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	<title>पीएचडी Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>पीएचडी Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>कैसे अपने बच्चों और चहेतों के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा विश्वविद्यालय प्रशासन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Oct 2021 02:44:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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		<category><![CDATA[हि0 प्र0 विश्वविद्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल एसएफआई]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने पीएचडी (PhD) में बिना प्रवेश परीक्षा के हुए दाखिलों को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की और उन दाखिलों को निरस्त करने की मांग उठाई है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कैंपस सचिव रॉकी ने विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई पीएचडी (PhD) भर्ती पर आपत्ति जताते हुए इसे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने पीएचडी (PhD) में बिना प्रवेश परीक्षा के हुए दाखिलों को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की और उन दाखिलों को निरस्त करने की मांग उठाई है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कैंपस सचिव रॉकी ने विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई पीएचडी (PhD) भर्ती पर आपत्ति जताते हुए इसे अध्यादेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की अवहेलना बताया।</p>
<p>रॉकी का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की धांधलियां पीएचडी के अंदर कर रहा है। विश्वविद्यालय में जो भी दाखिलें पीएचडी में हुए हैं, वह यूजीसी (UGC)और विश्वविद्यालय के अध्यादेश के नियमों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा अपने फायदे के लिए किए गए हैं।</p>
<p><iframe title="कैसे अपने बच्चों और चहेतों के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा विश्वविद्यालय प्रशासन" width="740" height="416" src="https://www.youtube.com/embed/jGHpHljbE9c?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<h3>टीचर कोटा:-</h3>
<p>विश्वविद्यालय के अंदर कार्यकारी परिषद में तय किया गया की हाल ही में जिन प्रोफेसर की भर्तियां हुई है और जिन अध्यापकों की पीएचडी पूरी नहीं हुई है, वह  अध्यापक पीएचडी में दाखिला बिना किसी प्रवेश परीक्षा के ले सकते हैं। उनके लिए कार्यकारी परिषद (EC) के अंदर एक सुपरन्यूमैरेरी (Supernumerary) सीट का प्रस्ताव पास किया गया। जिससे वे अपनी पीएचडी बिना किसी प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) के पूरी कर सकते हैं।</p>
<p>एसएफआई (SFI) ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन यदि इस तरह की सुपरन्यूमैरेरी सीट रख रहा है, तो इसमें जितने भी प्राध्यापक कॉलेजों और विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ाते हैं उन्हें समान अवसर का मौका मिलना चाहिए जोकि प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही दिया जाना चाहिए, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश की सरकार अपने चहेतों के दाखिलें पीएचडी के अंदर करवाना चाहती है और इस विश्वविद्यालय को एक विशेष विचारधारा का अड्डा बनाना चाहती है।</p>
<p>रॉकी ने कहा कि इस भेदभाव पूर्ण फैसले के कारण जो प्राध्यापक अपनी पीएचडी पूरी करना चाहता भी था, वह भी अपनी पीएचडी पूरी नहीं कर पाएगा।एसएफआई ने सवाल उठाया की अगर एक छात्र पीएचडी (PhD) में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर सकता है तो एक अध्यापक क्यों नहीं ?</p>
<h3>वार्ड (Ward) कोटा:-</h3>
<p>एसएफआई इकाई सचिव रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी भगवाकरण की इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए 21 अगस्त 2021 को विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग में यह पारित किया था कि विश्वविद्यालय का प्राध्यापक व कर्मचारी वर्ग अपने बच्चों की एडमिशन PhD के अंदर बिना किसी प्रवेश परीक्षा के करवा सकता है। इसके माध्यम से सबसे पहले जिनके बच्चे PhD में दाखिला लेते हैं वह है विश्वविद्यालय के कुलपति, डीन ऑफ सोशल साइंसेज और डायरेक्टर है।</p>
<p>रॉकी ने कहा कि इससे यह सिद्ध होता है कि यह कहीं ना कहीं उन 1200 से अधिक कर्मचारियों व 300 से अधिक प्राध्यापकों के बच्चों के साथ भी भेदभाव है उनके समान अवसर के अधिकार को छीन लिया गया है क्योंकि सबसे पहले जिनके बच्चों की भर्ती PhD में हुई है वे विश्वविद्यालय के सबसे सर्वोच्च स्थान पर बैठे हुए अधिकारी हैं और कहीं ना कहीं प्रभावशाली लोग हैं ।</p>
<p>सचिव ने आरोप लगाया कि कोटा कहीं ना कहीं प्रशासन और प्रदेश सरकार के इशारे पर कुलपति के बेटे को फायदा पहुंचाने की साजिश है। क्योंकि जब कार्यकारी परिषद के द्वारा इस कोटे के तहत यह सीटें निकाली गई, तो इन सीटों को विज्ञापित भी नही किया गया और न ही प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया, जोकि समान अवसर के अधिकार की भी छीनना है और यूजीसी की गाइडलाइंस की अवहेलना है।</p>
<h3>दीनदयाल उपाध्याय घोटाला (DDU PhD Scam)</h3>
<p>एसएफआई इकाई सचिव रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर दीनदयाल उपाध्याय नाम से एक पीठ का गठन किया गया है और जिसके अंदर डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है, जिसकी अपनी कोई मास्टर डिग्री नहीं है । विश्वविद्यालय प्रशासन ने अयोग्य लोगों को इस विश्वविद्यालय में भर्ती करने के लिए इस पीठ में PhD का प्रावधान किया। अब सवाल यह है कि जिस पीठ की मास्टर डिग्री ही नहीं है वह पीएचडी कैसे करवा रही है।</p>
<p>सचिव ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के अंदर यह होता आ रहा है कि जितनी सीटें पीएचडी के लिए विज्ञापित की जाती हैं उससे ज्यादा भर्तियां की जा रही हैं। ये एक बहुत बड़ी सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डीडीयू के अंदर भी इसी तरह की धांधली सामने आई थी जिसमें पहले 5 सीटों को विज्ञापित किया गया था परंतु अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आठ और लोगों को दाखिला पीएचडी में दिलाया गया।</p>
<p>एसएसआई ने आरोप लगाए हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन या कुलपति प्रदेश सरकार और आरएसएस (RSS) के इशारे पर इस विश्वविद्यालय के अंदर नियमों को दरकिनार करते हुए एक विशेष विचारधारा को इस विश्वविद्यालय के अंदर आरक्षण दे रही है। एसएसआई ने इन भर्तियों की जो नियमों को ताक पर रखकर की गई हैं और मेहनत करने वाले छात्रों को समान अवसर के अधिकार को छीन कर की गई हैं उनकी कड़ी निंदा की है। एसएसआई ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से यह मांग की है कि इन भर्तियों को निरस्त किया जाएं।</p>
<h3>पीएचडी स्थानांतरण मुद्दा (PhD Migration issue)</h3>
<p>एसएफआई इकाई सचिव रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर पिछले कुछ समय से निजी शिक्षण संस्थानों से छात्रों की माइग्रेशन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर की जा रही है जो सरासर विश्वविद्यालय के अध्यादेश का उल्लंघन करता है। विश्वविद्यालय के अंदर पीएचडी में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा और नेट जेआरएफ (NET JRF) पास करना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर निजी संस्थानों के अंदर सिर्फ पैसे के बलबूते पर पीएचडी के अंदर दाखिला मिल जाता है और अंत में अपने चहेते लोगों को विश्वविद्यालय में पीएचडी के अंदर माइग्रेशन करवा देते है, जो पीएचडी के अंदर बैठने के योग्य ही नहीं हैं।</p>
<h3>एसएफआई (SFI) के कुछ सवाल जो वह प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखना चाहती है-</h3>
<p>1. जब छात्र पीएचडी (PhD) में प्रवेश पाने के लिए प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर सकता है तो एक अध्यापक क्यों नहीं?<br />
2. पीएचडी के अंदर वार्ड कोटे से भरी गई सीटों को विज्ञापित क्यों नहीं किया गया?<br />
3. छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए समान अधिकार के अवसर क्यों नही दिए गए?<br />
4.क्या विश्वविद्यालय की EC vice chancellor के दवाब में काम रही है?<br />
5. पीएचडी (Phd) के अंदर सीटों की संख्या विज्ञापित कम और दाखिले ज्यादा कैसे ?<br />
6. जिस कोर्स के अंदर मास्टर डिग्री नहीं है उसमें पीएचडी (PhD) मे दाखिलें कैसे?<br />
7. बिना नेट जेआरएफ (NET JRF) के पीएचडी सीटें बांटने के बाद उसकी वैधता पर संशय?<br />
8. पीएचडी के अंदर निजी शिक्षण संस्थानों से एचपीयू (HPU) में माइग्रेशन कैसे?<br />
9. विश्वविद्यालय अध्यादेश की अवहेलना करने वाले वाइस चांसलर, डीन ऑफ स्टडीज, डीन ऑफ सोशल साइंसेज पर कार्यवाही कब?<br />
10. डीन ऑफ स्टडीज (DS) के पद पर पिछले तीन चार साल से एक ही शख्स क्यों?</p>
<p>एसएफआई ने मांग की है कि उच्च न्यायलय शीघ्र अति शीघ्र इस पर स्वत: संज्ञान ले और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ संज्ञान ले और जो दोषी अधिकारी इसमें शामिल है उन पर कड़ी कार्यवाही अमल मे लाई जाए।</p>
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		<title>विश्वविद्यालय का नया कारनामां, पीएचडी में अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा दिया दाखिला, अभाविप (ABVP) नें किया विरोध   </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/17/hp-university-phd-admission-2021-21-irregularities/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Oct 2021 14:16:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[ABVP]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद]]></category>
		<category><![CDATA[पीएचडी]]></category>
		<category><![CDATA[विश्वविद्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाडलों की पीएचडी में दाखिले के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा प्रदेश विश्वविद्यालय, अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिले न्यायसंगत नहीं: अभाविप (ABVP) शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों विश्वविद्यालय न होकर किसी की निजी दुकान हो, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3>लाडलों की पीएचडी में दाखिले के लिए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा प्रदेश विश्वविद्यालय, अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिले न्यायसंगत नहीं: अभाविप (ABVP)</h3>
<p><strong>शिमला</strong>-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों विश्वविद्यालय न होकर किसी की निजी दुकान हो, जहाँ मालिक जो मन में आए वो कर सकता हो। फिलहाल इस दुकान को कुलपति सिकंदर कुमार चल रहे हैं। उन्होंने एक नया फरमान जारी किया है जिसके माध्यम से अपने बेटे समेत यूआईआईटी के निदेशक, डीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के बच्चों को सीधे पीएचडी में प्रवेश दे दिया गया है। इन्होंने न तो नेट/जेआरएफ परीक्षा और न ही पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास की है।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक बीते 21 अगस्त को हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में गुपचुप ये प्रस्ताव पास कर दिया गया और पीएचडी में प्रवेश के लिए दिए गए विज्ञापन में भी कहीं इस प्रस्ताव के पारित होने के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई। इस प्रस्ताव के पास होने की अधिसूचना भी गुपचुप तरीके से 28 अगस्त, 2021, को निकाली गई। अधिसूचना के मुताबिक विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों के बच्चों  से एक लाख रुपये एकमुश्त फीस लेकर प्रवेश देने का प्रावधान किया गया। इसके साथ-2 विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक प्रध्यापकों (Assistant Professors) के बचों के लिए भी हर विभाग में एक-2 सीट रिजर्व रखने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है।</p>
<p>इसे सीधे ही लागू कर दिया गया। यह मामला अब प्रवेश मिलने के बाद सामने आया है। हर विभाग में विवि कर्मियों के बच्चों की एक-एक सीट का अलग से प्रावधान किया गया है।</p>
<p>इसे जी तोड़ मेहनत कर नेट/जेआरएफ परीक्षा और प्रवेश पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास करने वाले छात्र ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस मुद्दे को लेकर उग्र हो गई है।</p>
<p>अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी दाखिले में विश्वविद्यालय अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिला देने के निर्णय का विरोध किया है । अभाविप हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने बताया कि विश्वविद्यालय के द्वारा अध्यापकों के बच्चों को पीएचडी दाखिलों में अनुचित तवज्जो देना आम छात्रों के साथ धोखा है और संविधान के अंतर्गत समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है ।</p>
<p>सकलानी ने कहा कि एक तरफ जहां आम छात्र सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करते हुए, किराए के कमरों में रहकर नेट/जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं बावजूद इसके वो पीएचडी में कम सीटों के चलते दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। अभाविप जहां आम छात्रों की आवाज को बुलंद करते हुए सभी विभागों में पीएचडी की सीटें बढ़ाने की मांग कर रही है वहीं विश्वविद्यालय में कार्यरत अध्यापकों के लाडलों को बिना नेट/ जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिला देने के निर्णय को आम छात्र के साथ धोखा है, अन्याय करार दे रही है।  सकलानी ने कहा कि ये कदम भारतीय संविधान के समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है।  साथ ही साथ यह फैसला यूजीसी के नियमों की भी सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है । एक तरफ जहां छात्र हित के विरुद्ध फैसला लेना हो तो विश्वविद्यालय इन्हीं नियमों व कानूनों का हवाला देता है, किंतु जब बात अपने लाडलों को दाखिले देने की आती है तो इन्हीं नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाता है ।</p>
<p>सकलानी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अध्यापकों के बच्चों को बिना किसी नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के पीएचडी दाखिलों का विरोध करती है और विश्वविद्यालय प्रशासन व प्रदेश सरकार से मांग करती है कि छात्र विरोधी व समानता के अधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले इस फैसले को वापिस लिया जाए अन्यथा अभाविप उग्र आंदोलन करेगी।</p>
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		<title>अब हिमाचल में यूजीसी मापदंड पूरा करने वाले कॉलेज प्राध्यापक भी करवा सकेंगे पीएचडी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/24/hp-university-nod-for-phd-by-college-lecturers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2017 10:33:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[पीएचडी]]></category>
		<category><![CDATA[रूसा सीबीसीएस]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल में यूजीसी के मापदंड पूरा करने वाले कॉलेज प्राध्यापक अब पीएचडी करवा सकेंगे। एचपीयू कार्यकारी परिषद ने कॉलेज प्राध्यापकों के पीएचडी गाइड बनने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से जहां विद्यार्थी गृह क्षेत्र के कॉलेजों में ही पीएचडी कर सकेंगे, वहीं एचपीयू में शिक्षकों की कमी के कारण पीएचडी गाइड नहीं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/03/24/hp-university-nod-for-phd-by-college-lecturers/">अब हिमाचल में यूजीसी मापदंड पूरा करने वाले कॉलेज प्राध्यापक भी करवा सकेंगे पीएचडी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> हिमाचल में यूजीसी के मापदंड पूरा करने वाले कॉलेज प्राध्यापक अब पीएचडी करवा सकेंगे। एचपीयू कार्यकारी परिषद ने कॉलेज प्राध्यापकों के पीएचडी गाइड बनने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से जहां विद्यार्थी गृह क्षेत्र के कॉलेजों में ही पीएचडी कर सकेंगे, वहीं एचपीयू में शिक्षकों की कमी के कारण पीएचडी गाइड नहीं मिलने की समस्या का समाधान भी हो जाएगा। </p>
<p>इस मुद्दे को लेकर डीन प्लानिंग की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्राध्यापकों को गाइड के रूप में ईसी ने वीरवार को मंजूरी दे दी। यह मामला लंबे समय से लंबित था। पांच साल तक नियमित सेवाएं देने वाले प्राध्यापक ही पीएचडी गाइड बनने के लिए पात्र होंगे। वह स्वयं पीएचडी डिग्री धारक हो और कम से कम उनके तीन रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हों। इसका लाभ प्रदेश भर के कॉलेजों में पढ़ाने वाले पात्र सैकड़ों प्राध्यापकों और पीएचडी में पंजीकृत हुए छात्रों को होगा। अब उनकी डिग्री समय से पूरी हो सकेगी। </p>
<p><strong>यूजी, पीजी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन </strong></p>
<p>ईसी ने एचपीयू के परीक्षा परिणाम में देरी को कम करने के लिए ऑनलाइन ऑन स्क्रीन इवेल्यूएशन शुरू करने का फैसला लिया। इसके लिए जल्द कमेटी गठित की जाएगी। छात्र की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर सीधे परीक्षा केंद्र से मूल्यांकनकर्ता को ऑनलाइन भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया यूजी और पीजी दोनों परीक्षाओं के मूल्यांकन में लागू होगा। कार्यकारी परिषद ने रूसा यूजी परीक्षाओं के परिणाम तैयार करने में एब्सोल्यूट ग्रेडिंग को लागू करने का निर्णय भी लिया। छात्र जितने अंक प्राप्त करेगा, उसी आधार पर उसका परिणाम तैयार होगा। </p>
<p><strong>छठे सेमेस्टर की उत्तर पुस्तिकाओं का होगा स्पॉट मूल्यांकन </strong></p>
<p>अंडर ग्रेजुएट कक्षाओं में लागू रूसा सीबीसीएस (विद इन फैकल्टी) सिस्टम के छठे व अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित करने को परीक्षा केंद्र कॉलेजों में ही स्पॉट मूल्यांकन करने का भी फै सला लिया गया।</p>
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