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	<title>Sewerage Cess Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Sewerage Cess Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>सीवरेज सेस बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर पड़ रहा अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jul 2019 13:24:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहरी ने पेयजल कंपनी द्वारा पानी बिल के साथ प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपये सीवरेज सेस वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई है । जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की अभी तक जो सेस शुल्क 30 फीसदी लिया जाता था उसे बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर अतिरिक्त व [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहरी ने पेयजल कंपनी द्वारा पानी बिल के साथ प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपये सीवरेज सेस वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई है ।</p>
<p>जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की अभी तक जो सेस शुल्क 30 फीसदी लिया जाता था उसे बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ पड़ रहा है , छोटे उपभोक्ता जो की पानी की कम खपत करते थे उस पर भी फ्लेट सौ रुपये शुल्क लगा देना तर्कसंगत नही है । निगम को इस बाबत पुनर्विचार करना चाहिए ये फ़ैसला पूरी तरह से जनविरोधी है इसे तुरंत वापस लेना चाहिए ।</p>
<p>जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की पेयजय कंपनी द्वारा महीने के महीने पानी के बिल नही दिये जाते ऐसे मे यदि किसी उपभोक्ता को छ :माह या आठ माह बाद बिल दिया जा रहा है तो उसपर हर माह के हिसाब से सौ रुपए शुल्क जोड़ा जा रहा है, हर उपभोक्ता को हर माह सौ रुपये जोड़ने के इस गणित से पेयजल कंपनी खासा मुनफा कमा रही है और आम आदमी पर गैरजरूरी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है जिस पर जिला कांग्रेस कमेटी कड़ी आपत्ति जताती है ।</p>
<p>अरुण शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा आए दिन ही जन विरोधी व तुगलकी फैसले लिए जा रहें है, मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवा पाने मे नाकाम रहा निगम केवल आम आदमी की जेब से पैसे निकलवाने की फिराक मे रहता है , हर दूसरे माह किसी ने किसी तरह से कोई नया शुल्क लगाया जा रहा है , और कुछ नही मिला तो कूड़े का शुल्क बढ़ा दिया जाता है इस से जनता मे आक्रोश है ।</p>
<p>अरुण शर्मा ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी ये मांग करती है की प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपए के इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए जिस से छोटे उपभोक्ताओ पर आर्थिक बोझ न पड़े अन्यथा महापौर व पेयजल कंपनी के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मोर्चा खोला जाएगा , निगम जनता पर तुगल्की फरमान लगाना बंद करें और शहर की जनता को मूलभूत सुविधाए प्रदान करने के प्रयास करे ।</p>
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		<title>शिमला शहर में पानी की दरों में वृद्धि के बाद अब सीवरेज चार्जेज न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह करने से जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/21/shimla-mcs-hike-in-sewerage-cess-burdens-public/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jul 2019 14:15:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[CPIM]]></category>
		<category><![CDATA[Sanjay Chauhan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211; शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थीं तथा अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है जोकि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है। वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था जो पूर्व [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong> शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थीं तथा अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है जोकि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है।</p>
<p>वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था जो पूर्व नगर निगम ने इसे 30 प्रतिशत किया था। तब से लेकर अभी तक केवल 30 प्रतिशत ही सीवरेज चार्जेज लिए जा रहे थे। परन्तु इस माह जारी किए गए बिलों में यह न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह की दर से जोड़ दिए गए हैं जिससे कम पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह 100 प्रतिशत हो गया है जोकि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/Shimla-MC-Water-Bill-Copy.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12767" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/Shimla-MC-Water-Bill-Copy.jpg" alt="Shimla MC Water Bill Copy" width="1000" height="667" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/Shimla-MC-Water-Bill-Copy.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/Shimla-MC-Water-Bill-Copy-300x200.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2019/07/Shimla-MC-Water-Bill-Copy-768x512.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>आम नागरिकों के साथ-2 कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने भी बिलों में की गई इस भारी वृद्धि की कड़ी भर्त्सना की है तथा इस वृद्धि को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है।</p>
<p>शिमला के <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/sanjay-chauhan/">पूर्व मेयर संजय चौहान</a> ने कहा कि जबसे बीजेपी की सरकार व नगर निगम शिमला का गठन हुआ है शिमला शहर की जनता पर पानी, बिजली, कूड़ा, बस आदि की सेवाओं की <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/06/22/bjp-ruled-shimla-mc-a-complete-failure/">दरों में भारी वृद्धि</a> की गई है। जिससे जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। शिमला शहर में पीने का पानी निजी हाथों में देने के लिए नगर निगम के जल विभाग को इससे अलग कर वर्ष 2018 में सरकार व नगर निगम ने एक कंपनी का गठन किया गया है। अब कंपनी पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही इसमें कोई नीतिगत हस्तक्षेप हो सकता है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि कंपनी अब अपने स्तर पर निर्णय ले कर पेयजल को एक सेवा के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु के रूप में देने का कार्य कर रही है और अब मूल्य वसूली(cost recovery) के सिद्धान्त पर कार्य कर रही है जिससे स्वाभाविक रूप से जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।</p>
<p>चौहान ने कहा कि वर्ष 2012 में भी तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था का निजीकरण लगभग कर ही दिया था। परन्तु जनता द्वारा सी.पी.एम. के महापौर व उपमहापौर चुने जाने पर इस निजीकरण के निर्णय को बदला गया तथा सरकार से एक लंबे संघर्ष के पश्चात वर्ष 2016 में पानी की पूरी व्यवस्था जिसमें पम्पिंग, लिफ्टिंग व वितरण नगर निगम ने अपने हाथों में लिया तथा नगर निगम के अधीन एक ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एवं सीवरेज सर्कल(GSWSSC) का गठन कर गुम्मा, गिरी, अश्विनी खड्ड व अन्य परियोजनाओ की पंप, पाइपलाइन को बदलने व अन्य कार्यो के लिये करीब 90 करोड़ की व्यवस्था की तथा कार्य प्रारंभ किया। जिसका परिणाम आज है कि शिमला शहर को 48-53 MLD तक रोज पानी मिल रहा है और विकराल पेयजल संकट को समाप्त किया गया। वर्ष 2015 में शहर को 65 MLD अतिरिक्त पानी व शहर में पानी की आपूर्ति व सीवरेज की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए 125 मिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक से ऋण हेतू केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग(DEA) से स्वीकृत करवाया गया था। जिसका कार्य अब आरम्भ हो रहा है।</p>
<p>चौहान ने कहा कि पेयजल की कंपनी के गठन के कारण आज जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में तो मार्च,2018 के पश्चात से लगभग 1 वर्ष 6 माह बीतने के पश्चात भी अभी तक बिल नहीं दिये गए हैं। अधिकांश वार्डो में कही 4 माह तो कहीं 6 माह के बाद किसी भी आधार पर बिल दिए जा रहे हैं। जबकि मार्च, 2017 में तत्कालीन नगर निगम ने निर्णय लिया था कि मई, 2017 से हर माह मीटर रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाएंगे और यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी जाएगी। परन्तु वर्तमान नगर निगम यह निर्णय तो नहीं लागू कर पाई इसके विपरीत कंपनी का गठन कर आज शहरवासियों को परेशानी में धकेल दिया है।</p>
<p>सी.पी.एम. ने मांग की है कि पेयजल की दरों व सीवरेज चार्जेज में की गई वृद्धि को तुरंत वापिस ले। हर उपभोक्ता को मीटर रीडिंग के आधार पर हर माह बिल दिये जाए तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए। सरकार शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की व्यवस्था को बदल कर इसे पुनः नगर निगम शिमला के अधीन करें ताकि संविधान के 74वें संशोधन जिसमें शहरों में पेयजल की व्यवस्था करने का दायित्व नगर निगम को दिया गया है को लागू किया जा सके।</p>
<p>चौहान ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो पार्टी जनता को लामबंद कर सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन करेगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/07/21/shimla-mcs-hike-in-sewerage-cess-burdens-public/">शिमला शहर में पानी की दरों में वृद्धि के बाद अब सीवरेज चार्जेज न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह करने से जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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