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	<title>पदमश्री अवार्ड Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिमाचल की 2 विभूतियों को पदमश्री अवार्ड, आईजी हिमांशु मिश्रा को राष्ट्रपति पुलिस पदक, अन्य 4 अधिकारियों को पुलिस पदक सम्मान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/01/26/himachal-pradesh-padamshri-and-president-police-award-on-republic-day-2022/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jan 2022 17:04:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से विद्यानंद सरैक और कला क्षेत्र के लिए चंबा से संबंद्ध रखने वाली ललिता वकील को भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साहित्य-शिक्षा के लिए प्रदेश के सिरमौर जिले के देवठी-मझगांव क्षेत्र के निवासी विद्यानंद सरैक और चंबा से कला क्षेत्र के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से विद्यानंद सरैक और कला क्षेत्र के लिए चंबा से संबंद्ध रखने वाली ललिता वकील को भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा की है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साहित्य-शिक्षा के लिए प्रदेश के सिरमौर जिले के देवठी-मझगांव क्षेत्र के निवासी विद्यानंद सरैक और चंबा से कला क्षेत्र के लिए ललिता वकील को भारत सरकार पदमश्री अवार्ड से अंलकृत करेगी।</p>
<p><strong>हस्तशिल्पी ललिता वकील चंबा रूमाल के संरक्षण हेतु पदमश्री अवार्ड </strong></p>
<p>चंबा शहर के चौंतडा से सम्बन्ध रखने वाली अंलकृत हस्तशिल्पी ललिता वकील को चंबा रूमाल के संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति पदमश्री अवार्ड से अंलकृत करेंगे।</p>
<p>ललिता वकील को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने सम्मानित किया था। 2012 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शिल्प गुरु सम्मान से सम्मानित किया। ये सम्मान पाने वाली ललिता वकील इकलौती हिमाचली हस्तशिल्पी हैं। 2017 में महिला एवं बाल विकास विभाग के सौजन्य से मेनका गांधी ने अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट अवार्ड से महिला गुरु के तौर पर प्रदान किया था।</p>
<p>16 वर्ष की उम्र से ही ललित वकील चंबा रूमाल कला से जुड़ गई थी। ललिता लड़कियों को इस कला की बारीकियां निशुल्क सिखाती हैं । प्रारंभिक दौर में घर पर कपड़े की कटिंग अथवा क्रोशिए बुनाई से उनका सफर आरंभ हुआ।</p>
<p>ललिता वकील को जर्मनी, कनाड़ा, रूमानिया व ग्रीस में कला भ्रमण में प्रदर्शनियां लगाने के अतिरिक्त उन्हें काफी प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्राप्त हुए है। स्वदेशी धरती पर राष्ट्रपति, राज्यस्तरीय व जिलास्तरीय भी कई अवार्ड मिले हैं।</p>
<p><strong>जानिए चंबा रुमाल की खासियत </strong></p>
<p>चंबा रुमाल अपनी कला और शानदार कशीदाकारी के कारण देश के अलावा विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है। चंबा रुमाल की कारीगरी मलमल, सिल्क और कॉटन के कपड़ों पर की जाती है। चंबा रुमाल पर की गई कढ़ाई ऐसी होती है कि दोनों तरफ एक जैसी कढ़ाई के बेल बूटे बनकर उभरते हैं। यही इस रुमाल की खासियत भी है।</p>
<p><strong>विद्यानंद सरैक साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार</strong></p>
<p>सिरमौर जिला के उपमंडल राजगढ़ के गांव देवठी-मझगांव के रहने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार, कलाकार और लोकगायक विद्यानंद सरैक को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए इस पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा।</p>
<p>विद्यानंद सरैक को राष्ट्रीय संगीत एवं नाट्य अकादमी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।</p>
<p>विद्यानंद सरैक चार वर्ष की उम्र से ही हिमाचली लोक संस्कृत ,करियाला (नाटक) मंच, पारम्परिक फोक संगीत की विभिन्न विधाओंके प्रति उनका लगाव बढ़ता गया। 81 वर्ष की आयु में भी वह लोक साहित्य, लोक संस्कृति के संरक्षण में जुड़े हैं।</p>
<p>विद्यानंद सरैक ने बताया कि उन्होंने हिमाचली संस्कृति तथा लोक विद्याओं पर किताबें लिखी हैं।विद्यानंद सरैक ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की है और उन्होंने 1959 से 1976 तक शिक्षा विभाग में अध्यापक रहे हैं ।</p>
<p>वर्ष 1972 में उन्होंने पहाड़ी कविताओं की पुस्तकों का संग्रह चिट्टी चादर, होरी जुबड़ी, नालो झालो रे सुर भाषा एवं संस्कृति विभाग के साथ मिल कर किया। विद्यानंद सरैक को 200 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं और 2018 में उन्हें राष्ट्रपति अवार्ड से भी नवाजा गया था।</p>
<p>उन्होंने 2003 में चूड़ेश्वर लोक नृत्य सांस्कृतिक मंडल के साथ मिलकर लोक संस्कृति और पहाड़ी भाषा के संरक्षण का कार्य आरंभ किया। कुछ समय पहले खंड विकास अधिकारी कार्यालय राजगढ़ से उनकी उपलब्धियों का रिकॉर्ड मांगा गया था। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विद्यानंद सरैक को साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>इन पुलिस अफसरों को भी मिलेगा राष्ट्रपति पुलिस पदक व पुलिस पदक सम्मान </strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश पुलिस में आईजी दक्षिणी रेंज शिमला हिमांशु मिश्रा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक की घोषणा की गई है। आईपीएस अधिकारी हिमांशु मिश्रा को इससे पहले उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए 2017 में पुलिस मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p>वहीं अन्य चार पुलिस अधिकारियों रंजना चौहान, विजय कुमार शर्मा, लक्ष्मण कुमार और जगदीश चंद को भी उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक दिए जायंगे।</p>
<p>जिन्हे यह पुलिस मेडल दिए जायँगे उनमे रंजना चौहान जो कि लोकायुक्त शिमला में पुलिस अधीक्षक हैं। विजय कुमार शर्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिमला हैं। लक्ष्मण ठाकुर पुलिस स्टेशन (पश्चिमी) शिमला यानी बालूगंज में इंस्पेक्टर हैं, जबकि जगदीश चंद राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) में मानद एएसआई हैं।</p>
<p>कालाअंब के सीआरपीएफ कमांडेंट निसार को भी मिलेगा राष्ट्रपति पुलिस पदक</p>
<p>सिरमौर के कालाअंब के ओगली के रहने वाले सीआरपीएफ में कमांडेंट निसार मोहम्मद को भी सीआरपीएफ के राइजिंग-डे पर हेडक्वार्टर गुरुग्राम में 19 मार्च को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p>निसार मोहम्मद वर्ष 1997 में सीआरपीएफ में सीधे सहायक कमांडेंट के तौर पर शमिल हुए थे। कमांडेंट निसार मोहम्मद ने आतंकवाद और नक्सल ग्रस्त इलाकों में विशेष सेवाएं दीं। उन्हें छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा में बेहतरीन कार्य करने के लिए आंतरिक सुरक्षा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वह जम्मू कश्मीर में बटालियन को कमांड कर रहे हैं।</p>
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