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	<title>Hydro Projects Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>एसजेवीएन मुख्यालय के बाहर हाइड्रो प्रोजेक्टों में कार्यरत सैंकड़ों मज़दूरों का प्रदर्शन, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन की उठाई मांग</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2025/04/22/sjvnl-workers-protest-in-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Apr 2025 13:49:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला –  शनान स्थित सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVN) के मुख्यालय के बाहर तीन हाइड्रो प्रोजेक्टों में कार्यरत सैंकड़ों ठेका मज़दूरों नें अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ग्रेच्युटी, बीमा व काम के आधार पर पद जैसी मुख्य मांगों को लेकर किया गया। मज़दूरों को नहीं दिया जा रहा न्यूनतम वेतन मजूदर [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला –</strong>  शनान स्थित सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVN) के मुख्यालय के बाहर तीन हाइड्रो प्रोजेक्टों में कार्यरत सैंकड़ों ठेका मज़दूरों नें अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ग्रेच्युटी, बीमा व काम के आधार पर पद जैसी मुख्य मांगों को लेकर किया गया।</p>
<p><strong>मज़दूरों को नहीं दिया जा रहा न्यूनतम वेतन</strong></p>
<p>मजूदर नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि एस जे वी एन के 1500 मेगावाट, 412 मेगावाट और 210 मेगावाट हाइड्रो प्रोजेक्टों में कार्यरत मज़दूरों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के प्रावधानों में कार्य की प्रकृति के अनुसार मजदूरों को अलग-अलग श्रेणी में रखा जाता है, ताकि उनको श्रेणी के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाए। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सतलुज जल विद्युत निगम मजदूरों से कुशल कार्य करवाता है लेकिन वेतन अर्धकुशल के अनुसार दिया जाता है।</p>
<p><strong data-start="932" data-end="966">बीमा और ग्रेच्युटी पर उठे सवाल</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मजदूरों के लिए बीमा का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि एन एच पी सी मज़दूरों को बीमा की सुविधा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मज़दूरों को ग्रेच्युटी की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है।</p>
<p class="" data-start="1247" data-end="1478">उन्होंने कहा कि ग्रेच्युटी न केवल सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति पर बल्कि मज़दूर की मृत्यु, विकलांगता या त्यागपत्र की स्थिति में भी देनी अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन जीने के अधिकार के तहत यह मज़दूरों का बुनियादी हक है। मज़दूरों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है।</p>
<p><strong data-start="1480" data-end="1542">मज़दूरों की आवाज़ उठाने वालों को किया जा रहा प्रताड़ित </strong></p>
<p>प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा मज़दूरों की आवाज़ उठाने वालों को चिन्हित कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर मज़दूर विरोधी रवैये को दर्शाता है।</p>
<p><strong>अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी</strong></p>
<p>मज़दूर नेताओं ने कहा कि एसजेवीएन को भारत सरकार के सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा &#8220;नवरत्न&#8221; का दर्जा मिला है, जो कंपनी की 36 वर्षों की यात्रा में एक अहम उपलब्धि है। वित्त वर्ष 2023-24 में एसजेवीएन ने हाइड्रो, सौर और पवन परियोजनाओं से कुल 8489 MU बिजली का उत्पादन कर 908.40 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इसका बड़ा हिस्सा हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से आया है। उन्होंने कहा कि मज़दूरों के बिना एसजेवीएन के इस सफर की कल्पना करना भी असंभव है। ऐसे में मजदूरों के योगदान को नज़रअंदाज़ करना अन्यायपूर्ण है।</p>
<p>मज़दूर नेताओं ने कहा कि यदि आने वाले समय में मज़दूरों की मांगों को नहीं माना गया तो उन्हे मजबूरन  अनिश्चितकालीन समय के लिए हाइड्रो परियोजनाओं का काम बंद करना पड़ेगा।</p>
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