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	<title>UHF Nauni Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>UHF Nauni Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<item>
		<title>नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/17/uhf-nauni-elf-employment-vocational-training-course-2019/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jul 2019 07:14:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन-डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/17/uhf-nauni-elf-employment-vocational-training-course-2019/">नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के<br />
औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य<br />
कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में<br />
स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।</p>
<p>यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 11 सितंबर से विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशनों और<br />
कृषि विज्ञान केंद्र में चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय के सात स्टेशनों में इस प्रशिक्षण कोर्स की कुल 130 सीटें<br />
होगी। जाछ (कांगड़ा), बाजौरा(कुल्लू), शारबो (किन्नौर), मशोबरा (शिमला) में स्थित विश्वविद्यालय के<br />
क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों और औदयानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में<br />
20-20 सीटें होगी। सिरमौर के धौलाकुआं में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र और चंबा के कृषि<br />
विज्ञान केंद्र में इस प्रशिक्षण कोर्स की 15-15 सीटें होगी।</p>
<p>इस कार्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने कम से कम दसवीं या समकक्ष स्तर की परीक्षा उतिर्ण की हो, 17 से 30 वर्ष<br />
की आयु का हो और कृषक परिवार से संबंध रखता हो। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन पत्र साधारण कागज पर<br />
संबंधित स्टेशनों के सह निदेशकय या कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के कार्यालय में 8 अगस्त या उससे पहले तक जमा<br />
कर सकते हैं।</p>
<p>साक्षात्कार 19 अगस्त को केंद्र सह निदेशक/ प्रभारी के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे। सभी<br />
उम्मीदवारों को यह घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाएगें। साक्षात्कार के समय<br />
उम्मीदवारों को अपने समस्त प्रमाण पत्र तथा उसकी एक-एक प्रतिलिपि साथ लानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान कोई<br />
भता देय नहीं होगा।</p>
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		<item>
		<title>डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/dr-parvinder-kaushal-joins-as-new-vc-of-uhf-nauni/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jul 2019 07:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Parvinder Kaushal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन- डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे। हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong> सोलन- </strong>डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे।</p>
<p>हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी विवि के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। उन्होनें अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है जिसके बादफ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।</p>
<p>डॉ कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण,अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएँ दी। इनमें से प्रमुख हैं, इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांचीमें वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के रूप डॉ कौशल ने कई वर्षो तक कार्य किया।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12718" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg" alt="UHF Nauni's New VC" width="1000" height="650" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC-300x195.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/UHF-Naunis-New-VC-768x499.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>डॉ कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं। उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार द्वारा भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी। इसके अलावा,उन्होंने फ्रांस, इटली, यूनाइटेड किंगडम, मैक्सिको, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, यूगोस्लाविया, बेल्जियम, हॉलैंड, स्पेन, एस्टोनिया, कनाडा, फिनलैंड, तुर्की, मलेशिया और श्रीलंका सहित कई देशों का दौरा किया है।</p>
<p>डॉ परविंदर कौशल ने विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों और समूहों के सदस्य के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख हैं क्षेत्रीय डीन समिति दक्षिण एशिया (2009); कृषि विज्ञान में पीजी पाठ्यक्रम की समीक्षा और पुनर्गठन के लिए नेशनल कोर ग्रुप (आईसीएआर) के सदस्य; आईसीएआर की वानिकी में ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया कमेटी (BSMA)के संयोजक (2007); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरल रेसिंस अँड गम्स के लिए क्विनक्वीनियल रिव्यू टीम (QRT) के सदस्य(2001-2007);शेर-ए-कशमीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की मान्यता के लिए पीयर रिव्यू टीम (आईसीएआर प्रत्यायन बोर्ड) के सदस्य(2008); यूजीसी की कृषि,बागवानी और वानिकी,पर्यावरण,कौशल विकास आदि पर विभिन्नविशेषज्ञ समितियों के सदस्य (2013-2016);आईसीएआर-केंद्रीय कृषि-वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित सदस्य अनुसंधान सलाहकार समितिके सदस्य (2015-17)। डॉ कौशल ने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (IUFRO)के रिसर्च ग्रुप &#8216;फॉरेस्ट स्टैंड एस्टेब्लिशमेंट ऑपरेशंस एंड टेक्नीक्स&#8217;के डिप्टी लीडर(2000-05)के रूप में भी काम किया है। वह वृक्षारोपण प्रतिष्ठान (1990-2000) पर IUFROवर्किंग पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।</p>
<p>इस अवसर पर डॉ कौशल ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रीमण्डल का धन्यवाद किया। उन्होनें कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि नौणी विश्वविद्यालय को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/10/dr-parvinder-kaushal-joins-as-new-vc-of-uhf-nauni/">डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>ऊना के युवा उद्यमी ने मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जैविक अगरबत्ती, न चारकोल, न सिंथेटिक रसायन</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/28/una-startup-develops-organic-incense-from-offered-flowers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Apr 2019 09:31:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन-जल्द ही लोग बाज़ार से धार्मिक स्थलों पर चढ़ाए गए फूलों से तैयार शुद्ध जैविक अगरबत्ती खरीद पाएगें। ऊना के युवा उद्यमी रविंदर प्राशर ने अपने ‘युवान’ अभियान के तहत डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में मंदिरों में चढ़ने वाले पवित्र फूलों से जैविक अगरबत्ती विकसित की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>जल्द ही लोग बाज़ार से धार्मिक स्थलों पर चढ़ाए गए फूलों से तैयार शुद्ध जैविक अगरबत्ती खरीद पाएगें। ऊना के युवा उद्यमी रविंदर प्राशर ने अपने ‘युवान’ अभियान के तहत डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में मंदिरों में चढ़ने वाले पवित्र फूलों से जैविक अगरबत्ती विकसित की है।</p>
<p>मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत समर्थित इस आइडिया का उद्देश्य पूजा स्थलों पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए फूलों के निपटान की समस्या का एक समाधान प्रदान करना है। इसके अलावा,धार्मिक स्थलों और समारोह में इस्तेमाल होने वाले इन फूलों को भी अगरबत्ती में बदलकर एक नया रूप मिल जाता है और यह व्यर्थ नहीं होते।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks.jpg"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12658" src="http://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks.jpg" alt="Dr HC Sharma, UHF VC launching the organic incense sticks" width="987" height="606" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks.jpg 987w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks-300x184.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks-768x472.jpg 768w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks-356x220.jpg 356w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks-696x427.jpg 696w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr-HC-Sharma-UHF-VC-launching-the-organic-incense-sticks-684x420.jpg 684w" sizes="(max-width: 987px) 100vw, 987px" /></a></p>
<p>बिट्स पिलानी से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी कर चुके रविंदर ने एमबीए के अंतिम सेमेस्टर के दौरान- युवान वेंडरस के नाम से कंपनी को पंजीकृत किया था। इसके बाद उन्होंने अपने इस आइडिया को लेकर मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना में आवेदन किया और अनुमोदन पर नौणी विवि के फ्लॉरिकल्चर और लैंडस्केप आर्कीटेकचर विभाग उन्हें इनक्यूबेटर के रूप में आवंटित किया गया। विश्वविद्यालय में उन्होनें अपने मैंटर डॉ भारती कश्यप, डॉ वाईसी गुप्ता और डॉ मनोज वैद्य के वैज्ञानिक इनपुट और सलाह से इस अगरबती का विकास किया गया। उत्पाद का परीक्षण विश्वविद्यालय के फ्लोरल क्राफ्ट लैब में किया गया।</p>
<p>इस प्रक्रिया में फूलों से प्राकृतिक भागों और आवश्यक तेलों का उपयोग किया जाता है ताकि जैविक अगरबती तैयार की जा सके। इसमें कोई चारकोल या किसी अन्य सिंथेटिक रसायन नहीं डाले जाते। इसके अलावा अगरबती बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कार्बन नेऊट्रल है क्योंकि इस प्रक्रिया से कोई अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है और यहां तक ​​कि फूलों के अप्रयुक्त भागों का उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने गुलाब, चन्दन और लैवेंडर सहित पांच तरह की अगरबती का विकास किया है जो ग्राहकों को बाज़ार में जून से उपलब्ध होंगी।</p>
<p>विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एचसी शर्मा ने हाल ही में रोज़ फेस्टिवल के दौरान इस अगरबत्ती का प्रमोचन किया। रविंदर ने इस उत्पाद को बनाने में उनके मार्गदर्शन और समर्थन करने के लिए मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना, विश्वविद्यालय और इसके वैज्ञानिकों और अपने परिवार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके ‘युवान’ अभियान का उद्देश्य मंदिरों में चढ़ाए गए पवित्र फूलों को खुले क्षेत्रों और नालों में फेंकने का एक विकल्प प्रदान करना है।  विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एचसी शर्मा ने रविंदर और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि युवा उद्यमियों को नवीनतम विचारों के साथ आगे आते देखना बहुत ही सराहनीय है।</p>
<p>इन नए विचारों से न केवल नए रोजगार मिलते हैं बल्कि समाज की कई समस्याओं का भी समाधान होता है। डॉ शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय नियमित रूप से किसानों को सूचना के प्रसार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से नए उद्यम स्थापित करने में मदद करता है और भविष्य में भी इस तरह की पहल का समर्थन करता रहेगा। उनके अनुसार कृषि पेशे को और अधिक सम्मान देने के लिए लोगों, विशेष रूप से युवाओं को, इस क्षेत्र में उद्यमिता अपनानी होगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री की स्टार्टअप योजना में संभावित उद्यमियों को व्यावहारिक ज्ञान,अभिविन्यास प्रशिक्षण और उद्यमी मार्गदर्शन दिया जाता है। मेजबान संस्थान द्वारा परियोजना की सिफारिश और अधिकारित समिति द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद एक वर्ष के लिए मासिक समर्थन भत्ता भी दिया जाता है। वर्ष 2017 में नौणी विवि में इस योजना के तहत एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया था। इनक्यूबेशन सेंटर सलाहकार सेवाएं प्रदान करके स्टार्टअप और नवाचार का समर्थन करते हैं और इसकी प्रयोगशालाओं और सुविधाओं को भी मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/04/28/una-startup-develops-organic-incense-from-offered-flowers/">ऊना के युवा उद्यमी ने मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जैविक अगरबत्ती, न चारकोल, न सिंथेटिक रसायन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नौणी विवि के धौलाकुआं स्टेशन को मिला राष्ट्रीय स्तर का डेहलिया  टेस्टिंग केंद्र का दर्जा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/03/20/dahlia-cultivation-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Mar 2019 11:18:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[Dahlia Cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[Floriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन-डॉ॰वाई॰एस॰ परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं को देश में डेहलियाफूल की टेस्टिंग का ‘लीड सेंटर’ (Lead centre of dahlia testing) के रूप में नामित किया गया है। भारत सरकार के कृषिसहकारिता और किसान कल्याण विभाग के पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने धौलाकुआं अनुसंधान केंद्र [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/03/20/dahlia-cultivation-in-himachal-pradesh/">नौणी विवि के धौलाकुआं स्टेशन को मिला राष्ट्रीय स्तर का डेहलिया  टेस्टिंग केंद्र का दर्जा</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>डॉ॰वाई॰एस॰ परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं को देश में डेहलियाफूल की टेस्टिंग का ‘लीड सेंटर’ (Lead centre of dahlia testing) के रूप में नामित किया गया है।</p>
<p>भारत सरकार के कृषिसहकारिता और किसान कल्याण विभाग के पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने धौलाकुआं अनुसंधान केंद्र को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर का ‘लीड सेंटर’ बनाया है जिससेआने वाले समय में राज्य में डेहलिया की खेती को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि यह पहली बार है किसी परियोजना के तहत इस फूल को विभिन्न क़िस्मों को हिमाचल में टेस्टिंग के लिए लाया गया है। स्टेशन पर चल रहे अनुसंधान से आने वाले समय में प्रदेश के किसानों के बीच डेहलिया की व्यावसायिक खेती को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>इस अनुसंधान केंद्र को फूलों पर शोध कार्य करते ज्यादा समय नहीं हुआ है। वर्ष 2012 में सजावटी पौधों पर काम शुरू किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र ने काफी प्रगति की है। पौधा किस्म और कृषक अधिकार प्राधिकरण ने 2016-17 में 18 लाख रुपये की राशि की एक परियोजना इस केंद्र को स्वीकृत की थी। इसके तहत डेहलियाकेविभिन्न रंग, आकार और श्रेणियों की 50 से अधिककिस्में उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों से केंद्र पर लाई गई।</p>
<p>मुख्य अन्वेषकडॉ प्रियंका ठाकुर ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य डेहलियाका डी॰यू॰एस॰ टेस्टिंग (DUSTesting)के दिशा-निर्देशों का विकास और फूल कि विभिन्न प्रजातियों और कल्टीवार का मूल्यांकन करना है। रूपात्मक लक्षण वर्णन, डीयूएसपरीक्षण दिशानिर्देशों का विकास और स्टेशन पर डेहलिया के लिए डीयूएस केंद्र की स्थापना का कार्य वर्तमान में चल रहा है।</p>
<p>हिमाचल के किसान इस नई फसल को कट फ्लावर के साथ-साथ,पॉट प्लांट प्रोडक्शन के लिए भी अपना सकते हैंजो न केवल फसल विविधीकरण में मददगार होगा बल्कि प्रदेश कि अर्थव्यवस्था और किसानों कि आय बढ़ा सकती है। डेहलिया पॉट प्लांट प्रोडक्शन, बॉर्डर, मास प्लांटेशन और कट फ्लावर आदि के लिए उपयुक्त है। केंद्र द्वारा किए गए शोध में पाया है कि माटुंगिनी, मदर टेरेसा, सिस्टर निवेदिता, तेनजिन, सूर्यदेव, जिशु, गिलोडी, एसपी कमला जैसी किस्में निचली पहाड़ी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त पाई गई है। कट फ्लावर उत्पादन के लिए माटुंगिनी, जिशु, सोहिनी, ब्लैक इटरनिटी, सूर्यदेव, मां शारदा किस्में उपयुक्त पाए गए हैं।</p>
<p>डेहलिया&#8217;फूलों का राजा&#8217; नाम से भी मशहूर है। पौधों की ऊँचाई विभिन्न क़िस्मों में अलग अलग पाई जाती है और दो इंच लॉलीपॉप शैली से लेकर विशाल 10-15 इंच ‘डिनर प्लेट’ स्टाइल के फूल 4-5 फीट की ऊंचाई तक बढ़ सकते हैं। फरवरी से मई माह तक यह फूल खिला रेहता है। किसान कटफ्लावर, गमले और लैंडस्केप पौधों और पौधों के उत्पादन से लाभांश कमा कर सकते हैं। नौणी विश्वविद्यालय के छात्र भी हिमाचल प्रदेश की निचली पहाड़ी परिस्थितियों के लिए डेहलिया की किस्मों के मूल्यांकन पर काम कर रहे हैं।</p>
<p>इस अवसर पर क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, धौलाकुआं के एसोशिएट डाइरेक्टर डॉ॰ ए॰के॰जोशी ने बताया कि डेहलिया परीक्षण के राष्ट्रीय स्तर के लीड सेंटर की मान्यता पाना एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह सर्दियों में खिलने वाला बहुत ही लोकप्रियऔर उपयोगी फूलहै।</p>
<p>डॉ॰ जोशी ने कहा कि इस मान्यता से अनुसंधान स्टेशन द्वारा किए जा रहे कार्यको देश में पहचान मिलने के साथ साथ राज्य में इस फूल की व्यावसायिक खेती को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्यमें और अधिक जर्मप्लाज्म भी स्टेशन पर जोड़ा जाएगा और किसानों को पौधों भीउपलब्ध होंगें। नौणी विवि के कुलपति डॉ॰ एचसी शर्मा और अनुसंधान निदेशक डॉ॰ जेएन शर्मा ने इस मौके पर वैज्ञानिकों को बधाई दी।</p>
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