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	<title>निजी स्कूल Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>निजी स्कूल Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>निजी स्कूल खोलने का निर्णय स्कूल प्रशासन के ऊपर थोप अपनी जिम्मेदारीयों से भाग रही सरकार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/16/decision-on-reopening-of-private-schools-left-on-school-administrations/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Nov 2021 19:15:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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		<category><![CDATA[अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की है जिसमे सरकार ने निजी स्कूल खोलने का निर्णय स्कूल प्रशासन के ऊपर थोप दिया है। समिति ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारीयों से भाग रही है और प्रदेश में सर्दियों में बंद होने बाले स्कूलों के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की है जिसमे सरकार ने निजी स्कूल खोलने का निर्णय स्कूल प्रशासन के ऊपर थोप दिया है। समिति ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारीयों से भाग रही है और प्रदेश में सर्दियों में बंद होने बाले स्कूलों के अभिभावकों को ऐसी परिस्थिति में ला दिया है जिससे अभिभावकों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।</p>
<p>समिति ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के चलते अधिकांश माता पिता जो शहरों में सिर्फ अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आते है, उन्होंने इस महामारी के चलते और भारी भरकम महंगाई और बिजली, पानी और कूड़े के दामो में सरकार द्वारा बेतहाशा वृद्धि के कारण अपने आवास छोड़ दिए है, उन्हें सरकार के इस निर्णय से और ज्यादा हताशा हुई है।</p>
<p>प्रदेश में कोरोना महामारी के कारण छात्रों की पढ़ाई ऑनलाइन ही रही थी और निजी स्कूलों के संचालकों ने किसी को बताए बिना पीटीए का गठन किया, जिसकी स्कूल संचालकों ने अभी तक एक भी बैठक नही बुलाई है। समिति ने कहा कि कई स्कूलों के प्रधानाचार्यो ने पीटीए के सदस्यों को यह तक कह दिया कि कोई भी सदस्य किसी कक्षा का व्हाट्सएप ग्रुप नही बनाएगा। जिस भी अभिभावक को कोई परेशानी होगी वह सीधा प्रधानाचार्य के पास आएगा। समिति ने यह भी कहा कि एक तो प्रबंधक ने उन्हें अपने अधिकारों से वंचित कर दिया दूसरा यह पीटीए के नियमों और कायदों के खिलाफ है।</p>
<p>समिति ने कहा कि इस महँगाई में अभिभावकों ने आनन फानन में आकर बच्चों को कॉपी किताबें, और वर्दी का प्रबंध किया, लेकिन सरकार ने एक भी बार नही सोचा कि जिन माता पिता को अपनी नौकरी पेशे से महामारी के दौरान हाथ धोना पड़ा है या जिनके आय के साधन कुछ भी नही है, वह अभिभावक अपने बच्चों का खर्च कैसे उठाएंगे।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा निदेशालय ने प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला निजी स्कूलों पर छोड़ा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/14/hp-higher-education-department-notification-to-open-school/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Nov 2021 05:25:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[निजी स्कूल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-प्रदेश में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों की पंद्रह नवंबर से शुरू होने वाली नियमित कक्षाओं के आदेश को सरकार ने बदल दिया है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपायुक्त शिमला, सभी जिला उपनिदेशकों और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-प्रदेश में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों की पंद्रह नवंबर से शुरू होने वाली नियमित कक्षाओं के आदेश को सरकार ने बदल दिया है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपायुक्त शिमला, सभी जिला उपनिदेशकों और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला स्वयं लेने की छूट दी गई है।</p>
<p>सरकार ने निजी स्कूल प्रबंधन को एसएमसी-पीटीए से चर्चा कर इस संदर्भ में आगामी फैसला लेने की मंजूरी दे दी है। प्रदेश के शीतकालीन छुट्टियों वाले सीबीएसई और आईसीएसई के निजी स्कूलों के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूलों में ना बुलाने पर ऑनलाइन कक्षाएं नियमित तौर पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने यह फैंसला निजी स्कूलों में बच्चे पढ़ाने वाले अभिभावकों के विरोध पर लिया है। पिछले दिन छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने शिमला जिला व अन्य शीतकालीन सत्र के छात्रों की कक्षाओं व ऑनलाइन वार्षिक परीक्षाओं को लेकर उच्चतर शिक्षा निदेशक द्वारा की गई अधिसूचना का स्वागत किया है लेकिन इसे आधा-अधूरा करार दिया है। मंच ने इस अधिसूचना को प्राइमरी कक्षाओं के साथ ही नौंवीं कक्षा तक लागू करने की मांग की है। मंच ने इस आदेश को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के स्कूलों के लिए भी लागू करने की मांग की है।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि शिमला शहर व प्रदेश के अन्य शीतकालीन स्कूलों में केवल पन्द्रह दिन तक चलने वाली कक्षाएं व वार्षिक परीक्षाएं स्कूलों में न करवाकर ऑनलाइन माध्यम से ही करवाई जाएं। उन्होंने इस संदर्भ में तुरन्त ही निर्णय लेने की मांग की है। क्योंकि शिमला के कुछ स्कूलों में दो दिन बाद 15 नवम्बर 2021 से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री के ओएसडी से भी बातचीत की है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि उच्चतर शिक्षा निदेशक के आदेशों में ऑनलाइन परीक्षाओं का कोई जिक्र नहीं है। ऑनलाइन कक्षाओं का आदेश भी स्कूल प्रबंधन व पीटीए पर छोड़ दिया गया है। यह आदेश भी केवल सीबीएसई व आईसीएससी के प्राइमरी स्कूलों के लिए है, जिसे नौंवीं कक्षा तक लागू करना चाहिए था। यह आदेश आधा-अधूरा है जिसे मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करके बेहतर बनाना चाहिए।</p>
<p>मेहरा ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन स्कूलों के सत्र में काफी अंतर है। ग्रीष्मकालीन स्कूलों का साढ़े तीन महीने का सत्र अभी शेष है जबकि शिमला के शीतकालीन स्कूलों में पांच दिन की कक्षाओं के बाद छात्रों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में शिमला में केवल दस से पन्द्रह दिन के लिए स्कूलों को खोलने का कोई औचित्य नहीं बनता है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि जब पूरा वर्ष भर छात्रों ने सौ प्रतिशत पढ़ाई ऑनलाइन कक्षाओं से की है तो फिर दस दिन की वार्षिक परीक्षाओं को ऑफलाइन माध्यम से स्कूलों में करवाने का कोई भी ठोस कारण नहीं बनता है। सरकार के इस निर्णय से छात्रों व अभिभावकों को बेवजह आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अभिभावक कोरोना महामारी से पहले ही काफी घबराए हुए हैं। शिमला शहर में कोरोना व अन्य वायरल संक्रमण के मामले भी लगातार बड़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों के कोरोना संक्रमण की जद में आने का काफी गम्भीर खतरा बना हुआ है। स्कूल खुलने से अभिभावकों पर नई ड्रेस खरीदने का भी हज़ारों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ने वाला है जबकि इसके बाद तीन महीने के लिए स्कूल शीतकालीन अवकाश के लिए बंद रहेंगे। इस तरह छात्रों व अभिभावकों को बेवजह आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/14/hp-higher-education-department-notification-to-open-school/">अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा निदेशालय ने प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला निजी स्कूलों पर छोड़ा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>मजबूरी में फीस न दे पाने वाले बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से बहार कर रहे निजी स्कूल, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के लिए भी हो रही 15 से 25 हजार रुपये तक की वसूली</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/04/himachals-private-school-charging-hefty-amount-for-school-leaving-certificates-parents/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Sep 2021 08:12:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[छात्र अभिभावक मंच]]></category>
		<category><![CDATA[निजी स्कूल]]></category>
		<category><![CDATA[विजेंद्र मेहरा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अभिभावकों की मानें तो निजी स्कूलों ने बड़ी चतुराई से वर्ष 2021 में कुल फीस के 80% से ज़्यादा हिस्से को टयूशन फीस में बदल कर लूट को जारी रखा है। छात्र अभिभावक मंच का आरोप है [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/04/himachals-private-school-charging-hefty-amount-for-school-leaving-certificates-parents/">मजबूरी में फीस न दे पाने वाले बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से बहार कर रहे निजी स्कूल, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के लिए भी हो रही 15 से 25 हजार रुपये तक की वसूली</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अभिभावकों की मानें तो निजी स्कूलों ने बड़ी चतुराई से वर्ष 2021 में कुल फीस के 80% से ज़्यादा हिस्से को टयूशन फीस में बदल कर लूट को जारी रखा है। छात्र अभिभावक मंच का आरोप है कि जो अभिभावक कोरोना काल में रोज़गार छिनने पर फीस नहीं दे पा रहे हैं उनके बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर किया जा रहा है या तो उन्हें स्कूल से ही बाहर किया जा रहा है। सैंकड़ों अभिभावक निजी स्कूलों की फीस जमा न कर पाने पर अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती कर रहे हैं परन्तु निजी स्कूल माइग्रेशन,ट्रांसफर अथवा स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने की एवज़ में 15,000 से 25,000 रुपये तक वसूल रहे हैं। मंच का कहना है कि जिन बच्चों ने स्कूल की एक भी ऑनलाइन कक्षा तक नहीं लगाई उनसे भी स्कूल छोड़ने पर 25,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।</p>
<p>छात्र अभिभावक मंच के राज्य संयोजक विजेंद्र मेहरा,जिला कांगड़ा अध्यक्ष विशाल मेहरा,मंडी अध्यक्ष सुरेश सरवाल,शिमला अध्यक्ष विवेक कश्यप,उपाध्यक्ष भुवनेश्वर सिंह,बद्दी अध्यक्ष जयंत पाटिल,पालमपुर अध्यक्ष आशीष भारद्वाज,नालागढ़ अध्यक्ष अशोक कुमार,कुल्लू अध्यक्ष पृथ्वी चंद व मनाली अध्यक्ष अतुल राजपूत ने कहा है कि प्रदेश सरकार की नाकामी व उसकी निजी स्कूलों से मिलीभगत के कारण निजी स्कूल लगातार मनमानी कर रहे हैं। कोरोना काल में भी निजी स्कूल टयूशन फीस के अलावा एनुअल चार्जेज़,कम्प्यूटर फीस,स्मार्ट क्लारूम,मिसलेनियस,केयरज़,स्पोर्ट्स,मेंटेनेंस,इंफ्रास्ट्रक्चर,बिल्डिंग फंड व अन्य सभी प्रकार के फंड व चार्जेज़ वसूल रहे हैं।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने प्रदेश सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि कानून का प्रारूप तैयार करने में ही इस सरकार ने तीन वर्ष का समय लगा दिया। जबकि महीनों पहले अभिभावकों ने दर्जनों सुझाव दिए हैं तब भी जान बूझकर यह सरकार कानून बनाने में आनाकानी कर रही है। इस मानसून सत्र में कानून हर हाल में बनना चाहिए था परन्तु सरकार की संवेदनहीनता के कारण कानून नहीं बन रहा है। सरकार की नाकामी के कारण ही बिना एक दिन भी स्कूल गए बच्चों की फीस में 15% से 50% तक की फीस बढ़ोतरी की गई है। स्कूल न चलने से स्कूलों का बिजली,पानी,स्पोर्ट्स,कम्प्यूटर,स्मार्ट क्लास रूम,मेंटेनेंस,सफाई आदि का खर्चा लगभग शून्य हो गया है तो फिर ये निजी स्कूल किस बात की पन्द्रह से पचास प्रतिशत फीस बढ़ोतरी कर रहे हैं और इस बढ़ोतरी पर सरकार क्यों मौन है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि फीस वसूली के मामले पर वर्ष 2014 के मानव संसाधन विकास मंत्रालय व पांच दिसम्बर 2019 के शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों का निजी स्कूल खुला उल्लंघन कर रहे हैं व इसको तय करने में अभिभावकों की आम सभा की भूमिका को दरकिनार कर रहे हैं। निजी स्कूल अभी भी एनुअल चार्जेज़ की वसूली करके एडमिशन फीस को पिछले दरवाजे से वसूल रहे हैं व हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वर्ष 2016 के निर्णय की अवहेलना कर रहे हैं जिसमें उच्च न्यायालय ने सभी तरह के चार्जेज़ की वसूली पर रोक लगाई थी।</p>
<p>उन्होंने प्रदेश सरकार से एक बार पुनः मांग की है कि वह निजी स्कूलों में फीस,पाठयक्रम व प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करने के लिए तुरन्त कानून बनाए व रेगुलेटरी कमीशन का गठन करे।</p>
<p>इसके साथ ही छात्र अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की भारी फीस व मनमानी लूट पर रोक लगाने के लिए आगामी केबिनेट बैठक में ही कानून व रेगुलेटरी कमीशन के प्रारूप को अंतिम रूप देने की मांग की है। मंच ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर प्रदेश सरकार ने तुरन्त यह कानून व रेगुलेटरी कमीशन स्थापित न किया तो अभिभावक मंच एक बार पुनः आंदोलन का बिगुल बजा देगा व मंच के बैनर तले अभिभावक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।</p>
<p>Photo by <a href="https://unsplash.com/@rupixen?utm_source=unsplash&amp;utm_medium=referral&amp;utm_content=creditCopyText">rupixen.com</a> on <a href="https://unsplash.com/?utm_source=unsplash&amp;utm_medium=referral&amp;utm_content=creditCopyText">Unsplash</a></p>
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