। ज़िला वन अधिकार समिति के अध्यक्ष जिया लाल नेगी ने प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना दागते हुये कहा कि उनको कानून के प्रावधानों और मूल्यों के बारे में कोई समझ नहीं है। <span lang="HI">जल जंगल जमीन पर कानूनी अधिकार दोनों पेसा और वन अधिकार कानून देते हैं और इनको लागू करने की मांग पिछले कई  वर्षों से हिमाचल के जन जातीय क्षेत्र के लोग उठा रहे हैं। “किन्नौर का संघर्ष पूरे जन जातीय क्षेत्र का आंदोलन है और लाहौल और स्पीति के लोग अपना पूरा समर्थन करते हुये इस आंदोलन को बाकी जन जातीय जिलों में भी आगे ले जाएंगे</span>’,<span lang="HI"> स्पीति सिविल सोसाइटी के ताकपा तेंजिन और सोनम तारगे ने कहा।</span></p>
<p>जंगी क्षेत्र की निवासी और ज़िला परिषद सदस्य प्रिया ने कहा कि किन्नौर का यह आंदोलन पार्टीबाजी से ऊपर उठ कर किन्नौर के अस्तित्व के लिए लड़ा जाएगा। खदरा गाँव और रारंग संघर्ष समिति के सुंदर नेगी ने मंच से आह्वान किया कि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं माने तो आने वाले चुनावों में इसका परिणाम किन्नौर कि जनता दिखा देगी। जनजातीय जिला होने के बावजूद जनजातीय कानूनों को ताख पर रख कर गैर जनजातीय व्यक्ति को जनजातीय संपत्ति का हस्तांतरण का मुद्दा भी खासा गरम और स्थानीय लोगों में रोष देखने को मिला। जन सभा के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रेषित किया गया।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/kinnaur-voices-rise-against-hydropwer-projects/">किन्नौर का अस्तित्व बचाने के लिए एकजुट हुए हज़ारों लोग, जिले में जल विद्युत परियोजनाओं को रद्द करने लिए उठी आवाज़</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
