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	<title>पीएचडी घोटाला Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले 2 सालों से बंद है 24&#215;7 लाइब्रेरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Dec 2021 11:25:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों को लेकर पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन किया। एसएफआई इकाई के पवन ने इस धरने प्रदर्शन में बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पिछले 2 सालों से 24 घंटे चलने वाली लाइब्रेरी बंद है। विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों को लेकर पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन किया। एसएफआई इकाई के पवन ने इस धरने प्रदर्शन में बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पिछले 2 सालों से 24 घंटे चलने वाली लाइब्रेरी बंद है। विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं लेकिन विश्वविद्यालय की मुख्य लाइब्रेरी के 24&#215;7 सेक्शन को अभी तक नहीं खोला गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एसएफआई के आंदोलन के चलते लाइब्रेरी को छात्रों के लिए सुबह 9:00 बजे से शाम 9:00 तक तो खोल दिया गया है। लेकिन छात्र यह मांग कर रहे हैं कि इसे 24 घंटे खुला रखा जाए ताकि जो विद्यार्थी दिन में किसी न किसी कारण अपनी पढ़ाई नही कर पाते हैं वो रात को लाइब्रेरी में बैठ कर अपनी पढ़ाई कर सकें। एसएफआई इकाई ने ये भी कहा कि इसके अलावा जो शोधार्थी दिन भर अपने शोध का कार्य कर रहे होते हैं वो भी रात में अपनी पढ़ाई कर सकते हैं।</p>
<p>पवन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 24&#215;7 सेक्शन को न खोलने से छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है । इस विश्वविद्यालय में ऐसे भी छात्र पढ़ते हैं जो दिन भर मेहनत करते हैं और रात को अपनी पढ़ाई के लिए समय देते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे मेहनती छात्रों के लिए 24&#215;7 लाइब्रेरी को न खोल कर इन छात्रों को पढ़ाई से महरूम कर रहा है।</p>
<p>अपनी दूसरी महत्वपूर्ण मांग को रखते हुए एसएफआई इकाई ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यूजीसी की गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए अपने चहेतों की पीएचडी के अंदर एडमिशन बिना प्रवेश परीक्षा के करवाई है वह भी न्याय संगत नहीं है। एसएफआई ने कहा कि वे जानते हैं कि जब भी विश्वविद्यालय के अंदर पीएचडी में डायरेक्ट एडमिशन होती हैं तो उसके लिए छात्रों को जेआरएफ क्वालीफाई करना पड़ता है। इसके अलावा दूसरा कोई भी रास्ता पीएचडी के अंदर प्रवेश लेने के लिए नहीं है लेकिन जब आम छात्रों द्वारा प्रशासन से इस पर जवाब मांगा जाता है तो प्रशासन द्वारा ईसी (EC) की मीटिंग का हवाला देते हुए कहा जाता है कि यह फैसला ईसी (EC) द्वारा पास किया गया है।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि वीसी इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि उनका इस विश्वविद्यालय के अंदर वीसी के पद पर यह अंतिम वर्ष है तो वे किसी तरह अपने चहेतों को इस विश्वविद्यालय के अंदर पिछले दरवाजे से उन्हें लाना चाहते हैं। इसका भी उनके पास अंतिम अवसर है ।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि पीएचडी के अंदर जो एडमिशन होगी वह एचपीयू वार्ड के उन कर्मचारियों के बच्चों की होगी जो निम्न वर्ग से संबंध रखते हैं लेकिन जब हम एडमिशन के लिए चुने गए लोगों के नाम देखते हैं तो पता चलता है कि उसके अंदर जो पहली एडमिशन होती है वह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के बेटे की है।  इसके अलावा जो दो एडमिशन होती हैं वह एक डायरेक्टर की बेटी की और एक डीन के बेटे की होती है।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि वे यह मांग कर रहे हैं यदि आप पीएचडी के अंदर एडमिशन करवाना चाहते हैं तो जो नियम यूजीसी द्वारा निर्धारित किए गए हैं उन नियमों के आधार पर ही पीएचडी के अंदर एडमिशन होनी चाहिए परंतु यहां यह हो रहा है की जो लोग दिन रात लाइब्रेरी के अंदर पढ़ाई करते हैं उन लोगों से समान अवसर का अधिकार छीना जा रहा है जो कि कतई उचित नहीं है एसएफआई यह मांग कर रही है की जितनी भी एडमिशन बिना प्रवेश परीक्षा के विश्वविद्यालय के अंदर की जा रही हैं उनको वापस लेना होगा और यदि पीएचडी के अंदर एडमिशंस होगी तो उसका आधार प्रवेश परीक्षा होगा।</p>
<p>एसएफआई ने अपनी तीसरी मुख्य मांग को सामने रखते हुए कहा कि जिस तरह से यूनिवर्सिटी अथॉरिटी द्वारा विश्वविद्यालय के अंदर प्राइवेटाइजेशन की मुहिम चलाई गई है उसे बंद किया जाना चाहिए ।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि तमाम लोग जानते हैं कि पिछले लंबे समय से कैफेटेरिया एरिया को बंद रखा गया है जहां पर छात्रों को कम मूल्य पर भोजन मिलता था।प्रशासन द्वारा कैफेटेरिया को ना खोल कर विश्वविद्यालय के अंदर नेसकैफे और कामधेनु जैसी निजी दुकानों को खोला जा रहा है। जहां पर यदि मूल्यों की बात करें तो मूल्य आसमान छू रहे हैं, मूल्यों की बात करें तो एक चाय 20 रुपए तो एक परांठे का मूल्य 60 रुपए है।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि एक और तो बात की जाती है कि यूनिवर्सिटी के अंदर सब्सिडाइज शिक्षा छात्रों को दी जानी चाहिए और दूसरी और हमारे शिक्षण संस्थान का निजीकरण जोरो से किया जा रहा है। एसएसआई ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि यह जितनी भी दुकाने विश्वविद्यालय के अंदर खोली गई है या तो यह विश्वविद्यालय के नियमों के तहत चलनी चाहिए, नहीं तो इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।</p>
<p>विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई के मुकेश ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन का इन मांगों को लेकर एक नकारात्मक रवैया रहा है एसएफआई पहले भी इन मांगों को प्रमुखता से उठा चुकी है। यदि जल्द छात्र मांगों के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया गया तो आने वाले समय में एसएफआई विश्वविद्यालय के अंदर उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन स्वयं होगा।</p>
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