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	<title>Urni Kinnaur Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Urni Kinnaur Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>किन्नौर के उरनी  में  नहीं टूट रही सतलुज में बनी झील, खतरा बढ़ने के बाद रेड अलर्ट जारी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/06/23/lake-in-urni-in-kinnaur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jun 2016 14:49:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[किन्नौर]]></category>
		<category><![CDATA[HP Assembly Vice Speaker]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है शिमला- हिमाचल के किन्नौर के उरनी ढांक में भूस्खलन के कारण बनी झील से पानी निकालने का कार्य जान जोखिम में डालकर किया जा रहा है। प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल के किन्नौर के उरनी ढांक में भूस्खलन के कारण बनी झील से पानी निकालने का कार्य जान जोखिम में डालकर किया जा रहा है। प्रशासन ने तेजी से बढ़ रहे सतलुज नदी के बहाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है।</p>
<p>सतलुज का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। नदी पर बने पुल को बचाना एनएच प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के लिए बेहद कठिन हो गया है। ऊपरी पहाड़ी से भूस्खलन के कारण झील से पानी की निकासी बहुत कम हो गई है।</p>
<p>झील के पानी की निकासी के लिए कश्ती में जाकर ब्लास्टिंग की जा रही है। ब्लास्टिंग के तुरंत बाद भूस्खलन के कारण दोबारा मलबा इकट्ठा हो रहा है। इस कारण झील में बराबर खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>लगातार जारी है ब्लास्टिंग मगर नहीं हट रही झील </strong></p>
<p>मजदूर झील के किनारे किश्ती में जाकर बड़े पत्थरों को ड्रिल कर ब्लास्ट कर रहे हैं। इसमें ब्लास्टिंग करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग रहा है। विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी कार्य का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मौके पर पहुंचे।</p>
<p>झील में पानी इतना बढ़ गया है कि वहां बिना कश्ती के ब्लास्टिंग कार्य नहीं हो सकता। विस उपाध्यक्ष ने एनएच प्राधिकरण के अधिकारियों को एहतियात बरतने के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए।</p>
<p>नेशनल हाईवे के कनिष्ठ अभियंता मोहन मेहता ने कहा कि चोलिंग की ओर लगे बैली ब्रिज को दो मीटर ऊंचा उठाने का कार्य तेजी से चल रहा है।  एसडीएम सुरेंद्र मोहन ने लोगों से बरसात का मौसम खत्म होने तक सतलुज किनारे न जाने का आह्वान किया है।</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/28/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-2016-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Mar 2016 12:47:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Culture Club Urni Kinnaur]]></category>
		<category><![CDATA[Gaiety theater Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsav 2016]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal culture]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Talent]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla City]]></category>
		<category><![CDATA[Urni Kinnaur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- आज की अन्तिम प्रस्तुुति में धू्रव शिखर, शिमला द्वारा नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक रंजीत कपूर तथा निर्देशक प्रवीण चांदला है। चैनपुर की दास्तान का कथानक उस वक्त का जब देश में बेईमानी थी, रिश्वत खोरी थी और भ्रष्टाचार था। अंग्रेजो की कैद से देश आजाद हुआ। पूरा मुल्क सदियों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/28/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-2016-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae/">हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> आज की अन्तिम प्रस्तुुति में धू्रव शिखर, शिमला द्वारा नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक रंजीत कपूर तथा निर्देशक प्रवीण चांदला है। चैनपुर की दास्तान का कथानक उस वक्त का जब देश में बेईमानी थी, रिश्वत खोरी थी और भ्रष्टाचार था। अंग्रेजो की कैद से देश आजाद हुआ। पूरा मुल्क सदियों से पड़ी गुलामी की जंजीरें तोड़-आजादी की सांसे ले रहा था। हर तरफ उमंग और जोश था।</p>
<p>आजादी का जश्न मनाने के बाद देश के नेताओं को महसूस हुआ कि आजादी हासिल कर लेना आसान था लेकिन उसे बनाए रखना बहुत मुश्किल है। सभी रियासतें हिन्दुस्तान में शामिल हो चुकी थी। लेकिन पुरानी बिमारियां, नौकरशाही लेन-देन, रिश्वतखोरी, जमाखोरी की हवा बह रही थी। इन कुरीतियों के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए गए, कानून बनाए गए, कई धमकियों दी गई लेकिन सारी बुराईयों से बेखबर एक रियासत ऐसी भी थी जहां लोग बडे प्यार से इन बुराईयों को गले लगाकर चैन की बंसी बजा रहे थे। यह रियासत थी चैनपुर। चैनपुर में क्या हो रहा था, कैसे हुआ, कैसे होगा इन सभी घटनाओं को पिरोकर हास्य व्यंग्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/category/%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF/" target="_blank">हिम रंग महोत्सव-2016की सभी प्रस्तुतियां पढ़ने के लिए क्लिक करें </a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; में दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। होरिंग्फो (हिरण-फो) नृत्य जिला किन्नौर के ग्राम उरनी में देवता श्री बद्री नरायण मन्दिर में किया जाता है।</p>
<p>यह नृत्य वैसाखी से 10 दिन पूर्व हर शाम को मन्दिर परिसर में होता है। वैसाखी के दिन यह नृत्य दोपहर के समय देवता श्री बद्री नारायण जी के समक्ष होता है। ग्रामवासी अत्यन्त प्रसन्ता से हर शाम को हिरण-फो नृत्य देखने आते है। यह नृत्य प्राचीन समय से चला आ रहा है। इस नृत्य में एक हिरण, राहुला व लाड़ा होता है।</p>
<p>राहुला विशेषता भूत-प्रेत व शिकारी होते है जो कि हिरण के साथ लड़ते है। दूसरी ओर राहुला स्वयं आपस में लड़कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते है। राहुला जिन्होंने पारम्पिरिक आभूषण पहना है वे परी की भूमिका अदा करते है तथा हिरण के साथ नृत्य करते है। आधुनिकता के इस दौर में भी यह नृत्य आज भी देवता श्री बद्री नारायण जी के मन्दिर परिसर में हिरण-फो नृत्य किया जाता है। ग्रामवारियों ने अपनी इस विरासत को बनाए रखा है ताकि आने वाली पीढ़ी इस नृत्य व संस्कृति का अनुसरण करते हुए इसे सुरक्षित रख सके।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/28/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-2016-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae/">हिम रंग महोत्सव-2016- के अन्तिम दिन नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; और लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; का गेयटी में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2016 14:40:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Gaiety theater Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Him Rang Mahotsav 2016]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal culture]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Talent]]></category>
		<category><![CDATA[HP Art Language Cultural Department]]></category>
		<category><![CDATA[Solan District]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। ये [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में  गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।<br />
</strong></p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां-राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>आज की प्रस्तुुति में प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा नाटक &#8220;बरसी&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक डाॅ. वयला वासुदेवन पिल्लै ने किया है। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन संजीव कुमार अरोड़ा ने किया है। इस नाटक में दर्शाया गया कि शस्त्र विद्या का जो प्रयोग युद्ध में होता आया है उसमें अब विज्ञान की,विद्या में अग्नि उगलने वाले नई खोज अर्थात परवाणु विस्फोटन की पताका फहरा रही है। झोंपडि़यां तक जल जाती है। विध्वंस के अंत में मृत्यु मंत्र रह जाता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>      बूंद भर पेयजल, मिलता नहीं जो अणुमुक्त हो।<br />
      जली लाशें बह रही है, जिन नदि नालों से हो।।</p>
<p>युग बदले,समय बदला,युद्ध का स्वरूप बदला किन्तु इससे मिलने वाले घाव,पीड़ा,उत्पीड़न और वेेदना यथावत है। युद्ध में पड़े सैंकड़ों शवों ने क्या पाया। धर्म या अधर्म,उन्होंने क्या सीखा, सत्य या असत्य, उन्होंने किसे अनाथ किया, महाराज को कोई भी चक्रवर्ती सम्राट युद्ध के बाद अनाथ नहीं होता। अनाथ होती है तो अबलाएं, अकिंचन ही जड़ से उखड़ जाती हैं। इनी सवालों के उत्तर खोजता ये नाटक एक प्रयोग है प्रणव थियेटर, बियोंड थियेटर सोलन का। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां- हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>हिमाचल प्रदेश को देव भूमि के नाम से जाना जाता है। देवी-देवताओं की पूजा एवं मान्यताओं के लिए यहां अनेक पर्व व त्योहार मनाएं जाते हैं। जिनमें अनेक परम्पारिक कार्यक्रम किए जाते है। सोलन जिला का करयाला भी देव परम्परा से जुड़ा लोकनाट्य है जो लोग अपने आराध्यों की स्तुति अथवा अपनी मन्नत पूरी होने पर करते हैं। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 23 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a></p>
<p>करयाला की उत्पति भी सोलन जिला से मानी जाती है। करयाला लोक नाट्य काफी प्राचीन समय से आयोजित किया जा रहा है जिसके माध्यम से वर्तमान समाज में फैली कुरीतियों को लोक भाषा में विभिन्न स्वांगों के माध्यम से ऊजागर किया जाता है जिससे लोगों का मनोरंजन भी होता है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 24 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन</a></p>
<p>पूजा, चन्द्रावली नृत्य,साधु का स्वांग, नट-नटिनी का स्वांग,लम्बरदार,ढ़ोंगी साधू, डाकिनी का स्वांग,झाड़ फूंक करने वालों के स्वांग के माध्यम से समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों को दर्शाया जाता है। यह लोनाट्य पूरी रात चलता है जिसमें लोगों के मनोंरंजन के लिए गीत-संगीत का कार्यक्रम लगातार चलता रहता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 25 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के छठे दिन नाटक ‘”सुन्नी भुंकू” और लोकनाट्य “जिजीविषा” तथा “दाहाजा” का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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