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	<title>Solan District Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2016 14:40:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। ये [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>27 मार्च को इसी क्रम में देवी दूर्गा संस्कृति क्लब उरनी, किन्नौर द्वारा लोकनाट्य &#8220;होरिंग्फो&#8221; एम्फी थियेटर में अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट में  गेयटी के एम्फी थियेटर में मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में सायं 5:00 बजे समारोह का अन्तिम नाटक &#8220;चैनपुर की दास्तान&#8221; धू्रव शिखर, शिमला द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।<br />
</strong></p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/19/him-rang-mahotsav-2016-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 19 की प्रस्तुतियां-राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ</a></p>
<p>आज की प्रस्तुुति में प्रणव थियेटर, वियोंड़ थियेटर, सोलन द्वारा नाटक &#8220;बरसी&#8221; मंचित किया गया। जिसके लेखक डाॅ. वयला वासुदेवन पिल्लै ने किया है। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन संजीव कुमार अरोड़ा ने किया है। इस नाटक में दर्शाया गया कि शस्त्र विद्या का जो प्रयोग युद्ध में होता आया है उसमें अब विज्ञान की,विद्या में अग्नि उगलने वाले नई खोज अर्थात परवाणु विस्फोटन की पताका फहरा रही है। झोंपडि़यां तक जल जाती है। विध्वंस के अंत में मृत्यु मंत्र रह जाता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/20/him-rang-mahotsav-2016-begins-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 20 की प्रस्तुतियां-‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें</a></p>
<p>      बूंद भर पेयजल, मिलता नहीं जो अणुमुक्त हो।<br />
      जली लाशें बह रही है, जिन नदि नालों से हो।।</p>
<p>युग बदले,समय बदला,युद्ध का स्वरूप बदला किन्तु इससे मिलने वाले घाव,पीड़ा,उत्पीड़न और वेेदना यथावत है। युद्ध में पड़े सैंकड़ों शवों ने क्या पाया। धर्म या अधर्म,उन्होंने क्या सीखा, सत्य या असत्य, उन्होंने किसे अनाथ किया, महाराज को कोई भी चक्रवर्ती सम्राट युद्ध के बाद अनाथ नहीं होता। अनाथ होती है तो अबलाएं, अकिंचन ही जड़ से उखड़ जाती हैं। इनी सवालों के उत्तर खोजता ये नाटक एक प्रयोग है प्रणव थियेटर, बियोंड थियेटर सोलन का। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/21/him-rang-mahotsav-2016/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 21 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 में करयाला और बेबस लाश का हुआ मंचन</a></p>
<p>&#8220;हिम रंग महोत्सव-2016&#8221; की पहली कड़ी में दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर बिजेश्वर करियाला मण्डल कुथड,सोलन द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/22/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater-2/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 22 की प्रस्तुतियां- हिम रंग महोत्सव-2016- नाटक ‘‘बेबस लाश’’ और लोकनाट्य करयाला का गेयटी थियेटर में मंचन</a></p>
<p>हिमाचल प्रदेश को देव भूमि के नाम से जाना जाता है। देवी-देवताओं की पूजा एवं मान्यताओं के लिए यहां अनेक पर्व व त्योहार मनाएं जाते हैं। जिनमें अनेक परम्पारिक कार्यक्रम किए जाते है। सोलन जिला का करयाला भी देव परम्परा से जुड़ा लोकनाट्य है जो लोग अपने आराध्यों की स्तुति अथवा अपनी मन्नत पूरी होने पर करते हैं। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/23/him-rang-mahotsva-2016-at-shimla-gaiety-theater/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 23 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के चौथे दिन नाटक ‘‘आधे-अधूरे’’ और लोकनाट्य ‘बांठड़ा’’ मंचित</a></p>
<p>करयाला की उत्पति भी सोलन जिला से मानी जाती है। करयाला लोक नाट्य काफी प्राचीन समय से आयोजित किया जा रहा है जिसके माध्यम से वर्तमान समाज में फैली कुरीतियों को लोक भाषा में विभिन्न स्वांगों के माध्यम से ऊजागर किया जाता है जिससे लोगों का मनोरंजन भी होता है। </p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/24/him-rang-mahotsav-2016-3/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 24 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन</a></p>
<p>पूजा, चन्द्रावली नृत्य,साधु का स्वांग, नट-नटिनी का स्वांग,लम्बरदार,ढ़ोंगी साधू, डाकिनी का स्वांग,झाड़ फूंक करने वालों के स्वांग के माध्यम से समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों को दर्शाया जाता है। यह लोनाट्य पूरी रात चलता है जिसमें लोगों के मनोंरंजन के लिए गीत-संगीत का कार्यक्रम लगातार चलता रहता है।</p>
<p><a href="http://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/25/him-rang-mahotsav-2016-4/" target="_blank">ये भी पढ़ें: मार्च 25 की प्रस्तुतियां-हिम रंग महोत्सव-2016- के छठे दिन नाटक ‘”सुन्नी भुंकू” और लोकनाट्य “जिजीविषा” तथा “दाहाजा” का गेयटी थियेटर में हुआ मंचन</a></p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/26/him-rang-mahotsav-2016-5/">हिम रंग महोत्सव-2016- के सातवें दिन नाटक &#8220;बरसी&#8221; और लोकनाट्य &#8220;करयाला&#8221; का गेयटी  में हुआ मंचन</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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