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	<title>नगर निगम Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>शिमला के ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय की जगह बुक कैफे खाेलने के प्रस्ताव का विरोध</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Sep 2021 14:10:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; शिमला नगर निगम हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्थित ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय को तोड़ कर वंहा कैफ़े बनाने का प्रस्ताव लेकर आया है। इस प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इस भवन का जीर्णोद्वार करने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 2.25 करोड़ रुपये खर्च होने है जीर्णोद्वार के बाद इस भवन में पहले की तरह पुस्तकालय चलेगा। इसके टॉप फ्लोर पर पुस्तकालय होगा जबकि ग्राउंड फ्लोर में कैफे होगा।</p>
<p>इस प्रस्ताव पर छात्रों और कई लोगों ने रोष जताया है और आरोप लगाया है कि नगर निगम जीर्णोद्धार के नाम पर इसे कैफ़े में तब्दील करना चाहता है और पुस्तकालय को बंद करना चाहता है। इसके विराेध में मंगलवार काे रिज मैदान पर कई छात्रों ने इकट्ठा होकर इसका जमकर विराेध किया। इसके दौरान छात्र मेयर से मिलने भी गए। पर मेयर ऑफिस में नहीं मिली। छात्राें ने आराेप लगाया कि जीर्णाेद्धार के नाम पर नगर निगम छात्राें काे गुमराह कर रहा है। उन्हाेंने कहा कि छात्रों का हक छीना जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि नगर निगम इस पुस्तकालय  में बुक कैफे खाेलना चाहता है।</p>
<p>धरने के दाैरान छात्र अजय राणा, सुनील ठाकुर, महेंद्र शर्मा, विवेक ने कहा कि शहर में काेई ऐसी जगह नहीं है, जहां पर छात्र सुकून से पढ़ाई कर सके। यह पुस्तकालय ही एक ऐसी जगह थी, जहां पर वह अपने एग्जाम की तैयारियाें के लिए आते थे। मगर अब इसे कैफे बनाने की तैयारी की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि नगर निगम का यह निर्णय पूरी तरह से गलत है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="">शिमला में विधानसभा के पास बनी लाइब्रेरी में भी जगह नही होती, उसके बाद वह यहां आते हैं। पर राज्य पुस्तकालय में भी जगह नही मिलती है। ऐसी सूरत में राज्य पुस्तकालय को कैफेटेरिया बनाना गलत है जिसे छात्र हरगिज बर्दास्त नही करेंगे।</p>
<p class="">वहीं वरिष्ठ नागरिक संजय कुमार वर्मा और वीरेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि उन्हाेंने भी अपनी स्टूडेंट लाइफ इसी लाइब्रेरी में गुजारी है। अभी भी वह यहां पर आते रहते हैं। उन्हाेंने कहा कि लाइब्रेरी एक ऐतिहासिक जगह है और रिज काे चर्च और लाइब्रेरी से ही जाना जाता है। ऐसे में इसे बंद करना गलत निर्णय है।</p>
<h4>सीपीआईएम (CPIM ) ने यह कहा</h4>
<p>सीपीआईएम लोकल कमेटी ने कहा है कि शिमला सरकार व नगर निगम राज्य पुस्तकालय को रिपेयर के नाम पर लाइब्रेरी को बंद ना करे। अगर लाइब्रेरी को रिपेयर करना ही चाहते है तो उससे पहले सरकार व नगर निगम छात्रों के साथ लिखित में समझौता करे की पुस्तकालय को बंद नही किया जाएगा और इसका संचालन जो अभी शिक्षा विभाग कर रहा है भविष्य में भी शिक्षा विभाग ही करे ना की नगर निगम और अगर मरमत का कार्य करना है तो उसकी भी तय सीमा निर्धारित की जाए क्योंकि ये छात्रों के भविष्य का प्रश्न है। सरकार को तुरंत इस फैसले को वापिस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भी पुस्तकालय का अभाव है 30 हजार रजिस्टर छात्र है जो की बहुत बड़ी संख्या है इसलिए सरकार व नगर निगम को और पुस्तकालय भी खोलने चाहिए।</p>
<p><strong>एसएफआई ने भी किया विराेध</strong></p>
<p>शिमला में स्थित राज्य पुस्तकालय को कैफे में तब्दील करने के फैसले का एसएफआई ने भी कड़ा विराेध किया है। एसएफआई के राज्याध्यक्ष रमन थारटा और राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा है कि मौजूदा सरकार का शिक्षा और उससे जुड़े संस्थानों से कोई सरोकार नही है। प्रदेश सरकार जहां एक ओर शिखर की ओर हिमाचल का नारा देकर राष्ट्रीय स्तर पर फर्जी आंकड़े पेश कर शिक्षा क्षेत्र में वाहवाही लूटने लगी है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के फैसले लेकर प्रदेश की शैक्षणिक छवि को धूमिल करने का कार्य कर रही है। यह प्रदेश की धरोहर ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय को आज एक ढाबे में तब्दील करने वाली सरकार की मंशा से साफ जाहिर होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ही पुस्तकालयों की संख्या कम <strong>है</strong> बजाए नए पुस्तकालय खोलने के सरकार पुराने पुस्तकालय को भी बंद कर जीर्णोद्धार के नाम से अपनी शिक्षा विरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। उन्हाेंने मांग उठाई कि सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार कर इस प्रस्ताव को शीघ्र वापिस लें, अन्यथा एसएफआई काे मजबूरन आंदाेलन करना पड़ेगा।</p>
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