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	<title>Himachal Education System Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल के सरकारी स्कूल टीचर खुलेआम पढ़ा रहे कोचिंग सेंटरों में, करोड़ों के धंधे में शिक्षा विभाग मौन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Mar 2016 15:06:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Dummy Admissions Hamirpur]]></category>
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		<category><![CDATA[Himachal Education System]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>करोड़ों के इस धंधे में शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन हैं। विजिलेंस भी चुप बैठा है। इस धंधे में संबंधित स्कूलों में साल भर स्टूडेंट्स की मौजूदगी केवल हाजिरी की औपचारिकता के तौर पर कथित रूप में हुई है। शिमला- टीचर तो सरकारी स्कूल के हैं लेकिन कोचिंग सेंटरों में उनकी मौजूदगी शिक्षा विभाग की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><br />
करोड़ों के इस धंधे में शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन हैं। विजिलेंस भी चुप बैठा है। इस धंधे में संबंधित स्कूलों में साल भर स्टूडेंट्स की मौजूदगी केवल हाजिरी की औपचारिकता के तौर पर कथित रूप में हुई है।</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong> टीचर तो सरकारी स्कूल के हैं लेकिन कोचिंग सेंटरों में उनकी मौजूदगी शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। एक ओर निजी स्कूलों में डम्मी एडमिशन लेकर कोचिंग सेंटरों में इन टीचरों के पास पढ़ रहे बच्चे व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि करोड़ों के इस धंधे में शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन हैं। विजिलेंस भी चुप बैठा है। इस धंधे में संबंधित स्कूलों में साल भर स्टूडेंट्स की मौजूदगी केवल हाजिरी की औपचारिकता के तौर पर कथित रूप में हुई है। जबकि वे रोजाना कोचिंग सेंटर जाते हैं। </p>
<p>कुछ कोचिंग सेंटरों में ऐसे टीचर्स के नाम भी पोस्टर में बाकायदा छापे हैं। ऐसा हमीरपुर के ही कुछ खास कोचिंग सेंटरों की बात नहीं है, ऐसी डम्मी एडमिशन लेकर पैसे वाले परिवारों के बच्चे यहां से बाहर भी कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हैं। जिसकी एवज में वे 60 से 70 हजार रुपए सालाना चुका रहे हैं। </p>
<p>यह धंधा पिछले कुछ सालों से जिस बड़े स्तर पर अब फल फूल चुका है उस पर लगाम लगाने के लिए किसी भी एजेंसी ने कोई पहल की हो ऐसा कतई नहीं लगता। हो भी कैसे, अधिकारियों की नाक के नीचे यह काम बेखौफ हो रहा है। लेकिन कोई रोक टोक करने वाला नहीं है। जिन कोचिंग संस्थानों में डम्मी एडमिशन वाले ये बच्चे 11वीं और 12वीं में मॉर्निंग-ईवनिंग की शिफ्टों में जमे हुए हैं वे इन संस्थानों के बाहर इनकी रौनक से ही सारी स्थिति बयां कर देती है। लेकिन मजाल किसी की कि कोई अधिकारी इन पर आकर औचक निरीक्षण करे और फिर उसी के आधार पर संबंधित स्कूलों में पहुंच कर स्टूडेंट्स की हाजिरी को जांचे। </p>
<p>इस धंधे की खास बात यह है कि कुछ चुनिंदा निजी स्कूलों में ये बच्चे सालाना परीक्षा भी देने पहुंचते हैं। इनके सेंटर भी उन्हीं में होते हैं। चर्चा तो शहर में खूब होती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कोई भी बीड़ा उठाने की शुरुआत नहीं करता। तभी तो कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले ये बच्चे मैरिट सूचियों में बड़ा नाम कमाने से कहीं चूक जाएं तो भी बेहतर नंबर लेकर दूसरों पर भारी पड़ते हैं। कुछ खास सेंटरों में सरकारी स्कूलों में कार्यरत विशेष टीचर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की इन खामियों का फायदा उठाकर धड़ल्ले से कोचिंग सेंटरों में भी पढ़ा रहे हैं। </p>
<p>वे इसके लिए ईवनिंग शिफ्ट का सहारा लेते हैं, लेकिन जिन्हें मोटी कमाई का शौक है वे स्कूलों से बीच-बीच में छुट्टियां लेकर मॉर्निंग-इवनिंग दोनों शिफ्टों में बच्चों को कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने के काम अंजाम दे रहे हैं। अभिभावकों की समस्या यह है कि देखा देखी में हर कोई अपने बच्चे को पढ़ाई में अव्वल बनाना चाहता है और इसी वजह से वह भी बगैर किसी हिचक के इसकी सवारी से कैसे चूके यह उसकी मजबूरी है। तभी तो कोई इसकी शिकायत किसी से क्यों करे। </p>
<p>चर्चाएं इसकी होती हैं। लेकिन कोई शिकायत लिखित तौर पर शिक्षा विभाग के पास नहीं देता। यदि सरकारी स्कूल का कोई टीचर कोचिंग सेंटर में पढ़ा रहा है तो उनके पास लिखित रूप में कोई शिकायत करे निश्चित रूप से कार्यवाही होगी। बगैर शिकायत के छापामारी कैसे हो सकती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे लिखित तौर पर शिकाय करें। सोमदत्त सांख्यान, डिप्टी डायरेक्टर सेकंडरी एजुकेशन,हमीरपुर </p>
<p><strong>क्या है डम्मी एडमिशन </strong></p>
<p>शहर के कुछ चुनिंदा स्कूलों में वे अभिभावक जिनके पास कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई की एवज में चुकाने के लिए 60 से 70 हजार की राशि मौजूद है वे दाखिला ले लेते हैं। वहां बच्चे को तो नहीं भेजते, लेकिन उसकी हाजिरी वहां लगती है। बच्चा सीधा कोचिंग सेंटर पहुंचता है। मतलब साफ है कि अभिभावक को एडमिशन के नाम पर निजी स्कूल में भी मोटी फीस चुकानी पड़ती है और कोचिंग सेंटर में भी। केवल एग्जाम देने उसे अपने स्कूल के सेंटर पर आना है। यही सब डम्मी एडमिशन का तकाजा है।</p>
<p>Photo:Representational</p>
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