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	<title>IPH Himachal Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>IPH Himachal Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला ही नहीं हिमाचल की कई और महत्वपूर्ण पानी परियोजनओं और सेवेरगे ट्रीटमेंट प्लांट्स की हालत खस्ता: निरीक्षण रिपोर्ट में खुलासा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/03/09/water-supply-schemes-of-himachal-in-poor-condition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Mar 2016 10:16:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- राजधानी शिमला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है। यह खुलासा आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने निरीक्षण रिपोर्ट में किया है। उन्होंने प्रदेश की कई पेयजल योजनाओं, प्रयोगशालाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का मुआयना किया। इसके [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  राजधानी शिमला में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति ठीक नहीं है। यह खुलासा आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने निरीक्षण रिपोर्ट में किया है। उन्होंने प्रदेश की कई पेयजल योजनाओं, प्रयोगशालाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का मुआयना किया।</p>
<p>इसके बाद सभी मुख्य अभियंताओं और अन्य अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख अभियंता ने निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार 26 जनवरी को निरीक्षण के समय हमीरपुर, नूरपुर और बिलासपुर में वाटर टेस्टिंग प्रोसीजर में कई कमियां देखी गईं। 26 जनवरी को ही एसटीपी ज्वालाजी के निरीक्षण में भी कमियां पाईं।</p>
<p>ऊना प्रयोगशाला में कमियां ठीक करने को अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए। 13 फरवरी को कांगड़ा, पालमपुर और धर्मशाला में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया। यहां भी कई खामियां देखी गईं। धर्मशाला में वाटर टेस्टिंग प्रयोगशाला को दुरुस्त करने के लिए जरूरी निर्देश दिए। 14 फरवरी को जोगिंद्रनगर, सुंदरनगर और मंडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का निरीक्षण किया।</p>
<p>पाया कि इसमें भी सुधार जरूरी हैं। प्रमुख अभियंता आरके कंवर ने कहा कि इंस्पेक्शन के समय उन्होंने पाया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर कुशल और अकुशल श्रमिकों को उन्हें नहीं दिया जा रहा है। उन्हें ये भरोसा दिलाया गया है कि श्रमिकों की व्यवस्था जल्दी होगी।</p>
<p><strong>जहां महामारी का खतरा, वहां सुपरक्लोरिनेशन करें</strong></p>
<p>आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके कंवर के मुताबिक निर्देश दिए हैं कि पीने योग्य पानी में प्रतिशत लीटर 0.25 मिलीग्राम क्लोरीन अवशेष ही रहें। जहां महामारी का खतरा है, वहां सुपरक्लोरिनेशन की जा सकती है। ब्लीचिंग पाउडर को इस तरह से डाला जाए कि इसे बनाने के तीन महीने के बाद ही इसका इस्तेमाल कर लिया जाए। इससे इसकी मजबूती कम नहीं होगी। ये भी सुनिश्चित करने को कहा कि हर रसासन पर अनिवार्य रूप से एक्सपायरी डेट हो।</p>
<p><strong>सोलन और लालपानी के प्लांटों में भी कई कमियां</strong></p>
<p>मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को निर्देश दिए कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की विस्तृत नमूना रिपोर्ट दी जाए। मेन कलेक्शन टैंक में लीकेज को रेक्टिफाई किया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए। दो जनवरी 2016 से अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति बंद कर दी है। व्हाइट वाशिंग समेत सभी तरह के रिपेयर के काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किए जाएं। सोलन और लालपानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कई कमियां पाई गई हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है।</p>
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		<title>आईपीएच रजिस्टर में उन दिनों का जिक्र जिस दौरान अश्वनी खड्ड में बिना ट्रीटमेंट छोड़ा था सीवरेज</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/04/shimla-sewage-treatment-plant-investigation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Feb 2016 07:08:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[IPH Himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Jaundice]]></category>
		<category><![CDATA[Malayana Sewage Treatment Plant]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Juandice Outbreak]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla MC]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla Water Supply]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- पीलिया मामले को लेकर चल रही सीवेज प्लांट की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि आईपीएच के रजिस्टर में उन दो दिनों का जिक्र है जिस दौरान अश्वनी खड्ड में बिना ट्रीटमेंट के प्लांट से सीवरेज का गंदा पानी छोड़ दिया था। एक नवंबर से 12 [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2016/02/04/shimla-sewage-treatment-plant-investigation/">आईपीएच रजिस्टर में उन दिनों का जिक्र जिस दौरान अश्वनी खड्ड में बिना ट्रीटमेंट छोड़ा था सीवरेज</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> पीलिया मामले को लेकर चल रही सीवेज प्लांट की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि आईपीएच के रजिस्टर में उन दो दिनों का जिक्र है जिस दौरान अश्वनी खड्ड में बिना ट्रीटमेंट के प्लांट से सीवरेज का गंदा पानी छोड़ दिया था। एक नवंबर से 12 दिसंबर के बीच के दो दिनों का इसमें उल्लेख किया। वहीं बुधवार को जेई और पंप आपरेटरों समेत 11 कर्मचारियों से पूछताछ की गई।</p>
<p>यह सभी कर्मचारी आईपीएच महकमे के हैं और अश्वनी खड्ड से लिफ्टिंग का काम करते हैं। इस मामले में एसडीओ से भी पूछताछ होगी। इनमें से दो पंप ऑपरेटरों की तलाश एसआईटी को है जिन पर सीवेज युक्त पानी सप्लाई करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि यहां की जिम्मेवारी एसडीओ और जेई पर है।</p>
<p>आईपीएच के रजिस्ट्रर में उन दो दिनों का जिक्र भी किया गया है जिस दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से बिना ट्रीटमेंट के सीवेज अश्वनी खड्ड में छोड़ दिया था। अब रजिस्ट्रर में यह रिपोर्ट मामले के खुलासे के बाद लिखी गई या घटना वाले दिन लिखी गई थी। इस बारे में एसआईटी छानबीन कर रही है। कर्मचारियों से थाना ढली में पूछताछ चल रही है। इस मामले को सुलझाने में एसआईटी को अभी काफी वक्त लगेगा। अब एसआईटी की जांच पानी को लिफ्ट करने वाले कर्मचारियों तक ही पहुंची है।</p>
<p><strong>रिपन में शुरू हुए पीलिया के टेस्ट</strong><br />
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में बुधवार से टाइप ऑफ जोंडिस के टेस्ट शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अस्पताल में मरीजों के यह टेस्ट नहीं हो पा रहे थे। अस्पताल में किट खत्म होने के बाद मरीजों को निजी लैबों में यह टेस्ट करवाने पड़ रहे थे। अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रंजना राव ने बताया कि अस्पताल में टेस्ट किट आ गई है।</p>
<p><strong>स्कूलों को जारी हुए निर्देश</strong><br />
राजधानी शिमला में पीलिया के प्रकोप के चलते उपनिदेशक उच्चत्तर शिक्षा जिला शिमला ने सभी स्कूलों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। आदेशों में सभी स्कूल प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापकों से स्कूल खुलने की तय 10 फरवरी की तिथि से पहले स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था करने और स्कूलों में लगी टंकियों की सफाई कर उसमें क्लोरिनेशन कराने को कहा है।</p>
<p>इसके बाद मुख्य शिक्षकों को उप निदेशक उच्चत्तर शिक्षा कार्यालय की वेबसाइट www.ddheshimla.com में जारी ऑनलाइन आदेशों में उपलब्ध करवाए फारमेट में स्कूल में पेयजल की व्यवस्था से संबंधित ब्यौरा भी देना होगा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर जारी आदेशों के मुताबिक स्कूलों को यह ब्यौरा उपलब्ध करवाना होगा। इसमें स्कूलों को स्कूल का नाम, ब्लॉक, पेयजल की व्यवस्था आदि का ब्यौरा देना होगा। टंकिंयों की सफाई से संबंधित रिपोर्ट भी उपनिदेशक कार्यालय को अलग से भेजनी होगी।</p>
<p><strong>एक्सईएन को अस्पताल से छुट्टी हिरासत में भेजा</strong><br />
आईजीएमसी अस्पताल में दाखिल आरोपी एक्सईएन को छुट्टी दे दी गई है। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा है। आरोपी ठेकेदार का अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि हर पहलू पर मामले की जांच की जा रही है। कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा।</p>
<p><strong>प्रदूषण बोर्ड और एमसी के अफसर निशाने पर</strong><br />
पानी का वितरण करने वाली एजेंसी और उसके बाद क्वालिटी कंट्रोल पर नजर रखने वाली एजेंसी भी जांच के दायरे में आएगी। साफ है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों पर भी एसआईटी का शिकंजा कसेगा। गौरतलब है पीलिया के चलते शहर के लोगों में दहशत हैं तथा सैकड़ों लोग अब तक पीलिया की चपेट में आ चुके हैं।</p>
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