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	<title>कुलदीप सिंह तंवर Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Mon, 30 Aug 2021 17:03:35 +0000</lastBuildDate>
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	<title>कुलदीप सिंह तंवर Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल में कृषि संकट के चलते विभिन्न किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मंच बना की सभा, सरकार के सामने रखी ये 10 मांगें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Aug 2021 16:45:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211;विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच के द्वारा आज बैठक शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों व बागवानों की समस्याओं के बारे में चर्चा की गई। इस बैठक में संयुक्त किसान मंच के हरीश चौहान, संजय चौहान, दीपक सिंघा, कुलदीप सिंह तंवर, के. एन. शर्मा, राजेश चौहान, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong>विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच के द्वारा आज बैठक शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों व बागवानों की समस्याओं के बारे में चर्चा की गई।</p>
<p>इस बैठक में संयुक्त किसान मंच के हरीश चौहान, संजय चौहान, दीपक सिंघा, कुलदीप सिंह तंवर, के. एन. शर्मा, राजेश चौहान, राजिंदर चौहान, सुशील चौहान, डिम्पल पांजटा, सन्दीप मस्ताना, सोहन ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, एस. एस. जोगटा, जिला परिषद सदस्य विशाल शांगटा, पूर्व जिला परिषद सदस्य, नीलम सेरेक, हरीश जनारथा आदि ने भाग लिया। इस बैठक में विधायक विक्रमादित्य सिंह व राकेश सिंघा ने भी अपने विचार रखे।</p>
<p>आम सहमति से इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि मंच 13 सिंतबर, 2021 को किसान तहसील, ब्लॉक व उपमण्डल स्तर पर प्रदर्शन करेगा। यदि सरकार फिर भी मांगे नहीं मानती है तो 26 सिंतबर, 2021 को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p>बैठक में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने  कहा कि प्रदेश में लगभग 89 प्रतिशत जनता गांव में रहती है तथा इसमे अधिकांश का रोजगार व आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि व बागवानी ही है। आज देश मे कृषि संकट के चलते प्रदेश के किसानों व बागवानों का संकट भी बढ़ रहा है। खेती में उत्पादन लागत क़ीमत निरन्तर बढ़ रही है और किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित दाम प्राप्त नहीं हो रहा है। जिससे इनके रोजगार व आजीविका का संकट और अधिक बढ़ रहा है। मौजूदा व्यवस्था में किसानों व बागवानों के उत्पाद की कॉरपोरेट व बागवानी क्षेत्र का संकट और अधिक गहरा हो गया है।</p>
<p>चर्चा के दौरान ये भी कहा गया कि आज सेब प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्थिकी है और इसका करीब 5000 करोड़ रुपए का योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था में है। इसके मद्देनजर प्रदेश में मंडियों की संख्या तो बढ़ रही है परन्तु सरकार द्वारा जिन संस्थाओं जिनमें ए पी एम सी मुख्य है, को मंडियों के विकास व किसानों के हितों की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है वह अपने दायित्व के निर्वहन में विफल रही है। जिसके फलस्वरूप आज भी मंडियों में किसानों व बागवानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और इनका शोषण बढ़ा है।</p>
<p>वक्ताओं ने  कहा कि आज इन मंडियों में किसानों व बागवानों को एक तो उचित दाम नहीं मिलता है और ए पी एम सी की लचर व्यवस्था के कारण किसानों व बागवानों को कानून के अनुसार समय पर भुगतान भी नहीं किया जाता है। कई किसान व बागवानों को आज भी कई वर्षों से आढ़तियों व खरीददारो द्वारा भुगतान नहीं किया गया है।</p>
<p>बैठक में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने हाल ही में शहरी विकास मंत्री द्वारा पराला मण्डी में दिए गए किसान विरोधी उस बयान की भी निंदा की जिसमे उन्होंने कहा कि बाज़ार में दाम सप्लाई व डिमांड ही तय करती है। यह किसान विरोधी बयान है और अदानी, आढ़ती व लदानी के पक्ष का बयान है। प्रदेश के बागवानी मन्त्री इस संकट में बिल्कुल नदारद है उन्हें इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है मुख्यमंत्री को तुरंत उन्हें पद मुक्त कर किसी जिम्मेवार को मंत्री बनाया जाए।</p>
<p>किसानों व बागवानों की समस्याओं के कारण पैदा हुए इस कृषि संकट के चलते संयुक्त किसान मंच द्वारा निम्न मांगो पर सहमति बनाई गई:</p>
<ol>
<li>प्रदेश में अदानी व अन्य कंपनियों तथा मण्डियों में किसानों के शोषण पर रोक लगाए व हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाये।</li>
<li>प्रदेश की विपणन मण्डियों में ए पी एम सी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए। जिन किसानों से यह वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।</li>
<li>किसानों के आढ़तियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में ए पी एम सी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।</li>
<li>सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए।</li>
<li>प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा देकर राहत प्रदान करे।</li>
<li>बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए।</li>
<li>प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य फसले वजन के हिसाब से बेची जाए।</li>
<li>HPMC और HIMFED द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए।</li>
<li>खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।</li>
<li>कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाये।</li>
</ol>
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			</item>
		<item>
		<title>सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट व लागत वस्तुओं की कीमतों मे भारी वृद्धि के चलते बढ़ी बागवानों की परेशानियां</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/himachal-pradesh-decreasing-cost-of-apple-troubles-apple-growers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Aug 2021 16:20:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[किसान सभा]]></category>
		<category><![CDATA[कुलदीप सिंह तंवर]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; किसान सभा ने प्रदेश सरकार पर हाल ही मे सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट के चलते बागवानों की परेशानी को बढ़ाने का आरोप लगाया है। राज्याध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों की रक्षा करने मे पूरी तरह विफल रही है और कॉरपोरेट घरानों के साथ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; किसान सभा ने प्रदेश सरकार पर हाल ही मे सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट के चलते बागवानों की परेशानी को बढ़ाने का आरोप लगाया है। राज्याध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों की रक्षा करने मे पूरी तरह विफल रही है और कॉरपोरेट घरानों के साथ खड़ी होकर उनको खुली छूट दी जा रही है ।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हाल ही मे अडानी समूह द्वारा सेब के जो दाम तय किये हैं जिसमें बीते साल 80-100 फीसदी रंग वाले सेब के दाम 85 रुपये प्रति किलो था जबकि इस बार इसी सेब का रेट 72 रुपये प्रति किलो है। इसी तरह दूसरे दर के सेब के रेट में भी भारी गिरावट की गई है।इतने कम रेट में किसानों को अपने बागीचे का खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p>तंवर ने कहा है कि प्रदेश सरकार बड़े बड़े घरानों के साथ खड़ी होकर बागवानों का शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार ने किसानों व बागवानों को मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है। जिससे कि लागत बढ़ रही है। आज किसान बाजार से महंगी दवाई खरीदने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों व बागवानों को बाजार मे सेब के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। आज के समय में उत्पादन लागत मे कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे कि आज इनकी आजीविका का संकट ओर गहरा हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश इस आर्थिकी को बचाने मे पूरी तरह विफल रही है। प्रदेश सरकार का बड़े बड़े कॉरपोरेट पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्हें खुली छूट दी जा रही है। सरकार को चाहिए कि वह इन कॉरपोरेट घरानों की इस मनमर्जी पर रोक लगाये। उन्होंने कहा कि सेब के दामों में आई गिरावट से व निरन्तर लागत वस्तुओं की कीमतों मे भारी वृद्धि के कारण सेब की 5 हजार करोड़ की आर्थिकी भी गहरे संकट में चली गयी है।</p>
<p>किसान सभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस संकट के समय मे बागवानों को संकट से बाहर निकालने के लिए जम्मू कश्मीर की तर्ज पर एम आई एस (मंडी मध्यस्थता योजना) के तहत सेब खरीदना चाहिए। जिसमें ए० ग्रेड के लिये 60 रुपये प्रति किलो बी ग्रेड के लिए 44 रुपये व सी ग्रेड के लिए 24 रुपये प्रति किलो के हिसाब से एच.पी.एम.सी. हिम्फेड व अन्य सहकारी समितियों के माध्यम से सेब खरीदना चाहिए।</p>
<p>जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि प्रदेश सरकार की लचर कार्यप्रणाली के कारण एच.पी.एम.सी. कानून की खुली अवहेलना पर रोक लगानी चाहिए, कानून के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करना चाहिए। मंडियों में जिनके पास लाइसेंस व परमिट हैं केवल उन्हें ही कारोबार करने की इजाजत देनी चाहिए तथा किसानों को जिस दिन उनका उत्पाद बिकता है उसी दिन खरीददार व आढ़ती द्वारा भुगतान के प्रावधान को लागू करना चाहिए।</p>
<p>किसान सभा के नेताओं ने कहा है कि 30 अगस्त को शिमला में संयुक्त किसान मंच द्वारा आयोजित अधवेशन में किसान सभा बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेगी। तथा किसान-बागवानों की समस्याओं को लेकर आगामी रणनीति तैयार करेगी।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने भी आरोप  लगाया है कि सरकार की मिलीभगत से सेब के दाम गिराए गए है। उन्होंने आरोप लगाया कि लदानी, अदानी को सरकार का पूरा सरंक्षण है।उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इसकी जांच करें और इस पर हस्तक्षेप करते हुए बागवानों के हितों की रक्षा करें। राठौर ने बागवानी मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि उन्होंने 1135 करोड़ के बागवानी प्रोजेक्ट पर कुंडली मारते हुए बागवानों के साथ अन्याय किया है।</p>
<p>वंही  भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद ठाकुर का कहना है कि मांग और आपूर्ति के अनुपात में ज्यादा अंतर आने से मार्किट में दाम गिरना स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे रेगुलेट करने के लिए ही सरकार ने बागवानों को तुड़ान की गति धीमी करने का सुझाव दिया है। जिस तरह से विपक्षी नेता इस मामले को तूल दे रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं, उससे बागवानों का कतई भला नहीं होने वाला। सरकार हर स्तर पर इस मामले में गंभीरता से काम कर रही है। प्रदेश में उच्च गुणवत्ता सेब के दाम में कोई गिरावट नहीं आई है। इस बार प्रदेश में हुई बंपर फसल के कारण पिछले कुछ दिनों में आपूर्ति एकदम बढ़ गई है, जिससे मांग सीमित होने के कारण दाम में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बागवानों को इससे घबराने की जरूरत कतई नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सेब खरीद के लिए जल्द ही रिलायंस, बिग बास्केट और सफल जैसी कंपनियां मार्केट में उतरने वाली हैं। खरीद में प्रतिस्पर्धा बढ़ने का फायदा बागवानों को ही होगा। अभी सेब सीजन शुरू ही हुआ है, ऐसे में जो हालात बने हैं उन्हें ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/27/himachal-pradesh-decreasing-cost-of-apple-troubles-apple-growers/">सेब के दामों में लगातार हो रही गिरावट व लागत वस्तुओं की कीमतों मे भारी वृद्धि के चलते बढ़ी बागवानों की परेशानियां</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>जयराम सरकार नहीं कर रही भूमि अधिग्रहण कानून लागू, प्रभावितों को नहीं मिल रहा उचित मुआवजा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/21/jairam-government-not-implementing-land-acquisition-act/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Aug 2021 15:11:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[किसान सभा]]></category>
		<category><![CDATA[कुलदीप सिंह तंवर]]></category>
		<category><![CDATA[भूमि अधिग्रहण]]></category>
		<category><![CDATA[भूमि अधिग्रहण कानून 2013]]></category>
		<category><![CDATA[भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों से राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण द्वारा विभिन्न फोरलेन सड़कें बनाई जा रही हैं जिसमें मुख्यतः परवाणू-शिमला, किरतपुर- मनाली, मटोर-शिमला, पठानकोट-मंडी , पिंजौर-नालागढ़ , हमीरपुर–कोटली-मंडी आदि मार्ग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 63 नए राष्ट्रीय उच्च मार्ग बनाने हेतु परियोजनाओं के प्रारूप तैयार किये जा रहे हैं। रेलवे लाइन बिछाने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों से राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण द्वारा विभिन्न फोरलेन सड़कें बनाई जा रही हैं जिसमें मुख्यतः परवाणू-शिमला, किरतपुर- मनाली, मटोर-शिमला, पठानकोट-मंडी , पिंजौर-नालागढ़ , हमीरपुर–कोटली-मंडी आदि मार्ग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 63 नए राष्ट्रीय उच्च मार्ग बनाने हेतु परियोजनाओं के प्रारूप तैयार किये जा रहे हैं। रेलवे लाइन बिछाने के लिए भानुपल्ली से बिलासपुर –लेह एवं चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन के लिए भी भूमि अधिग्रहण की जा रही है तथा एअरपोर्ट निर्माण एवं विस्तार हेतु भी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है। बिजली निर्माण हेतु बांध/ टावर लाइन बिछाने के लिए भी जमीन का अधिग्रहण किया गया है या किया जा रहा है।</p>
<p>उपरोक्त परियोजना में भूमि अधिग्रहण, 2013 कानून (पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुना मुआबजा) को हिमाचल सरकार पूर्णतः लागू नहीं कर रही है। हेैरानी की बात है कि पिछले 3 बर्ष बीत जाने के बाबजूद भी हिमाचल सरकार अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं ले पाई है और कानून कों लागू करने में आना-कानी कर रही है। यह कहना है भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच और किसान सभा का।</p>
<p>शनिवार को भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच के सह सयोंजक परमानंद शर्मा और किसान सभा राज्य अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर ने जिलाधीश शिमला के माध्यम से मुंख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को लागू करने हेतु एक मांग पत्र सौंपा है।</p>
<p>किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर ने मांग करते हुए कहा कि आज सात पंचायत के प्रभावित परिवार शिमला पहुँचे हैं  जिसमे चमियान,मल्याणा,पूजली,आनंदपुर,शोगी, कोट और मैहली शामिल थी।</p>
<p><strong>भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच और किसान सभा की मांगे निम्नलिखित है: </strong></p>
<ol>
<li>जयराम ठाकुर की सरकार, पुनर्स्थापना, पुनर्वास तथा भूमि अधिग्रहण, 2013 के अनुसार फैक्टर-2 (चार गुना मुआबजा) को फोर लेन व रेलवे लाइन में लागु करे</li>
<li>नये प्रोजेक्ट्स के लिए स्थान का चयन तकनीकी आधार पर सोशल इम्पैक्ट सर्वे के पश्चात ही किया जाए</li>
<li> गैर कृषि भूमि व जहां पर न्यूनतम विस्थापन हो ऐसी साइट को वरीयता दी जाए</li>
<li>स्थानीय जनता के इज़मेंट राइट्स को सुनिश्चित किया जाए</li>
<li>मार्केट रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाए और मुआवजे का भुगतान अतिशीघ्र किया जाये</li>
<li>प्रस्तावित सड़क के बाहर परियोजना से प्रभावित मकानों, जमीन व बगीचे के नुकसान का मुआबजा दिया जाये</li>
<li>रोड़ प्लान के अनुसार भूमि अधिग्रहण किया जाये तथा मिट्टी डम्पिंग के स्थान तय किये जाये व पहाड की तरफ स्टेप कटिंग की जाये</li>
<li>भूमि की निशानदेही कर पक्की बुरजियाँ लगाई जाएं</li>
<li>5 मीटर कंट्रोल विड्थ व 3 मीटर टीसीपी योजना से निरस्त किया जाये</li>
</ol>
<p>मंच ने यह भी मांग की कि उच्च न्यायलय व मंडलीय न्यायलय में लंबित जमीन अधिग्रहण के मामलों की निर्धारित समय सीमा में सुनवाई कि जाये व स्थानीय लोगो को सभी परियोजनायों में 70% रोजगार सुनिश्चित किया जाये।</p>
<p>मंच ने यह भी कहा कि इसके अलावा  जिला सत्र पर समस्याओं के निवारण व परियोजना कार्यान्वयन हेतु सयुंक्त समिति गठित कि जाये जो उचित निर्णय ले सके।</p>
<p>भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच ने मांग की है कि उपरोक्त मुद्दों को सरकार जल्दी से सुलझाये अन्यथा अक्टूबर माह में भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच, राज्य/जिला स्तरीय आन्दोलन करेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य, केंद्र सरकार व राष्ट्रीयउच्च मार्ग के अधिकारियों की होगी।</p>
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