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	<title>National Health Mission Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला में पीलिया का प्रकोप जारी प्रतिदिन आ रहे 25 मामले, सोलन व मंडी में भी गिरफ्त में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Feb 2016 10:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-  प्रदेश में हुई बर्फबारी और बारिश से बागवानों व किसानों को भले राहत मिली है मगर पीलिया के वायरस पर तापमान में कमी के कारण कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस कम तापमान में अधिक फैलता है और उच्च तापमान का प्रभाव इस पर सीधा पड़ता है। लिहाजा बारिश और बर्फबारी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  प्रदेश में हुई बर्फबारी और बारिश से बागवानों व किसानों को भले राहत मिली है मगर पीलिया के वायरस पर तापमान में कमी के कारण कोई असर नहीं होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस कम तापमान में अधिक फैलता है और उच्च तापमान का प्रभाव इस पर सीधा पड़ता है। लिहाजा बारिश और बर्फबारी के बीच लोगों को सेहत संभालने की अधिक आवश्यकता है। एहतियात के तौर पर जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे फिलहाल बनाए रखें।</p>
<p>आईजीएमसी अस्पताल शिमला के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कांगा ने कहा कि लोग पीलिया के प्रबंधों पर सुस्त न हों। प्रदेश में अब तक स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पीलिया पीड़ितों की संख्या 1300 के पार हो गई है। प्रतिदिन अब 25 के आसपास मामले अकेले शिमला से सामने आ रहे हैं। दूसरे जिले सोलन व मंडी में भी पीलिया का प्रकोप जारी है। श्वास से संबंधित बीमारियों पर ही मौसम को लेकर असर पड़ता है। गला खराब, बुखार व जुकाम बीमारियां ही मौसम के बरसने से खत्म होती हैं मगर पीलिया पर लगाम इसके परिणामस्वरूप नहीं लगेगी।</p>
<p><strong>संभल कर रहें लोग</strong></p>
<p>स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि इस मौसम की कोई गारंटी नहीं है कि पीलिया का वायरस नष्ट हो जाएगा। इस मौसम का पीलिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए लोग संभल कर रहें।</p>
<h3>ब्यास में घूल रही डंपिंग साइट की गंदगी</h3>
<p>मनाली चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंडी शहर से करीब चार किलोमीटर दूर क्वारी से एक संपर्क मार्ग मंडी नगर परिषद की <strong>डंपिंग</strong> साइट की ओर जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 50 मीटर ऊपर की ओर यह साइट स्थित है। साइट में तीन ओर पहाड़ हैं। जबकि चौथी दिशा ब्यास नदी की ओर खुलती है। पिछले करीब दो दशक से इस जगह पर नगर परिषद की ओर से एकत्र की जाने वाली गंदगी खुले क्षेत्र में फेंक दी जाती है। इस गंदगी को अकसर नगर परिषद की ओर से आग लगा दी जाती है।</p>
<p>इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को विषैले धुंए का कोप भाजन बनना पड़ता है। <strong>डंपिंग</strong> साइट में सभी तरह का कूड़ा कर्कट फेंका जाता है। इसमें एक्सपायर दवाइयां भी शामिल रहती हैं। कई बार मृत पशु भी यहीं फेंक दिए जाते हैं। अकसर यहां पर लावारिस पशु गंदगी में जुगाली करते देखे जा सकते हैं। गर्मियों में यहां से उठने वाली दुर्गंध राष्ट्रीय राजमार्ग व नजदीकी गांवों तक फैल जाती है। यहां से गुजरते समय जब दुर्गंध के झोंकों की मार सहनी पड़ती है तब इसका अहसास होता है कि नजदीक ही डं¨पग साइट है।</p>
<p>बारिश में साइट के तीन ओर स्थित पहाड़ों की ढलानों के पानी का प्रवाह नाला बनकर साइट में आता है और वहां पड़ी सभी तरह की गंदगी को एक नाली के रास्ते से ब्यास नदीं में धकेल देता है। <strong>डंपिंग </strong>साइट से कितनी ज्यादा गंदगी ब्यास नदी में पहुंचती है इसका अनुमान उस नाली को देखकर लगाया जा सकता है जो गंदगी के अरक से पीले रंग की हो गई है। यही गंदगी ब्यास नदी में मिल कर इसकी धारा को जहरीला बना देती है।</p>
<p>कुछ दूरी के बाद ब्यास का यही पानी मंडी शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए लिफ्ट किया जाता है। जिसे आईपीएच विभाग की ओर से मंडी के घर-घर में नलों के माध्यम से लोगों को मुहैया करवाया जाता है। कमोवेश यही स्थिति सुंदरनगर में हैं। यहां चांदपुर की डं¨पग साइट भी पूरी तरह से लबालब भर चुकी है। <strong>डंपिंग</strong> साइट की गंदगी सीधे सुकेती ख्खड्ड में जाकर मिल रही है।</p>
<h3>क्या कहना है नगर परिषद का</h3>
<p>नगर परिषद मंडी व सुंदरनगर की कार्यकारी अधिकारी उर्वशी वालिया का कहना है कि <strong>डंपिंग</strong> साइट से गारबेज का पानी ब्यास नदी में नहीं जाता बल्कि वहां स्थित एक पानी के सोर्स से नाली में पानी जाता है। <strong>डंपिंग</strong> साइट में लावारिस पशु न जाएं इसके लिए यहां पर फेंसिंग करवाई जा रही है और साइट को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। यहां पर प्लेटफार्म और एंटी ली¨चग चेंबर बनाए गए हैं। <strong>डंपिंग </strong> साइट के चारों ओर नाली बनाई गई है। ब्यास नदी में जाने वाली गंदगी को रोकने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>डंपिंग साइट से गंदगी का हो रहा रिसाव</strong></p>
<p>मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष  का कहना है कि डंपिंग साइट से गंदगी का रिसाव लगातार जारी रहता है, जो नाली से बहकर सारा साल ब्यास में मिलता है। इससे ब्यास दूषित हो रही है।</p>
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