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	<title>उमंग फाउंडेशन शिमला निवासी सुभाष कुमार Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/21/hp-high-court-judgment-in-homeless-mentally-ill-people/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Feb 2017 08:22:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बेघर मानसिक रोगियों को बचाने में  हिमाचल पुलिस अधिकारी  कर रहे आनाकानी, कोर्ट की अवमानना का नहीं कोई डर शिमला- शिमला की गैर-सरकारी संस्था, उमंग फाउंडेशन, का आरोप है की हिमाचल प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षकों पर 2015 में उच्च न्यायाल द्वारा शिमला निवासी, सुभाष कुमार, द्वारा सडकों पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बेघर मानसिक रोगियों को बचाने में  हिमाचल पुलिस अधिकारी  कर रहे आनाकानी, कोर्ट की अवमानना का नहीं कोई डर</strong></p>
<p><strong>शिमला- </strong>शिमला की गैर-सरकारी संस्था, उमंग फाउंडेशन, का आरोप है की हिमाचल प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षकों पर 2015 में उच्च न्यायाल द्वारा <a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/18/mental-health-activist-of-himachal-pradesh-subhash-kumar/">शिमला निवासी, सुभाष कुमार,</a> द्वारा सडकों पर बेसहारा भटकते मानसिक रोगयीओं के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु की गई याचिका पर दिए गए आदेशों का भी कोई फर्क नहीं दिख रहा है!</p>
<p>हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मनोरोगियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अभियान के बारे में छपी खबरों का व्यापक असर हुआ है। आम लोग अपने आसपास के बेसहारा मनोरोगियों के बारे में स्थानीय पुलिस एवं संस्था को फोन पर सूचना दे रहे हैं। लेकिन पुलिस का रवैया नकारात्मक बना हुआ है। संस्था ने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को रविवार को इस बारे में पत्र लिखा है और चेताया है कि यदि पुलिस ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत बेसहारा मनोरोगियों के मानवाधिकार संरक्षण की कार्यवाही नहीं की तो हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर किया जाएगा।</p>
<p>संस्था ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने मनोरोगियों से संबंधित सूचनाओं पर कार्रवाई न की तो वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर करेंगे।</p>
<p>समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में बेसहारा मनोरोगियों के अधिकारों की खबर पढ़ने के बाद चंबा सोलन, कुल्लू, सिरमौर, बिलासपुर, धर्मशाला, ज्वाला जी बैजनाथ, शाहपुर ,सुंदर नगर, बद्दी, कुमार सेन, पौंटा साहिब, सुन्नी आदि स्थानों से उनके पास फोन आए। फोन करने वालों ने अपने क्षेत्र में बेसहारा मनोरोगियों की दयनीय हालत के बारे में बताया। उनमें से कई मनोरोगी तो डस्टबिन से खाना निकाल कर खाने को मजबूर हैं । लगभग सभी लोगों ने कहा कि सूचना देने के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।</p>
<p>चंबा जिले के गांव सिद्धपुरा निवासी सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी जीत सिंह ने बताया कि वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के पास एक मनोरोगी रहता है। वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के कैंपस और आसपास घूमता है तथा लोगों से बिस्कुट और रोटी मांग कर खा लेता है। उसकी उम्र करीब 30 साल है और शायद बिहार का रहने वाला है । उन्होंने कहा कि जब इसकी सूचना उन्होंने स्थानीय थाने में दी तो पुलिस कर्मचारियों ने उनका ही मजाक उड़ाया और कोई कार्यवाही नहीं की।</p>
<p>धर्मशाला से रविंदर ने बताया की पुलिस थाने के ठीक सामने लगभग 45 वर्षीय मनोरोगी रहता है जो डस्टबिन से खाना ढूंढ कर खाता है लेकिन पुलिस सब कुछ जानने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने बताया कि इसी तरह चामुंडा नगरी रोड पर लगभग 25 वर्षीय मनोरोगी दयनीय हालत में घूमता दिखता है । बद्दी से वीर सिंह ठाकुर ने कहा की नालागढ़ में बस स्टैंड के पास करीब 40 वर्ष का एक बेसहारा मनोरोगी रहता है जो दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है।</p>
<p>सोलन से सतीश सिक्का ने बताया की सुबाथू रोड पर लाइट वाले चौक से 2 किलोमीटर दूर एक मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो सड़क पर सोता है और कूड़ेदान से खाना बीनकर खाता है ।लोग अक्सर उसको तंग करते हैं और कूड़ेदान से भी खाना नहीं निकालने देते। कुल्लू से सुदर्शना चौहान ने कहा कि कटराई-जटेड़ रोड पर लगभग 35 वर्षीय मनोरोगी रहता है और सड़क पर ही सोता है।</p>
<p>सोलन जिले संजय शर्मा ने बताया की में कुनिहार नालागढ़ रोड पर राम शहर की ओर जाने वाले रास्ते पर झंडू गांव में एक मनोरोगी रहता है जो श्मशान घाट के पास सोता है ।बैजनाथ से भरत शर्मा ने फोन पर बताया की मंडी रोड पर पेट्रोल पंप के पास करीब 40 वर्षीय मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो पेट्रोल पंप के आसपास घूमता दिखता है। जिला शिमला के कुमार से कपिल शर्मा ने कहा कि वहां शणाद गाँव का नरेश मनोरोगी होने के बाद दयनीय हालत में रहता है। वह अपने घर जाने की बजाए इधर-उधर से खाना मांग कर गुजर बसर करता है।</p>
<p>कांगड़ा जिले के रैत में करीब 7 वर्ष की दक्षिण भारत की एक मनोरोगी महिला बुरी हालत में रह रही है उसके पास ना तो पर्याप्त कपड़े हैं और नहीं सिर ढकने को छत। रैत से गुरनाम सिंह ने बताया कि उसकी बोली कोई नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा की इस महिला को तुरंत सहारे की जरूरत है।</p>
<p>पौंटा साहिब के पास बद्रीपुर में आंगनवाड़ी वर्कर बलजीत कौर ने कहा की नजदीकी गांव भोपुर में करीब 25 साल का मनोरोगी लड़का खराब हालत में सड़क पर ही पड़ा रहता है।</p>
<p>ज्वालाजी से सपना ने बताया की बस स्टैंड के पास कई मनोरोगी बेसहारा हालत में रहते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत है। ढली शिमला से रवि कुमार दलित ने बताया कि संजौली में एक नेपाली युवक नशे के कारण मानसिक संतुलन खो कर इधर-उधर चिल्लाता रहता है पुलिस वालों ने पहले उसे पकड़ा और कुछ देर बाद छोड़ दिया जबकि वह पूरी तरह से मनोरोगी है।</p>
<p>संस्था ने कहा कि इन सभी मामलों में स्थानीय पुलिस का नकारात्मक रवैया देखते हुए उन्होंने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करने का अनुरोध किया है ।</p>
<p>इस कानून के मुताबिक संबंधित थाना अध्यक्ष का दायित्व है कि वह बेसहारा मनोरोगी को देखकर उसे पुलिस संरक्षण में ले और नजदीकी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में 24 घंटे के भीतर पेश करें। इसके बाद अदालत मनोरोगी को मनोचिकित्सक को दिखाने का आदेश पारित करती है। उसका इलाज एवं पुनर्वास निशुल्क करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 23 और 24 के सख्ती से पालन के लिए 4 जून 2015 को हाई कोर्ट बिल्कुल स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/02/21/hp-high-court-judgment-in-homeless-mentally-ill-people/">बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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