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	<title>Nirmal Gram Puraskar Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>खुलासा: हिमाचल के 2519 गांवों में खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी, पुरस्कारों, योजनाओं का फायदा उठाने के लिए किया फर्जीवाड़ा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/25/600-himachal-panchayats-are-not-defecation-free/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Apr 2016 12:38:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है,गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी, देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है,गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी, देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा करने वाले हिमाचल को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है। केंद्र की ओर से आई गाइडलाइन पर हिमाचल सरकार की जांच में यह खुलासा हुआ है। सरकार ने यह जांच जिला प्रशासन से करवाई है।</p>
<p>जांच में प्रदेश के 2519 गांवों के खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी पाए गए हैं। राज्य सरकार ने इस जांच रिपोर्ट को केंद्र को भेज दिया है। इन पंचायतों ने गलत रिपोर्ट देकर न केवल हिमाचल सरकार को बल्कि केंद्र को भी गुमराह किया है।</p>
<p>प्रदेश की कुल 3243 पंचायतों में से 1584 को खुला शौचमुक्त घोषित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में आंके गए कुल गांवों की संख्या 18,465 है। इनमें से 9684 गांवों को ग्राम पंचायतों ने ओपन डिफेक्शन फ्री घोषित किया था, लेकिन असल में इनमें से 7165 गांव ही खुला शौचमुक्त पाए गए हैं। यानी 2519 गांवों के खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी थे।          </p>
<p>देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा करने वाले हिमाचल को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है। वर्ष 2012 में हिमाचल में इस संबंध में एक सर्वे किया गया। इस सर्वेक्षण में ये रिपोर्ट दी गई कि किस घर में शौचालय है और किस घर में नहीं। इसके बाद भी ग्र्राम पंचायतों से समय-समय पर रिपोर्ट लेकर इसे अपडेट किया जाता रहा। लेकिन केंद्र की गाइडलाइन पर हुई जांच से पंचायतों का फर्जीवाड़ा सामने आया है।</p>
<p><strong>खुला शौचमुक्त पर ये मिलते हैं पुरस्कार</strong></p>
<p>खुले में शौचमुक्त होने और स्वच्छता के लिए निर्मल ग्राम पुरस्कार, महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार जैसे अवार्ड दिए जाते रहे हैं। इन अवार्डों को पाने के लिए ही ये फर्जीवाड़ा किया जाता रहा। कागजों में ही कई घरों में शौचालय बने दिखाए जाते रहे। ये भी माना जाता रहा कि भविष्य में सरकार ऐसी पंचायतों की ग्रांट को बढ़ा सकती है, इसीलिए यह खेल जारी रहा।</p>
<p><strong>31 दिसंबर तक थी जांच की डेडलाइन</strong></p>
<p>गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी। इसके लिए जांच की गाइडलाइन तीन सितंबर 2015 को जारी की गई थी। पंचायत चुनाव होने के कारण हिमाचल सरकार ने इस जांच में देरी होने के लिए केंद्र से वक्त मांगा। हाल ही में ये रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी गई है।</p>
<p><strong>ये थे जांच के प्रमुख बिंदु</strong></p>
<p>प्रत्येक घर में शौचालय हो</p>
<p>स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य प्रतिष्ठानों में फंक्शनल टॉयलेट हों</p>
<p>सार्वजनिक स्थानों में सार्वजनिक शौचालय हों</p>
<p>मामले को देखने के बाद ही इस बारे मे मैं कोई कमेंट कर पाऊंगा।- अभिषेक जैन, निदेशक,ग्रामीण विकास विभाग, हिमाचल प्रदेश</p>
<p>Photo: Corporate Ethos/Representational Image</p>
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