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	<title>People with disability in Himachal Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>विकलांगता पर हिमाचल सरकार केंद्र को कर रही गुमराह, विकलांगता क़ानून का खुलेआम हो रहा उल्लंघन, हाईकोर्ट के आदेशों को भी नहीं किया लागू</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Sep 2016 07:53:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- विकलांगो के लिए कार्यरत संस्था उमंग फाउंडेशन ने भारत सरकार के मुख्य विकलांगता आयुक्त को दिए एक ज्ञापन में आरोप लगाया है कि हिमाचल सरकार केंद्र को राज्य में विकलांगता के बारे में गुमराह कर रही है। सच्चाई यह है कि विकलांगता क़ानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और हाईकोर्ट के आदेशों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  विकलांगो के लिए कार्यरत संस्था उमंग फाउंडेशन ने भारत सरकार के मुख्य विकलांगता आयुक्त को दिए एक ज्ञापन में आरोप लगाया है कि हिमाचल सरकार केंद्र को राज्य में विकलांगता के बारे में गुमराह कर रही है। सच्चाई यह है कि विकलांगता क़ानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और हाईकोर्ट के आदेशों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। मुख्य विकलांगता आयुक्त राज्य की स्थित का जायजा लेने के लिए हिमाचल के दौरे पर हैं।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के उदासीन रवैये के कारण विकलांगों को न्याय के लिए आंदोलन और हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने का रास्ता अपनाना पड़ता है। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि 4 जून 2015 को उनकी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्विद्यालयों में विकलांगों को मुफ़्त शिक्षा का अधिकार दिया था। विश्वविद्यालयों ने इसे लागू भी कर दिया मगर सरकार ने अपने स्कूलो-कॉलेजों में इसे लागू करने से इनकार कर दिया। </p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में अनेक विभागों में नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण भी विकलांगों को नहीं दिया गया। यही नहीं, मुख्य विकलांगता आयुक्त द्वारा जारी विकलांगों की परीक्षा लिखने संबंधी नीति को लेकर अजय श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश अभी तक लागू नहीं किये गए हैं।</p>
<p>ज्ञापन में कहा गया है कि सुंदरनगर में दृष्टिहीन एवं बधिर बालिकाओं तथा शिमला के ढली में बालकों के विशेष स्कूल में बच्चों को इंटरनेट के साथ कम्प्यूटर की सुविधा, दृष्टिहीन बच्चों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी, कम्प्यूटर शिक्षक और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी आवश्यक सुविधाएं तक नहीं दी गई हैं। दृष्टिहीन बच्चों को मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर भी नहीं दिया गया है जो उन्हें चलने की तकनीक सिखाने के लिए ज़रूरी है।</p>
<p>शिमला के पोर्टमोर स्कूल और नाहन, नगरोटा बगवां और जोगिन्दर नगर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में दृष्टिहीन एवं बधिर बच्चों को इंटरनेट के साथ कम्प्यूटर, डिजिटल लाइब्रेरी, एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श की सुविधा नहीं दी गई है। इन सभी आवासीय स्कूलों ko सरकर ने इंक्लूसिव स्कूल घोषित किया है। उन्हें कम्प्यूटर सिखाया ही नहीं जाता।</p>
<p>अजय श्रीवास्तव ने कहा कि विकलांगता जन अधिनियम 1995 में विकलांगों की समस्याएं सुलझाने के लिए राज्य विकलांगता आयुक्त का प्रावधान हैं जबकि हिमाचल में यह व्यवस्था पूरी तरह ठप्प पड़ी है। विकलांगता आयुक्त का अतिरिक्त दायित्व सिर्फ नाम के लिए एक विशेष सचिव स्तर के अधिकारी को दिया हुआ है जो ये जिम्मेवारी निभाने में समर्थ नहीं हैं।</p>
<p>ज्ञापन के अनुसार दृष्टिहीन कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था नहीं है जिससे वे भी अन्य कर्मियों की तरह काम कर सकें। राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर बाधारहित वातावरण बनाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाये गए हैं। यहां तक कि कल्याण विभाग के अपने दफ्तर को बाधा रहित नहीं बनाया गया है। अजय श्रीवास्तव ने मुख्य विकलांगता आयुक्त से इस सम्बन्ध में उचित कदम उठाने की मांग की है।</p>
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