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	<title>HP Rural Development Department Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>ऑनलाइन उत्पाद बेच रहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं,एक महीने में आए 1,000 से अधिक ऑर्डर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Feb 2025 11:29:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने 3 जनवरी, 2025 को आधिकारिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म हिमईरा (https://himira.co.in/) लॉन्च किया था। राज्य सरकार की मानें तो हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में इस पहल से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ई-कॉमर्स [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2025/02/10/himira-online-e-commerce-platform-register-over-1000-sales-in-one-month/">ऑनलाइन उत्पाद बेच रहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं,एक महीने में आए 1,000 से अधिक ऑर्डर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने 3 जनवरी, 2025 को आधिकारिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म हिमईरा (https://himira.co.in/) लॉन्च किया था। राज्य सरकार की मानें तो हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में इस पहल से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से देश भर में लोगों के बीच हिमईरा उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ रही है।</p>
<p><strong>एक महीने में </strong><strong>1,000 </strong><strong>से अधिक ऑर्डर</strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार ई-कॉमर्स हिमईरा प्लेटफॉर्म के लॉन्च के महज एक महीने के भीतर ही देश भर से 1,000 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में ग्राहकों को 1,050 से अधिक ऑनलाइन ऑर्डर सफलतापूर्वक डिलीवर किए जा चुके हैं।</p>
<p>ई-कॉमर्स में एकीकरण के साथ, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद अब पेटीएम और माईस्टोर जैसे प्लेटफार्मों पर स्वचालित रूप से सूचीबद्ध हो जाते हैं। राज्य सरकार के अनुसार यह पहल ग्रामीण हिमाचल के शिल्प कौशल की समृद्धि और विविधता को भारत के हर कोने में ला रही है।</p>
<p><strong>स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को हो रहा लाभ: मुख्यमंत्री </strong></p>
<p>इसी बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि &#8220;इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य भर में लगभग 30,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका के ऐसे अवसरों तक सीधी पहुँच मिली है। वेबसाइट पर हाथ से बुने हुए हिमाचली वस्त्रों से लेकर शुद्ध और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों तक लगभग 30 उत्पादों की विविधतापूर्ण रेंज उपलब्ध है।&#8221;</p>
<p><strong>महिलाओं की सफलता की कहानियां</strong></p>
<p>सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार हिमईरा प्लेटफॉर्म से जुड़ी कई महिलाओं ने अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव देखे हैं। सोलन जिले की जसविंदर कौर, कांगड़ा जिले की मेघा देवी, लाहौल-स्पीति जिले की रिग्जिन छोदान और हमीरपुर जिले की अनीता देवी जैसी महिलाओं ने हिमईरा के माध्यम से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और अब वे आत्मनिर्भर जीवन जी रहीं हैं।</p>
<p>सोलन जिले की जसविंदर कौर का कहना है कि उनके लिए साईनाथ एसएचजी में शामिल होना जीवन बदलने वाला रहा है। उन्होंने वित्तीय सहायता और पशुधन और गैर-कृषि गतिविधियों के लिए 60,000 रुपये के ऋण के साथ गोबर के उत्पाद बनाने का काम शुरू किया था। उनकी मासिक आय, जो कभी मात्र 1000 रुपये थी, अब बढ़कर 20,000 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से मुझे जो कौशल मिले हैं, उन्होंने वास्तव में उनके जीवन को बदल दिया है। पशुधन और गोबर के उत्पाद बेचकर वह अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा सकती है।</p>
<p>कांगड़ा जिले की मेघा देवी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। श्री गणेश एसएचजी से जुड़ने के बाद उन्होंने डोना-पत्तल (पत्तल बनाने) का एक छोटा सा उद्यम शुरू किया। उनकी मासिक आय 5000 रुपये से बढ़कर 20000 रुपये हो गई है। एक समय वह पूरी तरह से अपने पति की आय पर निर्भर थीं, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति बदल गई है। मेघा कहती हैं, <em>&#8220;अपने जुनून को आजीविका में बदलना लचीलेपन और विकास की यात्रा रही है। मेरी खुदरा दुकान से होने वाली हर बिक्री और मेरे द्वारा बनाए गए हर पत्तल के साथ, मैं न केवल लाभ बल्कि अपने बच्चों के सपनों को साकार होते हुए देखती हूँ।</em>&#8221;</p>
<p>लाहौल-स्पीति जिले के केलांग में रिग्जिन छोदान को कंगला बेरी एसएचजी के माध्यम से कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और हथकरघा से जुड़ी। उनकी मासिक आय 4000 रुपये से बढ़कर 25000 रुपये हो गई है। अब वह अपने उद्यम का विस्तार करने और ग्रामीण बाजारों में नए अवसरों की तलाश करने की योजना बना रही हैं। वह कहती हैं, <em>&#8220;यह अविश्वसनीय है कि कैसे नए कौशल सीखने से मेरी कमाई ही नहीं बल्कि जीवन के प्रति मेरा पूरा दृष्टिकोण बदल गया है।&#8221;</em></p>
<p>हमीरपुर जिले के झमियाट गांव की अनीता देवी शुरू में एक निजी आईटी नौकरी पर निर्भर थीं और उन्हें हर महीने मात्र 5000 रुपये मिलते थे। SHG के साथ उनकी यात्रा बुनियादी बचत से शुरू हुई और मशरूम की खेती में NRLM प्रशिक्षण के माध्यम से, उनकी मासिक आय धीरे-धीरे बढ़कर 20000 रुपये हो गई। वह बताती हैं, <em>&#8220;कड़ी मेहनत और अपने समूह और राज्य सरकार के समर्थन से, मैंने अपनी छोटी बचत को एक संपन्न व्यवसाय में बदल दिया। अब, मैं न केवल अपने परिवार का समर्थन करती हूँ, बल्कि दूसरों को भी उनकी क्षमता पर विश्वास करने के लिए सशक्त बनाती हूँ।&#8221;</em></p>
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		<title>खुलासा: हिमाचल के 2519 गांवों में खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी, पुरस्कारों, योजनाओं का फायदा उठाने के लिए किया फर्जीवाड़ा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/04/25/600-himachal-panchayats-are-not-defecation-free/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Apr 2016 12:38:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
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		<category><![CDATA[Nirmal Gram Puraskar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है,गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी, देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है,गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी, देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा करने वाले हिमाचल को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> खुला शौचमुक्त होने के पुरस्कारों और इससे जुड़ी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने फर्जीवाड़ा किया है। केंद्र की ओर से आई गाइडलाइन पर हिमाचल सरकार की जांच में यह खुलासा हुआ है। सरकार ने यह जांच जिला प्रशासन से करवाई है।</p>
<p>जांच में प्रदेश के 2519 गांवों के खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी पाए गए हैं। राज्य सरकार ने इस जांच रिपोर्ट को केंद्र को भेज दिया है। इन पंचायतों ने गलत रिपोर्ट देकर न केवल हिमाचल सरकार को बल्कि केंद्र को भी गुमराह किया है।</p>
<p>प्रदेश की कुल 3243 पंचायतों में से 1584 को खुला शौचमुक्त घोषित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में आंके गए कुल गांवों की संख्या 18,465 है। इनमें से 9684 गांवों को ग्राम पंचायतों ने ओपन डिफेक्शन फ्री घोषित किया था, लेकिन असल में इनमें से 7165 गांव ही खुला शौचमुक्त पाए गए हैं। यानी 2519 गांवों के खुले में शौचमुक्त होने के दावे फर्जी थे।          </p>
<p>देश भर में खुले में शौचमुक्त सर्वाधिक गांवों की घोषणा करने वाले हिमाचल को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है। वर्ष 2012 में हिमाचल में इस संबंध में एक सर्वे किया गया। इस सर्वेक्षण में ये रिपोर्ट दी गई कि किस घर में शौचालय है और किस घर में नहीं। इसके बाद भी ग्र्राम पंचायतों से समय-समय पर रिपोर्ट लेकर इसे अपडेट किया जाता रहा। लेकिन केंद्र की गाइडलाइन पर हुई जांच से पंचायतों का फर्जीवाड़ा सामने आया है।</p>
<p><strong>खुला शौचमुक्त पर ये मिलते हैं पुरस्कार</strong></p>
<p>खुले में शौचमुक्त होने और स्वच्छता के लिए निर्मल ग्राम पुरस्कार, महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार जैसे अवार्ड दिए जाते रहे हैं। इन अवार्डों को पाने के लिए ही ये फर्जीवाड़ा किया जाता रहा। कागजों में ही कई घरों में शौचालय बने दिखाए जाते रहे। ये भी माना जाता रहा कि भविष्य में सरकार ऐसी पंचायतों की ग्रांट को बढ़ा सकती है, इसीलिए यह खेल जारी रहा।</p>
<p><strong>31 दिसंबर तक थी जांच की डेडलाइन</strong></p>
<p>गांवों और पंचायतों के ओपन डिफेक्शन फ्री होने के दावे को जांचने की भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक डेडलाइन तय की थी। इसके लिए जांच की गाइडलाइन तीन सितंबर 2015 को जारी की गई थी। पंचायत चुनाव होने के कारण हिमाचल सरकार ने इस जांच में देरी होने के लिए केंद्र से वक्त मांगा। हाल ही में ये रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी गई है।</p>
<p><strong>ये थे जांच के प्रमुख बिंदु</strong></p>
<p>प्रत्येक घर में शौचालय हो</p>
<p>स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य प्रतिष्ठानों में फंक्शनल टॉयलेट हों</p>
<p>सार्वजनिक स्थानों में सार्वजनिक शौचालय हों</p>
<p>मामले को देखने के बाद ही इस बारे मे मैं कोई कमेंट कर पाऊंगा।- अभिषेक जैन, निदेशक,ग्रामीण विकास विभाग, हिमाचल प्रदेश</p>
<p>Photo: Corporate Ethos/Representational Image</p>
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