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	<title>एसएफआई Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>एसएफआई Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>छात्रों की समस्याओं को लेकर एसएफआई ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/07/sfi-submitted-a-memorandum-to-the-vice-chancellor-regarding-students-problems/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Mar 2022 16:36:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[ईआरपी सिस्टम]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[पीजी परिणाम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले काफी लंबे समय से पीजी रिजल्ट और ईआरपी सिस्टम में खामियों को लेकर छात्र संघठनों द्वारा ज्ञापन सौंपना और धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं एचपीयू प्रशासन ने जल्दबाजी में पीजी के कुछ विभागों के रिजल्ट घोषित कर दिए लेकिन घोषित परिणामों में काफी खामियां देखने को मिल रही है [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले काफी लंबे समय से पीजी रिजल्ट और ईआरपी सिस्टम में खामियों को लेकर छात्र संघठनों द्वारा ज्ञापन सौंपना और धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं एचपीयू प्रशासन ने जल्दबाजी में पीजी के कुछ विभागों के रिजल्ट घोषित कर दिए लेकिन घोषित परिणामों में काफी खामियां देखने को मिल रही है जिससे छात्र परेशान है। यह आरोप लगाया है प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने। </p>
<p>एसएफआई इकाई ने इन समस्याओं को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा है।</p>
<p>एसएफआई इकाई ने कहा कि पिछले लंबे समय से छात्रों के पीजी के रिजल्ट को जल्दी से जल्दी घोषित करने की  मांग की जा रही थी लेकिन जब वी.वी. प्रशासन 5 महीने बाद जल्दबाजी में छात्रों के कुछ विभागों के रिजल्ट को घोषित करता है तो उसके अंदर काफी खामियां देखने को मिलती है जिसके चलते छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि काफी लंबे समय से यह मांग कर रही थी कि पीजी परीक्षाओं से पहले परीक्षा परिणामों को घोषित किया जाए परंतु अभी पूरे परिणामों को घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p>इकाई ने कहा कि छात्र ईआरपी सिस्टम की खामियों से परेशान है और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य की चिंता ना करते हुए ईआरपी सिस्टम को दुरुस्त करने में नाकामयाब रहा है।  </p>
<p>एसएफआई ने कुलपति से मांग करते हुए कहा कि छात्रों के पीजी परीक्षा परिणामों को जल्द प्रभाव से घोषित किया जाए और जो परिणाम घोषित हुए हैं उनके अंदर जो खामियां हैं उन खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। </p>
<p>वहीं इकाई ने यह भी मांग की है कि ईआरपी सिस्टम को सही ढंग से चलाया जाए नहीं तो इस सिस्टम को वापस लिया जाए । </p>
<p>इसके अलावा एसएफआई ने अन्य प्रमुख मांगे को सामने रखते हुए कहा कि जो छात्रों से 2020-21 सत्र की  हॉस्टल कॉन्टीनुअशन फीस  लेने का फरमान विवि ने निकाला है उसे वापस लिया जाए और छात्रों की  हॉस्टल कॉन्टीनुअशन फीस को माफ किया जाए और छात्रों के लिए कैफिटेरिया को जल्द से जल्द खोला जाए।</p>
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		<title>जयराम सरकार का बजट असंतोषजनक और शिक्षा विरोधी:एसएफआई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/05/hpu-sfi-statement-on-hp-govt-budget-2022-23/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Mar 2022 13:45:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[जयराम ठाकुर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार बजट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को वर्ष 2022-23 के लिए हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 51 हज़ार 365 करोड़ का बजट पेश किया।इस बजट में उन्होंने कर्मचारियों, कारोबारियों, युवाओं, महिलाओं,वरिष्ठ नागरिकों,आशा वर्कर, चौकीदारों समेत अन्य वर्गों के लिए कई घोषणाएं की है। कुछ वर्ग बजट से खुश है तो कुछ ने इस बजट पर निराशा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को वर्ष 2022-23 के लिए हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 51 हज़ार 365 करोड़ का बजट पेश किया।इस बजट में उन्होंने कर्मचारियों, कारोबारियों, युवाओं, महिलाओं,वरिष्ठ नागरिकों,आशा वर्कर, चौकीदारों समेत अन्य वर्गों के लिए कई घोषणाएं की है। </p>
<p>कुछ वर्ग बजट से खुश है तो कुछ ने इस बजट पर निराशा व्यक्त की है। वहीं छात्र संगठन एसएफआई की बात की जाए तो उन्होंने जयराम सरकार के इस बजट को  असंतोषजनक और शिक्षा विरोधी  बताया है।</p>
<p>एसएफआई का कहना है कि जहां शिक्षा को लेकर गठित कोठारी आयोग व अन्य विभिन्न आयोगों की सिफारिशों के मुताबिक शिक्षा पर राज्य बजट का 30 फ़ीसदी खर्च होना चाहिए था। जो कि पिछले बार के बजट में कुल बजट का 16.8 प्रतिशत था इस बार 2022 -23 के बजट में शिक्षा के बजट में कटौती करते हुए मात्र 16 प्रतिशत अनुमानित बजट का प्रावधान किया है।के इससे साफ झलकता है कि शिक्षा को लेकर राज्य की सरकार चिंतित नहीं हैं।</p>
<p>वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय ने अपने वितीय संचालन हेतु राज्य सरकार से 189  करोड़ की मांग की थी लेकिन विश्वविद्यालय के लिए भी मात्र 147 करोड़ का प्रावधान ही किया गया है। बजट में इस कटौती का असर आने वाले समय मे छात्र समुदाय पर बढ़ता जाएगा। इकाई ने कहा कि मौजूदा समय मे प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में करोड़ो रुपया पीटीए फीस के नाम पर छात्रों से वसूला जा रहा है। </p>
<p>सरकार इस आर्थिक संकट की स्थिति में जनता को राहत देने की बजाय इस बजट से यह संकेत दे रही है कि आने वाले वर्ष में कोविड दौर में खाली हुए सरकारी खजाने को आम जनता से पूरा किया जाएगा, इसीलिए सरकारी खर्च को कम करते हुए जनता से संसाधन बटोरने का बजट तैयार किया गया है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p> एसएफआई इकाई का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय में स्टाफ की कमी होने की वज़ह से छात्रों के परीक्षा परिणाम  समय से घोषित नहीं हो पा रहे है वहीं ईआरपी व्यवस्था की वजह से छात्रों के परिणाम भी बदल रहे है जो छात्र पहले पास थे एक माह के बाद उसी विषय मे उनका परिणाम फेल दिखाया जाया रहा है। यह इसी वजह से हो रहा है कि स्टाफ की कमी और इस सिस्टम में खामियां बहुत अधिक है जिसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है,लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी का रोना रो रहा विश्वविद्यालय प्रशासन इस बार फिर से हॉस्टल बंद होने पर भी छात्रों से जबरन हॉस्टलफीस फीस वसूल कर अपने घाटे को पूरा करने में लगा है।</p>
<p>एसएफआई का आरोप है कि जयराम सरकार पिछले 3 सालों से लंबित विभिन्न तरह की छात्रवृतियों को बहाल नहीं कर पाई है और सरकार  पुरानी योजनाओं को नया नाम देकर छात्रों से ठगी करना चाहती है, जबकि सच्चाई सबके सामने है कि सरकार पिछले 4 सालों से छात्रों की छात्रवृति बहाल नहीं कर पाई है। अभी तक छात्र अपनी स्कॉलरशिप के लिए दर बदर भटक रहे है । </p>
<p>इकाई ने बताया कि कुछ  नई  मेधावी छात्र सम्मान योजनाएं शुरू की गई है जो की सराहनीय कार्य  है, लेकिन वो भी अगर कागजों तक सिमट जाएगी तो यह भी एक चुनावी जुमला ही सिद्ध होगी। उनका कहना है कि पिछले 2 सालों से हिमाचल प्रदेश सरकार पहले से चली आ रही मेधावी छात्र सम्मान योजना के माध्यम से मिलने वाले लैपटॉप्स व सम्मान राशि अभी तक  छात्रों को नहीं दे पाई है।  </p>
<p>पिछले 2 वर्षो में माहमारी के चलते सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान भी छात्रों व उनके अभिभावकों को झेलना पड़ा है। जिसके लिए एसएफआई राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से  हर एक गरीब परिवार को 7500 प्रतिमाह  आर्थिक सहयोग देने की मांग की थी,लेकिन आर्थिक तंगी का राग अलापती सरकार ने उसे इस बार के  बजट में शामिल नहीं  किया जबकि विधायकों व मंत्रियों का लंबित वेतन तुंरत जारी करने के आदेश दिए है। यह सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।</p>
<p> राज्य कमेटी  ने कहा कि इसके साथ-साथ  स्वर्ण जयंती उत्कृष्ट विद्यालय व महाविद्यालय के नाम से जिस योजना में 100 स्कूलों 9 महाविद्यालयों को उत्कृष्ट बनाने का सपना दिखाया गया है वह महज काल्पनिक औऱ लोगो को गुमराह करने की योजना है। पहले सरकार पिछले साल के बजट में निर्धारित 100 स्कूलों और 9 महाविद्यालय के नाम बताए जिन्हें सुधारने व उत्कृष्ट बनाने का प्रयास किया गया बल्कि इसके विपरीत पिछले 3 सालों में लगातार  प्रदेश में शिक्षा के स्तर में भयंकर गिरावट देखी गई है।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों की खुली लूट को रोकने के लिए कोई कारगर योजना नही बनाई गई है बल्कि  यह बजट निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने, सहयोग और  समझौता परस्त है जिसका एसएफआई विरोध करती है। कमेटी ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनावी साल में अपने आखिरी बजट से जनता को लुभाने में नाकाम रहे है।</p>
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		<title>एचपीयू बिना हॉस्टल में रहे ही छात्रों से वसूल रहा कन्टीन्यूशन फ़ीस एसएफआई ने जताया विरोध</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/25/hp-university-hostel-continuation-fee-issue/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Feb 2022 16:16:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[ईआरपी सिस्टम]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू हॉस्टल]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- एक तरफ एचपीयू में छात्र पीजी परीक्षाओं के परिणाम और ईआरपी सिस्टम में खामियों की वजह से परेशान हैं तो अब विवि हॉस्टल में रहे रहे छात्रों को 2020-21 सेशन की होस्टल कन्टीन्यूशन फीस जमा करने को कह रहा है। इसी के विरोध ने आज प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने फाइनेंस ऑफिसर का [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> एक तरफ एचपीयू में छात्र पीजी परीक्षाओं के परिणाम और ईआरपी सिस्टम में खामियों की वजह से परेशान हैं तो अब विवि हॉस्टल में रहे रहे छात्रों को 2020-21 सेशन की होस्टल कन्टीन्यूशन फीस जमा करने को कह रहा है।</p>
<p>इसी के विरोध ने आज प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने फाइनेंस ऑफिसर का घेराव किया और  2020-21 सेशन की होस्टल कन्टीन्यूशन फ़ीस माफ़ करने की मांग की।</p>
<p>एसएफ़आई के विश्वविद्यालय हॉस्टल सेक्रेटरी साहिल ने बताया कि विवि लगातार छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ाता जा रहा है। 2020-21 सेशन में कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को प्रभावित किया जिसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र के अछूते नहीं रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि उस समय में प्रशासन ने छात्रों को अपने घर के नजदीक परीक्षा केंद्र दिया था जिससे अधिकतर छात्रों ने अपने घर के नजदीकी केंद्र पर परीक्षा दी थी और केवल कुछ एक ही छात्र परीक्षा देने विश्वविद्यालय आये थे और उस समय की उन्होंने फीस भी दे दी थी। </p>
<p>उसके बाद अधिकतर समय हॉस्टल बन्द थे और हॉस्टल की किसी भी प्रकार की सुविधा का प्रयोग छात्रों की ओर से नहीं किया गया है। बावजूद इसके भी प्रशासन ने एक तुग़लकी फरमान की तरह यह नोटिफिकेशन निकाली जाती है कि सभी छात्रों को उस समय की कन्टीन्यूशन फीस देनी होगी अन्यथा उनकी डिग्री पर रोक लगा दी जाएगी।</p>
<p>एसएफ़आई अध्यक्ष रॉकी ने बताया कि 2020-21 सेशन में कोरोना के कारण सभी की आर्थिक स्थिति खराब हुई थी। तो वहीं प्रशासन ऐसे तुग़लकी फ़रमान जारी कर छात्रों पर मानसिक और आर्थिक दबाव डाल रहा है। जब छात्रों ने किसी भी प्रकार की सुविधा का उपयोग किया ही नहीं है तो उसकी फ़ीस देने का क्या औचित्य बनता है।</p>
<p>एसएफ़आई ने कहा कि उन्होंने उस समय ही मांग उठाई थी कि छात्रों से कोई कन्टीन्यूशन फ़ीस न ली जाए और तब प्रशासन ने कोई फ़ीस भी नही ली थी, लेकिन अब कन्टीन्यूशन फ़ीस देने की विवि प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी की है जिसमें सभी हॉस्टल में रहे रहे छात्रों को कन्टीन्यूशन फ़ीस देनी होगी। </p>
<p>इकाई ने कहा कि प्रशासन का यह फैसला छात्रों पर आर्थिक दबाव डाल रहा है इसलिए 2022-21 सेशन की हॉस्टल कन्टीन्यूशन फ़ीस माफ़ की जानी चाहिए।</p>
<p>इसके साथ ही एसएफआई ने बीएड परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि को आगे बढ़ाने की मांग भी की है। </p>
<p>एसएफआई इकाई सह सचिव सुरजीत ने बताया कि ईआरपी सिस्टम में खराबी के चलते बीएड परीक्षा फॉर्म भरने की आखिरी तारीख बढ़ाने की मांग एसएफआई ने की है जिसके चलते इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन से मिल कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने बीएड परीक्षा फॉर्म भरने की आखिरी तारीख को बढ़ाने की मांग की हैं।</p>
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		<item>
		<title>एसएफआई ने ईआरपी सिस्टम की खामियों और पीजी परीक्षा परिणामों को घोषित करने में हो रही देरी के विरोध में किया धरना प्रदर्शन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/24/hpu-sfi-protest-against-erp-system/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Feb 2022 14:10:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[ईआरपी सिस्टम]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ईआरपी सिस्टम में खामियों की वजह से छात्रों को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार छात्र संगठन ईआरपी सिस्टम में सुधार की मांग विवि प्रशासन से कर रहे है लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। यही वजह भी हैं कि इस सिस्टम में खामियों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/24/hpu-sfi-protest-against-erp-system/">एसएफआई ने ईआरपी सिस्टम की खामियों और पीजी परीक्षा परिणामों को घोषित करने में हो रही देरी के विरोध में किया धरना प्रदर्शन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ईआरपी सिस्टम में खामियों की वजह से छात्रों को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार छात्र संगठन ईआरपी सिस्टम में सुधार की मांग विवि प्रशासन से कर रहे है लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। यही वजह भी हैं कि इस सिस्टम में खामियों के चलते ऑनलाइन फॉर्म भरने के साथ ही अन्य कई परेशानियां छात्रों को आ रही है। </p>
<p>इसी के चलते आज एसएफआई एचपीयू इकाई ने विवि परिसर ने धरना प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन के माध्यम से एसएफआई ने जहां ईआरपी सिस्टम में सुधार की मांग उठाई तो वहीं पीजी परीक्षाओं के परिणाम भी जल्द घोषित करने की मांग प्रशासन से की।</p>
<p>एसएफआई ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने 2013 में ईआरपी सिस्टम विश्वविद्यालय में लाया था जिसके साथ विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रणाली की शुरुआत हुई थी। आज 9 साल बीतने के बाद भी प्रशासन ईआरपी सिस्टम को सही रूप से स्थापित नहीं कर पाया है। जिस वजह से छात्रों को भारी मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>इकाई ने कहा कि  छात्रों के जब एग्जाम फॉर्म भरे जाते हैं तो ईआरपी सिस्टम की खामियों की वजह से समय पर फॉर्मनहीं भर पाते हैं व दूसरी तरफ जब रिजल्ट घोषित किया जाता है उस समय ईआरपी सिस्टम में खामियों की वजह से छात्रों के आधे अधूरे रिजल्ट निकलते हैं। </p>
<p>ईआरपी सिस्टम के चलते जब कोई छोटी सी भी गलती होती है तो विश्वविद्यालय उसको ठीक करने की 600 रुपये छात्रों से वसूल करता है। </p>
<p>विश्वविद्यालय प्रशासन ने एग्जामिनेशन विंग को ठेके पर दे दिया है जिसके तहत ऑनलाइन पेपर चेक करने का प्रावधान किया गया है। इसमें ठेकेदार की ओर से रखे गए लोगों की ओर से एग्जामिनेशन शीट की स्केनिंग की जा रही है व शीट कहां चेक हो रही है इसका पूरा ब्यौरा ठेकेदार के पास है जिसमें एग्जाम चेकिंग की सीक्रेसी पर सवाल खड़ा होता है। किसी भी विश्वविद्यालय के कर्मचारी को स्केनिंग की जिम्मेवारी नहीं दी गई है। </p>
<p>अब सवाल पैदा होता है कि अगर इस प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?<br />
ठेकाकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय के फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। </p>
<p>एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगस्त सितम्बर 2021 में पीजी के एग्जाम करवाए थे लेकिन लगभग 6 माह का समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन रिजल्ट घोषित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। रिजल्ट में देरी का मुख्य कारण एग्जाम विंग का ठेकाकरण है। </p>
<p>अब 3 मार्च 2022 से पीजी के एग्जाम होने जा रहे हैं लेकिन अभी तक छात्रों के रिजल्ट घोषित नहीं किए गए हैं। इस कारण प्रशासन की ओर से छात्रों के भविष्य से साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि किसी छात्र ने री अपीयर के एग्जाम भरने हैं तो वो कैसे फॉर्म भरेगा जबकि उसका पिछला रिजल्ट ही अभी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p>एसएफआई ने धरना प्रदर्शन के माध्यम से प्रशासन को चेताया है कि यदि जल्द ही छात्रों के परीक्षा  परिणाम घोषित नहीं किए जाते तो एसएफआई छात्रों को लामबंद कर एक उग्र आंदोलन करेगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/24/hpu-sfi-protest-against-erp-system/">एसएफआई ने ईआरपी सिस्टम की खामियों और पीजी परीक्षा परिणामों को घोषित करने में हो रही देरी के विरोध में किया धरना प्रदर्शन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>एचपीयू एसएफआई ने विश्वविद्यालय से जुड़ी मांगों को लेकर कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/23/hpu-sfi-submitted-a-memorandum-to-the-registrar-regarding-university/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Feb 2022 15:38:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू कुलसचिव]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश विश्वविद्यालय में नॉन टीचिंग स्टाफ की कमी, यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के लिए टीजीटी की भर्ती,पंचायत सचिव परीक्षा,कैफेटेरिया जैसी कई मांगों को लेकर आज एसएफआई इकाई ने एचपीयू कुलसचिव को ज्ञापन सौंप कर सभी मांगों को लेकर उन्हें अवगत करवाया। इकाई ने बताया कि एचपीयू प्रशासन ने नॉन टीचिंग भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जून [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश विश्वविद्यालय में नॉन टीचिंग स्टाफ की कमी, यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के लिए टीजीटी की भर्ती,पंचायत सचिव परीक्षा,कैफेटेरिया जैसी कई मांगों को लेकर आज एसएफआई इकाई ने एचपीयू कुलसचिव को ज्ञापन सौंप कर सभी मांगों को लेकर उन्हें अवगत करवाया।</p>
<p>इकाई ने बताया कि एचपीयू प्रशासन ने नॉन टीचिंग भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जून 2020, सितंबर 2021 और जनवरी 2022 में निकाली थी लेकिन अभी तक यह परीक्षा करवाने में प्रशासन नाकाम रहा है।</p>
<p>एसएफआई ने यह मांग की है कि ये परीक्षा जल्द से जल्द करवाई जाए ताकि विद्यार्थियों को आने वाली परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी कार्य समय पर हो सके।</p>
<p>वहीं यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के लिए टीजीटी की भर्ती को लेकर एसएफआई ने कहा कि टीजीटी भर्ती के लिए एग्जाम प्रशासन की ओर से करवाया गया था लेकिन उस एग्जाम के परिणाम के बिना ही प्रशासन ने कैंडिडेट को डॉक्यूमेंटेशन के लिए बुला लिया और डॉक्यूमेंटेशन हो भी गई।</p>
<p> एसएफआई ने आरोप लगाया कि प्रशासन अपने लोगों को धांधली करके अंदर लाने की भी साजिश कर रहा है इसलिए इसकी भी जांच होना जरूरी है। </p>
<p>इकाई ने बताया कि प्रशासन ने पंचायत सचिव के लिए भी परीक्षा करवाई गई थी लेकिन अभी तक इसका परिणाम घोषित नहीं किया गया है, इसलिए इसका परिणाम जल्द से जल्द निकाला जाए। </p>
<p>इसके साथ ही वि.वि कैफेटेरिया पर एसएफ़आई ने कहा कि उन्होंने प्रशासन से बहुत पहले से यह भी मांग की थी कि यूनिवर्सिटी का जो कैफेटेरिया है जो कि पिछले लगभग 2 सालों से बंद है उसे खोला जाए जहां पर विद्यार्थियों को उचित मूल्य पर अच्छा खाना मिलता है,लेकिन प्रशासन ने अभी तक इसे न खोलकर कैंपस में नई नई महंगी कामधेनु व हॉटस्पॉट जैसी दुकानें खोलकर छात्रों को लूट रहा है। </p>
<p>परिसर में कुछ अन्य दुकानें पहले से ही है जहां पर लगभग उचित मूल्य पर खाना मिलता था लेकिन प्रशासन द्वारा खोले गए महंगी दुकानों के कारण उन दुकानों वालों ने भी अपने मनमाने मूल्य पर खाना खिलाना शुरू कर दिया है।  एसएफआई ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि सभी दुकानों में रेट लिस्ट लगाई जाए जो प्रशासन की ओर निर्धारित किया गया हो जिससे विद्यार्थियों को उचित मूल्य पर खाना मिल सके।</p>
<p>विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष रॉकी ने कहा है कि अगर जल्द से जल्द यह मांगे पूरी न हुई तो एसएफआई एक उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।</p>
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		<title>छात्र हितों की अनदेखी और मांगों को लेकर एसएफआई ने एचपीयू में किया प्रदर्शन, ईसी को सौंपा ज्ञापन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/21/hpu-sfi-submitted-memorandum-to-ec-regarding-student-interests-and-demands/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 13:16:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू हॉस्टल]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश विश्वविद्यालय में आज कार्यकारिणी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में भाग लेने के लिए आने वाले कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों के समक्ष छात्र संगठनों में छात्र हितों से जुड़ी मांगें रखी और धरना प्रदर्शन भी किया। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश विश्वविद्यालय में आज कार्यकारिणी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में भाग लेने के लिए आने वाले कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों के समक्ष छात्र संगठनों में छात्र हितों से जुड़ी मांगें रखी और धरना प्रदर्शन भी किया।</p>
<p> इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन कर ईसी के सदस्यों को ज्ञापन सौंपा। </p>
<p>इस प्रदर्शन में एसएफआई इकाई सदस्य सुरजीत ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि हाल ही में प्रदेश विवि प्रशासन की ओर से अधिसूचना जारी करके 2019 से 2021 में हॉस्टलों में रह रहे विद्यार्थियों से 2020-21 की फीस वसूलने की बात कही गई है, लेकिन 2020-21 में  कोरोना के कारण हॉस्टल बंद रहे और छात्र अधिकतर समय घर पर ही रहें हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि हिमाचल विश्वविद्यालय में अधिकतर छात्र निम्न ओर मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाला पढ़ता है और कोरोना महामारी के कारण इन परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है। ऐसे में इन छात्रों से इस फीस को वसूलना इन परिवारों पर और अधिक आर्थिक बोझ डालना होगा। </p>
<p>उन्होंने बताया कि एसएफआई विवि ईकाई पिछले लम्बे समय से विश्वविद्यालय में पढ़ रहे प्रत्येक छात्र के लिए हॉस्टल की मांग कर रही है । </p>
<p>इस समय विवि में छात्रों के लिए केवल चार हॉस्टल है ओर छात्राओं के लिए केवल दस हॉस्टल है। विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों की संख्या लगभग चार हजार है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि केवल कुछ प्रतिशत छात्र ही हॉस्टल में इस समय रह रहे हैं। </p>
<p>अन्य छात्रों को अत्यधिक किराए पर रूम लेकर सांगटी अथवा शिमला के दूरदराज के क्षेत्रों में रहना पड़ता है। इन कमरों में अत्यधिक किराए के अलावा पानी की समस्या, धूप ना होना और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण ना मिल पाने आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। </p>
<p>विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगते हुए एसएफआई ने कहा कि प्रदेश विवि के निठल्लेपन का आलम यह है कि नये हॉस्टल बनवाने के लिए पैसा आने के बावजूद भी अभी तक हॉस्टल के लिए जमीन तक चिन्हित नहीं की गई है। </p>
<p>इकाई ने ईसी के सदस्यों के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा है कि एचपीयू में हॉस्टल को बनाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए और प्रदेश विश्वविद्यालय में पढ़ रहे प्रत्येक छात्र के लिए हॉस्टल मुहैया करवाए जाए ताकि उन्हें अधिक आर्थिक बोझ ना सहना पड़े और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण भी‌ मिल पाए। </p>
<p>साथ ही साथ  छात्रों से हॉस्टल फीस  भी न ली जाए। एसएफआई ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर मांगे जल्द से जल्द पूरी ना हुई तो छात्रों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।</p>
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		<title>छात्रों की परेशानी का कोई समाधान नहीं निकाल पा रहा एचपीयू,फॉर्म भरने में आ रही दिक्कतें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/18/hp-university-examination-form-portal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Feb 2022 04:29:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पिछले डेढ़ महीने से यूजी और पीजी के छात्रों के लिए एग्जामिनेशन फॉर्म भरने के लिए खोले गए पोर्टल को इतना लंबा समय होने के बाद भी छात्रों को उनके एग्जामिनेशन फॉर्म भरने में दिक्कतें आ रही हैं। छात्र अपने फॉर्म ही नहीं भर पा रहे हैं,लेकिन एचपीयू [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong> प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पिछले डेढ़ महीने से यूजी और पीजी के छात्रों के लिए एग्जामिनेशन फॉर्म भरने के लिए खोले गए पोर्टल को इतना लंबा समय होने के बाद भी छात्रों को उनके एग्जामिनेशन फॉर्म भरने में दिक्कतें आ रही हैं। </p>
<p>छात्र अपने फॉर्म ही नहीं भर पा रहे हैं,लेकिन एचपीयू प्रशासन इसका कोई समाधान नहीं निकाल पा रहा है।</p>
<p>छात्रों की इसी समस्या को लेकर गुरुवार को विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई ने परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपा। एसएफआई ने कहा कि पिछले डेढ़ महीने से विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूजी और पीजी के छात्रों के लिए जो एग्जामिनेशन फॉर्म भरने के लिए पोर्टल खोला है लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी छात्र अपने एग्जामिनेशन फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं।</p>
<p>एसएफआई ने कहा कि कभी आरएमई के नाम पर तो कभी साइट में प्रॉब्लम के नाम पर विश्वविद्यालय में जो छात्र अपनी समस्या को लेकर आते हैं उन्हें इन तरीकों से वापस भेजा जाता है।</p>
<p>एसएफआई ने कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन से यह मांग की है कि यूजी और पीजी के एग्जाम फॉर्म में जो समस्याएं आ रही है उन्हें जल्द से जल्द ठीक किया जाए और जब तक सभी छात्र अपने एग्जाम फॉर्म नहीं भर लेते तब तक एग्जामिनेशन पोर्टल को खुला  रख फॉर्म भरने की तारीख को बढ़ाया जाए।</p>
<p>एसएफआई ने कहा ईआरपी एक ऐसा सिस्टम है जिसका मुख्यालय दिल्ली के अंदर है और अगर यहां कोई समस्या होती है तो उस समस्या को पहले दिल्ली भेजना पड़ेगा उसके बाद दिल्ली से इसका समाधान बताया जाएगा। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि विश्वविद्यालय के अंदर पूरे स्टाफ को अभी भी इस ईआरपी सिस्टम का उपयोग करना नहीं आता है।</p>
<p>इस सिस्टम की वजह से छात्र मानसिक,शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहा है। </p>
<p>एसएफआई ने प्रशासन से  मांग  कि है कि इस सिस्टम को जल्द से जल्द सुदृढ़ किया जाए या फिर इस ईआरपी सिस्टम को उखाड़ फैंका जाए और इसके साथ साथ यूजी के छात्रों के लिए एग्जामिनेशन फॉर्म न भरने पर जो 20,000रुपए का शुल्क छात्र से लेट फीस के नाम पर लिया जा रहा है वह बहुत अधिक है जिससे छात्र के जीवन पर आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है। </p>
<p>एसएफआई ने प्रशासन से यह मांग की है कि छात्र पर सूटेबल फाइन लगना चाहिए और इस फाइन की राशि को कम किया जाए।</p>
<p>कैंपस सचिव विवेक राज ने यह भी बताया कि उन्होंने कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन से यह भी मांग की है कि पीजी के जितने भी पेंडिंग रिजल्ट्स है उन्हें जल्द घोषित किया जाए। </p>
<p>पीजी की परीक्षाएं कराए हुए लगभग छह-सात महीने हो गए हैं और कुछ समय के बाद अगले सेमेस्टर की परीक्षाएं भी शुरू हो जाएगी लेकिन हर बार की तरह विश्वविद्यालय प्रशासन का रिजल्ट्स को लेकर ये ढीला रवैया रहता है। </p>
<p>विश्विद्यालय प्रशासन अपने इस ढीले रवैया में जल्द सुधार करें और सभी परीक्षा परिणामों को पूर्ण तरीके से घोषित करें।</p>
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		<title>पुलवामा हमले में शहीद जवानों से किए गए वायदे पूरे करे सरकार,अर्धसैनिक बलों के साथ ना किया जाए भेदभाव: एसएफआई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/14/sfi-pay-homage-to-pulwama-martyrs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Feb 2022 12:44:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[उपायुक्त कार्यालय शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[पुलवामा हमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए एसएफआई की राज्य कमेटी ने आज जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। पहले शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई जिसके बाद अर्धसैनिक बलों के विभिन्न मुद्दों को लेकर एसएफआई ने धरना प्रदर्शन किया और सरकार से यह मांग भी उठाई की वह [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए एसएफआई की राज्य कमेटी ने आज जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। पहले शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई जिसके बाद अर्धसैनिक बलों के विभिन्न मुद्दों को लेकर एसएफआई ने धरना प्रदर्शन किया और सरकार से यह मांग भी उठाई की वह सभी मुद्दों पर समाधान करे।</p>
<p>एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि हर शहीद पाकिस्तान की गोली खाकर ही नहीं मरता। कोई नक्सलियों का क़खात्मा करते हुए,कोई बाढ़ में लोगों को बचाते हुए तो कोई कश्मीर में आतंकियों से निपटते हुए अपने प्राण गंवाता है। ड्यूटी पर दोनों रहते हैं और दोनों ने देश के लिए ही वर्दी पहनी है,लेकिन एक शहीद है लेकिन  दूसरा नहीं। </p>
<p>एक से अभिप्राय थलसेना, नौसेना या वायुसेना से है जबकि दूसरे का सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी या ऐसी ही किसी फोर्स से जिसे पैरामिलिट्री कहते हैं।</p>
<p>एसएफआई का आरोप है कि हमारी सरकार सेना के नाम पर केवल राजनीति कर सता पर काबिज होने तक सीमित है। जब सवाल सेनाओं की सुविधाओं या उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का आता है तो हमारी सरकारें अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटती नजर आई है।</p>
<p>एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि कश्मीर में सेना के साथ बीएसएफ और सीआरपीएफ भी मोर्चे पर बराबरी से लड़ते है। बात शहीद के दर्जे में भेदभाव की हो या फिर पेंशन, इलाज, सीएसडी कैंटीन या एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में बच्चों के एडमिशन की, जो सुविधाएं और सम्मान सैन्य बलों के हिस्से आता है, वह पैरामिलिट्री को नहीं दिया जाता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ ड्यूटी में अपने प्राण गंवाने वाला सेना,नौसेना या वायुसेना का जवान-अफसर शहीद कहलाता है, लेकिन पैरामिलिट्री का जवान आतंकी या नक्सली से लड़ते मारा जाए तो यह सिर्फ  मौत होती है उन्हें शहीद नहीं माना जाता। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि र्द्धसैनिक बलों के सभी शहीद जवानों को शहीद का दर्जा दिया जाए। </p>
<p>उन्हें बताया कि शहादत के बाद सेना में परिवार वालों को राज्य सरकार में नौकरी में कोटा, एजुकेशन इंस्टीट्यूट में उनके बच्चों के लिए सीटें रिजर्व हैं लेकिन, पैरामिलिट्री के लिए ऐसा कुछ नहीं है। यहां तक कि जब से बाकी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बंद हुई है, तब से सीआरपीएफ-बीएसएफ जवानों की पेंशन भी बंद कर दी गई है। लेकिन थलसेना,नौसेना और वायुसेना में पेंशन सुविधा अभी भी उपलब्ध है।</p>
<p>कमेटी ने कहा कि सेना में दो साल फील्ड पोस्टिंग या बॉर्डर एरिया पोस्टिंग होती है, जबकि ऐसा कुछ सीएपीएफ में नहीं है। एंट्री लेवल पर पैरामिलिट्री के जवानों को 21 हजार रुपए सैलरी मिलती है, जबकि डिफेंस फोर्सेस में 35 हजार है। </p>
<p>आर्मी जवान को शुरूआत से ही मिलिट्री सर्विस पे के तौर पर 2,000 रुपए दिए जाते हैं,जबकि पैरामिलिट्री के लिए ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है। </p>
<p>एसएफआई ने पुलवामा हमले में शहीद हुए सभी सेना के जवानों से जो सरकार ने वायदे किए है उन्हें शीघ्र पूरा करने की मांग की है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/14/sfi-pay-homage-to-pulwama-martyrs/">पुलवामा हमले में शहीद जवानों से किए गए वायदे पूरे करे सरकार,अर्धसैनिक बलों के साथ ना किया जाए भेदभाव: एसएफआई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>एचपीयू में हॉस्टलों को जल्द खोलने की मांग को लेकर एसएफआई ने चीफ़ वार्डन को सौंपा ज्ञापन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/11/hpu-sfi-submitted-memorandum-to-chief-warden-regarding-opening-university-hostels/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Feb 2022 15:40:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीयू हॉस्टल]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- देश भर में अब छात्रों की शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने को लेकर शिक्षण संस्थानों को खोला जा रहा है। छात्र भी संस्थानों में आ कर अपनी कक्षाएं लगा रहे हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अभी तक छात्रों की कक्षाएं और उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं। यही [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/11/hpu-sfi-submitted-memorandum-to-chief-warden-regarding-opening-university-hostels/">एचपीयू में हॉस्टलों को जल्द खोलने की मांग को लेकर एसएफआई ने चीफ़ वार्डन को सौंपा ज्ञापन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  देश भर में अब छात्रों की शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने को लेकर शिक्षण संस्थानों को खोला जा रहा है। छात्र भी संस्थानों में आ कर अपनी कक्षाएं लगा रहे हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अभी तक छात्रों की कक्षाएं और  उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं। </p>
<p>यही वजह भी है कि अब छात्र संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन से एचपीयू के हॉस्टलों को खोलने की मांग के साथ ही विश्वविद्यालय को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए खोलने की मांग करते हुए नजर आ रहे है। </p>
<p>छात्र संगठन एसएफआई की ओर से आज छात्र हितों की कुछ मांगों को लेकर चीफ़ वार्डन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से चीफ़ वार्डन को यह अवगत करवाया गया कि विश्वविद्यालय को कोविड के चलते पिछले 2 महीनों से बंद रखा गया है लेकिन अब जब पूरे देश के अंदर सभी शिक्षण संस्थानों को खोल दिया गया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी विश्वविद्यालय खोलने को राजी नहीं है। </p>
<p>एसएफआई सचिव विवेक राज का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी भी पुस्तकालय को 50% कैपेसिटी के साथ खोला गया है। </p>
<p>मार्च में विश्वविद्यालय पीजी परीक्षाएं करवाने जा रहा है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को परीक्षाओं की तैयारियों के लिए विश्वविद्यालय को अभी भी खोलने के लिए तैयार नहीं है। विश्वविद्यालय का यही नकारात्मक रवैया पूरे कोविड काल में देखने को मिला है। </p>
<p>अनेकों छात्र विश्वविद्यालय में परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आ चुके हैं लेकिन विश्वविद्यालय के हॉस्टलों को अभी तक खोला नहीं गया है। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अनेकों क्षेत्र ऐसे हैं जहां परीक्षाओं की तैयारियों में छात्रों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। विश्वविद्यालय के न खुलने व हास्टलों और पुस्तकालय को बंद रखने से छात्रों की शिक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। </p>
<p>एसएफआई ने छात्रों की इन परेशानियों को देखते हुए सभी छात्रों के लिए विश्वविद्यालय हॉस्टलों को जल्द से जल्द खोलने की मांग एसएफआई ने विवि प्रशासन से की है साथ ही यह भी चेताया है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन हॉस्टलों को जल्द से जल्द नहीं खोलता है तो एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई आम छात्रों को लामबंद करते हुए आंदोलन करेगी,जिसका जिम्मेवार विश्वविद्यालय प्रशासन होगा।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/11/hpu-sfi-submitted-memorandum-to-chief-warden-regarding-opening-university-hostels/">एचपीयू में हॉस्टलों को जल्द खोलने की मांग को लेकर एसएफआई ने चीफ़ वार्डन को सौंपा ज्ञापन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>केंद्र बजट से निराश वामपंथी सगठनों ने किया धरना प्रदर्शन,जलाई बजट की प्रति</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/08/himahcal-pradesh-leftist-organization-protest-against-union-budget-2022/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Feb 2022 14:03:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[डीवाईएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[बजट 2022]]></category>
		<category><![CDATA[वामपंथी संगठन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए बजट में युवाओं के लिए रोजगार का किसी तरह का कोई प्रावधान ना करने और महंगाई से राहत ना देने के विरोध में आज वामपंथी संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान एसएफआई, डीवाईएफआई ओर एआईडीडब्ल्यूए ने बजट की प्रति को भी जलाया। केंद्रीय [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/08/himahcal-pradesh-leftist-organization-protest-against-union-budget-2022/">केंद्र बजट से निराश वामपंथी सगठनों ने किया धरना प्रदर्शन,जलाई बजट की प्रति</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए बजट में युवाओं के लिए रोजगार का किसी तरह का कोई प्रावधान ना करने और महंगाई से राहत ना देने के विरोध में आज वामपंथी संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। </p>
<p>इस प्रदर्शन के दौरान एसएफआई, डीवाईएफआई ओर एआईडीडब्ल्यूए ने बजट की प्रति को भी जलाया। केंद्रीय कमेटी के आवाह्न पर यह धरना प्रदर्शन किया गया।</p>
<p>डीवाईएफआई शिमला शहरी सचिव अमित कुमार ने बताया कि एक और जहां पूरे देश में कोरोना महामारी के चलते विभिन्न लोगों को इस बजट से आस थी कि इस बजट के बाद जनता को राहत मिलेगी परंतु केंद्र सरकार ने किसी प्रकार की राहत इस बजट में नहीं दी गई । </p>
<p>सचिव ने कहा कि बजट में जहां एक और मनरेगा में बजट कम किया गया वहीं दूसरी और युवाओं को रोजगार देने की बात तो कि गई परंतु कोरोना महामारी के चलते जिस तरह से लगातार रोजगार छिन गया उसकी भरपाई करना मुश्किल है। जो राहत केंद्र सरकार युवाओं को दे सकती थी वो राहत केंद्र सरकार की ओर नहीं दी गई। </p>
<p>उन्होंने कहा कि आज देश के अंदर विभिन्न परीक्षाओं को पास कर जब युवा रोजगार की बात करते हैं तो उन्हें लाठी-डंडे दिए जा रहे हैं। बिहार में पिछले दिनों हुई घटना इसका एक जीता जागता उदाहरण है। </p>
<p>अमित ने बताया कि देश के अंदर अनेक विभागों में अनगिनत पद खाली पड़े हैं लेकिन केंद्र की सरकार उन पदों को भरने का कार्य नहीं कर रही है। और केंद्र सरकार 2014 से लेकर हर वर्ष नौकरी देने की बात करती है परंतु युवाओं को स्थाई रोजगार के नाम पर ठेके पर नौकरियां दी जा रही है और युवाओं का शोषण किया जा रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि  केंद्र सरकार की ओर से इस बजट में बढ़ती महंगाई को लेकर किसी प्रकार की राहत आम जनता को नहीं दी गई सरकार लगातार बढ़ती महंगाई को कम करने में विफल रही है जहां गैस सिलेंडर की कीमत 1000 से ऊपर है वहीं दूसरी ओर खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा हैं।</p>
<p>इस बजट में महंगाई को कम करने को लेकर केंद्र की सरकार ने कोई भी कदम नहीं उठाया है । सरकार इसे अमृत काल का बजट कह रही है लेकिन इस बजट में किसी भी वर्ग को राहत देने का कार्य नहीं किया गया।</p>
<p>प्रदर्शन के माध्यम से विभिन्न जन संगठनों ने केंद्र की सरकार से आगामी दिनों में बढ़ती महंगाई को कम करने रोजगार को लेकर स्थाई नीति बनाने छात्रों को आ रही विभिन्न समस्याओं को जल्द दूर करने की मांग की  है।</p>
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