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	<title>एस.एफ.आई Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>एचपीयू के छः करोड़ ईआरपी घोटाले में जांच की मांग, निजी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Sep 2021 07:17:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला&#8211; हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र लम्बे समय से  इ.आर.पी. (ERP) प्रणाली की खामियों पर सवाल उठाते आ रहे है।  विश्वविद्यालय प्रशासन और ERP कंपनी न केवल विश्वविद्यालय के संसाधनों को बर्बाद कर रही है बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य  के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। पहले विवि प्रशासन ईआरपी सिस्टम को संचालित करने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र लम्बे समय से  इ.आर.पी. (ERP) प्रणाली की खामियों पर सवाल उठाते आ रहे है।  विश्वविद्यालय प्रशासन और ERP कंपनी न केवल विश्वविद्यालय के संसाधनों को बर्बाद कर रही है बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य  के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। पहले विवि प्रशासन ईआरपी सिस्टम को संचालित करने के लिए अपनी किसी चहेती निजी कंपनी को आउटसोर्स करती है और फिर उसकी खामियों को दूर करने के नाम पर आठ करोड़ बजट का प्रावधान करती है। विवि के अनुसार इसमे से अभी तक ईआरपी सिस्टम को दुरुस्त करने के नाम पर लगभग छह करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है। लेकिन विश्वविद्यालय के सारे छात्र संघ संगठनों ने ये आरोप लगाया है कि करोड़ो खर्च करने पर भी ईआरपी सिस्टम का हाल वही फटीचर का फटीचर ही है।</p>
<p>जब से ईआरपी सिस्टम को विश्वविद्यालय ने अपनाया है इस पूरे प्रकरण में लगभग छः साल का समय बीत चुका है परंतु विश्वविद्यालय ने इतने लंबे समय के दौरान हमेशा ईआरपी सिस्टम की खामियों मानने से इंकार करती रही । ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद भी हज़ारों छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूरदराज के जिलों से शिमला विवि की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे उनका समय व पैसा दोनो बर्बाद होता है।</p>
<p>यही कारण है कि अब छात्र संगठन एचपीयू के ईआरपी स्कैम की न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग उठा रहे हैं।</p>
<p>वहीं अगर फीस की बात की जाये तो विश्वविद्यालय इस मामले में भी पीछे नहीं है छात्रों से भारी भरकम फीस ली जाती है, वहीं अगर छात्रों के किसी दस्तावेज में कोई गलती हो और गलती भी विश्वविद्यालय प्रशासन की हो तब भी उस गलती को सुधारने के लिए भी अलग से छात्रों से ही भारी भरकम फीस ऐंठी जाती है।</p>
<p>वंही विश्वविद्यालय के कुलपपति राजनीति में व्यस्त रहते हैैं।  छात्रों की माने तो उन्होंने विश्वविद्यालय को आर एस एस (RSS) का अड्डा बना के रख दिया है। यही नहीं कुलपति के चयन के ऊपर भी गंभीर आरोप लगे हैं। उनपे अपनी अयोग्यता को लेकर झूठ  बोलने का आरोप है जिससे राजभवन ने भी स्वीकारा है। यंहा तक की अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी उनके निक्कमेंपन से परेशान होकर उन पर सवाल कर रही है। जब छात्र संगठनों ने उनका विरोध किया या उनसे बात करनी चाहि तो कुलपति ने अपने निक्कमेंपन को छुपाने के लिए पुलिस की आड़ ली और छात्रों पर ही मुकदमें दायर करवा दिए ।</p>
<p><strong>अ.भा.वि.प (ABVP) नें ई आर पी प्रणाली की गुणवत्ता पर उठाये सवाल </strong></p>
<p>अ.भा.वि.प विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ई आर पी (ERP) प्रणाली की गुणवत्ता के लिए अपनी पीठ थपथपाने के मौके की तलाश में रहता है। प्रशासन विश्वविद्यालय ई आर पी प्रणाली को पूरे देश भर में सर्वोत्तम कोटि का बताती है लेकिन ई आर पी प्रणाली सवालों के घेरे में तब आती है जब हम देखते है की लगातार दूसरी बार ई आर पी की टेस्टिंग के नाम पर छात्रों के गलत परिणाम घोषित किए गए हैं, गलत परिणामों को देख छात्रों को काफी तनाव का सामना करना पड़ रहा है जबकि वास्तव में घोषित किए गए परिणाम सही नहीं है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा है कि विश्वविद्यालय ने अभी तक यूजी के छात्रों का अंतिम सत्र के परीक्षा परिणाम नहीं निकाले है, ऐसे में पूरे प्रदेश भर में ऐसे भी छात्र है जो पीजी के प्रवेश बाहरी राज्यो के विश्वविद्यालयों से लेना चाहते है लेकिन यूजी के परिणामों के बगैर अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले पाना सम्भव नहीं हो पा रहा अगर परिणाम घोषित करने में ज्यादा समय लगाया जाता है तो छात्र प्रवेश नहीं ले पाएगा।</p>
<p>अध्यक्ष ने बी.एड (B.Ed) के प्रथम और तृतीय सत्र के परिणामों को घोषित करने की भी मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने बी.एड (B.Ed) के लिए प्रथम सत्र की प्रवेश परीक्षाएं करवा ली है। लेकिन अभी पिछले साल के पहले और तीसरे सत्र के परिणाम घोषित नहीं किए है। उन्होंने बीबीए (BBA) और बीसीए (BCA) के रि-अपीयर के परिणाम घोषित करने की मांग उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने काफी लंबे समय से बीबीए (BBA) और बीसीए (BCA) के छात्रों के रि-अपीयर के परिणाम नहीं निकाले है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए परिणामों को जल्द से जल्द घोषित करे।</p>
<p><strong>ये कहना है एनएसयूआई (NSUI) का </strong></p>
<p>एन.एस.यू.आई के इकाई उपाध्यक्ष रजत भारद्वाज पोन्टू ने कहा है कि प्रदेशभर से हज़ारों छात्रों की शिकायतें उन्हें मिली जिसमे छात्र जब अपने पोर्टल पर रिजल्ट देखत है तो वहां पास शो करता है और दो दिन बाद रिजल्ट में फेल या कोई अनियमितताएं शो करता है। इन सभी कारणों से विवि और कॉलेजों के छात्र कई वर्षों से परेशान है। ऐसे में एनएसयूआई ने ईआरपी (ERP) घोटाले की न्यायिक जांच की मांग की है।</p>
<p>एनएसयूआई ने एचपीयू परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंप कर कोरोना महामारी के चलते छात्रों के लिए प्रदेश के सभी जिलों में पीजी के परीक्षा केंद्रों को खोलने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त विश्विद्यालय लाइब्रेरी के 24 ऑवर सेक्शन को तत्काल छात्रों के लिए खोलने सहित पिछले लंबित सभी पीजी व यूजी परीक्षा परिणामों को जल्द घोषित करने की मांग उठाई।</p>
<p><strong>निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़: एसएफआई (SFI)</strong></p>
<p>एस.एफ.आई (SFI) सचिव रॉकी का कहना है कि छात्र छः सालों से इ आर पी (ERP) प्रणाली पर सवाल उठा रहे थे तब तो विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा से इस चीज को अस्वीकार करता रहा और इस बेकार सिस्टम के कसीदे पढ़ता रहा। ऐसे में सवाल उत्पन होता है कि आज तक जिन छात्रों का भविष्य इस सिस्टम की वजह से बर्बाद हुआ है उसकी भरपाई कैसे की जाएगी।</p>
<p>एसएफआई ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया है। अगर इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए छः करोड से ज्यादा का खर्च विश्वविद्यालय वहन कर रहा है कहीं ना कहीं यह चीज संदेह के दायरे में आती है कि इतने बड़े बजट का दुरुपयोग कहां हुआ। इस पूरे सिस्टम को लेकर तथा इसको स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर सीबीआई जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके की कहीं अधिकारियों के द्वारा कंपनी के साथ सांठगांठ करके उस पैसे को डकार तो नहीं लिया गया है।</p>
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