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	<title>Sewage Treatment Plant Shimla Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>पीलिया की समस्या को लेकर विधानसभा का घेराव, मुख्यमन्त्री ने दिया सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड बनाने का आश्वासन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Mar 2016 15:13:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में पीलिया रोग के फैलाव के रूप में हुआ।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) ने पीलिया की समस्या को लेकर पंचायत भवन से लेकर विधानसभा चैक तक रैली का आयोजन किया व विधानसभा का घेराव किया। इस रैली में सैंकड़ों लोगों ने भाग लिया! </p>
<p>प्रदर्शन के बाद पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह से मिला व और उन्हें ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने ये भी कहा कि दरअसल पीलिया का मुख्य कारण पीने के पानी में सीवरेज के पानी का मिलना है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स एसटीपी में गन्दे पानी को साफ करने के लिए सही तरीका नहीं अपनाया जा रहा है और बिना साफ किया पानी छोड़ने की वजह से बार-बार पेयजल के स्रोत दूषित हो रहे हैं। खासतौर पर इस बार अश्वनी खड्ड से सप्लाई होने वाले पानी में यह समस्या ज्यादा आई है।</p>
<p>पार्टी का कहना है कि उन्होंने मुख्यमन्त्री से मांग की है कि शिमला में पीलिया की समस्या के पूर्ण समाधान के लिए तुरन्त ठोस कदम उठाए जाएं। पार्टी सचिव विजेन्द्र मेहरा ने कहा कि मुख्यमन्त्री ने पार्टी के सुझाव पर हिमाचल में सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड गठित करने का आश्वासन दिया है।</p>
<p>पार्टी ने कांग्रेस व भाजपा सरकारों पीलिया की समस्या के लिए बराबर जिम्मेवार ठहराया है जिन्होंने 2008 में माननीय उच्च न्यायालय  के दिशा निर्देशों को लागू न कर हज़ारों लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया। इन दोनों सरकारों की ठेका परस्त नीतियों के कारण लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>पार्टी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शिमला शहर में हज़ारों लोग पीलिया रोग से ग्रस्त हैं व कुछ की मौत भी हो चुकी है। यह बीमारी शिमला से होते हुए सोलन व अन्य जगह भी पहुंच चुकी है। इस बीमारी के फैलने के पीछे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की अव्यवस्था तथा सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली प्रमुख कारणों में से एक है।</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में 8 सर्कुलर देने तथा नेशनल इंस्टीटियूट आॅफ वायरोलोजी पुणे द्वारा वर्ष 2008 में गंभीर सुझाव देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसका प्रतिबिम्बन वर्ष 2009, 2011, 2013, 2015 व 2016 में पीलिया रोग के फैलाव के रूप में हुआ। इस वर्ष तो इस रोग की चपेट में हज़ारों लोग आ गए हैं जो कल्याणकारी राज्य की भूमिका तथा लोगों के जीने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है।</p>
<p>शिमला शहर और इसके आसपास की पंचायतों में फैले पीलिया से ग्रस्त लोगों का आंकड़ा कई हज़ारों में पहुंच चुका है। 22 लोग अपनी जान तक गवां चुके हैं। हालांकि यह कोई नई पैदा हुई स्थिति नहीं है। यह हर साल की समस्या है तथा सर्दी और बरसात दोनों मौसमों में इसके फैलने की संभावनाएं रहती हैं।</p>
<p>कम्युनिस्ट पार्टी ने पीलिया पर गंभीर होकर कहा कि पीलिया होने के कई कारण है शहर और इसके इर्द-गिर्द क्षेत्रों में जिस तेजी से निर्माण हुआ है और आबादी का विस्तार हुआ है उस अनुपात में बहुत से घर अभी सीवरेज की मुख्य लाइनों से नहीं जुड़े हैं। उनके सेप्टिक टैंकों की गन्दगी कभी खुद रिस कर और कभी जानबूझ कर बरसात के दिनों में नालों में बहकर इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। निर्माण कार्य के लिए बाहर से आए हज़ारों मज़दूर और रोज़ी-रोज़गार के लिए अन्य छोटे-छोटे काम धन्धे करने वालों के लिए न तो उस अनुपात में मकान मालिकों द्वारा शौचालयों की व्यवस्था की गई है और न ही सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था है। ऐसे में खुले में शौच जाना उनकी मजबूरी भी है और जो जलस्रोतों के दूषित होने का एक और कारण आने वाली गर्मियों के महीनों में शहर में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से यह समस्या और बढ़ेगी तथा पानी की कमी होगी। इसलिए समस्या के समाधान के लिए ठोस योजना बनाने वैकल्पिक व्यवस्था की ज़रूरत है।</p>
<p>पार्टी ने निम्नलिखित सुझाावों के साथ प्रदेष सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की हैः-</p>
<p><strong>पेयजल से सम्बन्धित सुझाव</strong></p>
<div style="border: 1px solid #ccc; margin: 10px 10px; padding: 0 10px;">1.)<strong>पीलिया से मरने वाले के परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये का मुवावज़ा तथा प्रभावितों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करवाया जाए।</strong></p>
<p><strong>पीलिया के इस पूरे प्रकरण को ‘आपदा’ समझकर भरांडी व बीण खड्ड से पानी उठाने के लिए पाइपों से पानी अश्वनी खड्ड पम्पिंग स्टेशन में लाकर एक माह के भीतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।</strong></p>
<p><strong>गुम्मा एवं सैंज खडड से पानी की अतिरिक्त आपूर्ति को सुनिश्चित करना तथा बिजली की सुदृढ़ व्यवस्था करना ताकि बरसात में ट्रिपिंग के कारण फिल्टर में गाद की समस्या पैदा न हो।</strong></p>
<p><strong>शिमला शहर की जनसंख्या, पर्यटकों एवं दैनिक कार्यों के लिए शहर पर निर्भरता की दृष्टि से स्थायी समाधान हेतु पेयजल प्रवाह स्कीम के तहत चंाशल परियोजना को शुरू किया जाए।</strong></p>
<p><strong>सुरक्षित पानी की पर्याप्त आपूर्ति तथा समुचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाए जो<br />
यथासमय प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लेने के लिए अधिकृत हो।</strong></p>
<p><strong>सीवरेज से सम्बन्धित सुझाव </strong></p>
<p><strong>सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का ठेकाकरण बंद किया जाए तथा इनका प्रबंधन सरकार के अधीन लाकर विभाग के माध्यम से किया जाए।</strong></p>
<p><strong>सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के व्यवस्थित संचालन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए तथा आवश्यक परीक्षणों/टैस्टों के लिए प्रयोगशालाओं को स्थापित किया जाए।</strong></p>
<p><strong>लम्बित पड़े कार्यों जैसे ट्रीटमेंट प्लांट्स तक सड़क बनाने,स्लज बैड बनाने, स्लज प्रैस को क्रियशील करने आदि की व्यवस्था<br />
को अतिशीघ्र पूरा किया जाए तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से निकली स्लज का उपयुक्त प्रबंधन किया जाए।<br />
</strong></p>
<p><strong>प्रत्येक घर को सीवरेज कनेक्टिविटी से जोड़ना।</strong></p>
<p><strong> प्रदेष स्तर पर विषेषज्ञों को शामिल करते हुए अलग से ‘सीवरेज ट्रीटमेंट बोर्ड’ का गठन किया जाए, जो पूरे प्रदेष में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स एसटीपी का प्रबंधन तथा निगरानी (डवदपजवतपदह) करे।<br />
</strong></div>
<p><em>Photo: File Photo/Himachal Watcher</em></p>
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