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	<title>Private Himachal Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>Private Himachal Schools Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिक्षा के गिरते स्तर के चलते  हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में चौंकाने वाली गिरावट, प्रदेश के 6324 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ 2-2 शिक्षक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/08/shocking-decline-in-hp-govt-schools-student-enrollments/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Nov 2016 06:05:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा देने के दावे करने वाली सरकार के राज में प्रदेश के 6324 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ दो-दो शिक्षक तैनात हैं। 1343 प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या के लिए शिक्षकों की कमी एक बड़ा कारण है। शिक्षा विभाग [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/11/08/shocking-decline-in-hp-govt-schools-student-enrollments/">शिक्षा के गिरते स्तर के चलते  हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में चौंकाने वाली गिरावट, प्रदेश के 6324 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ 2-2 शिक्षक</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा देने के दावे करने वाली सरकार के राज में प्रदेश के 6324 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ दो-दो शिक्षक तैनात हैं। 1343 प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।</p>
<p>सरकारी स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या के लिए शिक्षकों की कमी एक बड़ा कारण है। शिक्षा विभाग की ओर से एकत्र आंकड़ों से सरकार के सभी दावे हवा साबित हो रहे हैं।</p>
<p>सूबे के दो हजार से अधिक प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम संख्या के चलते अगले साल तक ताले लगाने की नौबत आ गई है। प्राइमरी और मिडल स्तर के इन स्कूलों में छात्र संख्या 15 से कम है। तीन सौ से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, जिनमें मात्र पांच से दस बच्चे ही पढ़ रहे हैं।<br />
प्रदेश के तीन जिलों कांगड़ा, मंडी और शिमला में एक-एक हजार से अधिक प्राइमरी स्कूलों में दो-दो शिक्षक तैनात हैं। कांगड़ा में 1038, मंडी में 1008, शिमला में 1000, सिरमौर में 594, चंबा में 608, बिलासपुर में 410, हमीरपुर में 343, किन्नौर में 99, कुल्लू में 434, लाहौल स्पीति में 120, सोलन में 454 और ऊना में 216 प्राइमरी स्कूल दो-दो शिक्षकों के सहारे हैं।</p>
<p>सिंगल टीचर वाले स्कूलों में शिमला के 250, मंडी के 247, चंबा के 195, बिलासपुर के 54, हमीरपुर के 24, कांगड़ा के 158, किन्नौर के 9, कुल्लू के 99, लाहौल स्पीति के 37, सिरमौर के 165, सोलन के 65 और ऊना के 40 स्कूल शामिल हैं।</p>
<p>प्रदेश के 128 मिडल स्कूलों में सिंगल टीचर, 276 स्कूलों में दो-दो टीचर, 570 में तीन-तीन टीचर, 1154 स्कूलों में 4 से 6 टीचर और दो स्कूलों में 7 से 10 टीचर तैनात हैं। इसी तरह तीन हाई स्कूलों में दो-दो शिक्षक, 12 में तीन-तीन शिक्षक, 323 में 4 से 6 शिक्षक, 534 में 7 से 10 शिक्षक, 7 स्कूलों में 11 से 15 शिक्षक तैनात हैं।</p>
<p>सेकेंडरी स्कूलों में 3 स्कूलों में तीन-तीन शिक्षक, 39 स्कूलों में 4 से 6 शिक्षक, 185 स्कूलों में 7 से 10 शिक्षक, 562 स्कूलों में 11 से 15 शिक्षक और 819 स्कूलों में 15 से अधिक शिक्षक तैनात हैं।</p>
<p>राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की घटती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से विश्वास उठ रहा है। यह आंकड़े सरकारी व्यवस्था की दुर्दशा को दर्शा रहे हैं। हर क्लास के लिए एक शिक्षक होना जरूरी है।</p>
<p>इसी महीने संघ इस मुद्दे को लेकर ज्वालाजी में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। कार्यशाला में इन समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। वीरेंद्र चौहान ने कहा कि शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में जो शिक्षक तैनात भी हैं, उन्हें गैर शिक्षक कार्यों में भी लगाया गया है। ऐसे हालात में गुणात्मक शिक्षा देने के दावे करना बेमानी है।</p>
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		<title>हिमाचल हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूलने वाले निजी शिक्षण संस्थानों  पर कसा शिकंजा, जांच के आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/hp-high-court-on-fee-structure-of-private-education-institute/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Apr 2016 14:41:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Coaching Centers in Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal Pradesh Private Universities]]></category>
		<category><![CDATA[Himachal's Private Colleges]]></category>
		<category><![CDATA[HP High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Private Himachal Schools]]></category>
		<category><![CDATA[ugc]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में स्थित सभी निजी शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं व मान्यता संबंधी जांच हेतु एक कमेटी का गठन करने के आदेश पारित किए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि एक कमेटी का गठन करें जोकि हर स्तर के निजी शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सैंटर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/hp-high-court-on-fee-structure-of-private-education-institute/">हिमाचल हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूलने वाले निजी शिक्षण संस्थानों  पर कसा शिकंजा, जांच के आदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में स्थित सभी निजी शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं व मान्यता संबंधी जांच हेतु एक कमेटी का गठन करने के आदेश पारित किए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि एक कमेटी का गठन करें जोकि हर स्तर के निजी शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सैंटर व किसी भी नाम से चलने वाले एक्सटैंशन सैंटर व विश्वविद्यालय की जांच 3 माह के भीतर पूरी करे। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अपने आदेशों में कहा है कि उक्त कमेटी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट किया गया हो कि क्या निजी संस्थान के पास पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ, अध्यापक-अभिभावक संघ इत्यादि हैं। </p>
<p>कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या सभी निजी शिक्षण संस्थान सरकार द्वारा अधिकृत फीस से अधिक तो नहीं वसूल रहे। इस कमेटी का दायित्व यह भी होगा कि वह रिपोर्ट में स्पष्ट करे कि क्या कोई विश्वविद्यालय, डिम्ड विश्वविद्यालय या अन्य संस्थान ओपन डिस्टैंस लॄनग के माध्यम से कोई प्रोग्राम/कोर्स करवा रहा है जोकि यूजीसी के नियमों के विपरीत है। कोर्ट ने कमेटी को कहा है कि वह बताए कि क्या कोई गुमराह करने वाले विज्ञापन उक्त संस्थाओं द्वारा जारी किए गए हैं। कोर्ट ने इन आदेशों के अलावा प्रधान शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वह निजी संस्थानों से जुड़ी कम से कम 11 जानकारियां अपनी वैबसाइट और संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाएं।</p>
<p>इन जानकारियों में वह बताएं कि उनके संस्थान में फैकल्टी सदस्यों की योग्यता एवं काम का अनुभव, इन्फ्रास्ट्रक्चर का विवरण, मान्यता प्रमाण पत्र, इंटर्नशिप व प्लेसमैंट का विवरण, फीस का संपूर्ण विवरण, अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी, अध्यापक-अभिभावक संघ की संपूर्ण जानकारी, परिवहन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी, संस्थान की आयु व उपलब्धियां, छात्रवृत्तियों की जानकारी व पूर्व छात्रों के पते व फोन नंबर सहित सूची शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त आदेशों की अवहेलना करने पर अवमानना का मामला चलाया जाएगा।</p>
<p>बिजनैस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्टडी की याचिकाओं को निपटाते हुए कोर्ट ने प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा है कि निजी संस्थान नाजायज ढंग से फीस वसूल कर अपने संसाधन बढ़ा रहे हैं। शिक्षा का स्तर गिराते हुए इसे व्यावसायिक बना दिया है। हरेक शिक्षण संस्थान की जवाबदेही है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए प्रार्थी निजी शिक्षण संस्थान को 10,000 रुपए की कॉस्ट लगाई। मामले के अनुसार रैगुलेटरी कमीशन (विश्वविद्यालय) ने बिजनैस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्टडी को छात्राओं की फीस लौटाने के आदेश दिए थे जो संस्था से एम.बी.ए. व पी.जी.डी.एम. कोर्स कर रही थीं।</p>
<p>इन छात्रों ने आरोप लगाया था कि संस्थान द्वारा वसूली जा रही फीस हद से ज्यादा है और यह कोर्स मान्यता प्राप्त भी नहीं है। संस्थान के अनुसार वह सिक्किम (मणिपाल) यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है इसलिए उसके कोर्स भी मान्यता प्राप्त ही हुए। कोर्ट ने रैगुलेटरी कमीशन के आदेशों को सही पाते हुए यह स्पष्ट किया कि उक्त संस्थान सिक्किम से बाहर संस्थान नहीं चला सकता क्योंकि यह सिक्किम सरकार के अधीन विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/28/hp-high-court-on-fee-structure-of-private-education-institute/">हिमाचल हाईकोर्ट ने मनमानी फीस वसूलने वाले निजी शिक्षण संस्थानों  पर कसा शिकंजा, जांच के आदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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